भाषा दक्षता — सामान्य हिंदी (संधि, उपसर्ग-प्रत्यय, पर्यायवाची/विलोम, शब्द एवं वाक्य शुद्धि, प्रशासनिक शब्दावली)
मुख्य तथ्य
- सामान्य हिंदी का यह भाग वस्तुनिष्ठ है; इसमें लंबा सिद्धांत नहीं, बल्कि पहचान, सुधार और मानक प्रयोग अधिक अंक दिलाते हैं।
- हिंदी व्याकरण के उदाहरण देवनागरी में ही पढ़ें, क्योंकि मात्रा, संयुक्ताक्षर, अनुस्वार, चंद्रबिंदु और विसर्ग ही कई प्रश्नों का आधार होते हैं।
- संधि-विच्छेद में केवल अर्थ वाले टुकड़े न देखें; यह भी जाँचें कि दोनों वर्ण मिलने पर नियम के अनुसार कौन-सा बदलाव हुआ है।
- स्वर संधि में दीर्घ, गुण और वृद्धि रूप जोड़ पर दिखाई देते हैं, इसलिए ए, ओ, ऐ और औ जैसे रूपों की उत्पत्ति जांचें।
- व्यंजन और विसर्ग संधि में बदले हुए व्यंजन, दोहरे व्यंजन तथा निः या दुः से बने रूपों को ध्यान से पहचानें।
मुख्य बिंदु
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सामान्य हिंदी का यह भाग वस्तुनिष्ठ है; इसमें लंबा सिद्धांत नहीं, बल्कि पहचान, सुधार और मानक प्रयोग अधिक अंक दिलाते हैं।
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हिंदी व्याकरण के उदाहरण देवनागरी में ही पढ़ें, क्योंकि मात्रा, संयुक्ताक्षर, अनुस्वार, चंद्रबिंदु और विसर्ग ही कई प्रश्नों का आधार होते हैं।
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संधि-विच्छेद में केवल अर्थ वाले टुकड़े न देखें; यह भी जाँचें कि दोनों वर्ण मिलने पर नियम के अनुसार कौन-सा बदलाव हुआ है।
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स्वर संधि में दीर्घ, गुण और वृद्धि रूप जोड़ पर दिखाई देते हैं, इसलिए ए, ओ, ऐ और औ जैसे रूपों की उत्पत्ति जांचें।
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व्यंजन और विसर्ग संधि में बदले हुए व्यंजन, दोहरे व्यंजन तथा निः या दुः से बने रूपों को ध्यान से पहचानें।
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उपसर्ग मूल शब्द से पहले और प्रत्यय उसके बाद जुड़ता है; मान्य उपसर्ग या प्रत्यय और स्वीकार्य शब्द-निर्माण की जाँच करें, केवल बचे हुए अंश के स्वतंत्र अर्थ को अनिवार्य कसौटी न मानें।
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उपसर्ग निषेध, दिशा, संबंध, तीव्रता या विरोध का भाव दे सकता है, इसलिए पूरे बने हुए शब्द का अर्थ देखकर निर्णय करें।
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ता, पन, कार, अक और वाला जैसे प्रत्यय भाववाचक संज्ञा, विशेषण या कर्ता-सूचक शब्द बना सकते हैं।
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अनेकार्थक शब्दों में सही अर्थ संदर्भ से तय होता है; एक ही लिखित रूप अलग वाक्यों में अलग अर्थ दे सकता है।
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विलोम शब्द चुनते समय अर्थ, शब्द-वर्ग और भाषा-शैली तीनों का मेल ज़रूरी है।
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समश्रुत भिन्नार्थक शब्दों में ध्वनि मिलती-जुलती होती है, पर वर्तनी और अर्थ अलग होते हैं; छपा हुआ रूप ध्यान से पढ़ें।
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शब्द-शुद्धि में वर्तनी के साथ लिंग, वचन, शब्द-रूप और औपचारिक तत्सम प्रयोग भी जांचे जाते हैं।
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वाक्य-शुद्धि में सामंजस्य, परसर्ग, पद-क्रम, पुनरुक्ति, मुहावरा और प्रशासनिक शैली की स्वाभाविकता मुख्य आधार हैं।
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प्रशासनिक शब्दावली को अधिसूचना, परिपत्र, ज्ञापन, प्रतिवेदन, निविदा, स्वीकृति और निस्तारण जैसे कार्यालयी शब्दों तक सीमित रखकर पढ़ें।
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सही प्रशासनिक शब्द भी गलत लिंग या क्रिया-सामंजस्य के साथ रखा जाए तो पूरा वाक्य अशुद्ध हो सकता है।
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सामान्य हिंदी में क्या पूछा जाता है और तैयारी कैसे करें?
