मुख्य तथ्य

  • RPSC ईओ/आरओ पाठ्यक्रम में कार्य संचालन और वार्ड समितियाँ राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 तथा संबंधित नगरीय निकाय नियमों के अंतर्गत आती हैं।
  • इस विषय का वैधानिक केंद्र अधिनियम का अध्याय 3 है, विशेषकर धारा 51 से 62 तक।
  • धारा 51 के अनुसार साधारण सामान्य बैठक 60 दिनों के भीतर एक बार और कैलेंडर वर्ष में कम से कम छह बार होनी चाहिए।
  • धारा 52 सदस्य को नगरपालिका कार्य की उपेक्षा, नगरपालिका संपत्ति की बर्बादी और स्थानीय नागरिक समस्याओं की ओर उचित प्राधिकारी का ध्यान दिलाने का अधिकार द...
  • धारा 54 तीन लाख या अधिक जनसंख्या वाली नगरपालिकाओं में वार्ड समितियों का गठन करती है।

मुख्य बिंदु

  1. 1

    RPSC ईओ/आरओ पाठ्यक्रम में कार्य संचालन और वार्ड समितियाँ राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 तथा संबंधित नगरीय निकाय नियमों के अंतर्गत आती हैं।

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    इस विषय का वैधानिक केंद्र अधिनियम का अध्याय 3 है, विशेषकर धारा 51 से 62 तक।

  3. 3

    धारा 51 के अनुसार साधारण सामान्य बैठक 60 दिनों के भीतर एक बार और कैलेंडर वर्ष में कम से कम छह बार होनी चाहिए।

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    निर्वाचित सदस्यों के कम से कम एक-तिहाई लिखित अनुरोध और प्रस्तावित संकल्प के उल्लेख पर अध्यक्ष को विशेष बैठक बुलानी होती है।

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    अध्यक्ष द्वारा समय पर विशेष बैठक न बुलाने पर मुख्य नगरपालिका अधिकारी अगली वैधानिक अवधि में बैठक बुलाता है।

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    सूचना, कार्यसूची, प्रश्न, संकल्प और विस्तृत कार्य संचालन विहित प्रक्रिया तथा नियमों से संचालित होते हैं।

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    धारा 52 सदस्य को नगरपालिका कार्य की उपेक्षा, नगरपालिका संपत्ति की बर्बादी और स्थानीय नागरिक समस्याओं की ओर उचित प्राधिकारी का ध्यान दिलाने का अधिकार देती है।

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    प्रत्येक सदस्य नगरपालिका प्रशासन से संबंधित विषयों पर अध्यक्ष से प्रश्न पूछ सकता है और संकल्प रख सकता है, पर यह अधिकार नियमों के अधीन है।

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    सदस्य मुख्य नगरपालिका अधिकारी को उचित सूचना देकर नगरपालिका कार्यालय में बिना शुल्क अभिलेखों का निरीक्षण कर सकता है।

  10. 10

    धारा 54 तीन लाख या अधिक जनसंख्या वाली नगरपालिकाओं में वार्ड समितियों का गठन करती है।

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    वार्ड समिति एक या अधिक वार्डों की हो सकती है और उन वार्डों का प्रतिनिधित्व करने वाले नगरपालिका सदस्य उसके सदस्य होते हैं।

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    नगरपालिका विशेष ज्ञान या नगरपालिका प्रशासन के अनुभव वाले अधिकतम पाँच पात्र व्यक्तियों को वार्ड समिति में नामित कर सकती है।

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    एक वार्ड की समिति में उसी वार्ड का नगरपालिका सदस्य अध्यक्ष होता है; दो या अधिक वार्डों की समिति में अध्यक्ष संबंधित नगरपालिका सदस्यों में से चुना जाता है।

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    वार्ड समिति की गणपूर्ति तीन सदस्यों से बनती है, जिनमें वार्ड समिति का अध्यक्ष शामिल होना चाहिए।

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    धारा 60 वार्ड समिति को ठोस अपशिष्ट, सफाई, विकास योजनाओं, लाभार्थी पहचान, पार्क, सड़क प्रकाश और जनभागीदारी में सहायक भूमिका देती है।

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    धारा 59 समितियों को नगरपालिका के निर्देशों के अधीन रखती है और बजट से बाहर नगरपालिका निधि खर्च स्वीकृत करने से रोकती है।

कार्य संचालन और वार्ड समितियों का वैधानिक आधार क्या है?

