मुहावरे एवं लोकोक्तियाँ
मुख्य तथ्य
- मुहावरा स्थिर अभिव्यक्ति है जिसका स्वीकृत अर्थ उसके शब्दों के शाब्दिक चित्र से अलग हो सकता है।
- लोकोक्ति सामान्यतः पूरा लोकप्रिय कथन होती है, जो किसी स्थिति पर सामान्य सीख या सामाजिक निर्णय देती है।
- अर्थ वाले प्रश्न में पहले पूरी अभिव्यक्ति अलग करें; आँख, हाथ, नाक या दाल जैसे अकेले शब्द से उत्तर न दें।
- निकटतम अर्थ वाला प्रश्न रूढ़ अर्थ को परखता है, सबसे रंगीन या सबसे शाब्दिक विकल्प को नहीं।
- गलत अर्थ वाला प्रश्न-प्रारूप में गलत अर्थ पूछा जाता है; इसलिए सभी सही अर्थों को हटाकर असंगत विकल्प पहचानें।
मुख्य बिंदु
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मुहावरा स्थिर अभिव्यक्ति है जिसका स्वीकृत अर्थ उसके शब्दों के शाब्दिक चित्र से अलग हो सकता है।
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लोकोक्ति सामान्यतः पूरा लोकप्रिय कथन होती है, जो किसी स्थिति पर सामान्य सीख या सामाजिक निर्णय देती है।
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अर्थ वाले प्रश्न में पहले पूरी अभिव्यक्ति अलग करें; आँख, हाथ, नाक या दाल जैसे अकेले शब्द से उत्तर न दें।
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निकटतम अर्थ वाला प्रश्न रूढ़ अर्थ को परखता है, सबसे रंगीन या सबसे शाब्दिक विकल्प को नहीं।
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गलत अर्थ वाला प्रश्न-प्रारूप में गलत अर्थ पूछा जाता है; इसलिए सभी सही अर्थों को हटाकर असंगत विकल्प पहचानें।
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वाक्य-प्रयोग में स्वाभाविक प्रसंग, सही सहप्रयोग और उपयुक्त भाषिक स्तर चाहिए, जबरन शाब्दिक अनुवाद नहीं।
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समान शब्द वाले मुहावरे अलग अर्थ रख सकते हैं, जैसे आँख दिखाना, आँख फेरना और आँखों में धूल झोंकना।
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मिलती-जुलती सीख देने वाली लोकोक्तियों का ज़ोर भी अलग-अलग बातों पर हो सकता है: बहाना, दोष, फल, कमी, सावधानी या शक्ति।
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RPSC उपनिरीक्षक की तैयारी में औपचारिक हिंदी प्रसंगों में प्रचलित मुहावरों और लोकोक्तियों को प्राथमिकता दें।
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प्रशासनिक और विधिक प्रसंगों में भंडाफोड़, छिपाव, विलंब, सार्वजनिक किरकिरी और जवाबदेही के मुहावरे बार-बार काम आते हैं।
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सबसे अच्छी पुनरावृत्ति-सूची हर अभिव्यक्ति के साथ छोटा और सटीक परीक्षा-योग्य अर्थ लिखती है, अस्पष्ट समानार्थियों का ढेर नहीं।
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ऋणात्मक अंकन में केवल दृश्य-चित्र से अनुमान लगाने से बचें; रूढ़ अर्थ स्पष्ट न हो तो सावधानी रखें।
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RPSC उपनिरीक्षक हिंदी में मुहावरे और लोकोक्तियों का अंतर कैसे समझें?
