मुख्य तथ्य

  • स्माइल का पूर्ण रूप सोशल मीडिया इंटरफेस फॉर लर्निंग एंगेजमेंट है और इसे राजस्थान स्कूल शिक्षा विभाग ने 13 अप्रैल 2020 को शुरू किया।
  • समग्र शिक्षा पूर्व-प्राथमिक से कक्षा 12 तक की स्कूल शिक्षा को जोड़ने वाली केंद्र प्रवर्तित समेकित योजना है।
  • राजस्थान में समग्र शिक्षा का क्रियान्वयन राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद् से जुड़ा है और केंद्र-राज्य साझेदारी 60:40 है।
  • सबसे मजबूत पूर्व-प्रश्न जाल राइज़ का पूर्ण रूप और स्माइल की 13 अप्रैल 2020 शुरुआत की तारीख हैं।

मुख्य बिंदु

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    पेपर प्रथम में ये पहलें राजस्थान के शैक्षिक परिदृश्य के भीतर आती हैं, इसलिए इन्हें संस्था-कार्य संबंधों के साथ पढ़ें।

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    दीक्षा का पूर्ण रूप डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर फॉर नॉलेज शेयरिंग और राइज़ का पूर्ण रूप राजस्थान इंटरफेस फॉर स्कूल एजुकेटर्स है।

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    दीक्षा-राइज़ शिक्षक और विद्यार्थियों को डिजिटल संसाधन, क्यूआर-संबद्ध ई-सामग्री और व्यावसायिक विकास सहयोग देता है।

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    स्माइल का पूर्ण रूप सोशल मीडिया इंटरफेस फॉर लर्निंग एंगेजमेंट है और इसे राजस्थान स्कूल शिक्षा विभाग ने 13 अप्रैल 2020 को शुरू किया।

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    स्माइल ने दूरस्थ सीखने की स्थिति में व्हाट्सऐप और सोशल मीडिया से दैनिक वीडियो लिंक तथा अभ्यास सहयोग पहुँचाया।

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    शिक्षा दर्शन टीवी और दूरदर्शन के माध्यम से निर्धारित कक्षा-वार श्रव्य-दृश्य पाठों की पहल है।

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    शिक्षा वाणी रेडियो या ध्वनि माध्यम से कम-कनेक्टिविटी सीखने की निरंतरता का विकल्प है।

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    समग्र शिक्षा पूर्व-प्राथमिक से कक्षा 12 तक की स्कूल शिक्षा को जोड़ने वाली केंद्र प्रवर्तित समेकित योजना है।

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    समग्र शिक्षा में सर्व शिक्षा अभियान, राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान और शिक्षक शिक्षा को मिलाया गया।

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    राजस्थान में समग्र शिक्षा का क्रियान्वयन राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद् से जुड़ा है और केंद्र-राज्य साझेदारी 60:40 है।

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    एससीईआरटी, डाइट और आईएएसई मुख्यतः अकादमिक सहयोग और शिक्षक-शिक्षा से जुड़े हैं, जबकि बीएसईआर, आरएसओएस और पाठ्य पुस्तक मंडल की भूमिकाएँ अलग हैं।

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    सबसे मजबूत पूर्व-प्रश्न जाल राइज़ का पूर्ण रूप और स्माइल की 13 अप्रैल 2020 शुरुआत की तारीख हैं।

परीक्षा फ्रेम: राजस्थान के शैक्षिक परिदृश्य में राज्य पहलें

राजस्थान के शैक्षिक परिदृश्य में दीक्षा-राइज़, स्माइल, शिक्षा दर्शन, शिक्षा वाणी और समग्र शिक्षा अभियान को अलग-अलग योजना नहीं, बल्कि स्कूल व्यवस्था के भीतर गुणवत्ता, पहुँच, प्रशिक्षण और सीखने की निरंतरता सँभालने वाले शासन-समूह की तरह पढ़ना चाहिए। पेपर प्रथम में यह विषय सामान्य समसामयिकी की सूची नहीं है, बल्कि शैक्षिक प्रबंधन और राजस्थान के शैक्षिक परिदृश्य के खंड में आता है। आरपीएससी के आधिकारिक स्कूल व्याख्याता सिलेबस के अनुसार पेपर प्रथम में ७५ बहुविकल्पीय प्रश्नों के लिए कुल १५० अंक निर्धारित हैं। आधिकारिक पाठ्यक्रम में यह नियोजन, पर्यवेक्षण, निरीक्षण, नेतृत्व और सम्पूर्ण गुणवत्ता प्रबंधन जैसे प्रबंधन-विचारों के बाद तथा बालकों का निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, २००९ से पहले रखा गया है। यही स्थान इसकी परीक्षा-दृष्टि तय करता है। आयोग प्रायः इन पहलों को स्कूल व्यवस्था के भीतर पूछता है: शैक्षणिक सहयोग कौन देता है, बोर्ड परीक्षाएँ कौन कराता है, पाठ्यपुस्तकें कौन तैयार या वितरित करता है, शिक्षक-प्रशिक्षण किस संस्था से जुड़ता है और विद्यालय बंद रहने या पुनर्बहाली के समय सीखने की सामग्री किस पहल से पहुँची।

