मुख्य तथ्य

  • क्षैतिज अक्ष को एक्स-अक्ष और ऊर्ध्वाधर अक्ष को वाई-अक्ष कहते हैं; दोनों का प्रतिच्छेद मूल बिन्दु (0, 0) है।
  • यदि y = 0 हो तो बिन्दु एक्स-अक्ष पर और यदि x = 0 हो तो बिन्दु वाई-अक्ष पर स्थित होता है।
  • मध्य बिन्दु 1:1 आन्तरिक विभाजन का विशेष रूप है; इसमें दोनों निर्देशांकों का साधारण औसत लिया जाता है।

मुख्य बिंदु

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    क्षैतिज अक्ष को एक्स-अक्ष और ऊर्ध्वाधर अक्ष को वाई-अक्ष कहते हैं; दोनों का प्रतिच्छेद मूल बिन्दु (0, 0) है।

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    क्रमित युग्म हमेशा (x, y) के रूप में पढ़ा जाता है; क्रम बदलने पर बिन्दु बदल जाता है।

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    चतुर्थांशों के चिह्न क्रमशः प्रथम (+, +), द्वितीय (-, +), तृतीय (-, -) और चतुर्थ (+, -) होते हैं।

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    यदि y = 0 हो तो बिन्दु एक्स-अक्ष पर और यदि x = 0 हो तो बिन्दु वाई-अक्ष पर स्थित होता है।

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    दो बिन्दुओं के बीच दूरी निकालते समय x-अन्तर और y-अन्तर के वर्गों का योग लेकर उसका धनात्मक वर्गमूल लिया जाता है।

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    क्षैतिज रेखाखंड में दूरी x-निर्देशांकों के निरपेक्ष अन्तर के बराबर और ऊर्ध्वाधर रेखाखंड में y-निर्देशांकों के निरपेक्ष अन्तर के बराबर होती है।

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    दूरी का वर्ग पहले निकालना बहुविकल्पीय प्रश्नों में तेज और सुरक्षित जाँच देता है।

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    आन्तरिक विभाजन में बिन्दु रेखाखंड के भीतर होता है और सूत्र में अंश में योग तथा हर में म + न आता है।

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    मध्य बिन्दु 1:1 आन्तरिक विभाजन का विशेष रूप है; इसमें दोनों निर्देशांकों का साधारण औसत लिया जाता है।

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    बाह्य विभाजन में बिन्दु रेखाखंड के बाहर उसी सीधी रेखा पर होता है और सूत्र में म - न वाला हर आता है।

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    बाह्य विभाजन में म = न होने पर हर शून्य हो जाता है, इसलिए कोई सीमित बाह्य विभाजन बिन्दु नहीं मिलता।

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    अनुपात की दिशा, जैसे AP:PB = म:न, लिखे बिना अनुभाग सूत्र लगाने से उत्तर उलट सकता है।

निर्देशांक तल क्या है और इसे कैसे पढ़ते हैं?

निर्देशांक तल में हर बिन्दु को एक्स-निर्देशांक और वाई-निर्देशांक की क्रमित जोड़ी से पढ़ते हैं; पहली संख्या क्षैतिज दिशा और दूसरी संख्या ऊर्ध्वाधर दिशा बताती है। राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड, जयपुर के आधिकारिक लिपिक ग्रेड-द्वितीय/कनिष्ठ सहायक संयुक्त भर्ती विज्ञापन के अनुसार इस भर्ती में कुल ४१९७ पद थे। कार्तीय निर्देशांक ज्यामिति में समतल के हर बिन्दु को दो संख्याओं से बताया जाता है। क्षैतिज संख्या-रेखा एक्स-अक्ष और ऊर्ध्वाधर संख्या-रेखा वाई-अक्ष कहलाती है। दोनों जहाँ मिलते हैं, वह मूल बिन्दु होता है और उसे (०, ०) लिखा जाता है। ये दोनों अक्ष समतल को चार भागों में बाँटते हैं, जिन्हें चतुर्थांश कहते हैं। परीक्षा में आरम्भिक गलती प्रायः क्रमित युग्म को लापरवाही से पढ़ने पर होती है। पहली संख्या हमेशा एक्स-अक्ष से जुड़ी होती है और दूसरी संख्या हमेशा वाई-अक्ष से। इसलिए (३, -२) का अर्थ है मूल बिन्दु से ३ इकाई दाएँ और फिर २ इकाई नीचे जाना; यह (-२, ३) वाला बिन्दु नहीं है।

