मुख्य तथ्य

  • ईओ/आरओ सिलेबस में एनयूएलएम राजस्थान के शहरी क्षेत्रों में चल रही महत्वपूर्ण योजनाओं के भाग में रखा गया है।
  • वर्तमान परिचालन पहचान डीएवाई-एनयूएलएम है, अर्थात दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन।
  • मिशन का उद्देश्य शहरी गरीब परिवारों की गरीबी और असुरक्षा को स्वरोजगार, कुशल मजदूरी रोजगार और मजबूत जमीनी संस्थाओं के माध्यम से घटाना है।
  • एनयूएलएम आवास मिशन नहीं है; आश्रय केवल शहरी बेघरों के लिए एसयूएच घटक में आता है, जबकि प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी आवास योजना है।
  • एसएमआईडी स्वयं सहायता समूह, क्षेत्र स्तरीय महासंघ और नगर स्तरीय महासंघ बनाता है;

मुख्य बिंदु

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    ईओ/आरओ सिलेबस में एनयूएलएम राजस्थान के शहरी क्षेत्रों में चल रही महत्वपूर्ण योजनाओं के भाग में रखा गया है।

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    वर्तमान परिचालन पहचान डीएवाई-एनयूएलएम है, अर्थात दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन।

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    मिशन का उद्देश्य शहरी गरीब परिवारों की गरीबी और असुरक्षा को स्वरोजगार, कुशल मजदूरी रोजगार और मजबूत जमीनी संस्थाओं के माध्यम से घटाना है।

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    एनयूएलएम आवास मिशन नहीं है; आश्रय केवल शहरी बेघरों के लिए एसयूएच घटक में आता है, जबकि प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी आवास योजना है।

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    एसएमआईडी स्वयं सहायता समूह, क्षेत्र स्तरीय महासंघ और नगर स्तरीय महासंघ बनाता है; हर शहरी गरीब परिवार से कम-से-कम एक सदस्य, प्राथमिकता से महिला, जोड़ी जाती है।

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    सीबीटी राष्ट्रीय, राज्य और शहर स्तर की मिशन संरचनाओं तथा कार्यक्रम कर्मियों की तकनीकी और प्रशासनिक क्षमता बढ़ाता है।

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    ईएसटीपी कौशल प्रशिक्षण को बाजार मांग, प्रमाणन, नियोजन और रोजगार-योग्यता से जोड़ता है।

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    एसईपी बैंक ऋण, ब्याज सब्सिडी, स्वयं सहायता समूह-बैंक संपर्क और स्थानीय उद्यम सहायता से व्यक्तिगत तथा समूह सूक्ष्म उद्यमों को सहारा देता है।

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    एसयूएसवी पथ विक्रेताओं के सर्वे, पंजीकरण, पहचान पत्र, वेंडिंग जोन, ऋण, कौशल और सामाजिक सुरक्षा समन्वय से जुड़ा है।

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    एसयूएच शहरी बेघरों के लिए आवश्यक सेवाओं सहित स्थायी, हर मौसम में चलने वाले आश्रय उपलब्ध कराने से संबंधित है।

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    74वें संशोधन की तर्कणा में शहरी गरीबी उन्मूलन नगरपालिका कार्य है, इसलिए नगरीय निकाय डीएवाई-एनयूएलएम में निष्क्रिय लाभार्थी नहीं, बल्कि अग्रणी कार्यान्वयन निकाय हैं।

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    ईओ/आरओ में मुख्य परीक्षा-फोकस संक्षेपों को सही घटक से जोड़ना और डीएवाई-एनयूएलएम को स्वच्छ भारत मिशन-शहरी, प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी, अमृत तथा खाद्य/रोजगार योजनाओं से अलग पहचानना है।

डीएवाई-एनयूएलएम क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?

