मुहावरे एवं लोकोक्तियाँ
मुख्य तथ्य
- मुहावरा स्थिर पदबंध होता है जिसका वास्तविक अर्थ लाक्षणिक और रूढ़ होता है, अलग-अलग शब्दों के शाब्दिक अर्थों का योग नहीं।
- अधिकांश मुहावरे वाक्य के भीतर प्रयोग होते हैं; उनके चारों ओर काल, लिंग, वचन और पुरुष का सामंजस्य सही होना चाहिए।
- लोकोक्ति सामान्यतः पूरा कथन होती है जो किसी सामान्य सत्य, व्यवहारिक सीख, नीति या चेतावनी को व्यक्त करती है।
- मुख्य परीक्षा-भेद यह है कि मुहावरा प्रायः पदबंध है और लोकोक्ति प्रायः पूर्ण कथन।
- मुहावरों और लोकोक्तियों का शब्द-दर-शब्द अर्थ नहीं लगाना चाहिए; स्वीकृत अर्थ और प्रसंग का मेल देखना चाहिए।
मुख्य बिंदु
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मुहावरा स्थिर पदबंध होता है जिसका वास्तविक अर्थ लाक्षणिक और रूढ़ होता है, अलग-अलग शब्दों के शाब्दिक अर्थों का योग नहीं।
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अधिकांश मुहावरे वाक्य के भीतर प्रयोग होते हैं; उनके चारों ओर काल, लिंग, वचन और पुरुष का सामंजस्य सही होना चाहिए।
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लोकोक्ति सामान्यतः पूरा कथन होती है जो किसी सामान्य सत्य, व्यवहारिक सीख, नीति या चेतावनी को व्यक्त करती है।
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मुख्य परीक्षा-भेद यह है कि मुहावरा प्रायः पदबंध है और लोकोक्ति प्रायः पूर्ण कथन।
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मुहावरों और लोकोक्तियों का शब्द-दर-शब्द अर्थ नहीं लगाना चाहिए; स्वीकृत अर्थ और प्रसंग का मेल देखना चाहिए।
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दफ्तरी मुहावरों में जिम्मेदारी, लापरवाही, मामला दबाना, कागजी कार्यवाही, संदेह और काम करते हुए पकड़े जाने जैसे भाव पूछे जा सकते हैं।
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सामाजिक मुहावरों में सम्मान, अपमान, झगड़ा, प्रभाव, प्रतिष्ठा, साहस, लज्जा और छल जैसे प्रसंग महत्त्वपूर्ण हैं।
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लोकोक्ति का उत्तर उसके सामान्य पाठ या सीख को पकड़े; उसमें आए पशु, वस्तु या दृश्य का शाब्दिक अर्थ अंतिम उत्तर नहीं होता।
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निकट अभिव्यक्तियों को अर्थ की तीव्रता और दिशा से अलग करें: क्रोध, लज्जा, गर्व, हार, व्यर्थ प्रयास और अचानक सफलता एक-दूसरे के स्थान पर नहीं रखे जा सकते।
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पद-पूर्ति प्रश्नों में परंपरागत शब्द जरूरी हैं; मिलता-जुलता शब्द व्याकरण की दृष्टि से ठीक हो सकता है, पर मुहावरे के रूप में गलत हो सकता है।
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शुद्ध प्रयोग के प्रश्नों में रूढ़ अर्थ और स्वाभाविक प्रसंग दोनों मिलना चाहिए।
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दो विकल्प सही लगें तो वह विकल्प हटाएँ जो भाव बदल देता है या लोकोक्ति को उसकी सामान्य सीख के बजाय किसी संकुचित क्रिया पर लगा देता है।
मुहावरा क्या होता है और उसका रूप स्थिर क्यों माना जाता है?
