मुख्य तथ्य

  • अधिगम अनुभव और अभ्यास से व्यवहार, ज्ञान, कौशल या दृष्टिकोण में अपेक्षाकृत स्थायी परिवर्तन है।
  • परिपक्वता, थकान और अस्थायी प्रदर्शन अधिगम नहीं हैं, यद्यपि ये कक्षा में प्रदर्शन को प्रभावित कर सकते हैं।
  • अधिगम के प्रमुख प्रकारों में शाब्दिक, गत्यात्मक, संप्रत्ययात्मक, समस्या-समाधान, साहचर्य, प्रेक्षणात्मक, अंतर्दृष्टि और रचनावादी अधिगम शामिल हैं।
  • व्यवहारवादी सिद्धांत उद्दीपन-अनुक्रिया संबंध, परिणाम, अभ्यास, पुनर्बलन और फीडबैक पर बल देते हैं।
  • थॉर्नडाइक का प्रयास और भूल सिद्धांत निर्देशित अभ्यास में उपयोगी है, पर बिना सोचे-समझे और बिना फीडबैक के बार-बार कोशिश करने से समय बर्बाद होता है।

मुख्य बिंदु

  1. 1

    अधिगम अनुभव और अभ्यास से व्यवहार, ज्ञान, कौशल या दृष्टिकोण में अपेक्षाकृत स्थायी परिवर्तन है।

  2. 2

    परिपक्वता, थकान और अस्थायी प्रदर्शन अधिगम नहीं हैं, यद्यपि ये कक्षा में प्रदर्शन को प्रभावित कर सकते हैं।

  3. 3

    अधिगम के प्रमुख प्रकारों में शाब्दिक, गत्यात्मक, संप्रत्ययात्मक, समस्या-समाधान, साहचर्य, प्रेक्षणात्मक, अंतर्दृष्टि और रचनावादी अधिगम शामिल हैं।

  4. 4

    व्यवहारवादी सिद्धांत उद्दीपन-अनुक्रिया संबंध, परिणाम, अभ्यास, पुनर्बलन और फीडबैक पर बल देते हैं।

  5. 5

    थॉर्नडाइक का प्रयास और भूल सिद्धांत निर्देशित अभ्यास में उपयोगी है, पर बिना सोचे-समझे और बिना फीडबैक के बार-बार कोशिश करने से समय बर्बाद होता है।

  6. 6

    शास्त्रीय अनुबंधन सीखी हुई भावनात्मक प्रतिक्रियाएँ समझाता है; शिक्षक को विषयों को सफलता, सुरक्षा और प्रोत्साहन से जोड़ना चाहिए।

  7. 7

    क्रियाप्रसूत अनुबंधन स्वैच्छिक व्यवहार को पुनर्बलन से आकार देता है, लेकिन दंड डर और बचाव पैदा कर सकता है।

  8. 8

    संज्ञानात्मक सिद्धांत ध्यान, कार्य-स्मृति, दीर्घकालिक स्मृति, अंतर्दृष्टि, संगठन और समस्या-समाधान रणनीतियों पर केंद्रित हैं।

  9. 9

    सामाजिक-संज्ञानात्मक अधिगम में आदर्श-अनुकरण, प्रेक्षणात्मक अधिगम और स्व-प्रभावकारिता महत्त्वपूर्ण हैं; शिक्षक का अपना आचरण भी आदर्श बनता है।

  10. 10

    अधिगम स्थानांतरण सकारात्मक, नकारात्मक या शून्य हो सकता है; समानता और मूल सिद्धांत पहचानने की ज़रूरत के आधार पर यह निकट या दूर भी हो सकता है।

  11. 11

    स्थानांतरण तब मजबूत होता है जब विद्यार्थी सिद्धांत समझते हैं, संदर्भों की तुलना करते हैं, विविध उदाहरणों का अभ्यास करते हैं और अपनी सोच की जाँच करते हैं।

  12. 12

    अधिगम को तत्परता, प्रेरणा, बुद्धि, ध्यान, परिपक्वता, स्वास्थ्य, भावना, शिक्षक-विधि, अभ्यास, फीडबैक, वातावरण, भाषा और सामाजिक-सांस्कृतिक पृष्ठभूमि प्रभावित करते हैं।

  13. 13

    रचनावादी अधिगम में विद्यार्थी पूर्वज्ञान, खोज, सहयोग और चिंतन से अर्थ का सक्रिय निर्माण करता है।

  14. 14

    रचनावाद में शिक्षक सुगमकर्ता और मार्गदर्शक होता है, जो सहारा देता है, भ्रांतियाँ सुधारता है और धीरे-धीरे जिम्मेदारी विद्यार्थी को सौंपता है।

अधिगम का अर्थ, क्षेत्र और प्रकार क्या हैं?

अधिगम का अर्थ अनुभव, अभ्यास और वातावरण से अंतःक्रिया के कारण ज्ञान, कौशल, व्यवहार, समझ, आदत, रुचि या दृष्टिकोण में अपेक्षाकृत स्थायी बदलाव है; इसका क्षेत्र कक्षा के हर उपयोगी सीखने तक फैला है और इसके प्रकार शाब्दिक, गत्यात्मक, संप्रत्ययात्मक, समस्या-समाधान, साहचर्य, प्रेक्षणात्मक, अंतर्दृष्टि और रचनावादी अधिगम तक जाते हैं। RPSC वरिष्ठ अध्यापक पाठ्यक्रम के अनुसार प्रथम प्रश्नपत्र में 4 विषय-भाग हैं, जिनमें शैक्षिक मनोविज्ञान का 40 अंकों का भाग भी शामिल है।

