मुख्य तथ्य

  • आधिकारिक ईओ/आरओ भाग ब पाठ्यक्रम राजस्थान नगर पालिका (कार्य संचालन) नियम, 2009 को अलग स्रोत के रूप में नामित करता है।
  • राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 की धारा 51 साधारण बैठक को साठ दिनों में एक बार और वर्ष में कम से कम छह बार से जोड़ती है।
  • विशेष बैठक के लिए निर्वाचित सदस्यों के कम से कम एक-तिहाई का लिखित अनुरोध और प्रस्तावित संकल्प का उल्लेख आवश्यक तथ्य है।
  • सभापति द्वारा वैधानिक अवधि में विशेष बैठक न बुलाने पर मुख्य नगर पालिका अधिकारी अगली निर्धारित अवधि में बैठक बुलाता है।
  • बैठक सूचना में स्थान, तारीख, समय और कार्यसूची होनी चाहिए तथा उस पर मुख्य नगर पालिका अधिकारी या अधिकृत अधिकारी के हस्ताक्षर होते हैं।

मुख्य बिंदु

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    आधिकारिक ईओ/आरओ भाग ब पाठ्यक्रम राजस्थान नगर पालिका (कार्य संचालन) नियम, 2009 को अलग स्रोत के रूप में नामित करता है।

  2. 2

    राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 की धारा 51 साधारण बैठक को साठ दिनों में एक बार और वर्ष में कम से कम छह बार से जोड़ती है।

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    विशेष बैठक के लिए निर्वाचित सदस्यों के कम से कम एक-तिहाई का लिखित अनुरोध और प्रस्तावित संकल्प का उल्लेख आवश्यक तथ्य है।

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    सभापति द्वारा वैधानिक अवधि में विशेष बैठक न बुलाने पर मुख्य नगर पालिका अधिकारी अगली निर्धारित अवधि में बैठक बुलाता है।

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    बैठक सूचना में स्थान, तारीख, समय और कार्यसूची होनी चाहिए तथा उस पर मुख्य नगर पालिका अधिकारी या अधिकृत अधिकारी के हस्ताक्षर होते हैं।

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    अत्यावश्यक बैठक के लिए अड़तालीस घंटे की अल्प-सूचना परीक्षा में सीधा स्मरणीय बिंदु है।

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    कार्यसूची मुख्य नगर पालिका अधिकारी तैयार करता है, पर ग्राह्यता और बैठक-नियमन सभापति तथा पीठासीन अधिकारी के नियंत्रण से जुड़ते हैं।

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    प्रस्ताव में सदस्य द्वारा सुझाया गया संशोधन भी शामिल माना जा सकता है, इसलिए प्रस्ताव और संशोधन को साथ पढ़ें।

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    सदस्य नगरपालिका प्रशासन पर प्रश्न पूछ और संकल्प रख सकते हैं, पर चर्चा निर्धारित प्रक्रिया और विषय-सीमा के अधीन रहती है।

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    गणपूर्ति कुल सदस्यों का एक-तिहाई है; इसे विशेष बैठक की एक-तिहाई निर्वाचित सदस्य मांग से न मिलाएं।

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    पीठासीन अधिकारी मतदान कराता है, परिणाम घोषित करता है और मत बराबर होने पर निर्णायक मत देता है।

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    मुख्य नगर पालिका अधिकारी नगरपालिका अभिलेखों, कार्यवाही और कार्यवृत्त की अभिरक्षा तथा संधारण से जुड़ा मुख्य अधिकारी है।

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    सदस्य उचित सूचना देकर नगरपालिका कार्यालय में बिना शुल्क नगरपालिका अभिलेखों का निरीक्षण कर सकता है।

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    मुख्य नगर पालिका अधिकारी चर्चा में विषय की व्याख्या कर सकता है, पर वह मतदान नहीं करता और प्रस्ताव नहीं रखता।

राजस्थान नगरपालिका कार्य संचालन नियम, 2009 को अलग से क्यों पढ़ना चाहिए?

