एक बिन्दु पर रेखाएँ एवं कोण; त्रिभुजों की सर्वांगसमता एवं समरूपता
मुख्य तथ्य
- रेखीय युग्म में दो आसन्न कोणों की असमान भुजाएँ सीधी रेखा बनाती हैं, इसलिए उनका योग 180 डिग्री होता है।
- किसी एक बिंदु के चारों ओर बने सभी कोणों का योग 360 डिग्री होता है।
- हर त्रिभुज के आंतरिक कोणों का योग 180 डिग्री होता है।
मुख्य बिंदु
- 1
आसन्न कोणों का शीर्ष और एक भुजा समान होती है, पर वे आवश्यक रूप से बराबर नहीं होते।
- 2
रेखीय युग्म में दो आसन्न कोणों की असमान भुजाएँ सीधी रेखा बनाती हैं, इसलिए उनका योग 180 डिग्री होता है।
- 3
दो सीधी रेखाएँ प्रतिच्छेद करें तो शीर्षाभिमुख कोण बराबर होते हैं।
- 4
किसी एक बिंदु के चारों ओर बने सभी कोणों का योग 360 डिग्री होता है।
- 5
हर त्रिभुज के आंतरिक कोणों का योग 180 डिग्री होता है।
- 6
त्रिभुज का बाह्य कोण सामने के दो आंतरिक कोणों के योग के बराबर होता है।
- 7
समद्विबाहु त्रिभुज में बराबर भुजाओं के सामने के कोण बराबर होते हैं।
- 8
त्रिभुज सर्वांगसमता की वैध कसौटियाँ भुजा-भुजा-भुजा, भुजा-कोण-भुजा, कोण-भुजा-कोण, कोण-कोण-भुजा और समकोण-कर्ण-भुजा हैं।
- 9
संगत भागों की बराबरी सर्वांगसमता सिद्ध होने के बाद प्रयोग होती है; यह अलग सर्वांगसमता कसौटी नहीं है।
- 10
तीन बराबर कोण समरूपता देते हैं, सर्वांगसमता नहीं, क्योंकि उनसे आकार तय होता है पर माप नहीं।
- 11
त्रिभुज समरूपता की वैध कसौटियाँ कोण-कोण, भुजा-भुजा-भुजा समरूपता और भुजा-कोण-भुजा समरूपता हैं।
- 12
समरूप त्रिभुजों में संगत कोण बराबर और संगत भुजाएँ आनुपातिक होती हैं।
- 13
सर्वांगसमता या समरूपता के कथन में अक्षरों का क्रम संगत भुजाओं और कोणों को तय करता है।
- 14
समरूप त्रिभुजों के परिमापों का अनुपात संगत भुजाओं के अनुपात के बराबर होता है।
- 15
समरूप त्रिभुजों के क्षेत्रफलों का अनुपात संगत भुजाओं के अनुपात के वर्ग के बराबर होता है।
- 16
माध्यिका सामने की भुजा को दो बराबर भागों में बाँटती है और त्रिभुज को बराबर क्षेत्रफल वाले दो भागों में बाँटती है।
एक बिंदु पर कोणों की जरूरी शब्दावली क्या है?