कार्य संचालन और वार्ड समितियों का वैधानिक आधार राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 का अध्याय 3 है, जिसे राजस्थान लोक सेवा आयोग की अधिशासी अधिकारी और राजस्व अधिकारी परीक्षा में नगरीय स्थानीय निकायों के नियमों के साथ पढ़ा जाता है। राजस्थान लोक सेवा आयोग की आधिकारिक भर्ती-विज्ञप्ति के अनुसार अधिशासी अधिकारी और राजस्व अधिकारी के प्रश्न-पत्र में राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 तथा नगरीय निकायों से संबंधित नियमों और योजनाओं का भाग 40 अंकों का है। कार्य संचालन और वार्ड समितियाँ विषय राजस्थान लोक सेवा आयोग के अधिशासी अधिकारी तथा राजस्व अधिकारी पाठ्यक्रम में राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 और नगरीय स्थानीय निकायों से जुड़े नियमों के अंतर्गत पढ़ा जाता है। परीक्षा की दृष्टि से पहला नियम यह है कि नियमों से पहले अधिनियम पढ़ा जाए। अधिनियम ही संस्था बनाता है, न्यूनतम वैधानिक ढांचा तय करता है और यह बताता है कि कौन-सी बातें नियमों या नगरपालिका के आदेश से विस्तार पाएंगी। बैठक-प्रक्रिया में नियम ज़रूरी हैं, पर वे अध्याय 3 से अलग कोई स्वतंत्र प्रशासनिक पुस्तिका नहीं हैं।

राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 का अध्याय 3 इस विषय का मूल आधार है। धारा 51 नगरपालिका की बैठकों से जुड़ी है। धारा 52 व्यक्तिगत सदस्यों के अधिकार और विशेषाधिकार बताती है। धारा 53 अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव से संबंधित है; यह आसपास का प्रावधान है, लेकिन इस विषय का केंद्र नहीं। धारा 54 वार्ड समितियों का गठन करती है। धारा 55 से 58 तक नगरपालिका समितियों और उनकी बैठक-प्रक्रिया से संबंधित हैं। धारा 59 समितियों, जिनमें वार्ड समितियाँ भी शामिल हैं, को नगरपालिका के निर्देशों के अधीन रखती है। धारा 60 वार्ड समिति के सामान्य कार्य बताती है। धारा 61 कुछ प्रतिबंधों के अधीन समितियों को शक्तियाँ, कर्तव्य और कार्य सौंपने की व्यवस्था देती है। धारा 62 यह सुरक्षा देती है कि कुछ रिक्तियों, त्रुटियों या अनियमितताओं के कारण कार्य और कार्यवाही अपने-आप अमान्य नहीं हो जाती, यदि अधिनियम की मूल शर्तें पूरी हैं।

धारा 2 की परिभाषाएँ भी याद रखनी चाहिए। नगरपालिका में नगर निगम, नगर परिषद और नगर बोर्ड तीनों आते हैं। अध्यक्ष का पदनाम निकाय के अनुसार बदलता है: नगर निगम में महापौर, नगर परिषद में सभापति और नगर बोर्ड में अध्यक्ष। मुख्य नगरपालिका अधिकारी नगर निगम या नगर परिषद में आयुक्त और नगर बोर्ड में अधिशासी अधिकारी होता है। वार्ड धारा 9 के अंतर्गत गठित वार्ड है और वार्ड समिति धारा 54 में वर्णित समिति है। वस्तुनिष्ठ प्रश्नों में अक्सर पदनाम बदलकर वही कानूनी नियम पूछा जाता है, इसलिए परिभाषा-आधारित सावधानी ज़रूरी है।

संवैधानिक पृष्ठभूमि अनुच्छेद 243-एस में है। यह तीन लाख या उससे अधिक जनसंख्या वाली नगरपालिकाओं में वार्ड समितियों की अपेक्षा करता है और राज्य कानून को उनकी संरचना तथा क्षेत्र तय करने की शक्ति देता है। राजस्थान का अधिनियम धारा 54 के माध्यम से इस विचार को लागू करता है। इसलिए वार्ड समिति को वैकल्पिक मोहल्ला समूह या कल्याण समिति नहीं मानना चाहिए। वह वार्ड, प्रतिनिधित्व, स्थानीय नागरिक निगरानी और जनभागीदारी से जुड़ी वैधानिक नगरपालिका समिति है।

अधिशासी अधिकारी और राजस्व अधिकारी तैयारी में याद रखने की शृंखला छोटी और साफ है: नगरपालिका बैठक के लिए धारा 51, सदस्य-अधिकार के लिए धारा 52, वार्ड समितियों के लिए धारा 54, समिति बैठकों के लिए धारा 58, समितियों पर नगरपालिका नियंत्रण के लिए धारा 59, वार्ड समिति कार्यों के लिए धारा 60 और कार्यवाही की वैधता के लिए धारा 62। पाठ्यक्रम में यह भाग 120 अंकों के वस्तुनिष्ठ प्रश्न-पत्र में 40 अंकों के भाग से जुड़ा है, इसलिए इसे हल्का विषय न मानें। व्यावहारिक प्रश्न यही हैं: बैठक कौन बुलाता है, कार्यसूची में क्या आता है, अध्यक्षता कौन करता है, गणपूर्ति कब मानी जाती है, मतदान से निर्णय कैसे बनता है, कार्यवाही कहाँ दर्ज रहती है, अभिलेख कौन देख सकता है और वार्ड समिति वार्ड-स्तर पर वास्तव में क्या कर सकती है।

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