ऐकिक नियम
मुख्य तथ्य
- ऐकिक नियम इकाई-दर की विधि है: पहले दी गई सूचना को एक इकाई पर लाते हैं, फिर आवश्यक इकाइयों तक बढ़ाते हैं।
- राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की स्नातक स्तर समान पात्रता परीक्षा 2024 में ऐकिक नियम तार्किक विवेचन और मानसिक योग्यता के भाग में प्रतिशत, अनुपात और समान…
- प्रत्यक्ष समानुपात में दोनों राशियाँ एक ही दिशा में चलती हैं: अधिक वस्तुएँ तो अधिक मूल्य, अधिक दूरी तो अधिक ईंधन, अधिक दिन तो अधिक मजदूरी।
- कई-से-एक प्रत्यक्ष प्रश्नों में एक इकाई का मान निकालने के लिए दिए गए कुल मान को दी गई इकाइयों से भाग दिया जाता है।
- एक-से-कई प्रत्यक्ष प्रश्नों में एक इकाई के मान को अपेक्षित इकाइयों की संख्या से गुणा किया जाता है।
मुख्य बिंदु
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ऐकिक नियम इकाई-दर की विधि है: पहले दी गई सूचना को एक इकाई पर लाते हैं, फिर आवश्यक इकाइयों तक बढ़ाते हैं।
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राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की स्नातक स्तर समान पात्रता परीक्षा 2024 में ऐकिक नियम तार्किक विवेचन और मानसिक योग्यता के भाग में प्रतिशत, अनुपात और समानुपात के पास सूचीबद्ध है।
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प्रत्यक्ष समानुपात में दोनों राशियाँ एक ही दिशा में चलती हैं: अधिक वस्तुएँ तो अधिक मूल्य, अधिक दूरी तो अधिक ईंधन, अधिक दिन तो अधिक मजदूरी।
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कई-से-एक प्रत्यक्ष प्रश्नों में एक इकाई का मान निकालने के लिए दिए गए कुल मान को दी गई इकाइयों से भाग दिया जाता है।
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एक-से-कई प्रत्यक्ष प्रश्नों में एक इकाई के मान को अपेक्षित इकाइयों की संख्या से गुणा किया जाता है।
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व्युत्क्रम समानुपात में एक राशि बढ़ती है तो दूसरी घटती है: अधिक मजदूर समय घटाते हैं, स्थिर दूरी में अधिक चाल यात्रा-समय घटाती है।
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कार्य-समय प्रश्नों में कुल कार्य को स्थिर मानकर व्यक्ति, दिन और घंटों की तुलना प्रति इकाई समय के कार्य से करनी चाहिए।
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चाल-समय-दूरी प्रश्नों में चाल और समय को व्युत्क्रम तभी मानें जब दूरी स्थिर हो।
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प्रतिशत प्रश्नों में आधार को 100 इकाई मानकर वृद्धि, कमी, लाभ या हानि लगाना सबसे सुरक्षित तरीका है।
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अनुपात प्रश्नों में छिपा ऐकिक चरण होता है: पहले अनुपात का एक भाग निकालिए, फिर आवश्यक भागों से गुणा कीजिए।
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लाभ-हानि में पहले यह पहचानना जरूरी है कि प्रतिशत क्रय मूल्य पर है या विक्रय मूल्य पर; सामान्य नियम में लाभ और हानि प्रतिशत क्रय मूल्य पर होते हैं।
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परीक्षा-सुरक्षित क्रम है: दी गई इकाई, अपेक्षित इकाई, संबंध-प्रकार और आधार पहचानिए, फिर ही समानुपात लिखिए।
ऐकिक नियम समान पात्रता परीक्षा में क्यों जरूरी है?
