मुख्य तथ्य

  • इनपुट-आउटपुट आरएसएसबी सीईटी स्नातक 2024 के तार्किक विवेचन और मानसिक योग्यता पाठ्यक्रम में स्पष्ट रूप से दिया गया है, इसलिए इसे छोड़ना सुरक्षित नहीं है…
  • मुख्य कौशल नियम-निर्धारण है: पहले इनपुट से प्रथम चरण की तुलना करें, फिर प्रथम से द्वितीय चरण की।
  • मशीन व्यवस्था में हर चरण सामान्यतः किसी एक शब्द, संख्या, अक्षर, चिह्न या अक्षरांकीय पद को नियोजित स्थान पर स्थिर करता है।
  • शब्द नियमों में वर्णक्रम, उल्टा वर्णक्रम, शब्द-लंबाई, प्रथम अक्षर और अंतिम अक्षर जैसे आधार आते हैं।
  • संख्या नियमों में आरोही क्रम, अवरोही क्रम, विषम-सम समूह, अंकीय योग और इकाई अंक की तुलना प्रमुख हैं।

मुख्य बिंदु

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    इनपुट-आउटपुट आरएसएसबी सीईटी स्नातक 2024 के तार्किक विवेचन और मानसिक योग्यता पाठ्यक्रम में स्पष्ट रूप से दिया गया है, इसलिए इसे छोड़ना सुरक्षित नहीं है।

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    मुख्य कौशल नियम-निर्धारण है: पहले इनपुट से प्रथम चरण की तुलना करें, फिर प्रथम से द्वितीय चरण की।

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    मशीन व्यवस्था में हर चरण सामान्यतः किसी एक शब्द, संख्या, अक्षर, चिह्न या अक्षरांकीय पद को नियोजित स्थान पर स्थिर करता है।

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    शब्द नियमों में वर्णक्रम, उल्टा वर्णक्रम, शब्द-लंबाई, प्रथम अक्षर और अंतिम अक्षर जैसे आधार आते हैं।

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    संख्या नियमों में आरोही क्रम, अवरोही क्रम, विषम-सम समूह, अंकीय योग और इकाई अंक की तुलना प्रमुख हैं।

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    वैकल्पिक नियमों में प्रायः एक शब्द और एक संख्या क्रम से रखे जाते हैं, जैसे वर्णक्रम में पहला शब्द और फिर सबसे छोटी संख्या।

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    चिह्न-संक्रिया इनपुट में पहले चिह्नों को गणितीय या संबंधात्मक अर्थ में खोलें, फिर आउटपुट निकालें।

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    प्रश्न में दिया गया गणना-क्रम हमेशा मानें; विशेष बाएँ-से-दाएँ निर्देश सामान्य गणितीय क्रम को बदल सकता है।

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    कूटलेखन-व्याख्या संबंध में अक्षर-प्रतिस्थापन, शब्द-कूट मिलान, कूटित कथन और अक्षरांकीय रूपांतरण शामिल हैं।

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    तेज समाधान के लिए चरण संख्या, बदला हुआ पद, बदलाव का कारण और बदली व्यवस्था वाली छोटी तालिका बनाएँ।

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    जो स्थान स्थिर हो चुके हैं उनकी पुनर्गणना न करें; स्थिर खंड चिन्हित कर केवल अस्थिर भाग पर काम करें।

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    सीईटी शैली में लंबे बैंकिंग-शैली सेटों से अधिक छोटे नियम-प्रयोग प्रश्न अपेक्षित हैं, फिर भी प्रत्यक्ष अवधारणा पूरी पढ़नी चाहिए।

सीईटी स्नातक में इनपुट-आउटपुट कहाँ आता है और कैसा पूछा जा सकता है?

