मुख्य तथ्य

  • उपसर्ग मूल शब्द से पहले लगने वाला अर्थवान तत्व है; इसलिए उसका विश्लेषण शब्द के बाएँ किनारे से शुरू होता है।
  • आरपीएससी उपनिरीक्षक हिंदी पाठ्यक्रम में उपसर्ग, संधि, समास और प्रत्यय के साथ शब्द-रचना समूह में आता है।
  • सच्चा उपसर्ग वही है जो आधार के अर्थ में स्पष्ट परिवर्तन करे; केवल आरंभिक अक्षर मिलना पर्याप्त नहीं है।
  • अ और अन् सामान्यतः निषेध, अभाव या विपरीत अर्थ देते हैं।
  • सु अच्छे, उचित या सुगम गुण का भाव देता है, जबकि दु, दुर् और दुष् दोष, कठिनता या प्रतिकूलता दिखाते हैं।

मुख्य बिंदु

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    उपसर्ग मूल शब्द से पहले लगने वाला अर्थवान तत्व है; इसलिए उसका विश्लेषण शब्द के बाएँ किनारे से शुरू होता है।

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    आरपीएससी उपनिरीक्षक हिंदी पाठ्यक्रम में उपसर्ग, संधि, समास और प्रत्यय के साथ शब्द-रचना समूह में आता है।

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    सच्चा उपसर्ग वही है जो आधार के अर्थ में स्पष्ट परिवर्तन करे; केवल आरंभिक अक्षर मिलना पर्याप्त नहीं है।

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    अ और अन् सामान्यतः निषेध, अभाव या विपरीत अर्थ देते हैं।

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    सु अच्छे, उचित या सुगम गुण का भाव देता है, जबकि दु, दुर् और दुष् दोष, कठिनता या प्रतिकूलता दिखाते हैं।

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    प्रति का अर्थ शब्द के अनुसार प्रत्येक, ओर, विरोध, प्रत्युत्तर या समकक्ष हो सकता है।

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    उप प्रायः निकटता, गौण स्थिति या सहायक संबंध बताता है।

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    सम् ध्वनि-अनुकूलन के कारण सं, सम या द्वित्व वाले रूपों में भी दिख सकता है।

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    वि औपचारिक हिंदी में विभाजन, भेद, विश्लेषण, विशेषता या विरोध का संकेत देता है।

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    असमानता जैसे शब्द में उपसर्ग और प्रत्यय दोनों हो सकते हैं; उत्तर वही दें जो प्रश्न पूछ रहा है।

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    दो उपसर्ग वाले शब्द में बाहरी उपसर्ग अक्सर ऐसे शब्द पर जुड़ता है जो पहले से उपसर्गीय रचना रखता है।

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    समास में दो शब्दवत् घटक संबंध बनाते हैं, जबकि उपसर्ग में पहला तत्व बंधा हुआ अर्थ-संशोधक होता है।

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    गैर, बे, सह, स्व और पुन जैसे आधुनिक पूर्व-तत्व शब्दार्थ में मदद करते हैं, पर वस्तुनिष्ठ उत्तर प्रश्न के व्याकरणिक ढांचे से तय होगा।

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    सबसे सुरक्षित विधि है: संदिग्ध उपसर्ग पहचानें, बचा आधार जांचें, अर्थ-संबंध मिलाएँ, फिर प्रत्यय और समास को अलग करें।

आरपीएससी उपनिरीक्षक में उपसर्ग को कैसे पढ़ना चाहिए?

आरपीएससी उपनिरीक्षक में उपसर्ग को शब्द-सूची की तरह नहीं, बल्कि शब्द बनने की पद्धति और अर्थ बदलने वाले पूर्व-तत्व की तरह पढ़ना चाहिए। आरपीएससी के आधिकारिक हिंदी प्रथम प्रश्न-पत्र में अधिकतम अंक २०० रखे गए हैं, इसलिए उपसर्ग जैसा छोटा व्याकरणिक बिंदु भी अंक बचाने और विकल्प काटने के लिए गंभीर तैयारी मांगता है। आरपीएससी उपनिरीक्षक हिंदी प्रश्न-पत्र में उपसर्ग को केवल शब्द-सूची की तरह नहीं पढ़ना चाहिए। यह शब्द-रचना का हिस्सा है। आधिकारिक प्रथम प्रश्न-पत्र के हिंदी पाठ्यक्रम में संधि, संधि-विच्छेद, समास, उपसर्ग और प्रत्यय को एक ही व्याकरणिक समूह में रखा गया है। इस क्रम का अर्थ है कि अभ्यर्थी से शब्द के बनने की पद्धति पहचानने की अपेक्षा है, केवल परिभाषा रटने की नहीं। यह अध्याय उपसर्ग को अलग करके समझाता है, पर तैयारी में इसे संधि, समास और प्रत्यय से जोड़कर ही रखना होगा।

