राजस्थान नगर पालिका (वस्तु क्रय एवं संविदा) नियम 1974
मुख्य तथ्य
- ईओ/आरओ के आधिकारिक पाठ्यक्रम में 1974 के क्रय और संविदा नियम भाग ख में अलग स्रोत के रूप में नामित हैं, इसलिए क्रय-प्रक्रिया स्वतंत्र नगरपालिका-विधि वि…
- नियमों का औपचारिक नाम राजस्थान नगरपालिकाएं (सामग्री क्रय और संविदा) नियम, 1974 है और इनकी अधिसूचना 27 नवम्बर 1974 को हुई थी।
- सामग्री या वस्तुओं के लिए 1,000 रुपये से अधिक व्यय पर, अपवाद न हो तो, विधिवत निविदा और सक्षम प्राधिकारी की पूर्व स्वीकृति आवश्यक है।
- कार्य निष्पादन के लिए 2,000 रुपये से अधिक व्यय पर, नियमगत अपवादों को छोड़कर, निविदा और पूर्व स्वीकृति आवश्यक है।
- सार्वजनिक विज्ञापन द्वारा खुली निविदा सामान्य नियम है, विशेषकर जब अनुमानित निविदा मूल्य 5,000 रुपये या अधिक हो।
मुख्य बिंदु
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ईओ/आरओ के आधिकारिक पाठ्यक्रम में 1974 के क्रय और संविदा नियम भाग ख में अलग स्रोत के रूप में नामित हैं, इसलिए क्रय-प्रक्रिया स्वतंत्र नगरपालिका-विधि विषय है।
- 2
नियमों का औपचारिक नाम राजस्थान नगरपालिकाएं (सामग्री क्रय और संविदा) नियम, 1974 है और इनकी अधिसूचना 27 नवम्बर 1974 को हुई थी।
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क्रय अधिकारी या मांग अधिकारी से आशय अधिशासी अधिकारी है; नगर परिषद के संदर्भ में अधिशासी अधिकारी में आयुक्त भी शामिल है।
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सामग्री या वस्तुओं के लिए 1,000 रुपये से अधिक व्यय पर, अपवाद न हो तो, विधिवत निविदा और सक्षम प्राधिकारी की पूर्व स्वीकृति आवश्यक है।
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कार्य निष्पादन के लिए 2,000 रुपये से अधिक व्यय पर, नियमगत अपवादों को छोड़कर, निविदा और पूर्व स्वीकृति आवश्यक है।
- 6
सार्वजनिक विज्ञापन द्वारा खुली निविदा सामान्य नियम है, विशेषकर जब अनुमानित निविदा मूल्य 5,000 रुपये या अधिक हो।
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सीमित निविदा सामान्यतः 10,000 रुपये से कम के आदेशों में प्रयुक्त होती है, पर अधिक मूल्य के मामलों में लिखित लोकहित-कारण या प्रमाणित तात्कालिकता चाहिए।
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एकल निविदा सामग्री या वस्तुओं में 1,000 रुपये से अधिक न होने वाले अनुमानित मूल्य पर लागू होती है; इसके अलावा नियमों में बिना निविदा के कुछ विशिष्ट अपवाद भी हैं।
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सामग्री-क्रय में निविदा समय-सीमा 1 लाख रुपये तक एक सप्ताह, 1 लाख से अधिक और 5 लाख रुपये तक दो सप्ताह, तथा 5 लाख रुपये से अधिक एक माह है।
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सार्वजनिक कार्यों में निविदा समय-सीमा 2 लाख रुपये तक दो सप्ताह, 2 लाख से अधिक और 5 लाख रुपये तक तीन सप्ताह, तथा 5 लाख रुपये से अधिक एक माह है।
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यदि अपर्याप्त प्रकाशन या कमजोर प्रतियोगिता के कारण पर्याप्त निविदाएं न मिलें, तो व्यापक सूचना के साथ नई निविदाएं आमंत्रित की जानी चाहिए।
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निविदा खुलने के बाद दरें अत्यधिक लगें या दरों की मिलीभगत का संदेह हो, तो बातचीत सभी निविदादाताओं से विधिवत सूचना देकर ही की जा सकती है।
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आपूर्ति निरीक्षण में चुनी गई वस्तुओं को नमूनों और विनिर्देशों से मिलाया जाना चाहिए; तुलना 10 प्रतिशत से कम नहीं होनी चाहिए, जब तक कारण सहित ऐसा करना अव्यावहारिक न हो।
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स्वीकृति के बाद की संविदा में यह लिखा होना चाहिए कि पूर्व स्वीकृति प्राप्त है और स्वीकृति या अनुमोदन की प्रति संविदा का भाग होनी चाहिए।
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अधिनियम और 1974 के नियमों का पालन किए बिना कोई नगरपालिका संविदा बाध्यकारी नहीं होती।
राजस्थान नगरपालिका क्रय और संविदा नियम १९७४ क्या हैं और ईओ/आरओ में इन्हें कैसे पढ़ना चाहिए?
