मुख्य तथ्य

  • स्नातक-स्तर सामान्य हिन्दी में पहचान और शुद्धि पूछी जाती है: मानक वर्तनी, वाक्य-शुद्धि, कार्यालयी शब्दावली, राजभाषा तथ्य, विराम-चिह्न और पत्र-रूप।
  • शब्द-शुद्धि में सबसे पहले यह पहचानें कि गलती किस तरह की है: मात्रा, व्यंजन, संयुक्ताक्षर, नासिक्य चिह्न, श-ष-स या स्वीकृत औपचारिक प्रयोग।
  • आजीविका, आवश्यक, उज्ज्वल, स्वास्थ्य, व्यवहार, कृतज्ञ और संविधान जैसे बार-बार पूछे जाने वाले शब्दों की सही वर्तनी याद रखें।
  • वाक्य-शुद्धि की शुरुआत लिंग और वचन-अन्वय से करें; सभा, समिति, सूचना और योजना जैसे शब्द अक्सर स्त्रीलिंग अन्वय कराते हैं।
  • प्राप्तकर्ता के साथ ‘को’, स्थान के साथ ‘में/पर’, उद्देश्य के लिए ‘के लिए’ और कर्ता बताने के लिए ‘द्वारा’ का सही प्रयोग करें।

मुख्य बिंदु

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    स्नातक-स्तर सामान्य हिन्दी में पहचान और शुद्धि पूछी जाती है: मानक वर्तनी, वाक्य-शुद्धि, कार्यालयी शब्दावली, राजभाषा तथ्य, विराम-चिह्न और पत्र-रूप।

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    शब्द-शुद्धि में सबसे पहले यह पहचानें कि गलती किस तरह की है: मात्रा, व्यंजन, संयुक्ताक्षर, नासिक्य चिह्न, श-ष-स या स्वीकृत औपचारिक प्रयोग।

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    आजीविका, आवश्यक, उज्ज्वल, स्वास्थ्य, व्यवहार, कृतज्ञ और संविधान जैसे बार-बार पूछे जाने वाले शब्दों की सही वर्तनी याद रखें।

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    वाक्य-शुद्धि की शुरुआत लिंग और वचन-अन्वय से करें; सभा, समिति, सूचना और योजना जैसे शब्द अक्सर स्त्रीलिंग अन्वय कराते हैं।

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    प्राप्तकर्ता के साथ ‘को’, स्थान के साथ ‘में/पर’, उद्देश्य के लिए ‘के लिए’ और कर्ता बताने के लिए ‘द्वारा’ का सही प्रयोग करें।

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    पूर्ण भूतकालिक सकर्मक क्रियाओं में ने का प्रयोग क्रिया-अन्वय को बदल सकता है; कर्ता, कर्म, परसर्ग और क्रिया को अलग-अलग पहचानें।

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    मुहावरे स्वीकृत रूप में ही शुद्ध माने जाते हैं; किसी एक शब्द को समानार्थी लगने वाले शब्द से बदलना भी विकल्प को अमानक बना सकता है।

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    प्रशासनिक शब्दावली में स्थापित कार्यालयी शब्द याद रखें: कार्यसूची, कार्यवृत्त, ज्ञापन, परिपत्र, अधिसूचना और संलग्नक।

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    कार्यसूची और कार्यवृत्त में भेद रखें: कार्यसूची बैठक से पहले के विषयों की सूची है, कार्यवृत्त बैठक के बाद का औपचारिक लेखा है।

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    अनुच्छेद 343 संघ की राजभाषा हिन्दी, देवनागरी लिपि और शासकीय प्रयोजनों के लिए भारतीय अंकों के अंतरराष्ट्रीय रूप से जुड़ा है।

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    राजभाषा नियमों में क, ख और ग क्षेत्र याद रखें; राजस्थान क क्षेत्र में आता है।

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    विराम-चिह्न पाठ्यक्रम का अलग विषय है; पूर्णविराम, अल्पविराम, अर्धविराम, द्विबिंदु, उद्धरण-चिह्न, प्रश्नवाचक चिह्न और योजक के सीधे प्रयोग पढ़ें।

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    कार्यालयी पत्र-रूप की पहचान में दिनांक, प्राप्तकर्ता, विषय, संदर्भ, मुख्य भाग, हस्ताक्षर, पदनाम और संलग्नक पर ध्यान दें; शैली स्पष्ट और औपचारिक होनी चाहिए।

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    पत्र-लेखन के लिए सरकारी, अर्ध-सरकारी और अनौपचारिक पत्रों के प्रारूप पहचानें; अन्य कार्यालयी दस्तावेज़ों को केवल अतिरिक्त अभ्यास मानें।

समान पात्रता परीक्षा में शब्द-शुद्धि और वाक्य-शुद्धि कैसे पूछी जाती है?

