वाक्यांश के लिए एक शब्द
मुख्य तथ्य
- इस अध्याय में वाक्यांश के लिए एक शब्द का अर्थ है दिए गए वाक्यांश के लिए सटीक सार्थक शब्द चुनना, व्याकरण से नया शब्द बनाना नहीं।
- विकल्प देखने से पहले वाक्यांश को परिभाषा की तरह पढ़कर उसका नियंत्रक संकेत पहचानें।
- व्यक्ति-सूचक शब्दों में आदत, गुण, भूमिका, संबंध, विश्वास और नैतिक मूल्य-निर्णय को अलग-अलग रखें।
- कर्ता-सूचक, क्रिया-सूचक और अवस्था-सूचक संज्ञाएँ अलग स्तर हैं; इन्हें मिलाने से उत्तर गलत होता है।
- अधिसूचना, परिपत्र, ज्ञापन, प्रतिवेदन, कार्यसूची और कार्यवृत्त जैसे शब्द प्रशासनिक औपचारिक प्रयोग में आते हैं।
मुख्य बिंदु
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इस अध्याय में वाक्यांश के लिए एक शब्द का अर्थ है दिए गए वाक्यांश के लिए सटीक सार्थक शब्द चुनना, व्याकरण से नया शब्द बनाना नहीं।
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विकल्प देखने से पहले वाक्यांश को परिभाषा की तरह पढ़कर उसका नियंत्रक संकेत पहचानें।
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व्यक्ति-सूचक शब्दों में आदत, गुण, भूमिका, संबंध, विश्वास और नैतिक मूल्य-निर्णय को अलग-अलग रखें।
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कर्ता-सूचक, क्रिया-सूचक और अवस्था-सूचक संज्ञाएँ अलग स्तर हैं; इन्हें मिलाने से उत्तर गलत होता है।
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अधिसूचना, परिपत्र, ज्ञापन, प्रतिवेदन, कार्यसूची और कार्यवृत्त जैसे शब्द प्रशासनिक औपचारिक प्रयोग में आते हैं।
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अभियुक्त, अपराधी, दोषसिद्धि, दोषमुक्ति, अभिरक्षा और जमानत जैसे विधिक शब्द प्रक्रिया के चरण से तय होते हैं।
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निकट विकल्पों में अंतर प्रायः दायरे, विषय, समय-चरण, मूल्य-निर्णय या प्रयोग-स्तर का होता है।
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उलटी अर्थ-सजगता का मतलब है शब्द देखकर उसका ठीक वाक्यांश याद कर पाना।
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अनुपयुक्त पर्याय वाले प्रश्न में हर विकल्प की परिभाषा मिलाकर देखें कि कौन-सा अर्थ जोड़ता, घटाता या उलटता है।
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अच्छे दोहराई कार्ड में शब्द, सही वाक्यांश, गलत विकल्प की चेतावनी और प्रयोग-स्तर लिखा होना चाहिए।
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मितव्ययी संयम से खर्च करने वाला है, अपव्ययी फिजूल खर्च करने वाला है, और कंजूस या कृपण खर्च न करने की नकारात्मक प्रवृत्ति बताता है।
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सूचना व्यापक शब्द है, जबकि अधिसूचना सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी आधिकारिक सूचना है।
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अभियुक्त या आरोपी पर आरोप लगा होता है; अपराधी या दोषी शब्द दोष सिद्ध होने का संकेत दे सकता है।
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समयबद्ध अभ्यास में गलती को दायरा-त्रुटि, विषय-त्रुटि, समय-चरण त्रुटि, मूल्य-निर्णय त्रुटि या प्रयोग-स्तर त्रुटि के रूप में चिह्नित करें।
आरपीएससी उपनिरीक्षक में वाक्यांश के लिए एक शब्द का दायरा क्या है?
