मुख्य तथ्य

  • आरपीएससी ईओ/आरओ पाठ्यक्रम में इंदिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी योजना भाग-ब की महत्वपूर्ण नगरीय योजनाओं में आती है।
  • वर्तमान सरकारी पोर्टल पर इसी योजना का नाम मुख्यमंत्री शहरी रोजगार गारंटी योजना दिखता है।
  • भाग-ब 120 अंकों के वस्तुनिष्ठ प्रश्नपत्र में 40 अंकों का हिस्सा है और नगरपालिका कानून, नियम तथा नगरीय योजनाओं से जुड़ा है।
  • यह शहरी मजदूरी रोजगार योजना है; इसे ग्रामीण रोजगार योजना या स्थायी सरकारी भर्ती नहीं मानना चाहिए।
  • वर्तमान पोर्टल जरूरतमंद शहरी परिवारों को 125 दिन रोजगार और 18 से 60 वर्ष आयु-समूह के पंजीकरण का संकेत देता है।

मुख्य बिंदु

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    आरपीएससी ईओ/आरओ पाठ्यक्रम में इंदिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी योजना भाग-ब की महत्वपूर्ण नगरीय योजनाओं में आती है।

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    वर्तमान सरकारी पोर्टल पर इसी योजना का नाम मुख्यमंत्री शहरी रोजगार गारंटी योजना दिखता है।

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    भाग-ब 120 अंकों के वस्तुनिष्ठ प्रश्नपत्र में 40 अंकों का हिस्सा है और नगरपालिका कानून, नियम तथा नगरीय योजनाओं से जुड़ा है।

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    यह शहरी मजदूरी रोजगार योजना है; इसे ग्रामीण रोजगार योजना या स्थायी सरकारी भर्ती नहीं मानना चाहिए।

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    वर्तमान पोर्टल जरूरतमंद शहरी परिवारों को 125 दिन रोजगार और 18 से 60 वर्ष आयु-समूह के पंजीकरण का संकेत देता है।

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    आवेदन के लिए जन आधार संख्या या जन आधार पंजीकरण रसीद जरूरी है।

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    पंजीकरण लाभार्थी स्वयं भी कर सकता है और ई-मित्र के माध्यम से भी कराया जा सकता है।

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    प्रशासनिक क्रम पंजीकरण, जॉब कार्ड, कार्य मांग, कार्य आवंटन, उपस्थिति या मस्टर, भुगतान और शिकायत निवारण है।

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    अनुमत कार्यों में पर्यावरण संरक्षण, पौधारोपण, पार्क रखरखाव, स्वच्छता से जुड़े कार्य और जल संरक्षण शामिल हैं।

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    नगरीय निकाय योजना में कार्य पहचान, स्वीकृति, कार्यस्थल निगरानी, अभिलेख रखरखाव और रिपोर्टिंग करते हैं।

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    जॉब कार्ड, मांग, कार्य और मास्टर रिपोर्ट ईओ/आरओ के लिए अभिलेख नियंत्रण और पारदर्शिता के प्रमुख संकेत हैं।

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    मनरेगा से तुलना करते समय शहरी दायरा, नगरीय निकाय क्रियान्वयन, स्थानीय नागरिक संपत्तियाँ और मजदूरी रोजगार उद्देश्य अलग रखें।

ईओ/आरओ परीक्षा में इंदिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी योजना को किस नाम से पढ़ना चाहिए?