मुहावरा हिंदी में प्रयुक्त ऐसा स्थिर पदबंध है जिसका अर्थ शब्दों के अलग-अलग शाब्दिक अर्थ जोड़कर नहीं, बल्कि उसके रूढ़ और लाक्षणिक अर्थ से समझा जाता है, और उसका मुख्य रूप इसलिए स्थिर माना जाता है क्योंकि शब्द बदलते ही प्रचलित अर्थ बिगड़ सकता है। राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के लिपिक ग्रेड-द्वितीय/कनिष्ठ सहायक २०१८ पाठ्यक्रम में सामान्य हिन्दी से ७५ प्रश्न निर्धारित हैं, इसलिए मुहावरे का स्थिर रूप अलग से याद करना व्यावहारिक लाभ देता है। जैसे, “नाक कटना” में सचमुच नाक कटने की बात नहीं है; इसका अर्थ अपमानित होना या प्रतिष्ठा चली जाना है। “आँखों का तारा” का अर्थ आँखों में कोई तारा होना नहीं, बल्कि अत्यंत प्रिय व्यक्ति होना है। लिपिक ग्रेड-द्वितीय/कनिष्ठ सहायक सामान्य हिंदी में पहला नियम यही है कि मुहावरे का अर्थ उसके प्रचलित भाव से पकड़ा जाए, शब्दशः अर्थ से नहीं।
दूसरा नियम है स्थिर रूप। मुहावरे के मुख्य शब्द सामान्यतः बदले नहीं जाते। “आँखों में धूल झोंकना” छल करने या धोखा देने के लिए स्वीकृत मुहावरा है। यदि इसी को किसी दूसरे अंग या दूसरी क्रिया से बदल दिया जाए तो वह मानक मुहावरा नहीं रह जाता। इसी तरह “दाँत खट्टे करना” का अर्थ किसी को बुरी तरह हराना या दबा देना है; इसके प्रमुख शब्द बदलने से अर्थ और रूप दोनों बिगड़ सकते हैं। वस्तुनिष्ठ प्रश्नों में कई बार देखने में मिलता-जुलता विकल्प इसलिए गलत होता है क्योंकि वह मुहावरे का रूढ़ रूप तोड़ देता है।
तीसरा नियम वाक्यगत प्रयोग है। मुहावरा अपने-आप में पूरा उपदेश नहीं होता; वह प्रायः वाक्य के भीतर अर्थ देता है। वाक्य उससे कर्ता, काल, कर्म और प्रसंग जोड़ता है। “हाथ मलना” का अर्थ अवसर निकल जाने के बाद असहाय होकर पछताना है। यह तब सही बैठेगा जब किसी ने चेतावनी को अनसुना किया और बाद में उसे हाथ मलना पड़ा। यहाँ मुहावरे में पछतावे का भाव है, और बाकी वाक्य बताता है कि किसने, क्यों और किस परिस्थिति में पछताया।
कई मुहावरों में वाक्य के अनुसार लिंग, वचन, पुरुष और काल का सामंजस्य बैठाया जाता है, पर मुहावरे का मूल भाग स्थिर रहता है। “नौ दो ग्यारह होना” भाग जाने या तुरंत गायब हो जाने के अर्थ में पहचाना जाता है। “रंगे हाथ पकड़ना” में वाक्य के अनुसार पकड़ा गया, पकड़ी गई, पकड़ लिया जैसे रूप आ सकते हैं, पर अर्थ वही रहता है कि व्यक्ति काम करते हुए पकड़ा गया। इसलिए उत्तर चुनते समय दो बातें साथ देखनी चाहिए: मुहावरा अपने स्वीकृत रूप में है या नहीं, और पूरा वाक्य उस अर्थ को स्वाभाविक ढंग से निभा रहा है या नहीं।
दैनिक जीवन के मुहावरे शरीर के अंगों, काम-काज, घर-परिवार, व्यापार, खेती, दफ्तर और सामाजिक प्रतिष्ठा जैसे अनुभवों से बनते हैं। चित्रात्मक शब्द उन्हें याद रखने में मदद करते हैं, पर परीक्षा में पूछा गया अर्थ वही रूढ़ अर्थ होता है। “कान भरना” का अर्थ किसी के मन में दूसरे के प्रति गलत बात बैठाना या भड़काना है। “मुँह की खाना” का अर्थ हार या अपमान झेलना है। “सिर पर चढ़ाना” का अर्थ जरूरत से अधिक महत्व देकर बिगाड़ देना है। ऐसे सभी उदाहरणों में शाब्दिक चित्र केवल याद रखने का सहारा है, अंतिम उत्तर नहीं।
व्यावहारिक तैयारी के लिए हर मुहावरे पर चार प्रश्न लगाएँ। पहला, इसका प्रचलित अर्थ क्या है? दूसरा, इसका रूप पूरा और सही है या नहीं? तीसरा, वाक्य का प्रसंग उस अर्थ से मिलता है या नहीं? चौथा, भाव सही है या नहीं: क्रोध, लज्जा, साहस, छल, तेजी, व्यर्थता, हार या सम्मान? इन चार कसौटियों से अर्थ और प्रयोग वाले अधिकांश प्रश्न अनुमान के बजाय नियम से हल होते हैं। सुरक्षित तैयारी यह है कि केवल अंग्रेज़ी समानार्थी याद न किए जाएँ, बल्कि हर मुहावरे को एक छोटे हिंदी प्रसंग से जोड़ा जाए।
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