कार्तीय निर्देशांक ज्यामिति — बिंदुओं के बीच दूरी, आंतरिक/बाह्य विभाजन
मुख्य तथ्य
- क्षैतिज अक्ष को x-अक्ष और ऊर्ध्वाधर अक्ष को y-अक्ष कहते हैं; दोनों का प्रतिच्छेद मूल बिंदु (0, 0) है।
- यदि y = 0 हो तो बिंदु x-अक्ष पर और यदि x = 0 हो तो बिंदु y-अक्ष पर स्थित होता है।
- आंतरिक विभाजन में यदि AP:PB = m:n हो, तो बिंदु के निर्देशांक ((m × x2 + n × x1)/(m + n), (m × y2 + n × y1)/(m + n)) होते हैं।
- मध्य बिंदु 1:1 आंतरिक विभाजन का विशेष रूप है; इसमें दोनों निर्देशांकों का साधारण औसत लिया जाता है।
- बाह्य विभाजन में यदि AP:PB = m:n हो, तो बिंदु के निर्देशांक ((m × x2 - n × x1)/(m - n), (m × y2 - n × y1)/(m - n)) होते हैं।
मुख्य बिंदु
- 1
क्षैतिज अक्ष को x-अक्ष और ऊर्ध्वाधर अक्ष को y-अक्ष कहते हैं; दोनों का प्रतिच्छेद मूल बिंदु (0, 0) है।
- 2
क्रमित युग्म हमेशा (x, y) के रूप में पढ़ा जाता है; क्रम बदलने पर बिंदु बदल जाता है।
- 3
चतुर्थांशों के चिह्न क्रमशः प्रथम (+, +), द्वितीय (-, +), तृतीय (-, -) और चतुर्थ (+, -) होते हैं।
- 4
यदि y = 0 हो तो बिंदु x-अक्ष पर और यदि x = 0 हो तो बिंदु y-अक्ष पर स्थित होता है।
- 5
दो बिंदुओं के बीच दूरी निकालते समय x-अंतर और y-अंतर के वर्गों का योग लेकर उसका धनात्मक वर्गमूल लिया जाता है।
- 6
क्षैतिज रेखाखंड में दूरी x-निर्देशांकों के निरपेक्ष अंतर के बराबर और ऊर्ध्वाधर रेखाखंड में y-निर्देशांकों के निरपेक्ष अंतर के बराबर होती है।
- 7
धनात्मक वर्गमूल लेने से पहले दूरी का वर्ग निकालना जाँच का उपयोगी मध्यवर्ती चरण है।
- 8
आंतरिक विभाजन में यदि AP:PB = m:n हो, तो बिंदु के निर्देशांक ((m × x2 + n × x1)/(m + n), (m × y2 + n × y1)/(m + n)) होते हैं।
- 9
मध्य बिंदु 1:1 आंतरिक विभाजन का विशेष रूप है; इसमें दोनों निर्देशांकों का साधारण औसत लिया जाता है।
- 10
बाह्य विभाजन में यदि AP:PB = m:n हो, तो बिंदु के निर्देशांक ((m × x2 - n × x1)/(m - n), (m × y2 - n × y1)/(m - n)) होते हैं।
- 11
बाह्य विभाजन में m = n होने पर हर शून्य हो जाता है, इसलिए कोई सीमित बाह्य विभाजन बिंदु नहीं मिलता।
- 12
अनुपात की दिशा, जैसे AP:PB = m:n, लिखे बिना विभाजन सूत्र लगाने से उत्तर उलट सकता है।
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निर्देशांक तल क्या है और इसे कैसे पढ़ते हैं?
