पर्यायवाची, विलोम, वाक्यांश के लिए एक शब्द
मुख्य तथ्य
- पर्यायवाची प्रश्न केवल परिचित शब्द नहीं, प्रसंग में ठीक अर्थ पहचानने की क्षमता जाँचते हैं।
- सामान्य, औपचारिक और साहित्यिक पर्याय एक ही समूह में हो सकते हैं, पर उनका प्रयोग समान नहीं होता।
- बेमेल पर्याय युग्म पहचानने के लिए हर जोड़े को समान अर्थ, विपरीत अर्थ, संबंधित या असंबंधित के रूप में जाँचें।
- विलोम में लक्ष्य शब्द के केंद्रीय अर्थ को उलटना होता है, कोई भी नकारात्मक शब्द चुनना पर्याप्त नहीं है।
- न्याय-अन्याय, आशा-निराशा और शुद्ध-अशुद्ध जैसे उपसर्ग-आधारित विलोम उपयोगी हैं, पर पूरे शब्द का अर्थ फिर भी देखें।
मुख्य बिंदु
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पर्यायवाची प्रश्न केवल परिचित शब्द नहीं, प्रसंग में ठीक अर्थ पहचानने की क्षमता जाँचते हैं।
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सामान्य, औपचारिक और साहित्यिक पर्याय एक ही समूह में हो सकते हैं, पर उनका प्रयोग समान नहीं होता।
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बेमेल पर्याय युग्म पहचानने के लिए हर जोड़े को समान अर्थ, विपरीत अर्थ, संबंधित या असंबंधित के रूप में जाँचें।
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विलोम में लक्ष्य शब्द के केंद्रीय अर्थ को उलटना होता है, कोई भी नकारात्मक शब्द चुनना पर्याप्त नहीं है।
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न्याय-अन्याय, आशा-निराशा और शुद्ध-अशुद्ध जैसे उपसर्ग-आधारित विलोम उपयोगी हैं, पर पूरे शब्द का अर्थ फिर भी देखें।
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उदार-दानी पर्याय है, जबकि उदार-कृपण विलोम है; ऐसे निकट विकल्पों से परीक्षा में भ्रम बनता है।
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वाक्यांश के लिए एक शब्द चुनते समय देखें कि वाक्यांश व्यक्ति, गुण, क्रिया, अवस्था या प्रशासनिक प्रयोग में से क्या माँग रहा है।
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-नीय, -शील, -वान, -हीन, -ज्ञ और -कारी जैसे प्रत्यय एक-शब्द रूप का संकेत देते हैं।
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पत्र, कर, फल, अंक, चरण और मुख जैसे अनेकार्थक शब्दों में सही पर्याय प्रसंग देखकर ही चुना जाता है।
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अपेक्षा-उपेक्षा, आचार-अचार और उदार-उद्धार जैसे शब्द-युग्म ध्वनि से पास लगते हैं, पर अर्थ में अलग होते हैं।
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समाज-सामाजिक, इतिहास-ऐतिहासिक और प्रशासन-प्रशासनिक जैसे संज्ञा से विशेषण रूप शब्दावली प्रश्नों में आते हैं।
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शब्द-भेद पर ध्यान दें: शांत विशेषण है और शांति संज्ञा; संबंधित शब्द हमेशा सही विकल्प नहीं होता।
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आवेदन, सत्यापन, पंजीकरण, नियुक्ति और अनुशंसा जैसी प्रशासनिक शब्दावली लिपिकीय हिन्दी के लिए महत्त्वपूर्ण है।
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कठिन विकल्पों में चुने हुए शब्द को छोटे वाक्य में रखकर अर्थ और भाषिक स्तर की जाँच करें।
पर्यायवाची, विलोम और एक शब्द वाले प्रश्न परीक्षा में कैसे हल करें?
पर्यायवाची, विलोम और वाक्यांश के लिए एक शब्द वाले प्रश्न परीक्षा में शब्द, प्रसंग और विकल्प के सही संबंध को पहचानकर हल किए जाते हैं। राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के लिपिक ग्रेड-द्वितीय/कनिष्ठ सहायक पाठ्यक्रम के अनुसार सामान्य हिन्दी और सामान्य अंग्रेज़ी वाले द्वितीय प्रश्न-पत्र में १५० प्रश्न रखे गए हैं।
