समास
मुख्य तथ्य
- समास की पहचान केवल जुड़े हुए रूप से नहीं, अर्थ रखने वाले पदों और स्पष्ट विग्रह से होती है।
- समस्त पद संक्षिप्त संयुक्त रूप है और विग्रह उसका खुला अर्थ-संबंध दिखाता है।
- संधि ध्वनि-परिवर्तन की जाँच है, जबकि समास पदों के बीच अर्थ और व्याकरणिक संबंध की जाँच है।
- तत्पुरुष के भेद दबे हुए कारक-संबंध से तय होते हैं: कर्म, करण, संप्रदान, अपादान, संबंध और अधिकरण।
- करण तत्पुरुष में से साधन या कारण बताता है; अपादान तत्पुरुष में से अलगाव, स्रोत या मुक्ति बताता है।
मुख्य बिंदु
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समास की पहचान केवल जुड़े हुए रूप से नहीं, अर्थ रखने वाले पदों और स्पष्ट विग्रह से होती है।
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समस्त पद संक्षिप्त संयुक्त रूप है और विग्रह उसका खुला अर्थ-संबंध दिखाता है।
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संधि ध्वनि-परिवर्तन की जाँच है, जबकि समास पदों के बीच अर्थ और व्याकरणिक संबंध की जाँच है।
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तत्पुरुष के भेद दबे हुए कारक-संबंध से तय होते हैं: कर्म, करण, संप्रदान, अपादान, संबंध और अधिकरण।
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करण तत्पुरुष में से साधन या कारण बताता है; अपादान तत्पुरुष में से अलगाव, स्रोत या मुक्ति बताता है।
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संप्रदान तत्पुरुष में उद्देश्य या पाने वाले के लिए ‘के लिए’ और पाने वाले के अर्थ में ‘को’ आता है; इसे संबंध तत्पुरुष न समझें।
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कर्मधारय में पहला पद दूसरे की सीधी विशेषता, पहचान या तुलना बताता है।
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द्विगु में पहला पद संख्या-सूचक होता है और पूरा पद गिने हुए समूह का बोध कराता है; यदि शब्द किसी अलग गुणधारी व्यक्ति या वस्तु को बताए, तो वह बहुव्रीहि है।
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द्वंद्व में और छिपा होता है और दोनों पद समुच्चय में बराबर रहते हैं।
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बहुव्रीहि में समस्त पद अपने पदों से अलग किसी व्यक्ति या वस्तु का बोध कराता है।
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अव्ययीभाव में पूरा समस्त पद अव्ययवत या क्रियाविशेषणीय अर्थ देता है, जैसे यथाशक्ति, प्रतिदिन और आजीवन।
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असमासिक विकल्प पहचानते समय उपसर्ग, प्रत्यय, संधि और रूढ़ शब्दों को समास से अलग रखें।
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समास में समस्त पद और विग्रह कैसे समझें?
समास में समस्त पद वह संक्षिप्त संयुक्त रूप है और विग्रह वही रूप खोलकर उसके भीतर छिपे अर्थ-संबंध को साफ बताता है। RPSC के उप निरीक्षक/प्लाटून कमांडर प्रश्नपत्र 1 हिंदी के आधिकारिक पाठ्यक्रम के अनुसार, प्रश्नपत्र 1 कुल 200 अंकों का है, इसकी अवधि 2 घंटे है, इसमें 100 वस्तुनिष्ठ प्रश्न होते हैं, शब्द-रचना में समास शामिल है और हर गलत उत्तर पर 1/3 अंक काटा जाता है।
