एक एवं दो चर वाले रैखिक समीकरण; द्विघात समीकरण; लघुगणक
मुख्य तथ्य
- द्विघात समीकरण को पहले ax^2 + bx + c = 0 के मानक रूप में लाएँ, जहाँ a शून्य नहीं होना चाहिए।
- विविक्तकर D = b^2 - 4ac से पता चलता है कि मूल दो अलग वास्तविक, बराबर वास्तविक या वास्तविक नहीं हैं।
- वास्तविक लघुगणक में आधार धनात्मक और 1 से अलग होना चाहिए, तथा मानांक धनात्मक होना चाहिए।
- आधार परिवर्तन से लॉग_a b = लॉग_c b / लॉग_c a मिलता है और लॉग_a b x लॉग_b a = 1 जैसे छोटे परिणाम जल्दी निकलते हैं।
मुख्य बिंदु
- 1
एक चर वाला रैखिक समीकरण चर को अकेला करके हल किया जाता है, लेकिन बराबरी का संतुलन दोनों पक्षों पर बना रहना चाहिए।
- 2
पक्षांतरण संतुलित क्रियाओं का छोटा रूप है; जोड़-घटाव और गुणा-भाग के उलटे संबंध को चिह्नों सहित सही बदलना जरूरी है।
- 3
भिन्न वाले रैखिक समीकरणों में हर हटाने के लिए हरों के लघुत्तम समापवर्त्य से पूरे समीकरण को गुणा करें।
- 4
शब्द-प्रश्न में पहले चर परिभाषित करें, फिर हर शर्त को समीकरण में बदलें, हल करें और उत्तर को कथन में जाँचें।
- 5
दो चर वाले रैखिक समीकरण का हल क्रमित युग्म होता है; (x, y) और (y, x) अपने-आप समान नहीं माने जाते।
- 6
दो युगपत रैखिक समीकरणों में गुणांक जल्दी मिल सकें तो विलोपन विधि और कोई चर आसानी से अलग हो तो प्रतिस्थापन विधि बेहतर रहती है।
- 7
द्विघात समीकरण को पहले ax^2 + bx + c = 0 के मानक रूप में लाएँ, जहाँ a शून्य नहीं होना चाहिए।
- 8
गुणनखंडन शून्य-गुणनफल नियम पर आधारित है: दो गुणनखंडों का गुणनफल शून्य हो तो कम से कम एक गुणनखंड शून्य होगा।
- 9
विविक्तकर D = b^2 - 4ac से पता चलता है कि मूल दो अलग वास्तविक, बराबर वास्तविक या वास्तविक नहीं हैं।
- 10
द्विघात सूत्र मानक रूप में दिए गए किसी भी द्विघात के मूल देता है, खासकर तब जब गुणनखंड तुरंत न दिखें।
- 11
लघुगणक घात संबंध को दोबारा लिखता है: a^x = N का अर्थ लॉग_a N = x है।
- 12
वास्तविक लघुगणक में आधार धनात्मक और 1 से अलग होना चाहिए, तथा मानांक धनात्मक होना चाहिए।
- 13
लघुगणक के नियम गुणनफल, भागफल और घात पर लागू होते हैं; वे मानांकों के योग या अंतर को सीधे जोड़-घटाव में नहीं बदलते।
- 14
आधार परिवर्तन से लॉग_a b = लॉग_c b / लॉग_c a मिलता है और लॉग_a b x लॉग_b a = 1 जैसे छोटे परिणाम जल्दी निकलते हैं।
एलडीसी में रैखिक समीकरण, द्विघात और लघुगणक कैसे पढ़ें?
