प्रत्यय
मुख्य तथ्य
- प्रत्यय धातु, मूल शब्द या आधार रूप के बाद लगता है; उपसर्ग आधार से पहले लगता है।
- सही प्रत्यय-पहचान के लिए मूल शब्द, जुड़ा हुआ अंत और अर्थ में आया बदलाव जाँचें; केवल अंतिम ध्वनि मिलना पर्याप्त नहीं है।
- कृत प्रत्यय मुख्यतः धातु या क्रिया में जुड़कर क्रियावाचक संज्ञा, कर्तृवाचक संज्ञा, साधन, परिणाम या संबंधित विशेषण बनाते हैं।
- तद्धित प्रत्यय मुख्यतः संज्ञा या विशेषण में जुड़कर भाव, संबंध, उत्पत्ति, जाति या समुदाय, गुण, किसी गुण या वस्तु का होना या स्थान-संबंध बताते हैं।
- सुंदरता, कठोरता, मिठास और गरमाहट जैसे शब्द भाववाचक प्रत्यय-रूपों के उपयोगी उदाहरण हैं।
मुख्य बिंदु
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प्रत्यय धातु, मूल शब्द या आधार रूप के बाद लगता है; उपसर्ग आधार से पहले लगता है।
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सही प्रत्यय-पहचान के लिए मूल शब्द, जुड़ा हुआ अंत और अर्थ में आया बदलाव जाँचें; केवल अंतिम ध्वनि मिलना पर्याप्त नहीं है।
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कृत प्रत्यय मुख्यतः धातु या क्रिया में जुड़कर क्रियावाचक संज्ञा, कर्तृवाचक संज्ञा, साधन, परिणाम या संबंधित विशेषण बनाते हैं।
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तद्धित प्रत्यय मुख्यतः संज्ञा या विशेषण में जुड़कर भाव, संबंध, उत्पत्ति, जाति या समुदाय, गुण, किसी गुण या वस्तु का होना या स्थान-संबंध बताते हैं।
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सुंदरता, कठोरता, मिठास और गरमाहट जैसे शब्द भाववाचक प्रत्यय-रूपों के उपयोगी उदाहरण हैं।
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लेखक, पाठक, गायक और रक्षक जैसे शब्दों को मूल क्रिया और करने वाले व्यक्ति के अर्थ से जाँचें।
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अभ्यास के लिए ईन, गार, दान, इय या ईय, आवट और ता उपयोगी हैं; ल या अल वाले संदेहास्पद अंत को तभी प्रत्यय मानें, जब सार्थक मूल शब्द साफ बचे।
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निर्भयता जैसे उपसर्ग और प्रत्यय वाले शब्द को केवल दो जोड़े गए अंश देखकर द्वि-प्रत्यय शब्द न मानें।
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भारतीयता और मानवीयता जैसे शब्दों में मूल शब्द के बाद क्रम से दो प्रत्यय जुड़ते हैं।
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प्रत्ययरहित विकल्प पहचानने के लिए संदेहास्पद अंत हटाकर देखें कि सार्थक मूल शब्द और अर्थ में बदलाव बचते हैं या नहीं।
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RPSC उपनिरीक्षक की तैयारी में सही प्रत्यय वाले उदाहरणों के साथ उनसे मिलते-जुलते अपवाद भी सीखें।
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एक ही शब्द में एक से अधिक प्रक्रिया हो, तब भी प्रत्यय को संधि, समास और उपसर्ग से अलग पहचानें।
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प्रत्यय क्या है और इसे उपसर्ग, संधि और समास से कैसे अलग पहचानें?
