मुख्य तथ्य

  • मूल प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 25 जून 2015 को सबके लिए आवास मिशन के अंतर्गत पात्र शहरी परिवारों के लिए शुरू हुई थी।
  • प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 वर्तमान दिशा-निर्देश संदर्भ है और 1 सितंबर 2024 से पाँच साल के लिए लागू किया जाना है।
  • 2.0 चरण पात्र शहरी गरीब और मध्यवर्गीय परिवारों की आवास जरूरतों को संबोधित करता है।
  • आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की वार्षिक पारिवारिक आय 3 लाख रुपये तक, निम्न आय वर्ग की 3 लाख से अधिक और 6 लाख रुपये तक, तथा मध्यम आय वर्ग की 6 लाख से अधिक…
  • 2.0 में घर को पानी, स्वच्छता, सीवरेज या सेप्टेज, सड़क और बिजली जैसी बुनियादी नागरिक सुविधाओं से जोड़कर देखा जाता है।

मुख्य बिंदु

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    आरपीएससी ईओ/आरओ पाठ्यक्रम में प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी को नगरीय योजनाओं और नगरपालिका प्रशासन के संदर्भ में पढ़ना चाहिए।

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    मूल प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 25 जून 2015 को सबके लिए आवास मिशन के अंतर्गत पात्र शहरी परिवारों के लिए शुरू हुई थी।

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    प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 वर्तमान दिशा-निर्देश संदर्भ है और 1 सितंबर 2024 से पाँच साल के लिए लागू किया जाना है।

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    2.0 चरण पात्र शहरी गरीब और मध्यवर्गीय परिवारों की आवास जरूरतों को संबोधित करता है।

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    वर्तमान चार घटक हैं: लाभार्थी आधारित निर्माण, साझेदारी में किफायती आवास, किफायती किराया आवास और ब्याज सब्सिडी योजना।

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    आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की वार्षिक पारिवारिक आय 3 लाख रुपये तक, निम्न आय वर्ग की 3 लाख से अधिक और 6 लाख रुपये तक, तथा मध्यम आय वर्ग की 6 लाख से अधिक और 9 लाख रुपये तक है।

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    लाभार्थी परिवार में पति, पत्नी, अविवाहित पुत्र और अविवाहित पुत्रियाँ शामिल मानी जाती हैं।

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    मुख्य अपवर्जन नियम यह है कि आवेदक या परिवार के किसी सदस्य के नाम भारत में कहीं भी पक्का घर नहीं होना चाहिए।

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    विधवाओं, एकल महिलाओं, दिव्यांगजन, वरिष्ठ नागरिकों, ट्रांसजेंडर व्यक्तियों, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यकों जैसे कमजोर समूहों को प्राथमिकता दी जाती है।

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    संघ स्तर पर आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय नोडल मंत्रालय है और केंद्रीय स्वीकृति तथा निगरानी समिति उच्च स्तरीय स्वीकृति-निगरानी निकाय है।

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    राज्य स्तर पर राज्य स्तरीय स्वीकृति और निगरानी समिति, राज्य स्तरीय नोडल एजेंसी तथा राज्य एजेंसियाँ स्वीकृति, मूल्यांकन, राज्य अंश और निगरानी से जुड़ी भूमिका निभाती हैं।

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    नगरीय स्थानीय निकाय, विकास प्राधिकरण, आवासन मंडल और चयनित निजी विकासकर्ता क्रियान्वयन एजेंसी के रूप में काम कर सकते हैं।

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    एकीकृत वेब पोर्टल और प्रबंधन सूचना प्रणाली मांग पंजीकरण, लाभार्थी सत्यापन, परियोजना सूचीकरण, तात्कालिक निगरानी और भू-टैगिंग में काम आते हैं।

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    प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी, ग्रामीण आवास योजना से अलग है क्योंकि यह शहरी संस्थाओं और नागरिक सुविधा अभिसरण के माध्यम से लागू होती है।

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    2.0 में घर को पानी, स्वच्छता, सीवरेज या सेप्टेज, सड़क और बिजली जैसी बुनियादी नागरिक सुविधाओं से जोड़कर देखा जाता है।

ईओ/आरओ में प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी को कैसे पढ़ना चाहिए?

ईओ/आरओ में प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी को पाठ्यक्रम में नाम से दी गई नगरीय योजना की तरह पढ़ना चाहिए, क्योंकि सवाल योजना की घोषणा से आगे बढ़कर शहरी प्रशासन, पात्रता, घटकों और क्रियान्वयन पर भी बन सकता है। प्रेस सूचना ब्यूरो के अनुसार प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी २.० में शहरी गरीब और मध्यवर्गीय परिवारों के लिए १ करोड़ घरों का लक्ष्य रखा गया है। ईओ/आरओ तैयारी में प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी को केवल कल्याणकारी नारे की तरह नहीं, बल्कि पाठ्यक्रम में नाम से दी गई नगरीय योजना की तरह पढ़ना चाहिए। आधिकारिक आरपीएससी पाठ्यक्रम में यह भाग ख के उस चालीस अंक वाले खंड में आती है, जहाँ राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, २००९ और राजस्थान के नगरीय क्षेत्रों में चलने वाली महत्वपूर्ण योजनाएँ दी गई हैं। इसलिए प्रश्न केवल योजना की घोषणा पर नहीं, बल्कि नगरीय प्रशासन की भाषा में भी बन सकता है: पात्र शहरी परिवार, नगरीय स्थानीय निकाय, विकास प्राधिकरण, आवासन मंडल, परियोजना स्वीकृति, लाभार्थी सत्यापन, नागरिक सुविधाएँ और शहरी तथा ग्रामीण आवास अधिकार-क्षेत्र का अंतर। अभ्यर्थी को योजना को शहर-स्तरीय क्रियान्वयन से जोड़कर पढ़ना चाहिए।

