मुख्य तथ्य

  • हिंदी संज्ञाएँ मुख्यतः पुल्लिंग या स्त्रीलिंग होती हैं और यही लिंग कई विशेषणों तथा क्रिया-रूपों को नियंत्रित करता है।
  • आ पर समाप्त अनेक पुल्लिंग शब्दों के स्त्रीलिंग रूप ई से बनते हैं, जैसे लड़का-लड़की, पर अर्थ और प्रयोग को अंतिम आधार मानें।
  • इन, आनी और नी जैसे प्रत्यय स्त्रीलिंग रूपों में मिलते हैं, जैसे मालिन, सेठानी और शेरनी।
  • निर्जीव शब्दों का भी व्याकरणिक लिंग होता है; किताब स्त्रीलिंग है और कमरा पुल्लिंग है।
  • बहुवचन में केवल संज्ञा नहीं, विशेषण और क्रिया का रूप भी बदल सकता है।

मुख्य बिंदु

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    हिंदी संज्ञाएँ मुख्यतः पुल्लिंग या स्त्रीलिंग होती हैं और यही लिंग कई विशेषणों तथा क्रिया-रूपों को नियंत्रित करता है।

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    आ पर समाप्त अनेक पुल्लिंग शब्दों के स्त्रीलिंग रूप ई से बनते हैं, जैसे लड़का-लड़की, पर अर्थ और प्रयोग को अंतिम आधार मानें।

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    इन, आनी और नी जैसे प्रत्यय स्त्रीलिंग रूपों में मिलते हैं, जैसे मालिन, सेठानी और शेरनी।

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    निर्जीव शब्दों का भी व्याकरणिक लिंग होता है; किताब स्त्रीलिंग है और कमरा पुल्लिंग है।

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    बहुवचन में केवल संज्ञा नहीं, विशेषण और क्रिया का रूप भी बदल सकता है।

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    आदरार्थक बहुवचन में एक व्यक्ति के लिए भी बहुवचन जैसी क्रिया लग सकती है, जैसे आप आए और गुरुजी बैठे हैं।

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    मैं, हम, तू, तुम, आप, वह, वे, यह और ये जैसे सर्वनाम पुरुष तथा क्रिया-सामंजस्य तय करते हैं।

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    आप के साथ सामान्यतः आदरपूर्ण बहुवचन रूप आता है; आप जाता है अशुद्ध और आप जाते हैं शुद्ध है।

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    काल पहचानते समय ता, रहा, चुका, गा, गया, हुई, थे जैसे काल और पक्ष-सूचक रूपों को साथ पढ़ें।

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    वस्तुनिष्ठ शुद्धि में गलती प्रायः सामान्य कार्यालयी वाक्य के भीतर लिंग, वचन, पुरुष या काल के छोटे असामंजस्य के रूप में छिपती है।

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    सही पद्धति है: मुख्य संज्ञा या सर्वनाम पहचानें, लिंग-वचन-पुरुष तय करें, फिर विशेषण और क्रिया को मिलाएँ।

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    सुंदर, विशेष और महत्वपूर्ण जैसे कई विशेषण अपरिवर्तनीय हैं; इनके अनावश्यक बदले हुए रूपों को सुधार न मानें।

हिंदी में लिंग कैसे पहचाना और मिलाया जाता है?

हिंदी में लिंग पहचानने और मिलाने का सीधा तरीका है कि मुख्य संज्ञा का पुल्लिंग या स्त्रीलिंग रूप तय कर उसके अनुसार विशेषण, कृदंत और क्रिया को बैठाया जाए। हिंदी व्याकरण में लिंग संज्ञा का वह भेद है जिसके आधार पर शब्द को मुख्यतः पुल्लिंग या स्त्रीलिंग माना जाता है। यह केवल नाम बताने की बात नहीं है; इसी से विशेषण, कृदंत और कई क्रिया-रूप बदलते हैं। परीक्षा में पहला काम शब्द का अनुवाद करना नहीं, बल्कि उसके साथ जुड़े सामंजस्य को पहचानना है। राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के आधिकारिक लिपिक द्वितीय श्रेणी और कनिष्ठ सहायक पाठ्यक्रम में प्रश्नपत्र द्वितीय के सामान्य हिंदी भाग के लिए ७५ प्रश्न निर्धारित हैं। जैसे लड़का आया में लड़का पुल्लिंग एकवचन है, इसलिए आया लगा है। लड़की आई में लड़की स्त्रीलिंग एकवचन है, इसलिए आई लगा है। इसी तरह अच्छा लड़का, अच्छी लड़की, बड़ा घर और बड़ी मेज में विशेषण संज्ञा के अनुसार बदल रहा है। कई पुल्लिंग शब्द आ पर समाप्त होते हैं और उनके स्त्रीलिंग रूप ई से बनते हैं, जैसे बेटा-बेटी, लड़का-लड़की, घोड़ा-घोड़ी। कुछ स्त्रीलिंग रूप इन, आनी, नी आदि प्रत्ययों से बनते हैं, जैसे माली-मालिन, सेठ-सेठानी, शेर-शेरनी, राजा-रानी। ये ढाँचे उपयोगी हैं, पर पूर्ण नियम नहीं हैं। पिता और दादा अर्थ से पुल्लिंग हैं, जबकि माता और दादी अर्थ से स्त्रीलिंग हैं। निर्जीव वस्तुओं का भी व्याकरणिक लिंग होता है जिसे प्रयोग से सीखना पड़ता है। किताब स्त्रीलिंग है, इसलिए किताब अच्छी है ठीक है। कमरा पुल्लिंग है, इसलिए कमरा बड़ा है ठीक है। कार्यालयी वाक्यों में गलती अक्सर लंबी पद-श्रृंखला में छिपती है। सूचना, समस्या, व्यवस्था और योजना सामान्य प्रयोग में स्त्रीलिंग हैं; निर्णय, प्रयास, आदेश और निर्देश पुल्लिंग हैं। इसलिए नई योजना, महत्वपूर्ण सूचना, पुराना आदेश, स्पष्ट निर्देश जैसे रूप सही हैं। सुंदर, उपयुक्त, विशेष और महत्वपूर्ण जैसे कई विशेषण अपरिवर्तनीय हैं; इन्हें जबरन स्त्रीलिंग बनाने की जरूरत नहीं होती। सुधार का व्यावहारिक तरीका है कि पहले मुख्य संज्ञा को पहचानें, उसका लिंग तय करें, फिर उसके साथ लगे विशेषण, कृदंत और क्रिया को मिलाएँ। यदि संज्ञा स्त्रीलिंग एकवचन है तो जहाँ बदलने वाला रूप हो वहाँ ई अथवा हुई, गई, की जैसे रूप आएँगे। यदि संज्ञा पुल्लिंग एकवचन है तो आ, हुआ, गया, किया जैसे रूप आएँगे। पर जहाँ विशेषण अपरिवर्तनीय हो, वहाँ केवल क्रिया या कृदंत से सामंजस्य देखना होगा। लिंग संबंधी प्रश्न सिद्धांत कम और वाक्य की स्वाभाविकता अधिक जाँचते हैं। सही उत्तर वही होगा जिसमें पूरी वाक्य-श्रृंखला व्याकरण की दृष्टि से एक जैसी बैठे।