समास; उपसर्ग एवं प्रत्यय
मुख्य तथ्य
- समास में दो या अधिक सार्थक पदों का संक्षिप्त रूप बनता है और समास-विग्रह उस छिपे हुए संबंध को खोलता है।
- अव्ययीभाव समास प्रायः क्रिया-विशेषण की तरह काम करता है, जैसे यथाशक्ति, प्रतिदिन और आमरण।
- तत्पुरुष समास में उत्तरपद प्रधान होता है और का, में, से, के लिए जैसे कारक-संबंध छिपे रहते हैं।
- कर्मधारय में दोनों पद एक ही वस्तु की ओर संकेत करते हैं और पहला पद दूसरे की विशेषता बताता है।
- द्विगु में संख्यावाचक पद महत्वपूर्ण होता है और पूरा पद समूह, माप या गिनी हुई इकाई का बोध कराता है।
मुख्य बिंदु
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समास में दो या अधिक सार्थक पदों का संक्षिप्त रूप बनता है और समास-विग्रह उस छिपे हुए संबंध को खोलता है।
- 2
अव्ययीभाव समास प्रायः क्रिया-विशेषण की तरह काम करता है, जैसे यथाशक्ति, प्रतिदिन और आमरण।
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तत्पुरुष समास में उत्तरपद प्रधान होता है और का, में, से, के लिए जैसे कारक-संबंध छिपे रहते हैं।
- 4
कर्मधारय में दोनों पद एक ही वस्तु की ओर संकेत करते हैं और पहला पद दूसरे की विशेषता बताता है।
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द्विगु में संख्यावाचक पद महत्वपूर्ण होता है और पूरा पद समूह, माप या गिनी हुई इकाई का बोध कराता है।
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द्वन्द्व समास में दोनों पद समान महत्व रखते हैं और विग्रह में सामान्यतः और या तथा आता है।
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बहुव्रीहि समास अपने पदों से बाहर किसी तीसरे व्यक्ति या वस्तु की विशेषता बताता है।
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उपसर्ग तभी मानें जब उपसर्ग हटाने पर सार्थक मूल शब्द बचे और अर्थ में पहचानने योग्य परिवर्तन हो।
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अ, अन, बे और ना जैसे निषेध-सूचक आरंभ हमेशा उपसर्ग नहीं होते; मिलते-जुलते आरंभिक अक्षरों से भ्रम न करें।
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कृत प्रत्यय धातु या क्रिया-आधार से जुड़कर कर्ता, क्रिया, भाव या योग्यता-सूचक शब्द बनाते हैं।
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तद्धित प्रत्यय संज्ञा, सर्वनाम, संख्या या विशेषण-आधार से जुड़कर भाव, संबंध, अधिकार, स्थान या विशेषण बनाते हैं।
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वस्तुनिष्ठ प्रश्नों में क्रम रखें: शब्द को तोड़ें, अर्थ खोलें, रचना का नाम तय करें, फिर विकल्प हटाएँ।
एलडीसी में समास, उपसर्ग और प्रत्यय कैसे पढ़ें?
एलडीसी में समास, उपसर्ग और प्रत्यय को रटकर नहीं, बल्कि शब्द को सही हिस्सों में तोड़कर और उसके अर्थ-परिवर्तन को पहचानकर पढ़ना चाहिए। राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के एलडीसी २०१८ पाठ्यक्रम के अनुसार द्वितीय प्रश्न-पत्र कुल १५० प्रश्न, १०० अंक और ३ घंटे का है। यह विषय एलडीसी द्वितीय प्रश्न-पत्र के सामान्य हिन्दी भाग में आता है। आधिकारिक ढाँचे में प्रश्न वस्तुनिष्ठ होते हैं: कुल १५० प्रश्न, १०० अंक, ३ घंटे, सभी प्रश्नों के समान अंक और एक-तिहाई ऋणात्मक अंकन। इसी प्रश्न-पत्र में ७५ प्रश्न सामान्य हिन्दी और ७५ प्रश्न सामान्य अंग्रेजी से होते हैं। इसलिए समास, उपसर्ग और प्रत्यय को वर्णनात्मक उत्तर की तरह नहीं, बल्कि रूप-पहचान की तरह पढ़ना चाहिए। प्रश्न में सामासिक पद देकर समास-भेद पूछा जा सकता है, सही समास-विग्रह चुनवाया जा सकता है, किसी शब्द में उपसर्ग पहचानने को कहा जा सकता है, मूल शब्द और प्रत्यय अलग करवाए जा सकते हैं, या दिए गए उपसर्ग से न बने शब्द को चुनना पड़ सकता है। सुरक्षित तैयारी का आधार केवल सूचियाँ रटना नहीं, बल्कि यह समझना है कि शब्द बना कैसे है।
समास का अर्थ है संक्षेपण। दो या अधिक सार्थक पद मिलकर छोटा और घना रूप बनाते हैं, जिसे सामासिक पद कहते हैं। इस प्रक्रिया में कारक-चिह्न, परसर्ग, संयोजक और व्याख्यात्मक शब्द प्रायः लुप्त हो जाते हैं। समास-विग्रह उसी संक्षेप को फिर से खोलकर पूरा वाक्यांश बनाता है। जैसे राजपुत्र का विग्रह राजा का पुत्र हो सकता है; यहाँ संबंध या अधिकार का भाव छिपा है। नीलकमल में पहला पद कमल की विशेषता बताता है, इसलिए अर्थ है नीला कमल। माता-पिता में दोनों पद समान महत्व रखते हैं, इसलिए विग्रह माता और पिता होगा। दशानन का अर्थ केवल दस आनन नहीं, बल्कि ऐसा व्यक्ति है जिसके दस आनन हों; यहाँ संकेत पदों से बाहर किसी व्यक्ति की ओर है।
उपसर्ग और प्रत्यय भी शब्द-रचना के औजार हैं, पर उनकी दिशा अलग होती है। उपसर्ग मूल शब्द से पहले जुड़ता है, जैसे सु से सुपुत्र, कु से कुपुत्र, अ से अधर्म, प्र से प्रस्थान। प्रत्यय मूल शब्द के बाद जुड़ता है, जैसे मित्र से मित्रता, गुण से गुणवान, लिख से लेखक, पढ़ से पठनीय। परीक्षा में सबसे बड़ी भूल यह होती है कि विद्यार्थी शब्द के आरंभ या अंत को देखकर तुरंत उत्तर चुन लेते हैं। सही तरीका है: पहले देखें कि बचा हुआ आधार अर्थपूर्ण है या नहीं; फिर देखें कि जुड़े हुए अंश से अर्थ में परिवर्तन आया या नहीं; अंत में रचना का नाम तय करें।
समास, उपसर्ग और प्रत्यय को एक साथ पढ़ने का लाभ यह है कि तीनों में शब्द को तोड़ने की आदत बनती है। सामासिक पद में दो स्वतंत्र पदों का संबंध खोजा जाता है। उपसर्ग में आरंभिक अंश और मूल शब्द का संबंध देखा जाता है। प्रत्यय में अंतिम अंश और बने हुए नए शब्द की श्रेणी देखी जाती है। एलडीसी स्तर पर लक्ष्य उन्नत व्युत्पत्ति-शास्त्र नहीं, बल्कि दिए गए विकल्पों में सबसे ठीक विश्लेषण चुनना है।
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