राजस्थान नगरपालिका कार्य संचालन नियम, 2009 को अलग से इसलिए पढ़ना चाहिए क्योंकि ईओ/आरओ परीक्षा में इससे नगरपालिका बैठक चलाने की ठोस प्रक्रिया पर सीधे प्रश्न बन सकते हैं। राजस्थान लोक सेवा आयोग के पाठ्यक्रम पृष्ठ पर स्थानीय स्वशासन विभाग परीक्षा 2022 में राजस्व अधिकारी ग्रेड द्वितीय और अधिशासी अधिकारी ग्रेड चतुर्थ का पाठ्यक्रम 31 अगस्त 2022 को जारी दर्ज है। राजस्थान नगरपालिका कार्य संचालन नियम, 2009 को अलग परीक्षा-स्रोत की तरह पढ़ना चाहिए, क्योंकि ईओ/आरओ के आधिकारिक पाठ्यक्रम के भाग ब में इसका नाम राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 और 1974 के सामान्य क्रय तथा संविदा नियमों के बाद स्वतंत्र रूप से दिया गया है। इसका अर्थ है कि परीक्षक केवल अधिनियम की सामान्य धाराओं से नहीं, बल्कि बैठक चलाने की ठोस प्रक्रिया से भी सीधे प्रश्न बना सकता है। यह विषय नगर प्रशासन पर सामान्य निबंध नहीं है। यह इस बात की संचालन-पुस्तिका है कि नगरपालिका की बैठक कैसे बुलाई जाएगी, सूचना और कार्यसूची सदस्यों तक कैसे पहुंचेगी, सदस्य प्रश्न या प्रस्ताव कैसे देंगे, पीठासीन अधिकारी चर्चा को कैसे नियंत्रित करेगा, मतदान कैसे होगा और अंत में कार्यवाही नगरपालिका का आधिकारिक अभिलेख कैसे बनेगी।

कानूनी ढांचे की शुरुआत राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 की तीन प्रमुख धाराओं से होती है। धारा 51 बैठक की बाध्यता बनाती है: साधारण सामान्य बैठक साठ दिनों में एक बार होनी चाहिए और किसी कैलेंडर वर्ष में कम से कम छह बैठकें होनी चाहिए। यही धारा विशेष बैठक की स्थिति भी बनाती है, जब निर्वाचित सदस्यों के कम से कम एक-तिहाई सदस्य लिखित अनुरोध देकर उस संकल्प को स्पष्ट करते हैं जिसे वे रखना चाहते हैं। धारा 52 व्यक्तिगत सदस्यों को वे भागीदारी अधिकार देती है जिन्हें नियम व्यवहार में लागू करते हैं: नगरपालिका कार्य की उपेक्षा या नगरपालिका संपत्ति की बर्बादी पर ध्यान आकर्षित करना, सभापति से प्रश्न पूछना, नगरपालिका प्रशासन पर संकल्प रखना और मुख्य नगर पालिका अधिकारी को उचित सूचना देकर बिना शुल्क नगरपालिका अभिलेखों का निरीक्षण करना। धारा 337 राज्य सरकार को नियम बनाने की शक्ति देती है, जिसमें नगरपालिका बैठकों के संचालन, प्रश्न पूछने और संकल्प रखने की प्रक्रिया निर्धारित करने की शक्ति शामिल है।

यही ढांचा परीक्षा की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है। अधिनियम अधिकार और संस्थागत कर्तव्य बताता है; 2009 के कार्य संचालन नियम उन्हें समयबद्ध चरणों में बदलते हैं। उदाहरण के लिए, अधिनियम कहता है कि विशेष बैठक निर्वाचित सदस्यों के एक-तिहाई लिखित अनुरोध से जुड़ती है; नियमों से सूचना, कार्यसूची और बैठक संचालन की यांत्रिकी पूछी जाती है। अधिनियम सदस्य को प्रश्न पूछने और संकल्प रखने का अधिकार देता है; नियमों में ग्राह्यता, चर्चा की सीमा और प्रस्ताव या संशोधन को कार्यसूची तक पहुंचाने की प्रक्रिया पूछी जाती है। अधिनियम मुख्य नगर पालिका अधिकारी को नगरपालिका अभिलेखों की अभिरक्षा और संधारण से जोड़ता है; नियम उसी अभिरक्षा को कार्यवाही, कार्यवृत्त और निरीक्षण से जोड़ते हैं। इसलिए अभ्यर्थी को हर नियम दो बार पढ़ना चाहिए: पहले नगरपालिका शासन के मानक की तरह, और फिर ऐसे वस्तुनिष्ठ तथ्य की तरह जिसे संख्या, अधिकारी, समय-सीमा या क्रमबद्ध प्रक्रिया में बदला जा सकता है।

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