मूल प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी २५ जून २०१५ को सबके लिए आवास मिशन के अंतर्गत शुरू हुई थी। इसका उद्देश्य पात्र शहरी परिवारों को किफायती, सभी मौसम में रहने योग्य पक्का घर उपलब्ध कराना था। यहाँ घर का अर्थ केवल छत नहीं है। योजना की सोच में घर गरिमा, स्वच्छता, बिजली, पानी, सामाजिक ढाँचे और शहरी समावेशन का आधार है। परीक्षा की भाषा में मिशन का लक्ष्य इस तरह याद रखा जा सकता है: पात्र शहरी परिवारों, विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर और निम्न आय वर्ग के परिवारों को लाभार्थी निर्माण, साझेदारी परियोजना, ऋण सहायता और आधारभूत सुविधाओं के अभिसरण से किफायती पक्का आवास देना।

वर्तमान संदर्भ प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी २.० है। सितंबर २०२४ के संचालन दिशा-निर्देश इसे शहरी क्षेत्रों के लिए सबके लिए आवास मिशन का अगला चरण मानते हैं, जिसका क्रियान्वयन १ सितंबर २०२४ से पाँच साल के लिए किया जाना है। इसका लाभार्थी दायरा केवल झुग्गी-बस्ती तक सीमित नहीं है। यह पात्र शहरी गरीब और मध्यवर्गीय परिवारों की आवास जरूरतों को लाभार्थियों, क्रियान्वयन एजेंसियों, राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों और प्राथमिक ऋण संस्थाओं की भूमिका से संबोधित करता है। इसलिए पुराने घटकों की सूची को स्थायी उत्तर मानकर याद रखना गलत होगा। पहले की चर्चा में स्थान पर झुग्गी पुनर्विकास, ऋण-सम्बद्ध सब्सिडी, साझेदारी में किफायती आवास और लाभार्थी आधारित निर्माण अधिक दिखते थे। वर्तमान २.० व्यवस्था चार घटकों पर चलती है: लाभार्थी आधारित निर्माण, साझेदारी में किफायती आवास, किफायती किराया आवास और ब्याज सब्सिडी योजना।

यही सबसे उपयोगी परीक्षा-बिंदु है। पाठ्यक्रम में नाम केवल प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी के रूप में आ सकता है, पर आज के उत्तर में २.० दिशा-निर्देशों की समझ दिखनी चाहिए। यदि प्रश्न वर्तमान घटकों पर हो तो लाभार्थी आधारित निर्माण, साझेदारी में किफायती आवास, किफायती किराया आवास और ब्याज सब्सिडी योजना लिखें। यदि प्रश्न मिशन के इतिहास या ग्रामीण आवास योजना से अंतर पर हो तो बताएँ कि शहरी योजना आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के अधीन है और नगरीय संस्थाओं से लागू होती है, जबकि ग्रामीण आवास योजना ग्रामीण विकास ढाँचे में आती है। वर्तमान दिशा-निर्देशों में एकीकृत वेब पोर्टल पर मांग आकलन, राज्यों और नगरीय निकायों द्वारा सत्यापन, भू-टैगिंग आधारित निगरानी, राज्य तथा केंद्रीय स्वीकृति-निगरानी समितियाँ और जल, स्वच्छता, सीवरेज, सड़क, बिजली तथा सामाजिक ढाँचे से अभिसरण भी महत्वपूर्ण हैं।

राजस्थान ईओ/आरओ के लिए इस विषय में पाठ्यक्रम संकेत, सत्यापित पूर्व-वर्ष प्रश्न संकेत से अधिक मजबूत है। योजना पाठ्यक्रम में स्पष्ट नाम से दी गई है, जबकि योजना-विशिष्ट पिछले प्रश्न का पाठ केवल उत्तर-कुंजी से भरोसेमंद ढंग से स्थापित नहीं होता। इसलिए तैयारी की सही रणनीति मध्यम गहराई की पक्की तैयारी है: मिशन उद्देश्य, वर्तमान चार घटक, आय वर्ग, पक्का घर न होने की शर्त, लाभार्थी परिवार की परिभाषा, कमजोर समूहों को प्राथमिकता, क्रियान्वयन शृंखला और शहरी-ग्रामीण अंतर अवश्य याद रखें। यही बातें एक अंक वाले वस्तुनिष्ठ प्रश्नों और छोटे तुलनात्मक उत्तरों में सबसे अधिक काम आती हैं।