मुख्य तथ्य

  • भारत की जनगणना दशकीय आधिकारिक गणना है, जो जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त के कार्यालय से संचालित होती है।
  • प्राथमिक जनगणना सार में कुल जनसंख्या, लिंग-वार जनसंख्या, 0-6 बाल जनसंख्या, साक्षर, कार्यकर्ता और ग्रामीण-नगरीय पंक्तियां मिलती हैं।
  • भारत की अंतिम जनगणना 2011 जनसंख्या 121.09 करोड़ थी, जिसमें 62.33 करोड़ पुरुष और 58.76 करोड़ महिलाएं थीं।
  • भारत की 2001-2011 दशकीय वृद्धि दर 17.7 प्रतिशत, घनत्व 382 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर और प्रभावी साक्षरता लगभग 73.0 प्रतिशत थी।
  • भारत का कुल लिंगानुपात 943 था, जबकि 0-6 आयु वर्ग का बाल लिंगानुपात लगभग 919 था।

मुख्य बिंदु

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    भारत की जनगणना दशकीय आधिकारिक गणना है, जो जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त के कार्यालय से संचालित होती है।

  2. 2

    प्राथमिक जनगणना सार में कुल जनसंख्या, लिंग-वार जनसंख्या, 0-6 बाल जनसंख्या, साक्षर, कार्यकर्ता और ग्रामीण-नगरीय पंक्तियां मिलती हैं।

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    भारत की अंतिम जनगणना 2011 जनसंख्या 121.09 करोड़ थी, जिसमें 62.33 करोड़ पुरुष और 58.76 करोड़ महिलाएं थीं।

  4. 4

    भारत की 2001-2011 दशकीय वृद्धि दर 17.7 प्रतिशत, घनत्व 382 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर और प्रभावी साक्षरता लगभग 73.0 प्रतिशत थी।

  5. 5

    भारत का कुल लिंगानुपात 943 था, जबकि 0-6 आयु वर्ग का बाल लिंगानुपात लगभग 919 था।

  6. 6

    राजस्थान की अंतिम जनगणना 2011 जनसंख्या 6.85 करोड़ थी, जिसमें लगभग 3.56 करोड़ पुरुष और 3.30 करोड़ महिलाएं थीं।

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    2011 में भारत की जनसंख्या में राजस्थान का हिस्सा लगभग 5.66 प्रतिशत था, लेकिन उसका घनत्व लगभग 200 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर ही था।

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    2001-2011 में राजस्थान की दशकीय वृद्धि दर लगभग 21.4 प्रतिशत थी, जो भारत की 17.7 प्रतिशत दर से अधिक थी।

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    राजस्थान का कुल लिंगानुपात 928 और बाल लिंगानुपात 888 था; दोनों भारत के मानों से नीचे थे।

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    राजस्थान की प्रभावी साक्षरता दर 66.1 प्रतिशत थी और पुरुष-महिला साक्षरता अंतर बहुत बड़ा था।

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    राजस्थान 2011 में लगभग 75.13 प्रतिशत ग्रामीण और 24.87 प्रतिशत नगरीय था, इसलिए वह भारत की तुलना में अधिक ग्रामीण था।

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    जनसंख्या और घनत्व में जयपुर राजस्थान का शीर्ष जिला था, जबकि जनसंख्या और घनत्व दोनों में जैसलमेर सबसे नीचे था।

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    राजस्थान में कुल साक्षरता दर में कोटा सबसे ऊपर और जालौर सबसे नीचे था।

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    कुल लिंगानुपात में डूंगरपुर सबसे ऊपर और धौलपुर सबसे नीचे था; बाल लिंगानुपात में बांसवाड़ा सबसे ऊपर और झुंझुनूं सबसे नीचे था।

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    प्रभावी साक्षरता दर निकालते समय सात वर्ष से कम आयु के बच्चों को हर से बाहर रखा जाता है।

जनगणना २०११ में प्राथमिक जनगणना सार सबसे भरोसेमंद आधार क्यों है?

जनगणना २०११ में प्राथमिक जनगणना सार इसलिए सबसे भरोसेमंद आधार है क्योंकि यही भारत और राजस्थान की कुल, ग्रामीण, नगरीय, जिला और छोटे प्रशासनिक स्तरों की आधिकारिक जनसंख्या-सारणी देता है। भारत की जनगणना देश की आधिकारिक जनसंख्या गणना और जनसांख्यिकीय विवरण का सबसे बड़ा स्रोत है। परीक्षा में इसे दशकीय अभ्यास के रूप में याद रखें, अर्थात सामान्यतः हर दस वर्ष में होने वाली गणना। जनगणना २०११ भारत की पंद्रहवीं जनगणना और स्वतंत्रता के बाद सातवीं जनगणना थी। यह जनगणना अधिनियम, १९४८ के तहत होती है और गृह मंत्रालय के अधीन भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त का कार्यालय इसे संचालित करता है। राजस्थान के लिए भी यही संस्थागत ढांचा लागू है, क्योंकि जिला, ग्रामीण-नगरीय, लिंग, साक्षरता, कार्यकर्ता और सामाजिक वर्गों की सारणियां राष्ट्रीय जनगणना व्यवस्था का हिस्सा हैं, अलग राज्य सर्वे नहीं। राजस्थान प्राथमिक जनगणना सार, जनगणना २०११ के अनुसार उस समय राजस्थान की जिला-सारणी ३३ जिलों पर आधारित थी।