सामान्य हिन्दी में शब्दावली के प्रश्न छोटे दिखते हैं, लेकिन इनमें केवल बहुत-से शब्द याद होना काफी नहीं होता। सही उत्तर वही चुनता है जो शब्द के ठीक अर्थ, उसके प्रसंग और दिए गए विकल्प के संबंध को पहचानता है। लिपिक ग्रेड द्वितीय की द्वितीय प्रश्न-पत्र व्यवस्था में सामान्य हिन्दी और सामान्य अंग्रेज़ी वस्तुनिष्ठ प्रश्न-पत्र में साथ आती हैं, और भर्ती सूचना में यह प्रश्न-पत्र दोनों भाषा भागों में बँटे एक सौ पचास प्रश्नों का बताया गया है। राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के वरिष्ठ माध्यमिक समान पात्रता परीक्षा के मुख्य प्रश्न-पत्र में भी यही व्यावहारिक शैली दिखती है: सीधा अर्थ, विलोम, वर्तनी या व्याकरण और ऐसे विकल्प जहाँ एक शब्द आकर्षक तो लगता है, पर पूरा सही नहीं होता। इस अध्याय में तैयारी की इकाई लंबी शब्दकोश-सूची नहीं, बल्कि शब्द, प्रसंग और विकल्प के बीच जाँचा हुआ संबंध है।
इस विषय के तीन मुख्य क्षेत्र हैं: पर्यायवाची शब्द, विलोम शब्द और वाक्यांश के लिए एक शब्द। पर्यायवाची प्रश्न में दिए गए शब्द का सबसे निकट अर्थ पूछा जा सकता है, या यह पूछा जा सकता है कि कौन-सा शब्द-पर्याय युग्म बेमेल है। विलोम प्रश्न में सीधे विपरीतार्थक शब्द पूछा जा सकता है, या सही और गलत युग्म पहचानने को कहा जा सकता है। वाक्यांश के लिए एक शब्द में ऐसा वाक्यांश दिया जाता है जैसे जिसे जीता न जा सके, भय से रहित अवस्था या सार्वजनिक सूचना, और उसके लिए छोटा, सार्थक हिन्दी शब्द चुनना होता है। इसी शब्दावली क्षेत्र में अनेकार्थक शब्द, शब्द-युग्म और संज्ञा से विशेषण बनाना भी जुड़ते हैं, क्योंकि ये भी ध्वनि की पहचान नहीं, बल्कि सही शब्द-संबंध की पहचान माँगते हैं।
पहली पद्धति है शब्द-संबंध को भावनात्मक निकटता से अलग करना। कई शब्द एक ही विषय-क्षेत्र में आते हैं, इसलिए मिलते-जुलते लगते हैं, पर वे पर्याय नहीं बन जाते। शासन, प्रशासन, सरकार और व्यवस्था शासन-क्षेत्र से जुड़े हैं, लेकिन हर वाक्य में एक-दूसरे के स्थान पर नहीं रखे जा सकते। इसी तरह विनय और नम्रता निकट हैं, पर विनय और अनुशासन केवल व्यवहार से जुड़े शब्द हैं, सख्त पर्याय नहीं। विलोम में भी विपत्ति और अभाव दोनों नकारात्मक शब्द हैं, पर सुख का स्वतः विलोम अभाव नहीं होगा; विकल्पों के अनुसार दुख या दुःख अधिक ठीक बैठता है। परीक्षा ऐसे निकट विकल्पों को सही उत्तर के पास रखकर भ्रम पैदा करती है।
दूसरी पद्धति है भाषिक स्तर पर नियंत्रण। हिन्दी में सामान्य, औपचारिक, संस्कृतनिष्ठ और साहित्यिक शब्द एक साथ मिलते हैं। जल, पानी, नीर और वारि सभी पानी से जुड़े हैं, पर हर जगह समान रूप से स्वाभाविक नहीं। पानी सामान्य बोलचाल का शब्द है, जल मानक और औपचारिक है, जबकि नीर और वारि साहित्यिक हैं। सीधा पर्याय पूछे जाने पर ये एक समूह में सही हो सकते हैं, लेकिन वाक्य-प्रयोग में उचित स्तर देखना पड़ेगा। परीक्षा-प्रचलित शब्द अक्सर स्कूली व्याकरण और कार्यालयी हिन्दी से आते हैं: अधीनस्थ, प्रविष्टि, अनुज्ञा, प्रावधान, प्रतिवेदन, निर्वाचित, नियुक्ति, संस्तुति। इन्हें सजावटी कठिन शब्द मानकर नहीं, अर्थ और प्रयोग के साथ याद करें।
तीसरी पद्धति है शब्द-परिवार से छँटाई। अ-, अन-, नि-, निर-, दुर्-, सु-, कु-, प्रति-, उप-, परा- जैसे उपसर्ग और -ता, -त्व, -मय, -शील, -हीन जैसे प्रत्यय शब्द-संबंध बदल देते हैं। न्याय और अन्याय में उपसर्ग से विलोम बनता है; आशा और निराशा विलोम युग्म हैं; भय और निर्भय संबंधित हैं, पर दोनों का शब्द-भेद समान नहीं। वाक्यांश के लिए एक शब्द में -शील, -ज्ञ, -विद, -कारी, -नीय और -त्व जैसे प्रत्यय व्यक्ति, गुण, क्रिया या भाववाचक अवस्था का संकेत देते हैं। रूप-रचना संकेत देती है, पर पूरा शब्द देखकर ही निर्णय करें, क्योंकि हर उपसर्गयुक्त शब्द साफ़ विलोम नहीं होता।
अंतिम परीक्षा-आदत है सभी विकल्प पढ़कर उत्तर चुनना। शब्दावली के बहुविकल्पीय प्रश्नों में दो विकल्प व्यापक रूप से जुड़े हो सकते हैं, एक निकट पर्याय हो सकता है और एक बिल्कुल ठीक हो सकता है। पहले शब्द-भेद पहचानें: संज्ञा, विशेषण, क्रिया या भाववाचक संज्ञा। फिर देखें कि प्रश्न पर्याय, विलोम, बेमेल युग्म या एक शब्द में से क्या पूछ रहा है। चुने हुए विकल्प को छोटे वाक्य में रखकर जाँचें। यदि विकल्प भाषिक स्तर बहुत बदल देता है, शब्द-भेद बदल देता है या अर्थ को गलत ढंग से संकुचित कर देता है, तो उसे छोड़ दें। यही आदत परिचित शब्द को सही शब्द समझ लेने की सबसे आम गलती से बचाती है।
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