मुख्य तथ्य

  • पर्यायवाची प्रश्न केवल संबंधित शब्द नहीं, समान या सबसे निकट अर्थ वाला शब्द मांगता है।
  • RPSC उपनिरीक्षक हिंदी में समूह-विकल्प का अभ्यास ज़रूरी है, क्योंकि प्रश्न ‘सभी पर्यायवाची चुनिए’ या ‘कौन-सा शब्द पर्यायवाची नहीं है?’ जैसे रूपों में आ...
  • सूर्य, चंद्र, जल, आकाश, अग्नि, वायु, नदी, समुद्र, पर्वत, कमल और बादल जैसे प्रकृति-संबंधी शब्द-समूहों को अच्छी तरह तैयार करें।
  • तत्सम और साहित्यिक पर्यायों में रवि, सलिल, व्योम, पावक और नृप जैसे शब्दों को पक्का रखना चाहिए।
  • भाववाचक पर्यायों में तीव्रता समझनी पड़ती है; शोक, पीड़ा, विषाद और संताप हमेशा पूरी तरह अदला-बदली योग्य नहीं।

मुख्य बिंदु

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    पर्यायवाची प्रश्न केवल संबंधित शब्द नहीं, समान या सबसे निकट अर्थ वाला शब्द मांगता है।

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    RPSC उपनिरीक्षक हिंदी में समूह-विकल्प का अभ्यास ज़रूरी है, क्योंकि प्रश्न ‘सभी पर्यायवाची चुनिए’ या ‘कौन-सा शब्द पर्यायवाची नहीं है?’ जैसे रूपों में आ सकते हैं।

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    सूर्य, चंद्र, जल, आकाश, अग्नि, वायु, नदी, समुद्र, पर्वत, कमल और बादल जैसे प्रकृति-संबंधी शब्द-समूहों को अच्छी तरह तैयार करें।

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    तत्सम और साहित्यिक पर्यायों में रवि, सलिल, व्योम, पावक और नृप जैसे शब्दों को पक्का रखना चाहिए।

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    भाववाचक पर्यायों में तीव्रता समझनी पड़ती है; शोक, पीड़ा, विषाद और संताप हमेशा पूरी तरह अदला-बदली योग्य नहीं।

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    शासन, प्रशासन, सरकार, राज्य, नीति और कानून जुड़े हुए शब्द हैं, पर सटीक अर्थ के अनुसार अलग रखे जाने चाहिए।

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    असंगत पर्याय प्रश्न में पहले तीन या अधिक शब्दों का साझा अर्थ खोजें, फिर अर्थ-क्षेत्र से बाहर शब्द चिह्नित करें।

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    निकट-पर्याय पहचानते समय अर्थ की चौड़ाई, तीव्रता, भाषिक स्तर, पद-भेद और वाक्य में सही प्रयोग जांचें।

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    विलोम अभ्यास को साथ रखें, पर अलग स्तंभ में रखें ताकि परिचित विपरीत जोड़े पर्याय न समझे जाएं।

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    उपयुक्त शब्द चयन में वाक्य निर्णायक होता है; कोई शब्द व्यापक पर्याय होकर भी किसी खास वाक्य में अनुपयुक्त हो सकता है।

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    बोलचाल, मानक और औपचारिक पर्यायों को अलग-अलग खानों में लिखी तालिका, बेतरतीब शब्दकोश-सूची से परीक्षा की तैयारी में ज़्यादा काम आती है।

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    जल के लिए नदी, आकाश के लिए मेघ और शासन के लिए नीति जैसे शब्द आम गलत विकल्प हैं, क्योंकि वे उसी विषय से जुड़े हैं, पर सटीक पर्याय नहीं।

RPSC उपनिरीक्षक में पर्यायवाची शब्द का दायरा और परीक्षा ढांचा क्या है?

