मुख्य तथ्य

  • प्रश्नपत्र-द्वितीय संस्कृत 150 प्रश्नों, 300 अंकों और 2 घंटे 30 मिनट की अवधि वाला बहुविकल्पीय विषय-पत्र है; गलत उत्तर पर एक-तिहाई अंक कटते हैं।
  • साहित्य में वैदिक साहित्य, ऋग्वेद के 6 सूचीबद्ध सूक्त, भगवद्गीता का द्वितीय अध्याय, ईशोपनिषद्, भारतीय संस्कृति के 4 निर्धारित विषय और विधा के अनुसार प...
  • 2024 के शिक्षण-विधि भाग में पठन-लेखन विकास, व्याकरण, गद्य, पद्य और नाटक की शिक्षण-विधियाँ, 5 शिक्षण-कौशल तथा गद्य, पद्य, व्याकरण, अनुवाद और नाटक की पा...

मुख्य बिंदु

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    प्रश्नपत्र-द्वितीय संस्कृत 150 प्रश्नों, 300 अंकों और 2 घंटे 30 मिनट की अवधि वाला बहुविकल्पीय विषय-पत्र है; गलत उत्तर पर एक-तिहाई अंक कटते हैं।

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    विद्यालयी व्याकरण में लघुसिद्धान्तकौमुदी की शब्दावली से माहेश्वरसूत्र, इत्, लोप, प्रत्याहार, सवर्ण, उच्चारणस्थान, संहिता, संयोग और पद को ठीक से समझना ज़रूरी है।

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    अच्-सन्धि, हल्-सन्धि और विसर्ग-सन्धि को केवल ध्वनि-परिवर्तन न मानें; सूत्र, वातावरण और उदाहरण की जोड़ी के रूप में पढ़ें।

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    समास प्रश्नों में अव्ययीभाव, तत्पुरुष, कर्मधारय, द्विगु, द्वन्द्व और बहुव्रीहि की पहचान विग्रह और अर्थ से तय होती है।

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    प्रत्यय-अभ्यास में तव्यत्, अनीयर्, यत्, ण्यत्, क्यप्, ण्वुल्, तृच्, णिनि, क्त, क्तवतु, शतृ, शानच्, तुमुन्, क्त्वा, ल्यप्, ल्युट्, घञ्, क्तिन्, मतुप्, वतुप्, त्व, तल्, ष्यञ्, तरप्, तमप्, इतच्, तसिल्, डाप्, डीप् और डीष् का अर्थ और रूप दोनों याद रखें।

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    रूपावली में निर्धारित संज्ञा और सर्वनाम-रूप तथा धातुरूप में पाँच लकारों के परस्मैपद, आत्मनेपद और उभयपद रूप परीक्षा की रीढ़ हैं।

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    शोधन और अनुवाद प्रश्न कारक, विभक्ति, उपसर्ग, अव्यय, वाच्य, लिङ्ग और वचन पर टिकते हैं; इसलिए वाक्य-स्तर का अभ्यास सारणी-जप जितना ही आवश्यक है।

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    स्नातक-स्तर व्याकरण में कर्ता, कर्म, करण, सम्प्रदान, अपादान और अधिकरण जैसे कारक पाणिनीय सूत्रों और सामान्य वाक्य-प्रयोग से पढ़े जाने चाहिए।

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    छन्द और अलङ्कार में तेज पहचान चाहिए; छन्द का लक्षण या लय तथा अलङ्कार का लक्षण और छोटा उदाहरण साथ रखें।

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    साहित्य में वैदिक साहित्य, ऋग्वेद के 6 सूचीबद्ध सूक्त, भगवद्गीता का द्वितीय अध्याय, ईशोपनिषद्, भारतीय संस्कृति के 4 निर्धारित विषय और विधा के अनुसार प्रमुख कवि शामिल हैं।

  11. 11

    2024 के शिक्षण-विधि भाग में पठन-लेखन विकास, व्याकरण, गद्य, पद्य और नाटक की शिक्षण-विधियाँ, 5 शिक्षण-कौशल तथा गद्य, पद्य, व्याकरण, अनुवाद और नाटक की पाठ-योजनाएँ हैं।

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    रामः पठति, रामं पश्यति और रामे ग्रामे जैसे उदाहरणों में विभक्ति बदलते ही अर्थ-संबंध बदलता है; यही इस प्रश्नपत्र की व्याकरणिक सोच है।

वरिष्ठ अध्यापक संस्कृत प्रश्नपत्र में क्या पढ़ना है?

वरिष्ठ अध्यापक संस्कृत प्रश्नपत्र में माध्यमिक-उच्च-माध्यमिक संस्कृत, स्नातक-स्तर की संस्कृत और संस्कृत शिक्षण-विधि, तीनों क्षेत्रों को साथ पढ़ना है। राजस्थान लोक सेवा आयोग की वरिष्ठ अध्यापक (माध्यमिक शिक्षा) प्रतियोगी परीक्षा 2024 के संस्कृत प्रश्नपत्र-द्वितीय पाठ्यक्रम के अनुसार प्रश्नपत्र में 150 बहुविकल्पीय प्रश्न और कुल 300 अंक हैं। वरिष्ठ अध्यापक प्रश्नपत्र-द्वितीय संस्कृत को छोटा भाषा-परीक्षण मानकर नहीं पढ़ना चाहिए। आधिकारिक योजना में यह 150 प्रश्नों, 300 अंकों और 2 घंटे 30 मिनट का बहुविकल्पीय विषय-पत्र है। गलत उत्तर पर उस प्रश्न के निर्धारित अंकों का एक-तिहाई भाग काटा जाता है। इसलिए यह प्रश्नपत्र तेज पहचान को महत्व देता है, पर अनुमान लगाने पर दंड भी देता है, विशेषकर जब दो रूप बहुत मिलते-जुलते हों। तैयारी में सारणियाँ, सूत्र, उदाहरण और ग्रंथ-स्मरण साथ-साथ चलने चाहिए।