ऐकिक नियम समान पात्रता परीक्षा में इसलिए जरूरी है क्योंकि प्रतिशत, अनुपात, समानुपात, लाभ-हानि, मजदूरी, समय और मात्रा जैसे कई संख्यात्मक प्रश्नों का सबसे साफ हल पहले एक इकाई निकालने और फिर अपेक्षित इकाई तक पहुँचने से बनता है। ऐकिक नियम इस अध्याय में इसलिए रखा जाता है कि यह केवल विद्यालयी गणित की छोटी विधि नहीं है; राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की स्नातक स्तर समान पात्रता परीक्षा २०२४ के पाठ्यक्रम में यह तार्किक विवेचन, मानसिक योग्यता और मूल संख्यात्मक योग्यता के अंतर्गत स्पष्ट रूप से दिया गया है। आधिकारिक पाठ्यक्रम में यह प्रतिशत, अनुपात और समानुपात के पास आता है, और परीक्षा में इसका प्रयोग भी इसी रूप में होता है। राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की समान पात्रता परीक्षा स्नातक स्तर २०२४ योजना में प्रश्नपत्र ३०० अंकों का है, इसलिए छोटे संख्यात्मक प्रश्नों में समय बचाने वाली विधि सचमुच अंक दिलाती है। प्रश्न के ऊपर हमेशा 'ऐकिक नियम' नहीं लिखा मिलेगा, पर बार-बार ऐसे प्रश्न मिलते हैं जिनमें दी गई सूचना को पहले एक इकाई पर लाना और फिर आवश्यक इकाई तक बढ़ाना ही सबसे साफ रास्ता होता है। इसलिए इस विषय को अनुपात, प्रतिशत, आय-व्यय और लाभ-हानि से अलग सूत्र-सूची की तरह नहीं पढ़ना चाहिए।
स्नातक स्तर के अभ्यर्थी को प्रश्न-ढाँचे में यह समझना होगा कि तर्क और संख्यात्मक भाग लंबे व्युत्पादन से अधिक गति और शुद्धता को महत्त्व देता है। प्रत्यक्ष ऐकिक प्रश्न में वस्तुओं की कीमत, दिनों की मजदूरी, निश्चित दर पर मात्रा या दिए गए अनुपात में राशि बाँटने जैसी स्थितियाँ आ सकती हैं। व्युत्क्रम ऐकिक प्रश्न कार्य और समय, चाल और समय, या व्यक्तियों की संख्या और दिनों के रूप में पूछा जा सकता है। वाणिज्यिक अंकगणित भी इसी सोच पर चलता है: यदि विक्रय मूल्य क्रय मूल्य का ८० प्रतिशत है, तो पहले १ प्रतिशत या १०० प्रतिशत निकालिए, फिर अपेक्षित लाभ या हानि वाले लक्ष्य तक जाइए।
पूर्व-प्रश्नों का संकेत अनुप्रयोग-प्रधान है। २०२४ के आधिकारिक मुख्य प्रश्नपत्रों में इसी संख्यात्मक क्षेत्र के आसपास लाभ-हानि, अनुपात में परिवर्तन, समानुपातीय बाँट और प्रतिशत वृद्धि-ह्रास जैसे प्रश्न दिखते हैं। २०२२ के आधिकारिक मुख्य प्रश्नपत्रों में भी इसी भाग में आय-अनुपात, राशियों का विभाजन, परिमाप-क्षेत्रफल अनुपात तर्क और लाभ-हानि शैली की गणनाएँ आती हैं। इससे पढ़ाई की दिशा स्पष्ट होती है: 'ऐकिक नियम' शब्द दिखने की प्रतीक्षा मत कीजिए। प्रश्न कहे कि ५ वस्तुओं का मूल्य इतना है तो ८ वस्तुओं का कितना होगा, किसी की आय दूसरे की आय का ३/५ है, १२ मजदूर काम १० दिन में पूरा करते हैं, या २० प्रतिशत हानि पर वस्तु ४०० रुपये में बिकी, तो ऐकिक नियम पहले से सक्रिय है।
स्नातक स्तर के अभ्यर्थी को इस अध्याय को मूल संख्यात्मक योग्यता की नियंत्रण-विधि की तरह पढ़ना चाहिए। तिरछा गुणन किया जा सकता है, पर उसे यांत्रिक ढंग से करने पर गलती की संभावना रहती है। सुरक्षित क्रम है: दी गई इकाई पहचानिए, अपेक्षित इकाई पहचानिए, संबंध प्रत्यक्ष है या व्युत्क्रम यह तय कीजिए, और फिर ही गुणा या भाग कीजिए। यही क्रम समान पात्रता परीक्षा की आम गलतियों से बचाता है: अनुपात उलट देना, लाभ प्रतिशत को विक्रय मूल्य पर लगा देना जबकि वह क्रय मूल्य पर है, स्थिर दूरी में चाल-समय को प्रत्यक्ष मान लेना, और आय-व्यय प्रश्नों में पुराने तथा नए प्रतिशत आधार मिला देना।
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