समास वह व्याकरणिक प्रक्रिया है जिसमें दो या दो से अधिक सार्थक पदों को जोड़कर छोटा, सघन और अर्थपूर्ण पद बनाया जाता है। इस प्रक्रिया में बीच के कारक-चिह्न, विभक्ति, परसर्ग, संयोजक या व्याख्यात्मक शब्द प्रायः लुप्त हो जाते हैं। जो संक्षिप्त पद बनता है, उसे समस्त पद कहा जाता है, और उसे खोलकर जो अर्थ-संबंध बताया जाता है, वह विग्रह कहलाता है। परीक्षा में समास पहचानने का सही तरीका नाम रटने से शुरू नहीं होता; पहले यह पूछना चाहिए कि दोनों पदों के बीच कौन-सा संबंध छिपा है। राजपुत्र में संबंध राजा का पुत्र है, युद्धभूमि में युद्ध की भूमि है और नीलकमल में नीला कमल है। शब्द छोटा हुआ है, पर विग्रह पूरा अर्थ खोल देता है।
तीन शब्द अलग-अलग याद रखने चाहिए। सामासिक पद वह पद है जिसमें समास की रचना या पहचान की जा रही है। समस्त पद वह अंतिम संक्षिप्त रूप है, जैसे ग्रामवास, दिनरात, दशमुख या चंद्रमौलि। विग्रह उसका खुला अर्थ है, जैसे ग्राम में वास, दिन और रात, दस मुख वाला, या जिसकी मौलि पर चंद्र है। कई व्याकरण पुस्तकों में सामासिक पद और समस्त पद बहुत निकट अर्थ में प्रयुक्त मिलते हैं, लेकिन प्रश्न हल करते समय सुरक्षित अभ्यास यह है कि दिए गए संयुक्त पद को पहचानें, उसका स्वाभाविक विग्रह करें और फिर उस विग्रह से दिखने वाले संबंध के आधार पर भेद चुनें।
सही समास पहचानने की आमतौर पर दो कसौटियाँ हैं। पहली, उसके हिस्से केवल ध्वनियाँ नहीं, बल्कि अर्थ रखने वाले पद हों। दूसरी, विग्रह में उन पदों के बीच व्याकरणिक या अर्थ-संबंध साफ दिखे। देवालय का विग्रह देव के लिए आलय है, इसलिए यह संप्रदान तत्पुरुष है। विद्यालय का विग्रह विद्या के लिए आलय है, इसलिए यह भी संप्रदान तत्पुरुष है। पर जहाँ केवल पास-पास आए वर्णों में ध्वनि-परिवर्तन हुआ हो, वहाँ प्रश्न संधि का हो सकता है, समास का नहीं। राम और ईश्वर से रामेश्वर बनने में सीमा पर ध्वनि-परिवर्तन भी है; इसलिए यदि प्रश्न संधि-विच्छेद पूछ रहा है तो ध्वनि नियम देखें, और यदि समास-विग्रह पूछ रहा है तो अर्थ-संबंध देखें।
RPSC शैली के वस्तुनिष्ठ प्रश्नों में अक्सर एक शब्द या विकल्पों का समूह देकर पूछा जाता है कि किसमें कौन-सा समास है, किसमें समास नहीं है, या दिए गए शब्द का समास-भेद क्या है। तरीका तय रखें: शब्द को उसके संभव अर्थपूर्ण हिस्सों में बाँटें, सबसे सरल मान्य विग्रह लिखें, छिपा संबंध पहचानें और फिर समास का भेद चुनें। यदि विग्रह में का, की, के आता है तो संबंध तत्पुरुष की संभावना देखें। यदि में या पर आता है तो अधिकरण तत्पुरुष देखें। यदि पहला पद दूसरे की सीधी विशेषता बता रहा है तो कर्मधारय देखें। यदि पूरा पद अपने घटकों से बाहर किसी अलग व्यक्ति या वस्तु की ओर संकेत कर रहा है तो बहुव्रीहि देखें। इसी पद्धति से शब्द के बाहरी रूप पर अटकने की गलती कम होती है।
असमासिक विकल्प अक्सर इसलिए आकर्षक लगता है क्योंकि वह भी परिचित या जुड़ा हुआ शब्द होता है। पर जाँचिए कि उसमें दो स्वतंत्र अर्थ रखने वाले पद और स्पष्ट विग्रह हैं या नहीं। अनुशासन, नैतिकता, मानवता जैसे शब्द शब्द-रचना के उदाहरण हो सकते हैं, पर वे अपने-आप समास नहीं हो जाते। उपसर्ग, प्रत्यय, संधि या सामान्य शब्द-निर्माण को समास में जबरन नहीं डालना चाहिए। परीक्षा अनुशासित पहचान को अंक देती है, अतः मजबूत उत्तर यह नहीं है कि शब्द संयुक्त जैसा दिखता है; मजबूत उत्तर यह है कि इस शब्द का यह विग्रह बनता है, उसमें यह संबंध छिपा है, इसलिए यह समास-भेद बनेगा।
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