समान पात्रता परीक्षा में शब्द-शुद्धि और वाक्य-शुद्धि का काम साहित्यिक व्याख्या करना नहीं, बल्कि मानक लिखित हिन्दी, कार्यालयी शब्दावली और राजभाषा-तथ्यों में सही रूप पहचानना है। RSSB की स्नातक-स्तर समान पात्रता परीक्षा 2024 के पाठ्यक्रम में इस विषय से सीधे जुड़े बिंदु हैं: पारिभाषिक शब्दावली, शब्द-शुद्धि, वाक्य-शुद्धि, विराम-चिह्न, राजभाषा हिन्दी की संवैधानिक स्थिति और कार्यालयी पत्रों से संबंधित ज्ञान। यह विषय साहित्यिक रसास्वादन का नहीं, सही रूप पहचानने और अशुद्धि सुधारने का है। राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की स्नातक-स्तर समान पात्रता परीक्षा के सामान्य हिन्दी पाठ्यक्रम में शब्द-शुद्धि, वाक्य-शुद्धि, प्रशासनिक पारिभाषिक शब्दावली, राजभाषा-ज्ञान, विराम-चिह्न और कार्यालयी पत्रों का प्रारूप शामिल है। समान पात्रता परीक्षा के बहुविकल्पीय प्रश्नों में अक्सर आजीविका जैसे शब्द की सही वर्तनी पहचाननी होती है, अशुद्ध वाक्य चुनना होता है, एजेंडा जैसे अंग्रेज़ी कार्यालयी शब्द का सही हिन्दी रूप बताना होता है, या संविधान और राजभाषा नियमों पर सीधा तथ्य पूछा जाता है। इसलिए मुख्य कौशल चार मिलते-जुलते विकल्पों की जल्दी तुलना करके उस रूप को चुनना है जो मानक लिखित हिन्दी और कार्यालयी प्रयोग में स्वीकार्य हो।

शब्द-शुद्धि में परीक्षक प्रायः दिखाई देने वाली भूल देता है: गलत मात्रा, छूटा हुआ अनुस्वार या चंद्रबिंदु, अनावश्यक संयुक्ताक्षर, श-ष-स की गड़बड़ी, ह्रस्व-दीर्घ स्वर की भूल या केवल बोलचाल के आधार पर बना शब्द। उदाहरण के लिए आजीविका मानक रूप है; यदि विकल्प में भीतर की मात्रा या व्यंजन क्रम बदल दिया गया हो तो वह अशुद्ध होगा। इसी प्रकार उज्ज्वल, निरंतर, व्यवहार, आवश्यक, स्वास्थ्य, कृतज्ञ, अनुशासन और परिणाम जैसे शब्दों की सही वर्तनी याद रहनी चाहिए। केवल उच्चारण से निर्णय करना सुरक्षित नहीं है, क्योंकि बोलचाल कई बार वास्तविक वर्तनी को ढक देती है।

वाक्य-शुद्धि में देखा जाता है कि वाक्य व्याकरण, मुहावरे और पूर्णता की दृष्टि से ठीक है या नहीं। सामान्य जाल हैं: लिंग-संबंधी असंगति, वचन का मेल न बैठना, गलत परसर्ग, परसर्ग के बाद गलत कारक-रूप, अमानक मुहावरा, सहायक क्रिया की कमी या अनावश्यक दुहराव। कोई वाक्य सुनने में सहज लगे, फिर भी अशुद्ध हो सकता है यदि संज्ञा और विशेषण का मेल न हो, ने का प्रयोग गलत हो, या मुहावरे का स्वीकृत रूप बदल गया हो। वस्तुनिष्ठ प्रश्न कभी शुद्ध वाक्य पूछते हैं और कभी अशुद्ध वाक्य; दोनों में पहले व्याकरणिक संबंध पहचानना है, फिर शब्द-चयन देखना है।

प्रशासनिक शब्दावली में कार्यालयी प्रयोग वाले शब्द पढ़े जाते हैं। इसमें सरकारी, दफ्तर और तकनीकी कामकाज के प्रचलित हिन्दी शब्द पूछे जाते हैं। इन जोड़ों को साफ़-साफ़ याद रखें: एजेंडा—कार्यसूची, मिनट्स—कार्यवृत्त, मेमोरेंडम—ज्ञापन, नोटिफिकेशन—अधिसूचना, सर्कुलर—परिपत्र, सैंक्शन—स्वीकृति, प्रपोज़ल—प्रस्ताव और एनक्लोज़र—संलग्नक। ये केवल सजावटी अनुवाद नहीं, बल्कि फाइलों, सूचनाओं और विभागीय पत्राचार में चलने वाले मानक शब्द हैं। इसलिए उत्तर मुक्त अनुवाद नहीं, बल्कि स्वीकृत कार्यालयी समतुल्य होना चाहिए।

राजभाषा-भाग शब्दावली से स्वाभाविक रूप से जुड़ता है, क्योंकि सरकारी संचार राजभाषा नियमों के भीतर चलता है। अनुच्छेद 343 संघ की राजभाषा हिन्दी, लिपि देवनागरी और संघ के शासकीय प्रयोजनों के लिए भारतीय अंकों के अंतरराष्ट्रीय रूप से जुड़ा मूल तथ्य देता है। राजभाषा अधिनियम, 1963 और राजभाषा नियम, 1976 संघीय प्रशासन में हिन्दी और अंग्रेज़ी के प्रयोग, तथा क, ख, ग क्षेत्रों की संचार-व्यवस्था को व्यावहारिक रूप देते हैं। परीक्षा में सामान्यतः अनुच्छेद संख्या, क्षेत्र-वर्गीकरण या राजभाषा प्रयोग पर सही कथन पूछा जाता है।

तैयारी का क्रम स्पष्ट रखें: पहले मानक वर्तनी-पैटर्न, फिर वाक्य-शुद्धि के नियम, फिर कार्यालयी शब्दावली, फिर राजभाषा तथ्य और पत्र-रूप की पहचान। विराम-चिह्न और कार्यालयी पत्रों का प्रारूप अलग-अलग परीक्षा-योग्य हिस्से हैं। गलत पूर्णविराम, अल्पविराम, द्विबिंदु, पता-खंड या संबोधन किसी वाक्य या पत्र-रूप कथन को अशुद्ध बना सकता है। परीक्षा में लंबे विवरण से अधिक सही रूप की साफ़ पहचान काम आती है।

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