वर्ग, घन, वर्गमूल एवं घनमूल — वैदिक विधि से (6 अंकों तक की संख्याएँ)
मुख्य तथ्य
- 5 पर समाप्त संख्या के वर्ग में 5 से पहले के भाग को उसके अगले पूर्णांक से गुणा करें और अंत में 25 जोड़ दें।
- (क + ख)^2 = क^2 + 2कख + ख^2 अधिकांश वर्ग-शॉर्टकटों का मूल सूत्र है।
- घन के लिए क^3 + 3क^2ख + 3कख^2 + ख^3 वाला विस्तार तभी तेज है जब सुधार छोटा और गुणन व्यवस्थित हो।
- पूर्ण वर्ग 2, 3, 7 या 8 पर समाप्त नहीं हो सकता; ऐसे अंतिम अंक तुरंत अस्वीकार किए जा सकते हैं।
- 6 अंकों तक के पूर्ण वर्ग का पूर्णांक वर्गमूल 1 से 999 तक हो सकता है।
मुख्य बिंदु
- 1
आधार के पास वर्ग में संख्या की अधिकता या कमी निकालकर बायाँ भाग समायोजित करें और दाएँ भाग में उसी अधिकता या कमी का वर्ग निश्चित अंकों में लिखें।
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5 पर समाप्त संख्या के वर्ग में 5 से पहले के भाग को उसके अगले पूर्णांक से गुणा करें और अंत में 25 जोड़ दें।
- 3
(क + ख)^2 = क^2 + 2कख + ख^2 अधिकांश वर्ग-शॉर्टकटों का मूल सूत्र है।
- 4
घन के लिए क^3 + 3क^2ख + 3कख^2 + ख^3 वाला विस्तार तभी तेज है जब सुधार छोटा और गुणन व्यवस्थित हो।
- 5
बड़ी संख्या में संक्षिप्त विधि तभी लाभ देती है जब आधार साफ हो; बड़ा सुधार हो तो सामान्य गुणा या विकल्प-छँटाई अधिक सुरक्षित हो सकती है।
- 6
वर्गमूल में दाएँ से दो-दो अंकों के युग्म बनते हैं और पहले अंक का अनुमान सबसे बाएँ समूह से लगाया जाता है।
- 7
पूर्ण वर्ग 2, 3, 7 या 8 पर समाप्त नहीं हो सकता; ऐसे अंतिम अंक तुरंत अस्वीकार किए जा सकते हैं।
- 8
वर्ग का अंतिम अंक केवल संभावित अंतिम अंक बताता है, अंतिम उत्तर नहीं; उसे परास और वर्ग करके जाँच से मिलाना जरूरी है।
- 9
6 अंकों तक के पूर्ण वर्ग का पूर्णांक वर्गमूल 1 से 999 तक हो सकता है।
- 10
घनमूल में अंतिम अंक का मानचित्र एक-से-एक है: 0→0, 1→1, 2→8, 3→7, 4→4, 5→5, 6→6, 7→3, 8→2, 9→9।
- 11
6 अंकों तक के पूर्ण घन का पूर्णांक घनमूल 1 से 99 तक होगा, क्योंकि 100^3 सात अंकों का है।
- 12
घनमूल में अंतिम तीन अंकों को अलग करके बाएँ समूह की तुलना 1 से 9 तक के घनों से की जाती है।
- 13
सन्निकट मूल को सटीक मूल नहीं मानना चाहिए; प्रस्तावित मूल का वर्ग या घन मूल संख्या से मिलना चाहिए।
- 14
हर संक्षिप्त विधि के बाद अंतिम अंक, आकार-परास या उलटी क्रिया से उत्तर की जाँच करनी चाहिए।
वर्ग, घन, वर्गमूल और घनमूल में परीक्षा क्या पूछती है?
