स्वच्छ भारत मिशन (शहरी)
मुख्य तथ्य
- ईओ/आरओ पाठ्यक्रम में स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) को राजस्थान की महत्वपूर्ण नगरीय योजनाओं के अंतर्गत पढ़ना है।
- मिशन का पहला चरण 2 अक्टूबर 2014 को शुरू हुआ और 2 अक्टूबर 2019 तक स्वच्छता लक्ष्य से जुड़ा था।
- मूल उद्देश्यों में खुले में शौच का उन्मूलन, मैला ढोने की प्रथा का अंत और वैज्ञानिक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन शामिल हैं।
- व्यवहार परिवर्तन, जन-जागरूकता और नगरीय निकायों की क्षमता वृद्धि मिशन के मुख्य उद्देश्य हैं।
- मुख्य घटक हैं: घरेलू शौचालय, सामुदायिक शौचालय, सार्वजनिक शौचालय और मूत्रालय, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, जन-जागरूकता और क्षमता निर्माण।
मुख्य बिंदु
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ईओ/आरओ पाठ्यक्रम में स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) को राजस्थान की महत्वपूर्ण नगरीय योजनाओं के अंतर्गत पढ़ना है।
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मिशन का पहला चरण 2 अक्टूबर 2014 को शुरू हुआ और 2 अक्टूबर 2019 तक स्वच्छता लक्ष्य से जुड़ा था।
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मूल उद्देश्यों में खुले में शौच का उन्मूलन, मैला ढोने की प्रथा का अंत और वैज्ञानिक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन शामिल हैं।
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व्यवहार परिवर्तन, जन-जागरूकता और नगरीय निकायों की क्षमता वृद्धि मिशन के मुख्य उद्देश्य हैं।
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मुख्य घटक हैं: घरेलू शौचालय, सामुदायिक शौचालय, सार्वजनिक शौचालय और मूत्रालय, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, जन-जागरूकता और क्षमता निर्माण।
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सामुदायिक शौचालय निश्चित बस्ती या निवासी समूह के लिए होता है, जबकि सार्वजनिक शौचालय आने-जाने वाली आबादी के लिए होता है।
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खुले में शौच से मुक्त स्थिति आधार है; प्लस स्तर कार्यशील और रखरखाव वाले सामुदायिक तथा सार्वजनिक शौचालय पर जोर देता है।
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प्लस प्लस स्तर मल-कीचड़, सेप्टेज और सीवेज के सुरक्षित प्रबंधन को जोड़ता है।
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वॉटर प्लस प्रयुक्त जल के संग्रहण, उपचार और सुरक्षित पुनः उपयोग या निकास से जुड़ा ऊंचा संकेतक है।
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दूसरा चरण 2021-2026 में कचरा-मुक्त शहरों, स्रोत पृथक्करण, वैज्ञानिक प्रसंस्करण और पुराने कचरा-ढेर सुधार पर जोर देता है।
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प्रयुक्त जल और मल-कीचड़ उपचार इसलिए ज़रूरी हैं क्योंकि शहरी स्वच्छता शौचालय बन जाने पर समाप्त नहीं होती।
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कचरा-मुक्त शहर स्टार रेटिंग और स्वच्छ सर्वेक्षण नगरीय प्रदर्शन संकेतक हैं, अलग लाभार्थी योजना नहीं।
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एकल-उपयोग प्लास्टिक में कमी नालों, सार्वजनिक स्थानों और सूखे कचरे की पुनर्प्राप्ति को बेहतर बनाती है।
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ईओ/आरओ उत्तर में योजना को नगरीय निकायों की जिम्मेदारियों से जोड़ना चाहिए: योजना, रखरखाव, संग्रहण सेवा, प्रवर्तन, रिपोर्टिंग और नागरिक प्रतिक्रिया।
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स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) ईओ/आरओ परीक्षा में क्यों महत्वपूर्ण है?