पाठ्यक्रम को मोटे रूप में तीन क्षेत्रों में समझना उपयोगी है। पहला क्षेत्र माध्यमिक और उच्च-माध्यमिक स्तर की संस्कृत है। इसमें लघुसिद्धान्तकौमुदी से जुड़ी पारिभाषिक शब्दावली आती है: माहेश्वरसूत्राणि, इत्, लोप, प्रत्याहार, स्वर, सवर्ण, उच्चारणस्थान, संहिता, संयोग और पद। इसके बाद सन्धि, समास, प्रत्यय, शब्दरूप, धातुरूप, अव्यय, उपसर्ग, अशुद्धि-शोधन, हिन्दी से संस्कृत अनुवाद, वाच्य-परिवर्तन और संख्यावाचक रूप आते हैं। व्यवहार में यह भाग पूछता है कि अभ्यर्थी संस्कृत को एक व्यवस्थित भाषा-तंत्र की तरह संभाल सकता है या नहीं। जैसे रामः पठति, रामं पश्यति, रामे ग्रामे और रामेण सह में केवल प्रत्यय याद नहीं हैं, बल्कि कारक-संबंध बदल रहा है। शोधन के प्रश्न एक साथ कारक, वचन, लिंग, वाच्य और ध्वनि-परिवर्तन की समझ जाँच सकते हैं।

दूसरा क्षेत्र स्नातक-स्तर की संस्कृत है। यहाँ विद्यालयी नियमों से आगे बढ़कर पाणिनीय व्याकरण, छन्द, अलङ्कार, वैदिक और लौकिक साहित्य तथा भारतीय संस्कृति आती है। यहाँ कारक-विभक्ति सूत्रों का सामान्य अर्थ और प्रयोग; 14 सूचीबद्ध छन्द—अनुष्टुभ्, आर्या, इन्द्रवज्रा, उपेन्द्रवज्रा, उपजाति, वंशस्थ, द्रुतविलम्बित, भुजङ्गप्रयात, वसन्ततिलका, मालिनी, मन्दाक्रान्ता, शिखरिणी, शार्दूलविक्रीडित और स्रग्धरा—की पहचान; तथा अनुप्रास, यमक, श्लेष, स्वभावोक्ति, उपमा, रूपक, उत्प्रेक्षा, व्यतिरेक, सन्देह, भ्रान्तिमान, निदर्शना, दृष्टान्त, अर्थान्तरन्यास, दीपक और तुल्ययोगिता जैसे सूचीबद्ध अलङ्कार पूछे जा सकते हैं। निर्धारित ग्रंथ-क्षेत्र में वैदिक साहित्य, ऋग्वेद के 6 सूक्त, भगवद्गीता का द्वितीय अध्याय और ईशोपनिषद् आते हैं। साहित्य की तैयारी में निर्धारित पाठों के साथ पाठ्यक्रम में दिए कवियों का सही लेखक-ग्रंथ मिलान भी रखें।

तीसरा क्षेत्र संस्कृत शिक्षण-विधियों का है। 2024 के पाठ्यक्रम में 4 मुख्य भाग हैं: पठन और लेखन विकसित करने की विधियाँ; व्याकरण, गद्य, पद्य और नाटक की शिक्षण-विधियाँ; पाठ-प्रस्तावना, व्याख्या, श्यामपट्ट-प्रयोग, दृष्टान्त और प्रश्नोत्तर के 5 शिक्षण-कौशल; तथा गद्य, पद्य, व्याकरण, अनुवाद और नाटक की पाठ-योजनाएँ। इसे अंतिम सप्ताह के लिए न छोड़ें, क्योंकि कक्षा में सही क्रम तभी समझ आता है जब विषय की संस्कृत पहले से साफ हो।

पुराने प्रश्नपत्र बताते हैं कि नियमों और रूपों को सवालों में पहचानना ज़रूरी है। सत्यापित आवृत्ति-विश्लेषण के बिना किसी क्षेत्र का सटीक प्रतिशत नहीं बताया जा रहा। फिर भी प्रश्नपत्र-प्रकार और पाठ्यक्रम से मुख्य क्षेत्र स्पष्ट हैं: सूत्राधारित व्याकरण, रूप-सारणियाँ, धातु, शोधन, अनुवाद, ग्रंथ-लेखक मिलान, छन्द-अलङ्कार पहचान और शिक्षण-विधि। सबसे सुरक्षित क्रम है: पहले व्याकरणिक शब्दावली, फिर सन्धि-समास-प्रत्यय के उदाहरण, फिर रूपावली और धातुरूप, और उसके बाद साहित्य व शिक्षण-विधि की स्मरण-सारणियाँ। इस प्रश्नपत्र में संस्कृत उदाहरण सजावट नहीं हैं; वे नियम की परीक्षा का प्रमाण हैं।

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