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए राज्य पहल को व्यावहारिक शासन-समूह की तरह पढ़ना चाहिए। राजस्थान की स्कूली शिक्षा व्यवस्था संस्थाओं और कार्यक्रमों को साथ लेकर चलती है। उदयपुर स्थित एससीईआरटी स्कूली शिक्षा और शिक्षक शिक्षा की राज्य-स्तरीय शीर्ष शैक्षणिक संस्था है; इसका संबंध पाठ्यचर्या, पाठ्यपुस्तक, मूल्यांकन सुधार, अकादमिक मार्गदर्शन और शिक्षक-शिक्षा संस्थानों को सहयोग देने से है। डाइट जिला स्तर पर शिक्षक-प्रशिक्षण, क्षेत्रीय सहयोग, क्रियात्मक शोध और स्थानीय अकादमिक संसाधन-कार्य को विद्यालयों के पास लाती है। आईएएसई उच्च स्तर की शिक्षक-शिक्षा और व्यावसायिक विकास संस्थाएँ हैं, इसलिए जब प्रश्न विद्यार्थी तक सामग्री पहुँचाने वाले प्लेटफ़ॉर्म के बजाय शिक्षक-शिक्षा को मजबूत करने पर हो तो इन्हें अलग पहचानना चाहिए।

बीएसईआर अर्थात् माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान, अजमेर माध्यमिक और उच्च माध्यमिक परीक्षाओं, मान्यता और परीक्षा-प्रशासन से जुड़ी संस्था है। राजस्थान राज्य मुक्त विद्यालय उन शिक्षार्थियों के लिए है जो नियमित दिवस-विद्यालय पद्धति से पढ़ाई पूरी नहीं कर पाते और जिन्हें माध्यमिक तथा उच्च माध्यमिक स्तर पर लचीला अवसर चाहिए। राजस्थान राज्य पाठ्य पुस्तक मंडल राज्य द्वारा स्वीकृत पाठ्यपुस्तकों के मुद्रण और वितरण से जुड़ा है, जिसमें निःशुल्क पाठ्यपुस्तक वितरण और अधिकृत मार्गों से पुस्तकों की उपलब्धता भी आती है। ये संस्थाएँ डिजिटल सीखने की पहल नहीं हैं; ये वह संगठनात्मक आधार हैं जिनमें डिजिटल और प्रसारण-आधारित पहलें फिट होती हैं।

तैयारी में तीन परतें अलग रखें। पहली परत शैक्षणिक प्राधिकरण और संसाधन-डिजाइन की है: एससीईआरटी, डाइट और आईएएसई। दूसरी परत प्रमाणन और पहुँच की है: नियमित बोर्ड परीक्षाओं के लिए बीएसईआर और मुक्त विद्यालयी व्यवस्था के लिए आरएसओएस। तीसरी परत सामग्री पहुँचाने और सीखने की निरंतरता की है: दीक्षा-राइज़, स्माइल, शिक्षा दर्शन, शिक्षा वाणी और समग्र शिक्षा। आयोग इसे सीधे पूर्ण-रूप, संस्था-कार्य मिलान, तारीख-भ्रम या माध्यम की तुलना वाले प्रश्न में बदल सकता है।

२०२२ के स्कूल व्याख्याता पेपर प्रथम का संकेत बहुत सीधा है: राइज़-दीक्षा पोर्टल में राइज़ का पूर्ण रूप और स्माइल शुरू होने की तारीख तथ्यात्मक प्रश्नों में पूछी गई। इसलिए इन कार्यक्रमों को केवल वर्णनात्मक निबंध की तरह न पढ़ें। पूर्ण रूप, लागू करने वाला विभाग, पहुँच का माध्यम, लक्षित लाभार्थी और एक पंक्ति का उद्देश्य याद रखें। साथ ही शैक्षिक प्रबंधन का कोण बनाए रखें: ये पहलें दिखाती हैं कि राज्य प्रशासन ने व्यापक सार्वजनिक स्कूल व्यवस्था के भीतर गुणवत्ता, पहुँच, निरंतरता, प्रशिक्षण और निगरानी को कैसे संभालने की कोशिश की।