स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) ईओ/आरओ परीक्षा में इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह राजस्थान के नगरीय निकायों की स्वच्छता, शौचालय, कचरा-प्रबंधन और स्थानीय प्रशासनिक जिम्मेदारियों को सीधे जोड़ता है।
स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) भारत सरकार के आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय से जुड़ा शहरी स्वच्छता और सफाई मिशन है, जिसे राज्यों और नगरीय स्थानीय निकायों के माध्यम से जमीन पर लागू किया जाता है। आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के स्वच्छ भारत मिशन-शहरी पोर्टल के अनुसार पहला चरण देश के 4,041 वैधानिक शहरों में खुले में शौच से मुक्ति और नगरपालिका ठोस अपशिष्ट के 100% वैज्ञानिक प्रबंधन के लक्ष्य के साथ लागू हुआ था। ईओ/आरओ परीक्षा में यह सामान्य जानकारी का हल्का विषय नहीं है। आधिकारिक पाठ्यक्रम में इसे भाग ब के उस खंड में रखा गया है जहां राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, नगरपालिका नियम और राजस्थान के नगरीय क्षेत्रों में चल रही महत्वपूर्ण योजनाएं पढ़ी जाती हैं। इसलिए प्रश्न केवल यह नहीं पूछेगा कि मिशन कब शुरू हुआ; वह यह भी पूछ सकता है कि किसी नगरपालिका, नगर परिषद या नगर निगम को इस योजना के तहत कौन-से काम करने हैं।
मिशन का पहला चरण 2 अक्टूबर 2014 को शुरू हुआ और 2 अक्टूबर 2019 तक समयबद्ध स्वच्छता लक्ष्य की दिशा में बनाया गया। इसके मूल उद्देश्य सीधे परीक्षा-योग्य हैं: खुले में शौच का उन्मूलन, मैला ढोने की प्रथा का अंत, आधुनिक और वैज्ञानिक नगरपालिका ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, स्वस्थ स्वच्छता व्यवहार में बदलाव, स्वच्छता और जन-स्वास्थ्य पर जागरूकता, तथा नगरीय निकायों की क्षमता वृद्धि। इन उद्देश्यों को अलग-अलग रटने के बजाय साथ पढ़ना चाहिए। यह केवल शौचालय निर्माण कार्यक्रम नहीं था। शौचालय सबसे दिखाई देने वाला साधन था, पर मिशन ने शहर से सुरक्षित मल-नियंत्रण, नियमित सफाई, कचरा संग्रहण, प्रसंस्करण, निगरानी और नागरिक भागीदारी भी अपेक्षित की।
मिशन को याद रखने की सरल श्रृंखला है: स्वच्छता तक पहुंच, साफ सार्वजनिक स्थान, कचरा-प्रणाली और व्यवहार परिवर्तन। स्वच्छता तक पहुंच में व्यक्तिगत घरेलू शौचालय, सामुदायिक शौचालय और सार्वजनिक शौचालय या मूत्रालय आते हैं। साफ सार्वजनिक स्थानों में खुले में शौच और खुले में मूत्रत्याग की समाप्ति, सुविधाओं का रखरखाव तथा बाजार, बस अड्डे, रेलवे स्टेशन, पर्यटन स्थल और कार्यालय क्षेत्रों जैसे स्थानों पर आने-जाने वाली आबादी की ज़रूरत शामिल है। कचरा-प्रणाली में नगरपालिका ठोस अपशिष्ट का संग्रहण, परिवहन, प्रसंस्करण और निपटान है। व्यवहार परिवर्तन इन सबको जन-जागरूकता, विद्यालय और वार्ड-स्तरीय भागीदारी, नागरिक प्रतिक्रिया, उपयोगकर्ता शुल्क और संस्थागत आदतों से जोड़ता है।
राजस्थान के नगरीय स्थानीय शासन के संदर्भ में इस विषय का प्रशासनिक महत्व बढ़ जाता है। राज्य में स्थानीय स्वशासन तंत्र नगर निगमों, नगर परिषदों और नगरपालिकाओं के माध्यम से काम करता है, जबकि योजना की निगरानी राज्य और शहर स्तर की व्यवस्थाओं से होती है। राजस्थान की योजना सामग्री में दो बड़े क्रियान्वयन शीर्ष स्पष्ट दिखते हैं: खुले में शौच से मुक्त कार्य और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन। पहले शीर्ष के तहत नगरीय निकायों को शौचालय-विहीन परिवारों की पहचान, घरेलू शौचालय निर्माण में सहायता, जगह की कमी वाले क्षेत्रों में सामुदायिक शौचालय की योजना और अधिक भीड़ वाले स्थानों पर सार्वजनिक शौचालय उपलब्ध कराने होते हैं। दूसरे शीर्ष के तहत उन्हें ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के अनुरूप घर-घर संग्रहण, परिवहन, प्रसंस्करण और निपटान की व्यवस्था बनानी होती है।
स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 पहले चरण को समाप्त नहीं करता, बल्कि उसी आधार को आगे गहरा करता है। 2021 में 2021-2026 अवधि के लिए शुरू हुए दूसरे चरण में मुख्य जोर केवल खुले में शौच से मुक्ति प्राप्त करने पर नहीं, बल्कि सुरक्षित स्वच्छता को टिकाए रखने और शहरों को कचरा-मुक्त बनाने पर है। परीक्षा के लिए सबसे सुरक्षित उत्तर निरंतरता वाला है: पहले चरण ने शौचालय, खुले में शौच से मुक्ति प्रमाणन, जन-जागरूकता और ठोस अपशिष्ट व्यवस्था का आधार बनाया; दूसरा चरण स्रोत पर कचरा पृथक्करण, वैज्ञानिक प्रसंस्करण, पुराने कचरा-ढेरों का सुधार, प्रयुक्त जल प्रबंधन, मल-कीचड़ और सेप्टेज उपचार तथा एकल-उपयोग प्लास्टिक में कमी को आगे बढ़ाता है।
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