निर्देशांक तल में हर बिंदु को x-निर्देशांक और y-निर्देशांक की क्रमित जोड़ी से पढ़ते हैं; पहली संख्या क्षैतिज दिशा और दूसरी संख्या ऊर्ध्वाधर दिशा बताती है। कार्तीय निर्देशांक ज्यामिति में समतल के हर बिंदु को दो संख्याओं से बताया जाता है। क्षैतिज संख्या-रेखा x-अक्ष और ऊर्ध्वाधर संख्या-रेखा y-अक्ष कहलाती है। दोनों जहाँ मिलते हैं, वह मूल बिंदु होता है और उसे (0, 0) लिखा जाता है। ये दोनों अक्ष समतल को चार भागों में बाँटते हैं, जिन्हें चतुर्थांश कहते हैं। परीक्षा में आरंभिक गलती प्रायः क्रमित युग्म को लापरवाही से पढ़ने पर होती है। पहली संख्या हमेशा x-अक्ष से जुड़ी होती है और दूसरी संख्या हमेशा y-अक्ष से। इसलिए (3, -2) का अर्थ है मूल बिंदु से 3 इकाई दाएँ और फिर 2 इकाई नीचे जाना; यह (-2, 3) वाला बिंदु नहीं है।
हर निर्देशांक का चिह्न दिशा बताता है। x-निर्देशांक धनात्मक हो तो दाएँ जाना है और x-निर्देशांक ऋणात्मक हो तो बाएँ। y-निर्देशांक धनात्मक हो तो ऊपर जाना है और y-निर्देशांक ऋणात्मक हो तो नीचे। इसी से चतुर्थांशों का चिह्न-क्रम बनता है: प्रथम चतुर्थांश (+, +), द्वितीय (-, +), तृतीय (-, -) और चतुर्थ (+, -)। अक्षों पर पड़े बिंदु किसी चतुर्थांश में नहीं गिने जाते। यदि y = 0 है तो बिंदु x-अक्ष पर है, और यदि x = 0 है तो बिंदु y-अक्ष पर है। मूल बिंदु अकेला ऐसा बिंदु है जहाँ दोनों निर्देशांक शून्य होते हैं।
बिंदु अंकित करना दो चरणों का काम है। पहले मूल बिंदु से x-निर्देशांक के अनुसार क्षैतिज दिशा में चलें, फिर y-निर्देशांक के अनुसार ऊर्ध्वाधर दिशा में। जैसे A(-4, 5) को अंकित करने के लिए 4 इकाई बाएँ और 5 इकाई ऊपर जाएँ। B(0, -3) में क्षैतिज चाल नहीं होगी; केवल y-अक्ष पर 3 इकाई नीचे जाएँ। C(6, 0) में x-अक्ष पर 6 इकाई दाएँ जाकर रुकना है। यह साधारण दृश्य-बोध आगे दूरी और विभाजन सूत्र के प्रश्नों को आसान बनाता है, क्योंकि बिंदुओं की लगभग स्थिति पहले से स्पष्ट हो जाती है।
लिपिक-स्तर की संख्यात्मक परीक्षा में पूरा ग्राफ-पेपर बनाना सामान्यतः ज़रूरी नहीं होता। जितना चाहिए उतना रेखाचित्र बनाइए: अक्ष दिखाइए, सही चतुर्थांश पहचानिए और बिंदु के पास उसके निर्देशांक लिख दीजिए। यदि दो बिंदुओं को जोड़ने वाला रेखाखंड अलग-अलग चतुर्थांशों में जा रहा है, तो चिह्न पहले ही बता देते हैं कि घटाव कहीं जोड़ जैसा बन सकता है। दोनों बिंदुओं का x-निर्देशांक समान हो तो रेखाखंड ऊर्ध्वाधर होगा, और दोनों का y-निर्देशांक समान हो तो रेखाखंड क्षैतिज होगा। ये दृश्य जाँचें औपचारिक गणना शुरू होने से पहले ही कई गलतियाँ रोक देती हैं।
निर्देशांक तल ज्यामिति को अंकगणित में बदल देता है। लंबाई, मध्य बिंदु और किसी अनुपात में विभाजन बिंदु, बिना बिल्कुल सही आकृति बनाए, निर्देशांकों से निकाले जा सकते हैं। LDC पाठ्यक्रम में लक्ष्य उन्नत विश्लेषणात्मक ज्यामिति नहीं है; अपेक्षा यह है कि अभ्यर्थी क्रमित युग्म, चिह्न, अक्ष, दूरी और दिए गए अनुपात में रेखाखंड-विभाजन को आत्मविश्वास से सँभाल सके। जो विद्यार्थी पहले बिंदु सही जगह समझ लेता है, उसके लिए सूत्र लगाना काफ़ी सरल हो जाता है।
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