RPSC उपनिरीक्षक हिंदी में पर्यायवाची प्रश्न समान या सबसे निकट अर्थ पहचानने और केवल संबंधित शब्दों को हटाने की समझ जांचते हैं। RPSC पाठ्यक्रम के अनुसार सामान्य हिंदी का प्रश्न-पत्र 200 अंकों का है और बहुविकल्पीय ढांचे में होता है। पाठ्यक्रम की प्रविष्टि 3 में पर्यायवाची, विलोम, समानार्थी शब्दों का विवेक, उपयुक्त शब्द चयन और संबंधित शब्दावली को शब्द-ज्ञान के अंतर्गत रखा गया है। इसलिए तैयारी में शब्द याद करने के साथ उनके अर्थ का फर्क पहचानना भी ज़रूरी है। सीधी सूची तभी काम आती है जब अभ्यर्थी उन शब्दों को भी हटाना जानता हो जो जुड़े लगते हैं, पर समान अर्थ नहीं देते।

पर्यायवाची शब्द का मूल अर्थ है ऐसा शब्द जो अर्थ की दृष्टि से दूसरे शब्द के स्थान पर आ सके। परीक्षा में पूरी तरह अदला-बदली हमेशा संभव नहीं होती। हिंदी में बोलचाल, मानक, प्रशासनिक, साहित्यिक और तत्सम स्तर साथ-साथ चलते हैं। जैसे पानी, जल, नीर और वारि पानी के अर्थ-क्षेत्र से जुड़े हैं, पर उनका भाषिक स्तर अलग है। रोजमर्रा में पानी स्वाभाविक है, जबकि औपचारिक या काव्यात्मक सूची में जल, नीर, सलिल और वारि अधिक आते हैं। RPSC के विकल्प कई बार सामान्य बोलचाल नहीं, औपचारिक या साहित्यिक पर्याय मांगते हैं। इसलिए हर प्रश्न में पूछें: क्या यहां सामान्य अर्थ पूछा जा रहा है, साहित्यिक स्तर पूछा जा रहा है, या समूह में असंगत शब्द खोजा जा रहा है?

आधिकारिक पाठ्यक्रम में पर्यायवाची और समानार्थी शब्दों का विवेक साफ तौर पर शामिल है, इसलिए तैयारी केवल राजा और नृप जैसे अलग-अलग जोड़े रटने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। यह भी अभ्यास करें कि दिए गए सभी शब्द पर्याय हैं या नहीं, कौन-सा शब्द समूह से बाहर है और किस विकल्प में सही पर्याय-समूह है। ऐसे प्रश्नों में पहले साझा अर्थ पहचानें, फिर हर शब्द का उससे मिलान करें। यदि तीन शब्द आकाश के लिए हैं और एक बादल के लिए, तो केवल प्रकृति-संबंध देखकर उत्तर नहीं मिलेगा; सही उत्तर के लिए अर्थ-क्षेत्र को संकीर्ण करना पड़ेगा।

तीन सीमाएं हमेशा साफ रखें। पहली, पर्यायवाची और विलोम अलग हैं। पर्यायवाची समान अर्थ खोजता है, जबकि विलोम विपरीत अर्थ। सुख और दुःख साथ याद होते हैं, पर वे पर्याय नहीं हैं। दूसरी, पर्यायवाची और संबंधित शब्द अलग हैं। शासन, प्रशासन, सरकार, राज्य और व्यवस्था जुड़े हुए हैं, पर हर जगह एक-दूसरे के स्थान पर नहीं रखे जा सकते। तीसरी, पर्यायवाची और उपयुक्त शब्द चयन अलग हैं। उपयुक्त शब्द चयन वाक्य में सही बैठने वाला शब्द मांगता है; पर्यायवाची प्रश्न बिना वाक्य के भी अर्थ पूछ सकता है। पाठ्यक्रम में ये विषय जुड़े हैं, पर इनमें होने वाली आम गलतियां अलग हैं।

सीधे पर्याय प्रश्न में तीन चरण अपनाएं। मूल शब्द का केंद्रीय अर्थ पहचानें, विलोम और असंबद्ध शब्द हटाएं, फिर अपेक्षित भाषिक स्तर में सबसे निकट शब्द चुनें। असंगत पर्याय प्रश्न में इसी क्रम को उलट दें: तीन शब्दों का साझा अर्थ खोजें और जो उससे बाहर हो उसे चिह्नित करें। उदाहरण के लिए प्रभात, उषा, अरुणोदय और संध्या में पहले तीन शब्द सुबह या भोर की ओर जाते हैं, जबकि संध्या शाम का समय है। वह समय-सूचक शब्द जरूर है, पर वही समय नहीं है। यही परीक्षा-कौशल है: संबंधित होना काफी नहीं, समान या सबसे निकट अर्थ चाहिए।

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