शब्द-शुद्धि एवं वाक्य-शुद्धि
मुख्य तथ्य
- एलडीसी द्वितीय प्रश्न-पत्र में शब्द-शुद्धि और वाक्य-शुद्धि में केवल सही रूप नहीं, अशुद्धि का कारण भी पूछा जाता है।
- शब्द-शुद्धि में अशुद्ध शब्द को मानक लिखित रूप में बदलना और शब्दगत अशुद्धि का कारण पहचानना जरूरी है।
- शब्दगत अशुद्धि के सामान्य कारण मात्रा, संयुक्ताक्षर, अनुस्वार, अनुनासिक, हलन्त, तत्सम वर्तनी और अनावश्यक अक्षर हैं।
- वाक्य-शुद्धि में लिंग, वचन, कारक, क्रिया, काल, वाच्य, पद-क्रम, मुहावरा और वाक्य की संक्षिप्तता की जाँच होती है।
- लिंग और वचन की अशुद्धि पहचानते समय संज्ञा, विशेषण, संबंध-सूचक रूप और क्रिया के संबंध को साथ पढ़ना चाहिए।
मुख्य बिंदु
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एलडीसी द्वितीय प्रश्न-पत्र में शब्द-शुद्धि और वाक्य-शुद्धि में केवल सही रूप नहीं, अशुद्धि का कारण भी पूछा जाता है।
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शब्द-शुद्धि में अशुद्ध शब्द को मानक लिखित रूप में बदलना और शब्दगत अशुद्धि का कारण पहचानना जरूरी है।
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शब्दगत अशुद्धि के सामान्य कारण मात्रा, संयुक्ताक्षर, अनुस्वार, अनुनासिक, हलन्त, तत्सम वर्तनी और अनावश्यक अक्षर हैं।
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वाक्य-शुद्धि में लिंग, वचन, कारक, क्रिया, काल, वाच्य, पद-क्रम, मुहावरा और वाक्य की संक्षिप्तता की जाँच होती है।
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लिंग और वचन की अशुद्धि पहचानते समय संज्ञा, विशेषण, संबंध-सूचक रूप और क्रिया के संबंध को साथ पढ़ना चाहिए।
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कारक की अशुद्धि प्रायः गलत परसर्ग या परसर्गपूर्व सर्वनाम रूप से आती है, जैसे मैं से के स्थान पर मुझसे।
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क्रिया और काल सुधारते समय कल, प्रतिदिन, अभी, पहले और कल तक जैसे समय-सूचक शब्दों को पहले पढ़ना चाहिए।
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वाच्य की अशुद्धि तब बनती है जब कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य और भाववाच्य जैसी रचनाएँ बिना व्याकरणिक संगति के मिला दी जाती हैं।
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अनावश्यक शब्द वाली अशुद्धि में शब्द परिचित होते हैं, पर दोष अर्थ की पुनरावृत्ति होता है, जैसे पुनः वापस या सबसे सर्वश्रेष्ठ।
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मुहावरे में परिचित पर्यायवाची शब्द मन से नहीं रखे जा सकते; परीक्षा में मुहावरे का स्थिर रूप ही मान्य होता है।
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विकल्पीय प्रश्नों में पहले त्रुटि का प्रकार अनुमानित करें, फिर विकल्प मिलाएँ; इससे निकट दिखने वाले भ्रमकारी विकल्पों से बचाव होता है।
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सुधारा गया विकल्प मूल अर्थ बदले बिना दोष हटाए और कोई नई अशुद्धि पैदा न करे।
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वर्तनी के प्रश्नों में बोलचाल की ध्वनि से अधिक महत्त्व लिखित देवनागरी रूप की दृश्य शुद्धता का होता है।
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सबसे उपयोगी पुनरावृत्ति-सारणी में अशुद्ध रूप, शुद्ध रूप, कारण और संकेत चार स्तंभ होने चाहिए।
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वाक्य वाले विकल्पों पर अंतिम निशान लगाने से पहले क्रिया, कारक, पुनरुक्ति, पद-क्रम और भाषा-रजिस्टर की तेज जाँच करें।
एलडीसी में शब्द-शुद्धि और वाक्य-शुद्धि कैसे पढ़ें?