वर्ग, घन, वर्गमूल और घनमूल में परीक्षा मुख्य रूप से यह पूछती है कि विद्यार्थी बड़े गुणा-भाग में उलझे बिना संख्या का स्वरूप पहचानकर तेज, साफ और जाँच योग्य गणना कर सकता है या नहीं। यह विषय सिद्धान्त याद करने से अधिक गणना-गति का विषय है। पाठ्यक्रम में ६ अंकों तक की पूर्ण संख्याओं के वर्ग, घन, वर्गमूल और घनमूल को वैदिक या संक्षिप्त विधियों से निकालना दिया गया है। राजस्थान लोक सेवा आयोग के आधिकारिक एलडीसी पेपर प्रथम पाठ्यक्रम में यह उपविषय ६ अंकों तक की संख्याओं के लिए दिया गया है। इसका अर्थ यह नहीं है कि हर प्रश्न केवल मन से हल होगा। अर्थ यह है कि जहाँ स्वरूप साफ दिखे, वहाँ लंबा गुणा या लंबा भाग घटाकर छोटा, जाँच योग्य काम किया जाए। परीक्षा में सही विधि पहचानना, उसे व्यवस्थित लिखना और अंत में उत्तर की जाँच करना तीनों बराबर महत्त्व रखते हैं।
वर्ग के लिए मुख्य आधार सूत्र हैं: (क + ख)^२ = क^२ + २कख + ख^२ और (क - ख)^२ = क^२ - २कख + ख^२। निकट-आधार, ५० या १०० के पास की संख्याएँ और ५ पर समाप्त होने वाली संख्याएँ इन्हीं सूत्रों से समझी जाती हैं। जैसे १०३ का वर्ग निकालने के लिए उसे (१०० + ३)^२ मानें तो १०००० + ६०० + ९ = १०६०९ मिलता है। इसी तरह ९८^२ = (१०० - २)^२ = १०००० - ४०० + ४ = ९६०४। यही सोच १०००, १०००० या १००००० जैसे आधारों पर भी काम करती है, बशर्ते सुधार छोटा हो।
घन में मूल सूत्र (क + ख)^३ = क^३ + ३क^२ख + ३कख^२ + ख^३ है। ऋण रूप में (क - ख)^३ = क^३ - ३क^२ख + ३कख^२ - ख^३ होगा। घन में वर्ग से अधिक पद आते हैं, इसलिए आधार और सुधार समझदारी से चुनना जरूरी है। १००२^३ को (१००० + २)^३ से निकालना सरल है, पर ६३८^३ को (६०० + ३८)^३ से निकालना तभी उपयोगी होगा जब लिखावट और गुणन बहुत साफ रखा जाए।
वर्गमूल और घनमूल इन्हीं क्रियाओं को उल्टा पूछते हैं। वर्गमूल का प्रश्न पूछता है कि कौन-सी संख्या का वर्ग दी गई संख्या है। घनमूल का प्रश्न पूछता है कि कौन-सी संख्या का घन दी गई संख्या है। ६ अंकों तक के पूर्ण वर्ग का वर्गमूल अधिकतम ९९९ हो सकता है, क्योंकि १०००^२ सात अंकों में चला जाता है। ६ अंकों तक के पूर्ण घन का पूर्णांक घनमूल अधिकतम ९९ हो सकता है, क्योंकि १००^३ सात अंकों का है।
तीन जाँचें आदत बनानी चाहिए। पहली, अंतिम अंक देखें: पूर्ण वर्ग २, ३, ७ या ८ पर समाप्त नहीं हो सकता। पूर्ण घन किसी भी अंक पर समाप्त हो सकता है, पर हर अंतिम अंक का घनमूल में निश्चित अंतिम अंक होता है। दूसरी, परास देखें: यदि संख्या ४०^२ और ४१^२ के बीच है तो मूल ३९ या ४२ नहीं हो सकता। तीसरी, अंतिम उत्तर को उलटी क्रिया से जाँचें। बिना सत्यापन का छोटा तरीका केवल सुंदर लिखी हुई अटकलबाजी है।
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