मुख्य तथ्य

  • बीएसईआर या आरबीएसई राजस्थान माध्यमिक शिक्षा अधिनियम, 1957 के तहत गठित माध्यमिक और उच्च माध्यमिक बोर्ड परीक्षा व्यवस्था से जुड़ा है।
  • राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल पाठ्यपुस्तकों के मुद्रण और वितरण, निःशुल्क पाठ्यपुस्तक आपूर्ति और 2010 के बाद कक्षा 9 से 12 की छपाई-भूमिका से जुड़ा है…
  • आरटीई 2009 के कारण प्राथमिक स्तर पर पहुँच, बाल-अधिकार, शिक्षक मानक, स्कूल दायित्व और गुणवत्ता-समर्थन महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
  • एनईपी 2020 आधारभूत साक्षरता-संख्याज्ञान, क्षमता-आधारित सीखने, शिक्षक पेशेवर विकास, लचीले मार्ग और मूल्यांकन सुधार पर बल देती है।

मुख्य बिंदु

  1. 1

    आरपीएससी पेपर प्रथम में राजस्थान के शैक्षिक परिदृश्य को संस्था और कार्य के आधार पर पूछा जाता है।

  2. 2

    एससीईआरटी या आरएससीईआरटी राज्य की शैक्षिक दिशा, पाठ्यक्रम सहयोग, शिक्षक प्रशिक्षण, मूल्यांकन सुधार, शोध और गुणवत्ता सुधार से जुड़ी संस्था है।

  3. 3

    बीएसईआर या आरबीएसई राजस्थान माध्यमिक शिक्षा अधिनियम, 1957 के तहत गठित माध्यमिक और उच्च माध्यमिक बोर्ड परीक्षा व्यवस्था से जुड़ा है।

  4. 4

    एससीईआरटी और बीएसईआर में मुख्य अंतर अकादमिक सहयोग बनाम बोर्ड परीक्षा और प्रमाणन का है।

  5. 5

    डाइट जिला-स्तर की शिक्षक शिक्षा और फील्ड-सहयोग संस्था है, विशेषकर प्राथमिक और उच्च प्राथमिक शिक्षा में।

  6. 6

    आईएएसई उन्नत शिक्षक शिक्षा, शिक्षक-शिक्षक विकास, पेशेवर क्षमता निर्माण और शैक्षिक शोध से जुड़ा उच्च स्तर है।

  7. 7

    राजस्थान राज्य मुक्त विद्यालय नियमित स्कूल व्यवस्था से बाहर रहने वाले विद्यार्थियों को माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर पर लचीला अवसर देता है।

  8. 8

    राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल पाठ्यपुस्तकों के मुद्रण और वितरण, निःशुल्क पाठ्यपुस्तक आपूर्ति और 2010 के बाद कक्षा 9 से 12 की छपाई-भूमिका से जुड़ा है।

  9. 9

    एसआईक्यूई का केंद्र कक्षा-प्रक्रिया, आधारभूत अधिगम, सीखने की जाँच, उपचारात्मक शिक्षण और गुणवत्ता शिक्षा है।

  10. 10

    आरटीई 2009 के कारण प्राथमिक स्तर पर पहुँच, बाल-अधिकार, शिक्षक मानक, स्कूल दायित्व और गुणवत्ता-समर्थन महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

  11. 11

    एनईपी 2020 आधारभूत साक्षरता-संख्याज्ञान, क्षमता-आधारित सीखने, शिक्षक पेशेवर विकास, लचीले मार्ग और मूल्यांकन सुधार पर बल देती है।

  12. 12

    बहुविकल्पीय प्रश्नों में पहले कार्य पहचानें: अकादमिक प्राधिकरण, बोर्ड परीक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण, मुक्त विद्यालय, पुस्तक आपूर्ति या गुणवत्ता पहल।

आरपीएससी में राजस्थान का शैक्षिक परिदृश्य कैसे समझें?

आरपीएससी में राजस्थान का शैक्षिक परिदृश्य समझने का सही तरीका यह है कि हर संस्था को स्कूल शिक्षा की श्रृंखला में उसके काम के अनुसार रखें, केवल नामों की सूची की तरह न पढ़ें। आरपीएससी स्कूल व्याख्याता पेपर प्रथम के सिलेबस में राजस्थान का शैक्षिक परिदृश्य संस्था और कार्य के रूप में समझना होता है। यहाँ जिन संस्थाओं के नाम आते हैं, वे हैं एससीईआरटी या आरएससीईआरटी, बीएसईआर या आरबीएसई, आईएएसई, डाइट, राजस्थान राज्य मुक्त विद्यालय, राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल और राज्य गुणवत्ता शिक्षा पहल। परीक्षा की दृष्टि से पहला काम नाम रट लेना नहीं, बल्कि हर संस्था को स्कूल शिक्षा की श्रृंखला में सही स्थान पर रखना है: अकादमिक योजना, शिक्षक तैयारी, पाठ्यपुस्तक, परीक्षा, वैकल्पिक विद्यालयी मार्ग और गुणवत्ता सुधार। जनगणना २०११ के राजस्थान प्राथमिक जनगणना सार के अनुसार राजस्थान की साक्षरता दर २०११ में ६६.१ प्रतिशत थी, इसलिए शैक्षिक परिदृश्य को केवल संस्थागत ढाँचा नहीं, बल्कि सीखने और साक्षरता की सामाजिक चुनौती से जुड़ा विषय भी मानना चाहिए।