एलडीसी में शब्द-शुद्धि और वाक्य-शुद्धि को सूची रटने के बजाय त्रुटि पहचानने, कारण समझाने और सही विकल्प चुनने की विधि की तरह पढ़ना चाहिए। एलडीसी द्वितीय प्रश्न-पत्र में शब्द-शुद्धि और वाक्य-शुद्धि को केवल याद की हुई सूची की तरह नहीं पढ़ना चाहिए। इसे त्रुटि-पहचान की विधि के रूप में पढ़ना अधिक उपयोगी है। आधिकारिक द्वितीय प्रश्न-पत्र के पाठ्यक्रम में सामान्य हिंदी के अंतर्गत शब्दों और वाक्यों का शुद्धीकरण दिया गया है, और साथ में अशुद्धि का कारण भी अपेक्षित है। राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के एलडीसी पाठ्यक्रम के अनुसार प्रश्न-पत्र द्वितीय की अवधि ३ घंटे है। प्रश्न-पत्र वस्तुनिष्ठ प्रकृति का होता है, इसलिए अभ्यर्थी के सामने बहुत निकट दिखने वाले विकल्प आते हैं। काम की आदत तीन चरणों की है: पहले दोष कहाँ है, यह पहचानना; फिर व्याकरणिक कारण बताना; और अंत में समय-सीमा में शुद्ध विकल्प चुनना।
शब्द-शुद्धि में दोष सामान्यतः एक ही शब्द के भीतर होता है। मात्रा गलत हो सकती है, व्यंजन-समूह बिगड़ सकता है, अनुस्वार और अनुनासिक में भ्रम हो सकता है, हलन्त या संयुक्ताक्षर छूट सकता है, तत्सम रूप बिगड़ सकता है या समान ध्वनि वाला अक्षर गलत लग सकता है। जैसे आवश्यक और आवश्याक में शुद्ध रूप आवश्यक है, पर कारण मात्रा की अशुद्धि है। उज्ज्वल और उज्वल में शुद्ध रूप उज्ज्वल है, क्योंकि संयुक्ताक्षर का दोष है। संस्कार और सस्कार में अनुस्वार छूट गया है। विकल्पीय प्रश्न में परीक्षक प्रायः तीन परिचित रूप और एक विकृत रूप देता है, इसलिए केवल उच्चारण के सहारे उत्तर चुनना जोखिम भरा है।
वाक्य-शुद्धि में दोष पूरे वाक्य में फैला होता है। कोई वाक्य बोलचाल में ठीक लग सकता है, पर मानक लिखित हिंदी में लिंग, वचन, कारक, काल, वाच्य, पद-क्रम या मुहावरे के कारण अशुद्ध हो सकता है। सुधार तभी भरोसेमंद है जब उसका कारण भी स्पष्ट हो। लड़की बाजार गया का शुद्ध रूप लड़की बाजार गई है, क्योंकि इस रचना में स्त्रीलिंग कर्ता के अनुसार क्रिया स्त्रीलिंग होगी। उसने मुझे से कहा का शुद्ध रूप उसने मुझसे कहा है, क्योंकि परसर्ग सर्वनाम के परिवर्तित रूप से जुड़ता है।
परीक्षा में व्यावहारिक विधि यह है कि हर विकल्प दो बार पढ़ा जाए। पहली बार संभावित त्रुटि-प्रकार चिन्हित करें: वर्तनी, लिंग, वचन, कारक, क्रिया, काल, वाच्य, पद-क्रम, पुनरुक्ति या मुहावरा। दूसरी बार देखें कि दिया गया सुधार उसी दोष को हटाता है या कोई नया दोष पैदा करता है। निकट विकल्प आम होते हैं: कोई विकल्प लिंग सुधार देता है पर अनावश्यक शब्द जोड़ देता है; कोई वर्तनी सुधारता है पर कारक बिगाड़ देता है। सही विकल्प वही है जो मानक, संक्षिप्त और व्याकरणिक रूप से उचित हो।
उच्च माध्यमिक स्तर के साझा पात्रता परीक्षा-पत्र में हिंदी प्रश्न विकल्प-आधारित पहचान के रूप में मिलते हैं और वाक्यगत शुद्धता को अशुद्ध वाक्य चुनने के निर्देश से भी परखा जा सकता है। इसलिए एलडीसी पाठ्यक्रम में तैयारी के दो रूप साथ रखने चाहिए: विकल्पों में अशुद्ध शब्द या वाक्य पहचानना और दिए गए अशुद्ध रूप का शुद्ध रूप चुनना। कारण-सूचक नाम इसलिए निर्णायक है कि कई विकल्प सतह पर सही लगते हैं। हर शुद्धि-प्रश्न को छोटे परीक्षण की तरह हल करें: लिखा क्या है, कौन-सा नियम टूटा है, शुद्ध रूप क्या है और कौन-सा विकल्प उस शुद्ध रूप को साफ ढंग से देता है।
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