उर्दू
मुख्य तथ्य
- उर्दू पेपर द्वितीय में लेखक, रचना और विधा को एक साथ दोहराना सबसे उपयोगी है, क्योंकि कई सवाल पहचान और विधा दोनों साथ जांचते हैं।
- अमानत इंदर सभा से जुड़े हैं, जबकि कुर्रतुलऐन हैदर, बलवंत सिंह, सुरेंद्र प्रकाश और इकबाल मजीद वरिष्ठ माध्यमिक अफसाना सूची में आते हैं।
- ख्वाजा हसन निजामी का मच्छर इंशाइया है, एहतेशाम हुसैन का खूजी तनकीद है, और अहमद जमाल पाशा तथा शाहिद अहमद देहलवी खाका-पाठों से जुड़े हैं।
- तशबीह में तुलना स्पष्ट चिह्न के साथ होती है, जबकि इस्तिआरा में तुलना का खुला चिह्न हटकर रूपकात्मक पहचान बन जाती है।
- तजाहुल-ए-आरिफाना में वक्ता जानते हुए भी अनजान बनने का काव्यात्मक अभिनय करता है।
मुख्य बिंदु
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उर्दू पेपर द्वितीय में लेखक, रचना और विधा को एक साथ दोहराना सबसे उपयोगी है, क्योंकि कई सवाल पहचान और विधा दोनों साथ जांचते हैं।
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अमानत इंदर सभा से जुड़े हैं, जबकि कुर्रतुलऐन हैदर, बलवंत सिंह, सुरेंद्र प्रकाश और इकबाल मजीद वरिष्ठ माध्यमिक अफसाना सूची में आते हैं।
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ख्वाजा हसन निजामी का मच्छर इंशाइया है, एहतेशाम हुसैन का खूजी तनकीद है, और अहमद जमाल पाशा तथा शाहिद अहमद देहलवी खाका-पाठों से जुड़े हैं।
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तशबीह में तुलना स्पष्ट चिह्न के साथ होती है, जबकि इस्तिआरा में तुलना का खुला चिह्न हटकर रूपकात्मक पहचान बन जाती है।
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तजाहुल-ए-आरिफाना में वक्ता जानते हुए भी अनजान बनने का काव्यात्मक अभिनय करता है।
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मजाज-ए-मुरसल, लफ्फ-ओ-नश्र, तलमीह, तजाद, इहाम, हुस्न-ए-तलील, तंसीकुस्सिफात, इश्तिकाक और मरातुन-नजीर को अलग-अलग परिभाषाओं से याद करें।
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प्रेमचंद, बेदी और मंटो स्नातक स्तर के अफसाने में केंद्रीय हैं, पर प्रेमचंद का यथार्थवाद, बेदी का विभाजन-संबंधी सामाजिक दर्द और मंटो का तीखा व्यंग्य एक जैसे नहीं हैं।
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बाग-ओ-बहार दास्तान, अनारकली नाटक, उमराव जान अदा नाविल, और वारदात तथा अन्नदाता अफसाना-पाठ के रूप में याद रखें।
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वली, दाग और फिराक स्नातकोत्तर गजल के प्रमुख आधार हैं; इकबाल और अख्तर शीरानी मंजूमात में आते हैं।
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सन 1700 तक दक्कन, सन 1857 तक उत्तर भारत, अलीगढ़ आंदोलन, प्रगतिशील आंदोलन और आधुनिकतावाद उर्दू साहित्य-इतिहास की मुख्य क्रम-रेखा बनाते हैं।
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प्रगतिशील आंदोलन समाज, वर्ग, श्रम, भूख और अन्याय को सामने रखता है, जबकि आधुनिकतावाद भीतरी अनुभव, प्रतीक, रूप-प्रयोग और नई कथन-तकनीक पर अधिक जोर देता है।
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उर्दू शिक्षण में साहित्यिक आस्वाद को विधा-पहचान, अलंकार-अभ्यास, सहकारी अधिगम, डिजिटल संसाधन और आकलन-तकनीक से जोड़ना चाहिए।
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RPSC स्कूल लेक्चरर पेपर द्वितीय के लिए वरिष्ठ माध्यमिक स्तर के कौन-से उर्दू पाठ पढ़ने चाहिए?
