त्रिकोणमिति — न्यूनकोणों के अनुपात, सर्वसमिकाएँ, ऊँचाई एवं दूरी
मुख्य तथ्य
- पूरा चक्कर 360 डिग्री, सीधा कोण 180 डिग्री और समकोण 90 डिग्री होता है।
- न्यूनकोण 0 डिग्री से बड़ा और 90 डिग्री से छोटा होता है; इस विषय में मुख्यतः न्यूनकोणों के अनुपात आते हैं।
- 0, 30, 45, 60 और 90 डिग्री के लिए साइन के मान क्रम से 0, 1/2, 1/वर्गमूल 2, वर्गमूल 3/2 और 1 हैं।
- पूरक कोणों का योग 90 डिग्री होता है; इसलिए साइन थीटा = कोसाइन (90 डिग्री माइनस थीटा) और टैन थीटा = कॉट (90 डिग्री माइनस थीटा)।
- मूल पाइथागोरस सर्वसमिका है: साइन वर्ग थीटा + कोसाइन वर्ग थीटा = 1।
मुख्य बिंदु
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पूरा चक्कर 360 डिग्री, सीधा कोण 180 डिग्री और समकोण 90 डिग्री होता है।
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न्यूनकोण 0 डिग्री से बड़ा और 90 डिग्री से छोटा होता है; इस विषय में मुख्यतः न्यूनकोणों के अनुपात आते हैं।
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समकोण त्रिभुज में चुने गए कोण के लिए साइन = सम्मुख भुजा ÷ कर्ण, कोसाइन = आसन्न भुजा ÷ कर्ण और टैन = सम्मुख भुजा ÷ आसन्न भुजा।
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कोसेक, सेक और कॉट क्रमशः साइन, कोसाइन और टैन के व्युत्क्रम अनुपात हैं।
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0, 30, 45, 60 और 90 डिग्री के लिए साइन के मान क्रम से 0, 1/2, 1/वर्गमूल 2, वर्गमूल 3/2 और 1 हैं।
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कोसाइन की पंक्ति साइन की पंक्ति की उल्टी होती है; टैन के मान साइन को कोसाइन से भाग देकर मिलते हैं।
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पूरक कोणों का योग 90 डिग्री होता है; इसलिए साइन थीटा = कोसाइन (90 डिग्री माइनस थीटा) और टैन थीटा = कॉट (90 डिग्री माइनस थीटा)।
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मूल पाइथागोरस सर्वसमिका है: साइन वर्ग थीटा + कोसाइन वर्ग थीटा = 1।
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व्युत्पन्न सर्वसमिकाएँ हैं: टैन वर्ग थीटा + 1 = सेक वर्ग थीटा और 1 + कॉट वर्ग थीटा = कोसेक वर्ग थीटा।
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ऊँचाई-दूरी प्रश्नों में टैन थीटा = ऊँचाई ÷ क्षैतिज दूरी आमतौर पर सबसे सीधा संबंध होता है।
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ऊँचे बिंदु से अवनमन कोण, नीचे वाले बिंदु से संबंधित उन्नयन कोण के बराबर होता है, जब क्षैतिज रेखाएँ समान्तर हों।
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यदि हर वस्तु के आधार से दूसरी वस्तु का शीर्ष देखा जाए और दोनों उन्नयन कोण पूरक हों, तो क्षैतिज दूरी डी = वर्गमूल (एच1 × एच2) होगी।
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त्रिकोणमिति में कोण और समकोण त्रिभुज कैसे समझें?