डीएवाई-एनयूएलएम शहरी गरीब परिवारों की गरीबी और असुरक्षा घटाने वाला केंद्र प्रायोजित शहरी आजीविका मिशन है, जो स्वयं सहायता समूह, कौशल, स्वरोजगार, पथ विक्रेता सहायता और शहरी बेघरों के आश्रय को एक साथ जोड़ता है। ईओ/आरओ सिलेबस में राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन राजस्थान के शहरी क्षेत्रों में चल रही महत्वपूर्ण योजनाओं के भाग में आता है। परीक्षा के लिए पहली सावधानी नामकरण की है। सिलेबस में पुराना छोटा नाम एनयूएलएम लिखा मिल सकता है, लेकिन वर्तमान परिचालन नाम दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन है, जिसे सामान्यतः डीएवाई-एनयूएलएम कहा जाता है। इसलिए वस्तुनिष्ठ प्रश्न में राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन, एनयूएलएम और डीएवाई-एनयूएलएम को वही शहरी आजीविका मिशन माना जाएगा, जब तक प्रश्न पुराने और वर्तमान नाम में विशेष अंतर न पूछे। यह मिशन आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के ढांचे से चलता है; इसे ग्रामीण आजीविका मंत्रालय की योजना न समझें। डीएवाई-एनयूएलएम मिशन दस्तावेज के अनुसार सामान्य राज्यों में इस मिशन की केन्द्र-राज्य वित्तीय हिस्सेदारी ६०:४० है, इसलिए राजस्थान जैसे राज्य में इसे पूरी तरह अकेली राज्य योजना नहीं माना जाएगा। ग्रामीण आजीविका मिशन से इसकी पद्धति कुछ मिलती है, क्योंकि दोनों में सामुदायिक संस्थाएं और स्वयं सहायता समूह महत्वपूर्ण हैं, पर ईओ/आरओ में इसका शहरी चरित्र साफ रखना जरूरी है: शहरी गरीब परिवार, शहर आधारित आजीविका, नगरीय निकाय, पथ विक्रेता और शहरी बेघर व्यक्ति। मिशन का केंद्रीय उद्देश्य गरीबी और असुरक्षा को कम करना है। डीएवाई-एनयूएलएम शहरी गरीब परिवारों को लाभकारी स्वरोजगार और कुशल मजदूरी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराकर उनकी गरीबी और संवेदनशीलता घटाना चाहता है। इसके लिए केवल एक बार की सहायता या अनुदान पर निर्भर नहीं रहा जाता, बल्कि गरीबों की मजबूत जमीनी संस्थाएं बनाई जाती हैं। मिशन की सोच में शहरी गरीबी सिर्फ कम आय नहीं है। इसमें अस्थिर अनौपचारिक काम जैसी व्यावसायिक असुरक्षा, आश्रय और सेवाओं की कमी जैसी आवासीय असुरक्षा, और लिंग, जाति, दिव्यांगता, आयु, प्रवास या पेशे के आधार पर बहिष्करण जैसी सामाजिक असुरक्षा शामिल है। इसी कारण मिशन आजीविका संवर्धन, कौशल विकास, वित्तीय समावेशन, पथ विक्रेताओं की सहायता और शहरी बेघरों के लिए आश्रय को एक साथ जोड़ता है। परीक्षा के लिए साफ सार यह है कि डीएवाई-एनयूएलएम शहरी गरीबी उन्मूलन का मिशन है, जो शहरी गरीबों को संगठित करता है, उनका कौशल बढ़ाता है, सूक्ष्म उद्यमों को सहारा देता है, पथ विक्रेताओं की सहायता करता है और शहरी बेघरों के लिए आश्रय उपलब्ध कराता है। इसी से इसकी दूसरी योजनाओं से अलग पहचान भी समझ आती है। प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी का मुख्य विषय आवास सहायता है; स्वच्छ भारत मिशन-शहरी का विषय स्वच्छता और नगरीय सफाई है; अमृत योजना जलापूर्ति, मल-जल निकासी और शहरी आधारभूत ढांचे जैसे विषयों पर केंद्रित है। एनयूएलएम का मुख्य विषय आजीविका और असुरक्षा में कमी है, हालांकि इसमें आश्रय का एक घटक और अन्य योजनाओं से समन्वय भी है। ईओ/आरओ में यही अंतर पहले भी पूछा गया है। २०२५ की पुनर्परीक्षा में स्वर्ण जयंती शहरी रोजगार योजना के डीएवाई-एनयूएलएम में पुनर्गठन वाले कथन को उस गलत कथन के साथ रखा गया था कि मिशन का उद्देश्य शहर विकास के लिए स्वच्छ और सतत पर्यावरण उपलब्ध कराना है। सही समझ यह है कि आजीविका वाला पुनर्गठन स्वीकार होगा और स्वच्छता-पर्यावरण वाला उद्देश्य अस्वीकार होगा, क्योंकि वह स्वच्छ भारत जैसे ढांचे के अधिक निकट है। २०२५ के एक अन्य प्रश्न में राजस्थान में गरीब शहरी महिलाओं की सहायता का तरीका पूछा गया था, जिसका आधार स्वयं सहायता समूह बनाना और ऋण तक आसान पहुंच देना था। इसलिए मिशन की पहचान केवल नाम याद करने की बात नहीं है; नाम से ही उद्देश्य, लक्षित समूह और घटक-मानचित्र निकलता है।