जनगणना का उद्देश्य केवल लोगों की गिनती करना नहीं है। यह स्कूल, स्वास्थ्य सेवाएं, सड़क, पेयजल, कल्याणकारी योजनाओं के लक्ष्य, परिसीमन से जुड़ी चर्चा, नगरीय योजना, आपदा प्रबंधन और सामाजिक क्षेत्र की तुलना के लिए समान आधार देती है। स्कूल व्याख्याता स्तर के प्रश्नों में इसका उपयोग अधिकतर तथ्यात्मक और तुलनात्मक होता है: भारत बनाम राजस्थान, एक जिला बनाम दूसरा जिला, २००१ बनाम २०११, या किसी संकेतक की परिभाषा को आंकड़ा-विवेचन में छिपाकर पूछा जाता है। इस पाठ्य-संदर्भ में २०११ के अंतिम आंकड़ों को बाद की किसी पूर्ण जनगणना ने प्रतिस्थापित नहीं किया था, इसलिए २०११ के संकेतकों को सर्वेक्षण, आंकड़ा-पटल या जनसंख्या अनुमान से न मिलाएं।

इस विषय का सबसे महत्त्वपूर्ण स्रोत प्राथमिक जनगणना सार है। आधिकारिक जनसंख्या खोज सुविधा इसी सारणी-समूह से आंकड़े निकालती है और ये सारणियां राज्य, जिला, उपखंड, नगर, गांव और वार्ड जैसे प्रशासनिक स्तरों पर अनेक संकेतक देती हैं। इनमें कुल जनसंख्या, पुरुष जनसंख्या, महिला जनसंख्या, ०-६ आयु वर्ग की बाल जनसंख्या, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति जनसंख्या, साक्षर, कार्यकर्ता और गैर-कार्यकर्ता शामिल होते हैं। यह कुल, ग्रामीण और नगरीय पंक्तियों को अलग-अलग दिखाता है; इसलिए एक ही जिले पर कुल जनसंख्या, ग्रामीण रूपरेखा या नगरीय रूपरेखा के रूप में अलग प्रश्न बन सकता है।

जनगणना के प्रश्न में असली सावधानी हर बार हर का चुनाव है। जनसंख्या घनत्व बराबर है कुल जनसंख्या को वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल से भाग देना। लिंगानुपात कुल जनसंख्या में प्रति १,००० पुरुषों पर महिलाओं की संख्या है। बाल लिंगानुपात ०-६ आयु वर्ग में प्रति १,००० बालकों पर बालिकाओं की संख्या है; यह न पूरी जनसंख्या का अनुपात है और न ०-१४ आयु वर्ग का। प्रभावी साक्षरता दर सात वर्ष और उससे अधिक आयु की जनसंख्या पर निकाली जाती है, इसलिए सात वर्ष से कम बच्चों को हर से बाहर रखा जाता है। दशकीय वृद्धि दर दो जनगणना वर्षों, यहां सामान्यतः २००१ से २०११, के बीच प्रतिशत वृद्धि है। नगरीकरण वैधानिक नगरों और जनगणना नगरों में रहने वाली जनसंख्या का हिस्सा है, केवल गैर-कृषि काम करने वालों का हिस्सा नहीं।

परीक्षा में सुरक्षित तरीका है कि जनगणना सारणी को क्रम से पढ़ें। पहले प्रशासनिक स्तर देखें: भारत, राज्य, जिला, उपखंड या नगर। फिर कुल-ग्रामीण-नगरीय श्रेणी जांचें। उसके बाद पुरुष और महिला स्तंभ पढ़कर अनुपात निकालें। याद रखें कि साक्षर व्यक्तियों की संख्या अलग है और साक्षरता दर निकला हुआ प्रतिशत है। अंत में अस्थायी और अंतिम आंकड़ों का भ्रम न करें; प्रश्न स्पष्ट रूप से अस्थायी न कहे तो जनगणना २०११ के अंतिम आंकड़े ही रखें। यही अनुशासन सामान्य तथ्यात्मक प्रश्नों में बड़ी गलती से बचाता है।