ईओ/आरओ परीक्षा में इंदिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी योजना को पाठ्यक्रम वाले नाम से पहचानते हुए वर्तमान सरकारी पोर्टल पर मुख्यमंत्री शहरी रोजगार गारंटी योजना के रूप में पढ़ना चाहिए। ईओ/आरओ तैयारी में इस योजना को दो नामों के साथ समझना जरूरी है। आरपीएससी के राजस्व अधिकारी ग्रेड-द्वितीय और अधिशासी अधिकारी ग्रेड-चतुर्थ पाठ्यक्रम में इंदिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी योजना को राजस्थान के नगरीय क्षेत्रों में चल रही महत्वपूर्ण योजनाओं में रखा गया है। यही भाग राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, २००९, उससे जुड़े नियमों और नगरीय योजनाओं से संबंधित है। १२० अंकों के वस्तुनिष्ठ प्रश्नपत्र में इस भाग के ४० अंक हैं। आरपीएससी के आधिकारिक पाठ्यक्रम के अनुसार भाग-ब के ४० अंक राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, २००९ और नगरीय निकायों से जुड़ी योजनाओं के लिए हैं। इसलिए यह योजना सामान्य कल्याण योजना भर नहीं है; यह नगरपालिका प्रशासन वाले हिस्से की योजना है, जहाँ नाम, क्रियान्वयन एजेंसी, पात्रता, अभिलेख और नगरीय कार्यों पर प्रश्न बन सकते हैं।

वर्तमान सरकारी पोर्टल पर इसी योजना का नाम मुख्यमंत्री शहरी रोजगार गारंटी योजना दिखाई देता है। स्थानीय स्वशासन विभाग की योजना सूची भी इसे स्थानीय स्वशासन विभाग की योजना के रूप में दर्ज करती है और समर्पित पोर्टल से जोड़ती है। परीक्षा में सावधानी यह है कि पाठ्यक्रम में पुराना नाम इंदिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी योजना है, जबकि वर्तमान पोर्टल और बजट-संदर्भों में मुख्यमंत्री शहरी रोजगार गारंटी योजना नाम चलता है। सामान्य ईओ/आरओ उत्तर में इन्हें अलग-अलग योजना मानने की जल्दी नहीं करनी चाहिए, जब तक प्रश्न खुद पुराने और वर्तमान नाम के बीच औपचारिक फर्क न पूछे। यदि प्रश्न पाठ्यक्रम की भाषा में हो तो पहले पाठ्यक्रम वाला नाम लिखें; वर्तमान पोर्टल, रिपोर्ट और क्रियान्वयन की चर्चा में वर्तमान नाम लिखें।

योजना की असली पहचान शहरी मजदूरी रोजगार है। इसका उद्देश्य पात्र शहरी निवासियों को स्थानीय सार्वजनिक कार्यों के माध्यम से मजदूरी वाला काम देना है। यह बिना काम के नकद अंतरण नहीं है और न ही स्थायी सरकारी नौकरी देने की भर्ती-योजना है। पोर्टल इसे शहरों के जरूरतमंद परिवारों के लिए प्रमुख शहरी रोजगार गारंटी व्यवस्था के रूप में दिखाता है। आवेदन लाभार्थी स्वयं या ई-मित्र के माध्यम से कर सकता है। आवेदन के लिए जन आधार संख्या या जन आधार पंजीकरण रसीद जरूरी बताई गई है। पोर्टल पर रोजगार कार्ड विवरण, कार्य आवेदन और रिपोर्टों के अलग लिंक भी हैं। ये डिजिटल संकेत परीक्षा में इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि अधिशासी अधिकारी या राजस्व अधिकारी से नीति का उद्देश्य ही नहीं, बल्कि पंजीकरण से काम आवंटन और मजदूरी भुगतान तक की प्रशासनिक कड़ी समझने की अपेक्षा होती है।

उत्तर-कुंजी से जुड़ी सावधानी भी याद रखें। २३ मार्च २०२५ की ईओ/आरओ पुनर्परीक्षा की अंतिम उत्तर-कुंजी सार्वजनिक है, पर उसमें प्रश्न-पाठ इस तरह उपलब्ध नहीं है कि योजना-विशेष के पुराने प्रश्न का भरोसेमंद दावा किया जा सके। इसलिए संभावित प्रश्न-शैली पाठ्यक्रम में इसकी स्थिति और योजना की रचना से समझनी चाहिए: सही नाम, वर्तमान नाम, शहरी पात्रता, १८ से ६० वर्ष आयु-समूह, पंजीकरण और रोजगार कार्ड, नगरीय निकायों की भूमिका, अनुमत कार्य और मनरेगा से अंतर। इस विषय को ग्रामीण विकास योजना की तरह न पढ़ें; इसका नियंत्रक ढांचा नगरपालिका नियम और नगरीय योजनाएँ हैं।