प्राथमिक स्तर पर जोर पहुँच, आयु के अनुसार नामांकन, कक्षा-प्रक्रिया, आधारभूत अधिगम, शिक्षकों को लगातार अकादमिक सहयोग और आरटीई २००९ के पालन पर रहता है। आरटीई इस भाग को निःशुल्क और अनिवार्य प्रारंभिक शिक्षा, पड़ोस के स्कूल, बच्चे के अधिकार, शिक्षक मानक और गुणवत्ता संबंधी दायित्वों से जोड़ता है। इसलिए शुरुआती कक्षाओं, कक्षा अवलोकन, सीखने की जाँच, उपचारात्मक कार्य और जिला-स्तर के अकादमिक सहयोग वाले प्रश्नों में एसआईक्यूई, डाइट और एससीईआरटी अधिक दिखाई देते हैं। पाठ्यपुस्तक मंडल भी प्राथमिक शिक्षा को प्रभावित करता है, क्योंकि सरकारी स्कूलों के अनेक विद्यार्थी समय पर मिलने वाली पुस्तकों, खासकर निःशुल्क पाठ्यपुस्तक व्यवस्था, पर निर्भर रहते हैं।

माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर पर जोर थोड़ा बदल जाता है। यहाँ पाठ्यक्रम का बोर्ड से सामंजस्य, बोर्ड परीक्षाएँ, प्रमाणपत्र, संबद्धता, पुस्तकों की उपलब्धता, शिक्षक पेशेवर विकास और किशोरों या वयस्कों के लिए लचीले रास्ते अधिक महत्वपूर्ण होते हैं। बीएसईआर इस स्तर पर केंद्रीय संस्था है, क्योंकि वही माध्यमिक और उच्च माध्यमिक परीक्षाओं की बोर्ड व्यवस्था चलाता है और परीक्षा ढाँचे को औपचारिक रूप देता है। राजस्थान राज्य मुक्त विद्यालय भी यहाँ महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि वह उन विद्यार्थियों को माध्यमिक और उच्च माध्यमिक प्रमाणन का लचीला मार्ग देता है जो नियमित स्कूल में बने नहीं रह पाते। आरएससीईआरटी की भूमिका यहाँ भी बनी रहती है, लेकिन अंतिम बोर्ड प्रमाणन की जगह पाठ्यक्रम सहयोग, प्रशिक्षण, शोध और गुणवत्ता सुधार के रूप में।

एनईपी २०२० इस पूरे मानचित्र को आधुनिक दृष्टि देती है। इसमें आधारभूत साक्षरता और संख्याज्ञान, लचीले सीखने के मार्ग, क्षमता-आधारित मूल्यांकन, शिक्षक पेशेवर विकास, पाठ्यक्रम नवीनीकरण और रटने पर निर्भरता कम करने पर बल है। ये लक्ष्य राजस्थान की संस्थाओं से अलग नहीं हैं। एससीईआरटी को राष्ट्रीय और राज्य स्तर की पाठ्यचर्या प्राथमिकताओं को अकादमिक सामग्री और शिक्षक सहयोग में बदलना होता है। डाइट और आईएएसई नीति को शिक्षक शिक्षा और फील्ड क्षमता में बदलने में मदद करते हैं। बीएसईआर की परीक्षा पद्धति को पाठ्यक्रम और मूल्यांकन सुधारों से जुड़ा रहना होता है। राजस्थान राज्य मुक्त विद्यालय लचीलापन और समावेशन बढ़ाता है, जबकि एसआईक्यूई स्कूल स्तर पर कक्षा गुणवत्ता को व्यवहार में लाने का प्रयास है।

बहुविकल्पीय प्रश्नों में सामान्य तुलना एससीईआरटी बनाम बीएसईआर, डाइट बनाम आईएएसई, राजस्थान राज्य मुक्त विद्यालय बनाम नियमित बोर्ड विद्यालय और पाठ्यपुस्तक मंडल बनाम पाठ्यक्रम प्राधिकरण के रूप में आती है। सुरक्षित सूत्र यह है: एससीईआरटी अकादमिक नेतृत्व है, बीएसईआर बोर्ड परीक्षा और संबद्धता है, डाइट जिला-स्तर का शिक्षक-सहयोग है, आईएएसई उन्नत शिक्षक शिक्षा और शोध है, राजस्थान राज्य मुक्त विद्यालय मुक्त विद्यालयी शिक्षा है, पाठ्यपुस्तक मंडल पुस्तकों का मुद्रण और वितरण है, और एसआईक्यूई कक्षा-अधिगम की गुणवत्ता सुधार पहल है।