सामान्य हिंदी में संधि, उपसर्ग-प्रत्यय, अर्थ-प्रयोग, शब्द और वाक्य शुद्धि तथा प्रशासनिक शब्दावली पूछी जाती है, इसलिए तैयारी का केंद्र नियम पहचानना, गलती पकड़ना और शुद्ध रूप चुनना होना चाहिए। स्कूल व्याख्याता प्रथम प्रश्न-पत्र के भाषा-दक्षता भाग में सामान्य हिंदी छोटा, पर अंक दिलाने वाला क्षेत्र है। यह भाग मानसिक योग्यता, सांख्यिकी, गणित और भाषा-दक्षता के संयुक्त खंड में आता है। हिंदी के अंतर्गत सूची मुख्यतः व्याकरण और प्रयोग पर आधारित है: संधि और संधि-विच्छेद, उपसर्ग और प्रत्यय, अनेकार्थक शब्द, विलोम शब्द, समश्रुत भिन्नार्थक शब्द, शब्द-शुद्धि, वाक्य-शुद्धि और प्रशासनिक क्षेत्र के अंग्रेज़ी राजकीय अथवा तकनीकी शब्दों के हिंदी पर्याय। राजस्थान लोक सेवा आयोग के आधिकारिक पाठ्यक्रम के अनुसार प्रथम प्रश्न-पत्र में 75 बहुविकल्पीय प्रश्न होते हैं और यह 150 अंकों का होता है। प्रश्न वस्तुनिष्ठ होते हैं, इसलिए तैयारी का केंद्र लंबा भाषावैज्ञानिक विवेचन नहीं, बल्कि पहचान, छंटनी और शुद्ध रूप चुनने की क्षमता होनी चाहिए।
इस विषय की पहली सावधानी लिपि-संबंधी है। हिंदी व्याकरण के उदाहरण देवनागरी में ही पढ़े और याद किए जाने चाहिए, जैसे विद्यालय, दुर्जन, दिनकर, आज्ञा और अधिसूचना। परीक्षा में असली भेद मात्रा, संयुक्ताक्षर, अनुस्वार, चंद्रबिंदु या विसर्ग से बनता है। यदि इन रूपों को रोमन ढंग से सोचने की आदत पड़ जाए तो वही सूक्ष्म वर्तनी-भेद छिप जाता है जिस पर प्रश्न आधारित होता है। सामान्य हिंदी में शब्द का अर्थ जितना ज़रूरी है, उतना ही उसका सही लिखा रूप भी ज़रूरी है।
पाठ्यक्रम को छह प्रश्न-परिवारों में समझना उपयोगी है। पहला, संधि वाले प्रश्न संयुक्त रूप या सही संधि-विच्छेद पूछते हैं। विकल्पों में मिलते-जुलते विच्छेद दिए जा सकते हैं, इसलिए स्वर, व्यंजन और विसर्ग संधि के सामान्य रूप पहचानने होंगे। दूसरा, उपसर्ग-प्रत्यय वाले प्रश्न पूछते हैं कि कौन-सा उपसर्ग या प्रत्यय जुड़ा है, मूल शब्द क्या बचता है और जुड़ने के बाद अर्थ में क्या परिवर्तन आया। तीसरा, अर्थ-आधारित प्रश्न अनेकार्थक शब्दों, विलोम शब्दों और एक जैसे सुनाई देने वाले भिन्नार्थक शब्दों पर आते हैं। चौथा, शब्द-शुद्धि में वर्तनी और शब्द-रूप की शुद्धता जांची जाती है। पांचवां, वाक्य-शुद्धि में लिंग-वचन, कारक, परसर्ग, पद-क्रम, अनावश्यक पुनरुक्ति और मुहावरेदार प्रयोग देखे जाते हैं। छठा, प्रशासनिक शब्दावली में राजकीय कार्यालयों में प्रचलित मानक शब्दों का सही चयन करना होता है।