उपसर्ग वह सार्थक शब्दांश है जो मूल शब्द या धातु-सदृश आधार से पहले लगकर नया शब्द या बदला हुआ अर्थ बनाता है। हिंदी व्याकरण में उपसर्ग सामान्यतः स्वतंत्र शब्द की तरह नहीं आता, बल्कि आधार से पहले जुड़ता है। अधर्म में अ, धर्म से पहले लगकर अर्थ को उलट देता है। सुपुत्र में सु, पुत्र में श्रेष्ठ या अच्छा होने का भाव जोड़ता है। प्रतिदिन में प्रति, दिन के साथ प्रत्येक का अर्थ देता है। परीक्षा में इन उदाहरणों का मूल्य इस बात में है कि पहला खंड तभी उपसर्ग माना जाए जब वह पूरे शब्द के अर्थ में स्पष्ट योगदान दे।

पहली सीमा प्रत्यय से है। प्रत्यय आधार के बाद लगता है और कई बार भाववाचकता, गुण, अवस्था या शब्द-भेद बदलता है। ता, पन, ई, क जैसे अंत-रूप कई शब्दों में प्रत्यय-विश्लेषण मांग सकते हैं। उपसर्ग हमेशा आधार से पहले देखा जाता है। अनुशासन में उपसर्ग पूछा जाए तो विश्लेषण शब्द के बाएँ किनारे से शुरू होगा; किसी भाववाचक संज्ञा में प्रत्यय पूछा जाए तो ध्यान दाएँ किनारे पर जाएगा। सामान्य भूल यह है कि हटता हुआ दिखने वाला हर खंड उपसर्ग मान लिया जाता है। स्थान, अर्थ और बचा हुआ आधार तीनों मिलें तभी उत्तर सुरक्षित है।

दूसरी सीमा समास से है। समास में दो सार्थक शब्द या पद मिलकर किसी संबंध को संक्षेप में व्यक्त करते हैं और कई बार समास का भेद भी पूछा जाता है। उपसर्ग में पहला भाग बंधा हुआ पूर्व-तत्व होता है, जिसका काम आधार का अर्थ बदलना है। राजपुत्र को समास की दृष्टि से देखना स्वाभाविक है, क्योंकि राज और पुत्र दोनों शब्दवत् घटक हैं। सुपुत्र उपसर्ग-रचना है, क्योंकि सु स्वतंत्र शब्द की तरह नहीं, गुणसूचक पूर्व-तत्व की तरह काम करता है।

आरपीएससी शैली के वस्तुनिष्ठ प्रश्नों में उपसर्ग की तैयारी तीन कामों पर टिकती है। पहला, दिए गए शब्द में उपसर्ग पहचानना: अपमान में अप, निराशा में नि या निर् का रूप, विपरीत में वि। दूसरा, उपसर्ग को उसके व्यापक अर्थ से मिलाना: अ और अन् निषेध, सु श्रेष्ठता, दु या दुर् दोष या कठिनता, प्रति प्रत्यावर्तन, विरोध या प्रत्येकता, उप निकटता या गौण संबंध। तीसरा, स्तरित रचना देखना, जहाँ आधार से पहले दो उपसर्गवत् तत्व हो सकते हैं। हर शब्द पर चार प्रश्न करें: मूल आधार क्या है, उससे पहले क्या जुड़ा है, उस जुड़ाव का उपसर्गीय अर्थ है या नहीं, और अंतिम अर्थ उसी से बनता है या नहीं। यही सावधानी उपसर्ग को प्रत्यय और समास से अलग करती है।