राजस्थान नगरपालिका क्रय और संविदा नियम १९७४ नगरपालिका निकायों के लिए सामग्री, वस्तु और कार्य-संविदा की वैधानिक क्रय-प्रक्रिया बताते हैं, इसलिए ईओ/आरओ में इन्हें स्थानीय स्वशासन के व्यावहारिक वित्तीय नियंत्रण की तरह पढ़ना चाहिए। राजस्थान नगर पालिका (वस्तु क्रय एवं संविदा) नियम १९७४ नगरपालिका निकायों के लिए क्रय और संविदा का विशेष नियम-समूह है। ईओ/आरओ के आधिकारिक पाठ्यक्रम में इन नियमों को भाग ख में अलग स्रोत के रूप में रखा गया है। राजस्थान लोक सेवा आयोग के ईओ/आरओ पाठ्यक्रम में भाग ख ४० अंकों का है। इसलिए यह केवल सामान्य लोक-वित्त का अध्याय नहीं है, बल्कि यह बताता है कि नगरपालिका सामग्री या वस्तुएं कैसे खरीदेगी और निर्माण, मरम्मत या अन्य कार्यों के लिए संविदा कैसे करेगी। वस्तुनिष्ठ प्रश्नों में इसकी उपयोगिता परिभाषाओं, निविदा सीमा-राशियों, निविदा प्रकाशन, समय-सीमा, सक्षम स्वीकृति, संविदा-हस्ताक्षर और निरीक्षण संबंधी सुरक्षा उपायों में है।
नियमों में प्रयुक्त औपचारिक नाम राजस्थान नगरपालिकाएं (सामग्री क्रय और संविदा) नियम, १९७४ है। इनका प्रकाशन २७ नवम्बर १९७४ की अधिसूचना संख्या एफ.३(२)(१३)एलएसजी/७४, जीएसआर ३११(३) से हुआ और ये राजपत्र में प्रकाशन के एक महीने बाद लागू हुए। नियमों का मूल आधार राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, १९५९ बताया गया है, जिसके अंतर्गत राज्य सरकार ने ये नियम बनाए। वर्तमान ईओ/आरओ तैयारी में अभ्यर्थी को इन्हें राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, २००९ की मौजूदा नगरपालिका व्यवस्था से जोड़कर पढ़ना चाहिए, क्योंकि आज दैनिक नगरपालिका शासन बाद के अधिनियम के अधीन चलता है, जबकि पाठ्यक्रम क्रय और संविदा नियम १९७४ को अलग स्रोत के रूप में पूछता है।
नियम संस्थागत भूमिकाओं को संक्षेप में परिभाषित करते हैं। बोर्ड में नगर परिषद भी शामिल है। क्रय अधिकारी या मांग अधिकारी से आशय अधिशासी अधिकारी है। अधिशासी अधिकारी में नगर परिषद का आयुक्त भी शामिल है। इसका सीधा अर्थ है कि क्रय-फाइल केवल लिपिक या भंडार शाखा का विषय नहीं है। सामग्री की मांग, निविदा की प्रक्रिया, निरीक्षण की जिम्मेदारी और अनुपालन अभिलेख अधिशासी अधिकारी के इर्द-गिर्द व्यवस्थित होते हैं। नगर परिषद की स्थिति में यही वैधानिक भूमिका आयुक्त निभाता है।
इन नियमों का क्षेत्र दो जुड़े हुए, पर अलग-अलग, विषयों को कवर करता है। पहला क्षेत्र सामग्री या वस्तुओं का क्रय है, जैसे भंडार सामग्री, उपकरण, अतिरिक्त पुर्जे, स्टेशनरी, औजार, सफाई सामग्री या नगरपालिका प्रशासन और सेवाओं के लिए जरूरी अन्य वस्तुएं। दूसरा क्षेत्र संविदा द्वारा कार्य निष्पादन है, जैसे छोटे निर्माण, मरम्मत, निर्माण-संबंधी फिटिंग, रख-रखाव या अन्य सार्वजनिक कार्य। नियम सामग्री-क्रय और कार्य-निष्पादन को बार-बार अलग रखते हैं, क्योंकि सीमा-राशि, समय-सीमा और तकनीकी अनुमोदन का तर्क दोनों में अलग हो सकता है।
परीक्षा के लिए केंद्रीय बात नियंत्रित विवेक है। नगरपालिका केवल जरूरत होने के आधार पर धन खर्च नहीं कर सकती। फाइल में प्रशासनिक आवश्यकता, बजट उपलब्धता, वैध क्रय-पद्धति, जहां आवश्यक हो वहां उचित निविदा सूचना, जहां आवश्यक हो वहां पूर्व स्वीकृति, निष्पक्ष मूल्यांकन, विधिवत संविदा और बाद में आपूर्ति या कार्य का निरीक्षण दिखना चाहिए। इसी कारण यह विषय ईओ/आरओ पदों के लिए महत्वपूर्ण है। अधिशासी अधिकारी और राजस्व अधिकारी से अपेक्षा रहती है कि वे केवल राजस्व वसूली नहीं, बल्कि नगरपालिका निधि के जवाबदेह व्यय की प्रक्रिया भी समझें।
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