प्रत्यय वह शब्दांश है जो किसी धातु, मूल शब्द या आधार रूप के बाद जुड़कर नया शब्द बनाता है या व्याकरणिक संबंध स्पष्ट करता है; इसे उपसर्ग, संधि और समास से अलग पहचानने के लिए आधार के बाद जुड़े अंश और उससे बने नए अर्थ को देखा जाता है। राजस्थान लोक सेवा आयोग के आधिकारिक उपनिरीक्षक और प्लाटून कमांडर पाठ्यक्रम में हिंदी प्रश्नपत्र के लिए अधिकतम अंक 200 दिए गए हैं। हिंदी व्याकरण में सामान्य परिभाषा यही है कि जो अंश शब्द या धातु के अंत में लगकर नया रूप बनाए, वह प्रत्यय कहलाता है। इसका उपसर्ग से सीधा अंतर है। उपसर्ग आधार के पहले लगता है, प्रत्यय आधार के बाद। जैसे अज्ञान में अ, ज्ञान से पहले आया है, इसलिए वह उपसर्ग है। ज्ञानी में ज्ञान के बाद ई प्रत्यय लगा है, जिससे ज्ञान रखने वाले व्यक्ति का अर्थ बनता है। RPSC प्रथम प्रश्नपत्र में शब्द-रचना हिंदी पाठ्यक्रम का भाग है, इसलिए यहाँ लंबी सैद्धांतिक परिभाषा से अधिक ज़रूरी है कि अभ्यर्थी विकल्पों में प्रत्यययुक्त, प्रत्ययरहित और द्वि-प्रत्यय शब्द पहचान सके।
सबसे सुरक्षित तरीका मूल शब्द से शुरू करना है। तीन सवाल क्रम से पूछें। पहला, पहचानने योग्य आधार क्या है: धातु, क्रिया, संज्ञा या विशेषण? दूसरा, उसके बाद कौन-सा अंत जुड़ा है? तीसरा, उस अंत से अर्थ में वह बदलाव आया है या नहीं जो आमतौर पर उस प्रत्यय से आता है? मिठास को मीठा और आस के रूप में समझा जा सकता है, जहाँ गुण का भाव बनता है। लिखने की क्रिया से लेखक जैसा कर्ता-सूचक शब्द बनता है। गरमाहट में गरमी या ताप की अनुभूति का भाव है, जहाँ अंत स्थिति या भाववाचक संज्ञा बनाता है। यदि अंत कोई नियमित शब्द-रचना संबंध नहीं बना रहा, तो केवल अंतिम अक्षर देखकर प्रत्यय मानना गलत होगा।
प्रत्यय और उपसर्ग का अंतर संधि और समास से भी अलग रखना चाहिए। संधि में ध्वनियाँ मिलती या बदलती हैं, जैसे स्वर या व्यंजन के मेल पर ध्वनि-परिवर्तन। समास में दो या अधिक सार्थक शब्द मिलकर संयुक्त पद बनाते हैं, जहाँ विशेषण-विशेष्य, कर्मधारय, तत्पुरुष आदि संबंध देखे जाते हैं। प्रत्यय-उपसर्ग विश्लेषण में ध्यान इस बात पर रहता है कि किसी एक बने हुए शब्द के आरंभ या अंत में कौन-सा जोड़ा गया अंश काम कर रहा है। एक शब्द में एक से अधिक प्रक्रियाएँ भी हो सकती हैं, पर प्रश्न का संकेत बताता है कि क्या देखना है। प्रत्यययुक्त शब्द पूछा है तो अंत देखें। उपसर्गयुक्त पूछा है तो शुरुआत देखें। संधि-विच्छेद पूछा है तो ध्वनि-सीमा देखें।
RPSC में एक सामान्य जाल समान दिखने वाला अंत है। हर अंतिम ता प्रत्यय नहीं होता। लता में अंतिम ता मूल शब्द का ही हिस्सा है। इसके विपरीत सुंदरता, सुंदर और ता से मिलकर भाववाचक संज्ञा बनती है। इसी तरह दान पर समाप्त हर शब्द में प्रत्यय-सूचक अर्थ नहीं होगा। दान स्वयं भी देने के अर्थ वाला स्वतंत्र शब्द है; कुछ बने हुए शब्दों में वह अंत या संयुक्त अंश की तरह दिख सकता है। अभ्यर्थी को यह तय करना होगा कि अंतिम खंड अलग किया जा सकता है या नहीं और अलग करने पर नया अर्थ बनता है या नहीं।
स्नातक स्तर पर प्रत्यय को केवल रटें नहीं; शब्द को तोड़कर उसका मूल और प्रत्यय पहचानने का अभ्यास करें। विकल्प लिखकर मूल शब्द और प्रत्यय को अलग करें, फिर अर्थ में आया बदलाव दो-तीन शब्दों में बताएँ। सही विश्लेषण हिंदी में स्वाभाविक लगना चाहिए: मूल शब्द और प्रत्यय मिलकर वर्तमान शब्द का अर्थ समझा दें। यदि व्याख्या बनावटी लगती है, तो वह विकल्प प्रत्ययरहित हो सकता है या उपसर्ग, समास, संधि अथवा साधारण मूल शब्द से जुड़ा हो सकता है। यह आदत खासकर उन प्रश्नों में काम आती है जहाँ तीन विकल्पों में सचमुच प्रत्यय हो और चौथा केवल उनके जैसा दिखता हो।
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