शैक्षिक मनोविज्ञान में अधिगम केंद्रीय धारणा है, क्योंकि शिक्षण तभी सार्थक माना जाता है जब वह विद्यार्थी में उपयोगी बदलाव ला सके। कक्षा के संदर्भ में अधिगम का अर्थ है अनुभव, अभ्यास और पर्यावरण से अंतःक्रिया के कारण व्यवहार, ज्ञान, कौशल, समझ, आदत, रुचि या दृष्टिकोण में अपेक्षाकृत स्थायी परिवर्तन। यहाँ अपेक्षाकृत स्थायी शब्द बहुत महत्त्वपूर्ण है। कोई बच्चा कविता नकल करने के तुरंत बाद पाँच मिनट तक सुना दे तो यह केवल अस्थायी प्रदर्शन हो सकता है; वही बच्चा बाद में कविता याद रखे, सुना सके और उसका आशय समझा सके तो इसे अधिगम कहा जाएगा। बुखार या थकान के कारण विद्यार्थी धीरे लिख रहा है तो उसने लिखना भुला नहीं दिया। इसी तरह किशोरावस्था में आवाज बदलना जैविक परिपक्वता है; यह अधिगम नहीं, क्योंकि यह किसी लक्ष्यपूर्ण अभ्यास या अनुभव से उत्पन्न नहीं हुआ।

इसलिए अधिगम को परिपक्वता, थकान, दुर्घटना और थोड़े समय के प्रदर्शन से अलग समझना चाहिए। परिपक्वता शरीर और तंत्रिका-तंत्र की स्वाभाविक वृद्धि है; वह कुछ काम सीखने की तैयारी बनाती है, लेकिन परिपक्वता अपने-आप में अधिगम नहीं है। थकान उपस्थित अधिगम के बावजूद प्रदर्शन घटा सकती है। अस्थायी प्रदर्शन संकेत, डर, अनुमान, नकल या तत्काल स्मृति से पैदा हो सकता है। परीक्षा में यह भेद अक्सर उदाहरणों से पूछा जाता है: बार-बार अभ्यास के बाद साइकिल चलाना सीखना अधिगम है; बच्चे का लंबा होना परिपक्वता है; लंबे परीक्षण के अंत में अधिक गलतियाँ करना थकान हो सकती है, बुद्धि या सीखे हुए ज्ञान की कमी नहीं।

अधिगम के प्रमुख प्रकार कक्षा के उदाहरणों से आसानी से याद रखे जा सकते हैं। शाब्दिक अधिगम में शब्द, प्रतीक, परिभाषाएँ, कविताएँ, सूत्र, तिथियाँ और व्याख्याएँ आती हैं। गत्यात्मक अधिगम में शारीरिक समन्वय होता है, जैसे सुंदर लिखना, नक्शा बनाना, प्रयोगशाला उपकरण संभालना, खेल-कूद की गतियाँ और उच्चारण का अभ्यास। संप्रत्ययात्मक अधिगम का अर्थ किसी वर्ग या विचार को समझना है, जैसे लोकतंत्र, वाष्पीकरण, संज्ञा, त्रिभुज या पुनर्बलन। समस्या-समाधान अधिगम में विद्यार्थी ज्ञान और युक्तियों का प्रयोग कर कठिनाई दूर करता है, जैसे ज्यामिति का प्रमाण हल करना या विद्यालय में कचरा कम करने की योजना बनाना। साहचर्य अधिगम संबंध जोड़ने से होता है, जैसे घंटी को अवकाश से जोड़ना या शब्द को उसके अर्थ से जोड़ना। प्रेक्षणात्मक या सामाजिक अधिगम में विद्यार्थी माता-पिता, शिक्षक, साथियों या सार्वजनिक जीवन के लोगों को देखकर सीखता है। अंतर्दृष्टि अधिगम में समस्या के भागों के संबंध को अचानक समझ लिया जाता है। रचनावादी अधिगम इस बात पर जोर देता है कि विद्यार्थी पूर्वज्ञान, गतिविधि, भाषा और सामाजिक अंतःक्रिया के आधार पर अर्थ का सक्रिय निर्माण करता है।

वास्तविक कक्षा में ये प्रकार अलग-अलग डिब्बों में नहीं रहते। विज्ञान का अध्याय पढ़ने में शाब्दिक अधिगम, संप्रत्यय सीखना और स्मृति-संगठन साथ-साथ चलते हैं। जल-चक्र का प्रतिरूप बनाना गत्यात्मक अधिगम, संप्रत्ययात्मक समझ, सहयोग और समस्या-समाधान को जोड़ता है। सम्मानजनक कक्षा-व्यवहार सीखने में पुनर्बलन, अनुकरण और चिंतन तीनों काम कर सकते हैं। वरिष्ठ शिक्षक को किसी एक प्रकार को हर सीखने के लिए पर्याप्त नहीं मानना चाहिए। समझ के बिना शाब्दिक अधिगम रटंत स्मरण बन जाता है; फीडबैक के बिना गत्यात्मक अभ्यास यांत्रिक दोहराव रह जाता है; चर्चा के बिना प्रेक्षण अवांछित व्यवहार भी दोहरा सकता है; और मदद या सही सहारे के बिना कठिन समस्याएँ कमजोर विद्यार्थियों को निराश कर सकती हैं। शिक्षक का काम है कि उद्देश्य के अनुसार अधिगम का प्रकार पहचाने और फिर तत्परता, अभ्यास, उदाहरण, फीडबैक और मूल्यांकन उसी के अनुसार व्यवस्थित करे।

पूरा नोट खोलें

यह सार्वजनिक पृष्ठ पहला उपलब्ध खंड दिखाता है। स्टडी पैक पूरा विषय और सभी पुनरावलोकन सामग्री खोलता है।

5 और खंड पूरे नोट में हैं

स्टडी पैक खोलें