मुख्य तथ्य

  • यदि N = p घात a × q घात b × r घात c है, तो धनात्मक गुणनखण्डों की संख्या (a + 1)(b + 1)(c + 1) होगी।
  • गुणनखण्डों का योग हर अभाज्य-घात की श्रृंखला, जैसे (1 + p + p वर्ग + ... + p घात a), को गुणा करके निकाला जाता है।
  • 120 = 2 घन × 3 × 5 के लिए धनात्मक गुणनखण्डों की संख्या 16 और सभी धनात्मक गुणनखण्डों का योग 360 है।
  • विषम गुणनखण्ड गिनने या उनका योग निकालने के लिए अभाज्य गुणनखण्डन में 2 की घात को छोड़ दिया जाता है।
  • द्विघात त्रिपदों में गुणनफल-योग सोच या x वर्ग का गुणांक 1 न होने पर मध्य पद विभाजन काम आता है।

मुख्य बिंदु

  1. 1

    गुणनखण्ड किसी संख्या या व्यंजक को पूरा-पूरा विभाजित करता है; गुणज किसी संख्या को पूर्णांक से गुणा करने पर मिलता है।

  2. 2

    अभाज्य गुणनखण्डन भाजक-प्रश्नों को घातों के चुनाव में बदल देता है, इसलिए गिनती और योग के सूत्र भरोसेमंद बनते हैं।

  3. 3

    यदि N = p घात a × q घात b × r घात c है, तो धनात्मक गुणनखण्डों की संख्या (a + 1)(b + 1)(c + 1) होगी।

  4. 4

    गुणनखण्डों का योग हर अभाज्य-घात की श्रृंखला, जैसे (1 + p + p वर्ग + ... + p घात a), को गुणा करके निकाला जाता है।

  5. 5

    120 = 2 घन × 3 × 5 के लिए धनात्मक गुणनखण्डों की संख्या 16 और सभी धनात्मक गुणनखण्डों का योग 360 है।

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    विषम गुणनखण्ड गिनने या उनका योग निकालने के लिए अभाज्य गुणनखण्डन में 2 की घात को छोड़ दिया जाता है।

  7. 7

    बीजीय गुणनखण्डन में पहले सामान्य गुणनखण्ड निकालें; उसके बाद समूहन या सर्वसमिका लगाएँ।

  8. 8

    समूहन तब सफल होता है जब अलग-अलग जोड़ियों से एक ही कोष्ठक बन जाए और वह कोष्ठक सामान्य गुणनखण्ड बन सके।

  9. 9

    वर्गों का अंतर a वर्ग - b वर्ग = (a - b)(a + b) है; इस स्तर पर वर्गों के योग को उसी तरह नहीं तोड़ा जाता।

  10. 10

    पूर्ण-वर्ग त्रिपद में पहला और अंतिम पद वर्ग होते हैं तथा मध्य पद उनके वर्गमूलों के गुणनफल का दुगुना होता है।

  11. 11

    द्विघात त्रिपदों में गुणनफल-योग सोच या x वर्ग का गुणांक 1 न होने पर मध्य पद विभाजन काम आता है।

  12. 12

    गुणनखण्ड प्रमेय के अनुसार यदि p(a) = 0 हो, तो x - a, p(x) का गुणनखण्ड है।

  13. 13

    सरलीकरण में केवल समान गुणनखण्ड काटे जाते हैं; जोड़ या घटाव के भीतर अलग पदों को नहीं काटा जा सकता।

  14. 14

    समीकरणों में सभी पद एक ओर लाकर पूरा गुणनखण्डन करें और फिर शून्य-गुणनफल नियम लगाएँ।

गुणनखण्ड और बहुपदों का गुणनखण्डन एलडीसी परीक्षा में कैसे पढ़ें?

एलडीसी परीक्षा में गुणनखण्ड और बहुपदों का गुणनखण्डन संख्या-आधारित भाषा, बीजीय पहचान और तेज जाँच की संयुक्त अभ्यास-इकाई की तरह पढ़ना चाहिए।

यह अध्याय किताब में दो अलग हिस्सों जैसा दिखता है, लेकिन परीक्षा में दोनों का व्यवहार एक जैसा है: संख्याओं के गुणनखण्ड और बीजीय गुणनखण्डन। एलडीसी गणित के सिलेबस में गुणनखण्ड और बहुपदों का गुणनखण्डन अलग-अलग नाम से आते हैं, इसलिए तैयारी केवल विभाज्यता तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। सीईटी वरिष्ठ माध्यमिक के हाल के परीक्षा-संकेत में १२० के सभी गुणनखण्डों का योग पूछने वाला सीधा प्रश्न आया था। दूसरी ओर बहुपदों का गुणनखण्डन सिलेबस-आधारित क्षेत्र है, जहाँ तेज पहचान सामान्य बहुविकल्पीय प्रश्न में समय बचा सकती है। इसलिए इस अध्याय को भारी प्रमाणों वाला बीजगणित नहीं, बल्कि गति और शुद्धता का अभ्यास-खंड मानकर पढ़ना चाहिए।

राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की समान पात्रता परीक्षा वरिष्ठ माध्यमिक स्तर २०२४ की योजना में प्रश्नों की संख्या १५० दी गई है, इसलिए समय बचाने वाली गुणनखण्ड-भाषा एलडीसी-स्तर की तैयारी में भी काम आती है।

किसी संख्या का गुणनखण्ड वह संख्या है जो उसे पूरा-पूरा विभाजित करे। जैसे ६, ४२ का गुणनखण्ड है क्योंकि ४२ को ६ से भाग देने पर ७ मिलता है और शेषफल शून्य रहता है। गुणज उल्टी दिशा में चलता है: ४२, ६ का गुणज है क्योंकि ४२ को ६ गुणा ७ लिखा जा सकता है। संख्यात्मक प्रश्नों में जाल अक्सर भाषा में होता है। “१२० के गुणनखण्ड” का अर्थ १२० के भाजक हैं; “१२० के गुणज” का अर्थ १२०, २४०, ३६० जैसी संख्याएँ हैं। किसी निश्चित धनात्मक पूर्णांक के गुणनखण्ड सीमित होते हैं, जबकि धनात्मक गुणज अनंत चलते हैं।

बीजगणित में गुणनखण्ड वह व्यंजक है जो किसी दूसरे व्यंजक को पूरा-पूरा विभाजित करे। यदि x वर्ग - ९ को (x - ३)(x + ३) लिखा जाए, तो x - ३ और x + ३ उस बहुपद के गुणनखण्ड हैं। पूरा-पूरा विभाजन का विचार वही रहता है, केवल संख्याओं की जगह व्यंजक आ जाते हैं। सामान्य गुणनखण्ड वह भाग है जो हर पद में मौजूद हो। जैसे ६x वर्ग + ९x में सामान्य गुणनखण्ड ३x है, इसलिए व्यंजक ३x(२x + ३) बनता है। यह संख्याओं में समान अभाज्य भाग बाहर निकालने का बीजीय रूप है।

परीक्षा में मुख्य कौशल यह है कि लंबी गणना शुरू करने से पहले तरीका चुन लिया जाए। प्रश्न संख्यात्मक हो तो पहले अभाज्य गुणनखण्डन और भाजक-सूत्र देखें। बीजीय प्रश्न में हर पद में कुछ साझा हो तो पहले सामान्य गुणनखण्ड बाहर निकालें। चार पद हों तो समूहन तेज हो सकता है। व्यंजक a वर्ग - b वर्ग जैसी सर्वसमिका से मिलता हो तो सर्वसमिका तुरंत लगाएँ। द्विघात त्रिपद ax वर्ग + bx + c रूप में हो तो मध्य पद विभाजन के लिए गुणनफल-योग वाली सोच अपनाएँ।

एक उपयोगी मानसिक जाँच है: सही गुणनखण्डन को वापस गुणा करने पर मूल व्यंजक मिलना चाहिए। बहुविकल्पीय प्रश्नों में कई गलत विकल्प चिह्न की गलती पर बने होते हैं। जैसे (x - ५)(x - २) से x वर्ग - ७x + १० मिलता है, x वर्ग + ७x + १० नहीं। इसी तरह (a - b) वर्ग का विस्तार a वर्ग - २ab + b वर्ग है, a वर्ग - b वर्ग नहीं। ऋण चिह्न वर्ग में सीधे वैसे नहीं चला जाता जैसे कई विद्यार्थी जल्दी में मान लेते हैं।

एलडीसी स्तर की गणितीय दक्षता में हर प्रश्न के लिए छोटा क्रम रखें। पहले पहचानें कि प्रश्न संख्या-आधारित है या व्यंजक-आधारित। दूसरे, आवश्यक सबसे छोटा गुणनखण्ड रूप लिखें। तीसरे, सूत्र या सर्वसमिका लगाएँ। चौथे, उत्तर को मान रखकर, गुणा करके या विभाज्यता से जाँच लें। यह चार-कदम आदत अध्याय को तेज रखती है, पर उसे यांत्रिक नहीं बनाती। इससे सूत्र याद होने के बावजूद प्रश्न की सही भाषा चूकने वाली सामान्य गलती भी कम होती है।