RPSC उपनिरीक्षक हिंदी में मुहावरे और लोकोक्तियों का अंतर उनके रूप और काम से समझना चाहिए: मुहावरा वाक्य के भीतर रूढ़ अर्थ वाला स्थिर पदबंध होता है, जबकि लोकोक्ति किसी स्थिति पर पूरी टिप्पणी करती है या कोई सामान्य सीख देती है। RPSC उपनिरीक्षक हिंदी प्रश्नपत्र में मुहावरे और लोकोक्तियाँ केवल सजावटी शब्दावली नहीं हैं। RPSC के आधिकारिक उपनिरीक्षक/प्लाटून कमांडर पेपर-प्रथम हिंदी पाठ्यक्रम में यह प्रश्नपत्र 200 अंकों का बताया गया है। पेपर-प्रथम के आधिकारिक हिंदी पाठ्यक्रम में मुहावरे और लोकोक्तियाँ अलग बिंदु के रूप में आते हैं, और प्रश्नपत्र वस्तुनिष्ठ होता है: 100 बहुविकल्पी प्रश्न तथा गलत उत्तर पर 1/3 अंक की कटौती। इसलिए यह अध्याय याददाश्त से अधिक सूक्ष्म अर्थ-पहचान का अध्याय है। अभ्यर्थी से सामान्यतः लंबा विवेचन नहीं माँगा जाता; उससे निकटतम अर्थ, भावार्थ, सही वाक्य-प्रयोग या निकट विकल्पों में गलत अर्थ पहचानने को कहा जाता है। परिपक्व तैयारी में अर्थ, प्रसंग, भाषिक स्तर और भ्रम-बिंदु साथ पढ़े जाने चाहिए।
मुहावरा ऐसा स्थिर पदबंध है जिसका अर्थ उसके शब्दों के सामान्य अर्थ जोड़कर नहीं निकाला जाता। नाक कटना में शाब्दिक चित्र नाक को चोट लगने का है, पर स्वीकृत अर्थ प्रतिष्ठा हानि या सार्वजनिक अपमान है। आँखों में धूल झोंकना में सचमुच धूल ज़रूरी नहीं; इसका अर्थ धोखा देना है। लोकोक्ति सामान्यतः लोक में प्रचलित पूरा कथन होती है, जो जीवन, व्यवहार या समाज पर सामान्य सीख, निर्णय या व्यावहारिक बुद्धि व्यक्त करती है। जैसी करनी वैसी भरनी यह बताती है कि व्यक्ति अपने कर्मों का फल भोगता है। नाच न जाने आँगन टेढ़ा उस व्यक्ति पर चोट करती है जो अपनी अयोग्यता का दोष बाहरी परिस्थिति पर डालता है।
सबसे सरल अंतर व्याकरणिक और कार्यगत है। मुहावरा वाक्य के भीतर पदबंध की तरह आता है: उसने अफसरों की आँखों में धूल झोंकी; यहाँ उसका रंगे हाथ पकड़ा जाना तय था। लोकोक्ति किसी स्थिति पर लगभग पूरा टिप्पणी-वाक्य बन सकती है: जिसकी लाठी उसकी भैंस उस प्रसंग में उपयुक्त है जहाँ न्याय नहीं, बल नियंत्रण तय करता है। मुहावरे अक्सर क्रिया-केंद्रित होते हैं; लोकोक्तियाँ स्थिति-केंद्रित और निर्णय-केंद्रित होती हैं। इसका अर्थ यह नहीं कि मुहावरों में कभी नैतिक संकेत नहीं होता या लोकोक्तियों में चित्रात्मकता नहीं होती। परीक्षा का भ्रम यहीं बनता है। भैंस के आगे बीन बजाना दृश्य के कारण लोकोक्ति जैसा लगता है, पर कई वस्तुनिष्ठ प्रसंगों में यह ऐसे व्यक्ति के सामने व्यर्थ प्रयास का मुहावरेदार प्रयोग बनता है जो बात ग्रहण ही नहीं कर सकता। दूसरी ओर ऊँट के मुँह में जीरा सामान्यतः अपर्याप्तता की लोकोक्ति-जैसी उक्ति है: बहुत बड़ी ज़रूरत के सामने अत्यंत छोटी मात्रा।
RPSC स्तर पर केवल स्कूलों में चलने वाली छोटी परिभाषाओं की सूची काफी नहीं है। प्रश्नपत्र वयस्क भाषिक स्तर चाहता है: प्रशासनिक लापरवाही, सार्वजनिक किरकिरी, जाँच, दबाव, जवाबदेही, अवसरवाद, झूठा बहाना और आचरण का मूल्यांकन। प्रश्न पढ़ते समय पहले तय करें कि अभिव्यक्ति स्थिर मुहावरा है, जिसके लिए निकटतम अर्थ चाहिए, या सामान्य कथन है, जिसके लिए स्थिति का सर्वश्रेष्ठ सीख चाहिए। फिर विकल्पों को प्रयोग से जाँचें: क्या यह अर्थ वाक्य में स्वाभाविक बैठेगा, या केवल किसी एक शब्द का शाब्दिक अनुवाद है? सही उत्तर वह है जो रूढ़ अर्थ बचाता है, न कि वह जो दृश्य-चित्र से सबसे मिलता-जुलता दिखता है। अंग्रेज़ी माध्यम से तैयारी करते समय हिंदी अभिव्यक्ति को रोमन लिपि में लिख सकते हैं, लेकिन उसका अर्थ किसी ढीले अंग्रेज़ी नाम की तरह नहीं, पूरे वाक्य में उसके असर से समझें।
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