वरिष्ठ माध्यमिक उर्दू पाठों को परीक्षा के लिए लेखक, रचना, विधा और साहित्यिक विशेषता के साफ नक्शे की तरह पढ़ना चाहिए, क्योंकि यही ढाँचा सीधे लेखक-पाठ पहचान और प्रसंगात्मक सवाल दोनों में काम आता है। राजस्थान लोक सेवा आयोग के स्कूल लेक्चरर उर्दू पेपर द्वितीय पाठ्यक्रम के अनुसार पेपर में 150 बहुविकल्पीय प्रश्न होते हैं और अधिकतम 300 अंक होते हैं। लेखक और रचना की पहचान का इतना अभ्यास करें कि ऐसे तथ्यात्मक सवालों का उत्तर जल्दी दे सकें। वरिष्ठ माध्यमिक भाग को निर्धारित पाठों के नक्शे की तरह पढ़ना चाहिए, क्योंकि पेपर में सीधे लेखक-पाठ पहचान भी आ सकती है और रूप, लेखक तथा साहित्यिक गुण से जुड़ा प्रसंगात्मक सवाल भी आ सकता है। गद्य में अमानत का संबंध मंजूम नाटक इंदर सभा से है। लेखक, रचना और विधा का यह संबंध ठीक-ठीक याद रखें: अमानत, इंदर सभा, नाटक। अफसाना समूह छोटा है, पर विविध है: कुर्रतुलऐन हैदर का फोटोग्राफर, बलवंत सिंह का लम्हे, सुरेंद्र प्रकाश का बाजूका और इकबाल मजीद का सुकून की नींद। हर पाठ के लिए तीन खाने बनाएं: लेखक, रचना और मुख्य कथन-शैली। हैदर को ऐतिहासिक चेतना और आधुनिक कथन-कौशल से, बलवंत सिंह को मानवीय स्थितियों और सामाजिक अवलोकन से, सुरेंद्र प्रकाश को आधुनिक अफसाना-प्रयोग और प्रतीकों से पैदा होने वाले तनाव से, तथा इकबाल मजीद को संक्षिप्त शहरी और मनोवैज्ञानिक कथा से जोड़कर पढ़ें। परीक्षा में लंबा साहित्यिक निबंध नहीं चाहिए, पर लेखक-रचना पहचान और अफसाना, नाटक, इंशाइया, तनकीद तथा खाका में फर्क साफ होना चाहिए।
ख्वाजा हसन निजामी का मच्छर इंशाइया के अंतर्गत आता है, इसलिए इसे हल्के व्यंग्य, निजी स्वर, चिंतन और बातचीत जैसे सहज लहजे वाले गद्य के रूप में पढ़ें। एहतेशाम हुसैन का खूजी तनकीद में रखा गया है; इसका अर्थ है कि जोर आलोचना पर रहेगा: पद्धति, मूल्यांकन, साहित्यिक निर्णय और तर्कपूर्ण चर्चा। खाका के लिए अहमद जमाल पाशा का कलीमुद्दीन अहमद और शाहिद अहमद देहलवी का मीर बाकर अली दास्तान गो याद रखें। खाका पूरी जीवनी नहीं होता; वह किसी व्यक्ति के स्वभाव, बोलचाल, आदतों और साहित्यिक व्यक्तित्व के चुने हुए संकेतों से याद रहने वाली तस्वीर बनाता है। शाहिद अहमद देहलवी के दास्तानगो से जुड़े खाके के आधार पर खाका और पुरानी मौखिक कथा-परंपरा का संबंध भी पूछा जा सकता है।
इस स्तर पर काव्य को रूप के आधार पर व्यवस्थित करना उपयोगी है। गजलियात में वली दक्कनी, मीर तकी मीर, मीर दर्द, मोइन अहसन जज्बी, नासिर काजमी और जां निसार अख्तर आते हैं। इन्हें काल और स्वर के आधार पर पढ़ें: वली दक्कन और उत्तरी गजल परंपरा के बीच पुल हैं; मीर और दर्द क्लासिकी दिल्ली की संवेदना दिखाते हैं; जज्बी, नासिर काजमी और जां निसार अख्तर गीतात्मक अभिव्यक्ति में आधुनिक या प्रगतिशील दौर की छाया लाते हैं। मंजूमात में नजीर अकबराबादी, इस्माइल मेरठी, अकबर इलाहाबादी, मखदूम मोहिउद्दीन और नून मीम राशिद हैं। यहाँ सवाल यह पूछ सकता है कि कवि सामाजिक यथार्थ, सुधारवादी स्वर, व्यंग्य, प्रगतिशील रूमानियत या आधुनिकतावादी प्रयोग से जुड़ता है या नहीं। मर्सिया में अनीस और दबीर दोनों हैं; दोनों को शोक-काव्य, कर्बला, कथात्मक विस्तार, अलंकारिक भव्यता और मुसद्दस जैसी गति के साथ पढ़ें। रुबाइयात में जगत मोहन लाल रवां और अमजद हैदराबादी हैं; रुबाई को चार पंक्तियों की संक्षिप्त कविता के रूप में पढ़ें, जिसमें विचार तीखा और प्रायः नैतिक, दार्शनिक या चिंतनशील होता है। गीत में अख्तर शीरानी, मीराजी, सलाम मछली शेहरी और एहसान दानिश हैं। उपयोगी फर्क यह है कि गीत लय, गेयता और तत्काल भावात्मकता के अधिक निकट जाता है, जबकि गजल स्वतंत्र शेरों, मतला, मकता, रदीफ और काफिया पर आधारित रहती है। उत्तर लिखते समय पहले विधा पहचानें, फिर लेखक का नाम दें और अंत में उससे जुड़ी साहित्यिक धारा या भाषा-शैली बताएं।
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