हर निर्देशांक का चिह्न दिशा बताता है। एक्स धनात्मक हो तो दाएँ जाना है और एक्स ऋणात्मक हो तो बाएँ। वाई धनात्मक हो तो ऊपर जाना है और वाई ऋणात्मक हो तो नीचे। इसी से चतुर्थांशों का चिह्न-क्रम बनता है: प्रथम चतुर्थांश (+, +), द्वितीय (-, +), तृतीय (-, -) और चतुर्थ (+, -)। अक्षों पर पड़े बिन्दु किसी चतुर्थांश में नहीं गिने जाते। यदि वाई = ० है तो बिन्दु एक्स-अक्ष पर है, और यदि एक्स = ० है तो बिन्दु वाई-अक्ष पर है। मूल बिन्दु अकेला ऐसा बिन्दु है जहाँ दोनों निर्देशांक शून्य होते हैं।

बिन्दु अंकित करना दो चरणों का काम है। पहले मूल बिन्दु से एक्स-निर्देशांक के अनुसार क्षैतिज दिशा में चलें, फिर वाई-निर्देशांक के अनुसार ऊर्ध्वाधर दिशा में। जैसे अ(-४, ५) को अंकित करने के लिए ४ इकाई बाएँ और ५ इकाई ऊपर जाएँ। ब(०, -३) में क्षैतिज चाल नहीं होगी; केवल वाई-अक्ष पर ३ इकाई नीचे जाएँ। स(६, ०) में एक्स-अक्ष पर ६ इकाई दाएँ जाकर रुकना है। यह साधारण दृश्य-बोध आगे दूरी और विभाजन सूत्र के प्रश्नों को आसान बनाता है, क्योंकि बिन्दुओं की मोटी स्थिति पहले से स्पष्ट हो जाती है।

एलडीसी स्तर की संख्यात्मक परीक्षा में पूरा ग्राफ-पेपर बनाना सामान्यतः जरूरी नहीं होता। जितना चाहिए उतना रेखाचित्र बनाइए: अक्ष दिखाइए, सही चतुर्थांश पहचानिए और बिन्दु के पास उसके निर्देशांक लिख दीजिए। यदि दो बिन्दुओं को जोड़ने वाला रेखाखंड अलग-अलग चतुर्थांशों में जा रहा है, तो चिह्न पहले ही बता देते हैं कि घटाव कहीं जोड़ जैसा बन सकता है। दोनों बिन्दुओं का एक्स समान हो तो रेखाखंड ऊर्ध्वाधर होगा, और दोनों का वाई समान हो तो रेखाखंड क्षैतिज होगा। ये दृश्य जाँचें औपचारिक गणना शुरू होने से पहले ही कई गल्तियाँ रोक देती हैं।

निर्देशांक तल ज्यामिति को अंकगणित में बदल देता है। लंबाई, मध्य बिन्दु और किसी अनुपात में विभाजन बिन्दु, बिना बिल्कुल सही आकृति बनाए, निर्देशांकों से निकाले जा सकते हैं। इस पाठ्यांश में लक्ष्य उन्नत विश्लेषणात्मक ज्यामिति नहीं है; अपेक्षा यह है कि अभ्यर्थी क्रमित युग्म, चिह्न, अक्ष, दूरी और दिए गए अनुपात में रेखाखंड-विभाजन को आत्मविश्वास से सँभाल सके। जो विद्यार्थी पहले बिन्दु सही जगह समझ लेता है, उसके लिए सूत्र लगाना काफी सरल हो जाता है।