एक बिंदु पर कोणों की जरूरी शब्दावली में आसन्न कोण, रेखीय युग्म, शीर्षाभिमुख कोण, पूरक कोण, संपूरक कोण और बिंदु के चारों ओर ३६० डिग्री का कोण-योग शामिल है। राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड, जयपुर के आधिकारिक लिपिक ग्रेड-द्वितीय/कनिष्ठ सहायक संयुक्त भर्ती विज्ञापन के अनुसार इस भर्ती में कुल ४१९७ पद थे। एक बिंदु पर रेखाएँ और कोण ज्यामिति के छोटे लेकिन बहुत उपयोगी आधार हैं। दो किरणें जब एक ही अंतिम बिंदु पर मिलती हैं, तो कोण बनता है; उस सामान्य बिंदु को शीर्ष कहते हैं। वस्तुनिष्ठ प्रश्नों में एक ही बिंदु से कई किरणें निकली हो सकती हैं, और काम चित्र को समीकरण में बदलने का होता है। पहले हर कोण को शीर्ष और दोनों भुजाओं से पहचानें, फिर देखें कि कौन-सा मानक संबंध लागू हो रहा है।
आसन्न कोण वे दो कोण हैं जिनका शीर्ष समान हो, एक भुजा समान हो और भीतर का भाग एक-दूसरे पर चढ़ा हुआ न हो। यदि एक किरण दो अन्य किरणों के बीच में है, तो बीच वाली किरण के दोनों ओर बने छोटे कोण आसन्न होंगे। उनके माप जोड़कर बाहरी किरणों से बने बड़े कोण का माप मिल सकता है। जैसे कोण कखग ३५ डिग्री और कोण गखघ ५० डिग्री हों और दोनों आसन्न हों, तो कोण कखघ ८५ डिग्री होगा। आसन्न का अर्थ बराबर नहीं है; यह केवल साथ-साथ स्थित होने और एक भुजा साझा करने की सूचना देता है।
रेखीय युग्म आसन्न कोणों का विशेष रूप है। इसमें दोनों कोणों की असमान भुजाएँ मिलकर एक सीधी रेखा बनाती हैं, इसलिए उनका योग १८० डिग्री होता है। यह परीक्षा में सबसे अधिक काम आने वाला तथ्य है। यदि रेखीय युग्म का एक कोण ११८ डिग्री है, तो दूसरा ६२ डिग्री होगा। यदि दोनों कोण क + २० और २क - १० लिखे हों, तो उनका योग १८० रखकर क निकाला जाएगा। सामान्य गलती यह है कि हर आसन्न कोणों को रेखीय युग्म मान लिया जाता है; रेखीय युग्म तभी होगा जब बाहर की भुजाएँ एक ही सीधी रेखा की विपरीत किरणें हों।
शीर्षाभिमुख कोण दो सीधी रेखाओं के प्रतिच्छेद से बनते हैं। शीर्ष के आर-पार आमने-सामने के कोण बराबर होते हैं। यदि चार कोणों में से एक ७० डिग्री है, तो उसका शीर्षाभिमुख कोण भी ७० डिग्री होगा। उससे लगे हुए दोनों कोण ११० डिग्री होंगे, क्योंकि प्रत्येक ७० डिग्री के साथ रेखीय युग्म बनाता है। इसलिए दो रेखाओं के प्रतिच्छेद में एक कोण ज्ञात हो तो चारों कोण मिल जाते हैं।
किसी बिंदु के चारों ओर कोणों का योग ३६० डिग्री होता है। जब कई किरणें एक बिंदु के चारों ओर पूरे घुमाव को छोटे-छोटे कोणों में बाँटती हैं, तो वे सभी कोण मिलकर ३६० डिग्री देते हैं। यदि चार कोण ८० डिग्री, ९५ डिग्री, ११० डिग्री और क हों, तो क = ७५ डिग्री होगा। “बिंदु के चारों ओर” का संकेत पूरे घुमाव का है, सीधी रेखा का नहीं।
दो और जोड़े याद रखें। पूरक कोणों का योग ९० डिग्री होता है और संपूरक कोणों का योग १८० डिग्री। हर रेखीय युग्म संपूरक होता है, पर हर संपूरक जोड़ा आसन्न हो यह जरूरी नहीं। ४० डिग्री और १४० डिग्री अलग-अलग स्थानों पर भी संपूरक कहलाएँगे। इस स्तर के प्रश्नों में मुख्य निर्णय ९०, १८० और ३६० डिग्री में से सही आधार चुनना है। समकोण ९० डिग्री, सरल कोण १८० डिग्री और पूर्ण कोण ३६० डिग्री होता है; यह साफ हो जाए तो अधिकांश प्रश्न एक पंक्ति के समीकरण में बदल जाते हैं।
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