आरपीएससी उपनिरीक्षक में वाक्यांश के लिए एक शब्द का दायरा यह है कि दिए गए पूरे वाक्यांश के लिए वही संक्षिप्त, सार्थक और औपचारिक हिंदी शब्द चुना जाए जो अर्थ को न बढ़ाए, न घटाए।
आरपीएससी के उपनिरीक्षक और प्लाटून कमांडर प्रतियोगी परीक्षा २०२५ के आधिकारिक प्रथम प्रश्न-पत्र हिंदी पाठ्यक्रम में शब्द ज्ञान को तीसरे विषय-बिंदु के रूप में रखा गया है।
आरपीएससी उपनिरीक्षक के हिंदी प्रश्न-पत्र में वाक्यांश के लिए एक शब्द का अर्थ है दिए गए वाक्यांश के लिए सबसे सटीक सार्थक शब्द चुनना। यहाँ लक्ष्य व्याकरण के नियम से नया शब्द बनाना नहीं है। पाठ्यक्रम में वाक्यांश के लिए सार्थक शब्द को शब्द ज्ञान के अंतर्गत रखा गया है, जहाँ पर्यायवाची, विलोम, शब्द-युग्मों का अर्थ-भेद, समान उच्चारण वाले भिन्नार्थक शब्द, समान दिखने वाले शब्दों में अंतर, उपयुक्त शब्द-चयन और संबंधवाचक शब्द भी आते हैं। इससे साफ है कि परीक्षक शब्द-भंडार के साथ अर्थ-निर्णय की क्षमता देखता है। अभ्यर्थी के सामने किसी बात को बार-बार सोचने की अवस्था, सरकार द्वारा जारी आधिकारिक सूचना, दूसरों की भलाई चाहने वाला व्यक्ति या जन्म से अंधा व्यक्ति जैसे वाक्यांश आते हैं और उसे निकट विकल्पों में से ठीक एक संक्षिप्त हिंदी शब्द चुनना होता है। शब्द तभी सार्थक है जब वह वाक्यांश के विषय, दायरे, समय-भाव, मूल्य-निर्णय और प्रयोग-स्तर को बचाए रखे।
मुख्य अभ्यास यह है कि वाक्यांश को परिभाषा की तरह पढ़ा जाए। पहले परिचित विकल्प पर नहीं जाना चाहिए; पहले यह पहचानना चाहिए कि वाक्यांश का नियंत्रक संकेत क्या है। यदि वाक्यांश किसी व्यक्ति को बता रहा है, तो देखें कि बात स्थायी गुण की है, अस्थायी आचरण की, सामाजिक भूमिका की, पेशे की, पारिवारिक संबंध की या नैतिक मूल्यांकन की। यदि वह किसी क्रिया को बता रहा है, तो तय करें कि शब्द क्रिया का नाम है, क्रिया के परिणाम का नाम है, उसे अधिकृत करने वाले आदेश का नाम है या उसे दर्ज करने वाले दस्तावेज का नाम है। यदि वह अवस्था बता रहा है, तो देखें कि अवस्था शारीरिक है, मानसिक है, विधिक है, सामाजिक है या प्रशासनिक है। जैसे जो कभी समाप्त न हो में नियंत्रक संकेत अनंत अवधि है। इसलिए वस्तु के अनुसार अनंत या शाश्वत ठीक हो सकता है; अमर सामान्यतः जीव, यश या मृत्यु से परे अस्तित्व से जुड़ता है, हर अंतहीन वस्तु से नहीं।
आरपीएससी शैली में विकल्प सूक्ष्म अंतर पर टिके होते हैं। किसी प्रश्न में चारों विकल्प अच्छे हिंदी शब्द हो सकते हैं, पर वाक्यांश से ठीक-ठीक मेल केवल एक ही खा सकता है। परोपकारी, दानी, उदार और सहृदय एक-दूसरे से जुड़े हैं, पर समान नहीं हैं। परोपकारी वह है जो दूसरों के हित में काम करे; दानी धन या वस्तु देने वाला है; उदार देने या दृष्टि में व्यापक है; सहृदय संवेदनशील और सहानुभूति रखने वाला है। यदि वाक्यांश हो जो दूसरों का उपकार करे, तो परोपकारी दानी से अधिक सुरक्षित है। यदि वाक्यांश हो जो दान देने में रुचि रखता हो, तो दानी अधिक सटीक है। इसलिए केवल पर्यायवाची रट लेना इस अध्याय में पर्याप्त नहीं होता।
तैयारी दो दिशाओं में होनी चाहिए। पहली दिशा है वाक्यांश से शब्द: वाक्यांश हेतु उपयुक्त शब्द। दूसरी दिशा है शब्द से वाक्यांश: मितव्ययी, अपव्ययी, कंजूस, कृपण, उदार या दानी दिखे तो तुरंत उसका परिभाषात्मक वाक्यांश याद आना चाहिए। यही उलटी अर्थ-सजगता निकट पर्यायों की गलती रोकती है, क्योंकि इससे शब्द की सीमा स्पष्ट होती है। मितव्ययी वह है जो सोच-समझकर और संयम से खर्च करे; कंजूस या कृपण में खर्च न करने की नकारात्मक प्रवृत्ति है। दोनों खर्च से जुड़े हैं, पर मूल्य-निर्णय अलग है।
प्रश्न-पत्र वस्तुनिष्ठ और समयबद्ध होता है, इसलिए तैयारी पहचान और भेद, दोनों पर आधारित होनी चाहिए। छोटे-छोटे समूह बनाइए: व्यक्ति-सूचक शब्द, गुण-सूचक शब्द, क्रिया-सूचक शब्द, अवस्था-सूचक शब्द, प्रशासनिक शब्द, विधिक औपचारिक शब्द, साहित्यिक शब्द और नकारात्मक चरित्र वाले शब्द। हर शब्द के साथ एक पंक्ति का वाक्यांश, दो निकट गलत विकल्प और उनके गलत होने का कारण लिखें। यह लंबी व्युत्पत्ति पढ़ने से अधिक परीक्षा-उपयोगी है। निरक्षर, साक्षर, अदृश्य, अजेय, सर्वज्ञ, अल्पज्ञ और कृतज्ञ जैसे शब्दों में उपसर्ग या मूल-रचना सहायक हो सकती है, पर उत्तर अंततः व्यवहार में प्रयुक्त अर्थ से तय होगा। इस अध्याय में दिखाना यह नहीं है कि शब्द कैसे बना; जानना यह है कि औपचारिक हिंदी में दिए गए वाक्यांश के लिए कौन-सा शब्द उचित है।
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