एलडीसी में रैखिक समीकरण, दो चर वाले युगपत रैखिक समीकरण, द्विघात समीकरण और लघुगणक को रूप पहचानकर, सही क्रिया चुनकर और अंत में प्रतिस्थापन से जाँचकर पढ़ना चाहिए। राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के आधिकारिक एलडीसी पाठ्यक्रम में प्रश्न-पत्र प्रथम का पूर्णांक १०० अंक दिया गया है।
यह अध्याय एलडीसी स्तर की गणितीय योग्यता में सीधे नाम से आने वाले भाग से जुड़ा है: रैखिक समीकरण, दो चर वाले युगपत रैखिक समीकरण, द्विघात समीकरण और लघुगणक। उपलब्ध प्रश्न-पत्रों से हर उप-प्रकार का बहुत मजबूत संकेत नहीं मिलता, इसलिए तैयारी को प्रक्रिया-केंद्रित रखना चाहिए। लक्ष्य यह नहीं है कि बीजगणित को बहुत गहराई से सिद्ध किया जाए; लक्ष्य है रूप पहचानना, सबसे तेज़ सही क्रिया चुनना, चिह्नों को नियंत्रण में रखना और विकल्प भरने से पहले उत्तर की जाँच करना।
समीकरण बताता है कि दो बीजीय राशियाँ बराबर हैं। इसमें एक चर हो सकता है, जैसे x, या दो चर हो सकते हैं, जैसे × और y। हल करने का अर्थ है ऐसा मान या ऐसे मान निकालना जिनसे बराबरी सही हो जाए। बराबर का चिह्न केवल सजावट नहीं है। एक पक्ष पर जो क्रिया की जाती है, उसी संतुलन को दूसरे पक्ष पर भी बनाए रखना पड़ता है; हाँ, परीक्षा में उसी बात को संक्षेप में पक्षांतरण के रूप में लिखा जाता है। जैसे × + ७ = १९ से × = १२ मिलता है, क्योंकि दोनों पक्षों से ७ घटाने पर बराबरी बनी रहती है। विद्यार्थी अक्सर कहते हैं कि +७ दूसरी तरफ जाकर -७ हो गया। यह तरीका तभी सुरक्षित है जब संतुलन का विचार साफ़ हो।
समीकरणों में सबसे पक्की जाँच प्रतिस्थापन है। हल निकालने के बाद उत्तर को मूल समीकरण में रखें, किसी बीच वाली सरल पंक्ति में नहीं, क्योंकि गलती उसी पंक्ति में आ चुकी हो सकती है। यदि ३x - ५ = १६ से × = ७ मिला, तो मूल समीकरण में जाँच करें: ३ × ७ - ५ = २१ - ५ = १६। एक चर वाले समीकरणों में यह जाँच पूरा हल दोबारा करने से तेज़ होती है और चिह्न, हर तथा गलत पक्षांतरण जैसी गलतियाँ पकड़ लेती है।
इस भाग में बीजगणित अक्सर भाषा से जुड़ जाता है। योग, अंतर, गुणनफल, भागफल, दुगुना, तिगुना, अधिक, कम, से अधिक और से कम जैसे शब्दों को सावधानी से समीकरण में बदलना पड़ता है। 'किसी संख्या से ५ कम' का रूप × - ५ होगा, लेकिन '५ किसी संख्या से १२ कम है' का अर्थ × - ५ = १२ की ओर जाता है। 'एक संख्या दूसरी संख्या से ४ अधिक है' को × = y + ४ लिखा जा सकता है। कार्य की पहली पंक्ति में चर की साफ़ परिभाषा होनी चाहिए, जैसे 'मान लें संख्या × है' या 'मान लें दोनों संख्याएँ × और y हैं'। इस पंक्ति के बिना शब्द-प्रश्न अनुमान लगाने जैसा बन जाता है।
पहचानने योग्य मुख्य रूप हैं: सरल रैखिक समीकरण, भिन्नों वाले रैखिक समीकरण, दो युगपत रैखिक समीकरण, द्विघात समीकरण और लघुगणकीय सरलीकरण या समीकरण। रैखिक का अर्थ है कि सरल करने के बाद चर की घात १ हो। द्विघात का अर्थ है कि उच्चतम घात २ हो। लघुगणक घात संबंध को लिखने का दूसरा तरीका है। इन रूपों को मिलाकर नहीं चलना चाहिए। जैसे x² + ५x + ६ = ० को साधारण रैखिक पक्षांतरण से हल नहीं किया जाता, और लॉग_a m + लॉग_a n, लॉग_a(m + n) के बराबर नहीं होता। रूप की सही पहचान ही गति का पहला साधन है।
एलडीसी स्तर की गणना में चरण छोटे रखें, पर अदृश्य नहीं। हर हटाने की एक साफ़ पंक्ति, समान पदों को इकट्ठा करने की एक पंक्ति और उत्तर की एक पंक्ति प्रायः काफी होती है। ऋण चिह्न और भिन्न साथ हों तो मन में बहुत बड़ी छलाँग न लगाएँ। जहाँ विस्तार की जरूरत न हो वहाँ कोष्ठक खोलकर संख्या बड़ी न करें। समीकरणों में सही और छोटा रास्ता सामान्यतः वही है जो संरचना बचाए रखे: हर साफ़ करें, समान पद मिलाएँ, जहाँ संभव हो गुणनखंड करें और अंत में प्रतिस्थापन से जाँच करें।
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