तैयारी का ढंग व्यावहारिक रखें। हर अपवाद रटने के बजाय बार-बार आने वाले रूपों की छोटी सारणियाँ बनाएं। संधि में होने वाले बदलाव का ढंग पहचानें: विद्या और आलय से विद्यालय बनता है, महा और ईश्वर से महेश्वर बनता है, निः और फल से निष्फल बनता है। उपसर्ग में स्थान और अर्थ दोनों देखें: अ उपसर्ग अशुद्ध जैसे शब्दों में निषेध का भाव देता है, जबकि ता प्रत्यय मधुरता जैसे शब्दों में भाववाचक संज्ञा बनाता है। शुद्धि वाले प्रश्नों में विकल्प देखने से पहले गलती का प्रकार पकड़ें। यदि त्रुटि लिंग की है तो केवल वर्तनी देखने से उत्तर नहीं मिलेगा; यदि त्रुटि मुहावरे की है तो वाक्य सतही रूप से व्याकरण-संगत होकर भी अशुद्ध हो सकता है।
हल करने का अच्छा क्रम है: पहले प्रश्न-परिवार पहचानें, फिर जिस इकाई की परीक्षा हो रही है उसे रेखांकित करें, नियम लागू करें और अंत में विकल्प की वर्तनी मिलाएं। संधि-विच्छेद में केवल सही अर्थ मिल जाना पर्याप्त नहीं है; लिखित रूप भी संधि-नियम से समझ में आना चाहिए। शब्द-शुद्धि में पूरे शब्द को पढ़ें, केवल आरंभ देखकर निर्णय न करें। वाक्य-शुद्धि में कर्ता, कर्म, क्रिया और परसर्ग अलग-अलग पहचानें। प्रशासनिक शब्दावली में अधिसूचना, परिपत्र, ज्ञापन, संकल्प, निविदा और प्रतिवेदन जैसे मानक शब्द सामान्य बोलचाल की व्याख्या से अधिक भरोसेमंद होते हैं। इस भाग में साहित्यिक रसास्वादन नहीं पूछा जाता; सरकारी परीक्षा के अनुरूप सामान्य हिंदी के सही, संक्षिप्त और मानक प्रयोग पूछे जाते हैं।
अंग्रेज़ी माध्यम से पढ़ने वाले अभ्यर्थी संतुलन रखें। सामान्य हिंदी के पाठ्यक्रम को अंग्रेज़ी व्याकरण का पाठ या केवल अनुवाद का अभ्यास न बनाएं। प्रश्न में आमतौर पर यह देखा जाता है कि छपा हुआ हिंदी रूप मानक है या नहीं, संधि-विच्छेद सही है या नहीं, उपसर्ग या प्रत्यय सचमुच जुड़ा है या नहीं और कार्यालयी शब्द प्रसंग के अनुसार ठीक है या नहीं। इस इकाई की कॉपी में नियमों के ढंग, छोटे उदाहरण-समूह और भ्रम में डालने वाले रूप अलग-अलग लिखें। शब्दावली सरल रखें: विषय का नाम, मानक रूप, बदलाव की वजह और उससे मिलता-जुलता 1 गलत विकल्प लिखें, ताकि अभ्यास में विकल्प हटाना आसान हो।
इस तरह दोहराव का समय भी बचता है। संधि और उपसर्ग-प्रत्यय को नियमों के ढंग से, अर्थ-आधारित शब्दों को वाक्य के संदर्भ से, शुद्धि के प्रश्नों को गलती की किस्म से और प्रशासनिक शब्दावली को प्रचलित पदबंधों के साथ दोहराएं। सब कुछ 1 ही सपाट सूची में रखने से याद करना भारी और कमजोर हो जाता है। हर उदाहरण पर प्रश्न-परिवार का छोटा संकेत लगा होगा तो बहुविकल्पीय प्रश्न की मांग जल्दी समझ आएगी और लिंग-सामंजस्य की गलती पर वर्तनी का नियम लगाने जैसी भूल नहीं होगी।
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