त्रिकोणमिति में कोण और समकोण त्रिभुज को इस तरह समझना चाहिए कि चुने हुए न्यूनकोण के सामने की भुजा, उसे छूने वाली आधार भुजा और कर्ण मिलकर सभी अनुपात तय करते हैं। त्रिकोणमिति की शुरुआत कोण के मापन से होती है। कोण बताता है कि एक ही प्रारम्भ-बिन्दु से निकली दो किरणों में से एक किरण दूसरी के सापेक्ष कितनी घूमी है। एलडीसी संख्यात्मक योग्यता में काम की इकाई डिग्री है। पूरा चक्कर 360 डिग्री, सीधा कोण 180 डिग्री और समकोण 90 डिग्री होता है। न्यूनकोण 0 डिग्री से बड़ा और 90 डिग्री से छोटा होता है। राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के एलडीसी पाठ्यक्रम के अनुसार, प्रथम प्रश्न-पत्र 100 अंकों का वस्तुनिष्ठ प्रश्न-पत्र है, जिसमें 150 प्रश्न होते हैं। इस विषय के लिए RSSB के गणित पाठ्यक्रम में न्यूनकोणों के त्रिकोणमितीय अनुपात और ऊँचाई-दूरी प्रश्न दिए गए हैं।
मुख्य आकृति समकोण त्रिभुज है। किसी एक न्यूनकोण को थीटा मानें। समकोण के सामने वाली भुजा कर्ण होती है और वह त्रिभुज की सबसे लंबी भुजा होती है। थीटा के ठीक सामने वाली भुजा लम्ब या सम्मुख भुजा कहलाती है। थीटा को छूने वाली, पर कर्ण न होने वाली भुजा आधार या आसन्न भुजा होती है। छहों मूल त्रिकोणमितीय अनुपात इन्हीं तीन भुजाओं से बनते हैं। इसलिए लंबे सूत्र रटने से पहले त्रिभुज बनाकर भुजाओं को सही नाम देना ज़रूरी है। यदि भुजाओं के नाम उलट गए तो साइन, कोसाइन और टैन तीनों के चुनाव में गलती हो सकती है।
पूरक कोण परीक्षा में बार-बार काम आते हैं। दो कोणों का योग 90 डिग्री हो तो वे पूरक कहलाते हैं। समकोण त्रिभुज में दोनों न्यूनकोण हमेशा पूरक होते हैं। यदि एक कोण थीटा है तो दूसरा 90 डिग्री माइनस थीटा होगा। इसी संबंध से साइन-कोसाइन, टैन-कॉट और सेक-कोसेक की जोड़ी बनती है। ऊँचाई-दूरी के उन प्रश्नों में भी यही बात उपयोगी है जहाँ दो देखे गए कोण पूरक हों; तब दोनों टैन का गुणनफल 1 हो जाता है।
कोण का मापन केवल परिभाषा नहीं है, वही तय करता है कि कौन-सा अनुपात लेना है। अगर ऊँचाई निकालनी हो और क्षैतिज दूरी दी हो, तो आमतौर पर टैन का अनुपात सबसे सीधा रहता है, क्योंकि टैन थीटा = लम्ब ÷ आधार। यदि कर्ण के साथ कोई खड़ी या क्षैतिज भुजा जुड़ी हो तो साइन या कोसाइन बेहतर हो सकते हैं। लिपिकीय स्तर के प्रश्नों में लंबी गणना से अधिक अंक इसी सही अनुपात-चयन पर निर्भर करते हैं।
साफ आकृति में क्षैतिज भूमि-रेखा, खड़ी ऊँचाई, दोनों के बीच समकोण, प्रेक्षक या वस्तु की स्थिति और दृष्टि रेखा का कोण दिखना चाहिए। दृष्टि रेखा वह तिरछी रेखा है जो प्रेक्षक की आँख से वस्तु के ऊपर या नीचे के बिंदु तक जाती है। वस्तु क्षैतिज रेखा से ऊपर हो तो क्षैतिज से ऊपर की ओर बना कोण उन्नयन कोण है। वस्तु प्रेक्षक की क्षैतिज रेखा से नीचे हो तो क्षैतिज से नीचे की ओर बना कोण अवनमन कोण है। दोनों स्थितियों में उपयोगी त्रिभुज समकोण होता है, क्योंकि ऊँचाई को भूमि या जल-स्तर पर लम्ब माना जाता है।
गणना करते समय तीन बातें याद रखें। पहली, कोण को उसके पूरक से न मिलाएँ; साइन थीटा और कोसाइन थीटा केवल 45 डिग्री पर बराबर होते हैं। दूसरी, अनुपात लगाने से पहले सभी दूरियाँ एक ही इकाई में रखें। तीसरी, संख्या रखने से पहले अनुपात लिखें। जैसे ऊँचाई एच वाला टावर दूरी डी से थीटा कोण पर दिख रहा है, तो पहले टैन थीटा = एच ÷ डी लिखें। फिर टैन का मान रखें। इससे एच ÷ डी की जगह डी ÷ एच लिखने वाली सामान्य गलती बचती है।
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