सीईटी स्नातक में इनपुट-आउटपुट तार्किक विवेचन और मानसिक योग्यता भाग का पाठ्यक्रम-बिंदु है, और इससे नियम पहचानकर अगला चरण, अंतिम व्यवस्था, किसी स्थान का पद या चरण-संख्या पूछी जा सकती है। इनपुट-आउटपुट इस पाठ्यक्रम में बाहर से जोड़ा गया बैंक-परीक्षा वाला विषय नहीं है; आरएसएसबी सीईटी स्नातक स्तर २०२४ के तार्किक विवेचन और मानसिक योग्यता भाग में यह सीधे दिया गया है। राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के विज्ञापन संख्या १०/२०२४ में सीईटी स्नातक २०२४ के अंतर्गत ११ सेवाओं के पदों की सूची दी गई है। इसलिए अभ्यर्थी को इसका मूल रूप अवश्य पढ़ना चाहिए, भले ही हाल के आधिकारिक प्रश्नपत्रों में इससे मिलते-जुलते कूटलेखन-व्याख्या, कूटित कथन और चिह्न-संक्रिया प्रश्न अधिक स्पष्ट दिखाई देते हों। इस अध्याय में इनपुट शब्दों, संख्याओं, अक्षरों, चिह्नों या मिश्रित अक्षरांकीय पदों की दी हुई पंक्ति हो सकता है। किसी नियम से पहला चरण बनता है, फिर उसी या जुड़े हुए नियम से दूसरा चरण बनता है, और अंत में अंतिम व्यवस्था मिलती है। प्रश्न अगले चरण, अंतिम व्यवस्था, किसी स्थान पर आने वाले पद या उस चरण-संख्या के बारे में पूछ सकता है जहाँ कोई व्यवस्था बनती है।

सीईटी स्नातक के लिए तैयारी का स्तर यथार्थवादी रखना चाहिए। २०२४ और २०२२ के नमूना आधिकारिक प्रश्नपत्रों में लंबे शुद्ध मशीन-इनपुट समूह बहुत मजबूत संकेत नहीं देते, पर कूटलेखन, कूटित संबंध और चिह्नों से गणितीय या संबंधात्मक अर्थ निकालने वाले प्रश्न निकट संकेत देते हैं। इससे विषय हटता नहीं है, क्योंकि पाठ्यक्रम में इनपुट-आउटपुट साफ नाम से है। इसका अर्थ केवल इतना है कि अभ्यास का संतुलन ठीक रखा जाए। स्नातक स्तर के अभ्यर्थी को पूर्ण मशीन-व्यवस्था पद्धति आनी चाहिए, लेकिन पाँच-पाँच प्रश्नों वाले बहुत लंबे बैंक-परीक्षा शैली के समूहों पर सारा समय नहीं लगाना चाहिए। सुरक्षित तरीका है: छोटा इनपुट, दो-तीन दिखे हुए चरण और नियम या परिणाम पूछने वाले वस्तुनिष्ठ प्रश्नों पर पकड़ बनाना।

मुख्य कौशल नियम-निर्धारण है। हर चरण को नई पहेली की तरह हल न करें। पहले इनपुट की तुलना पहले चरण से करें और देखें कि क्या बदला। फिर पहले चरण की तुलना दूसरे चरण से करें और जाँचें कि वही तरह का बदलाव आगे चल रहा है या नहीं। सामान्य चालें हैं: सबसे छोटी संख्या बाएँ लगना, सबसे बड़ी संख्या दाएँ लगना, वर्णक्रम में पहला शब्द स्थिर होना, वर्णक्रम में अंतिम शब्द स्थिर होना, विषम-सम संख्याओं को अलग करना, या शब्द और संख्या को बारी-बारी से रखना। नियम मिलते ही शेष उत्तर सामान्यतः यांत्रिक हो जाता है।

यह विषय मूल संख्यात्मक योग्यता और कूटलेखन से भी जुड़ता है। कुछ प्रश्नों में @, #, %, $ जैसे चिह्नों को जोड़, घटाव, गुणा या भाग का अर्थ दिया जाता है। फिर दिए गए चिह्नित इनपुट को गणितीय आउटपुट में बदलना होता है। कुछ प्रश्नों में अक्षर अगले या पिछले अक्षर से बदलते हैं, शब्द पहले और अंतिम अक्षर से कूटित होते हैं, या अक्षरांकीय श्रेणियाँ संख्या-मूल्य और वर्ण-क्रम के आधार पर बदली जाती हैं। ये शुद्ध मशीन-व्यवस्था समूह नहीं हैं, पर वही आदत जाँचते हैं: दिए गए इनपुट-आउटपुट युग्म से नियम पहचानना और नए इनपुट पर उसे बिना चूके लागू करना।

परीक्षा-दृष्टि से तैयारी को दो भागों में बाँटें। प्रत्यक्ष तैयारी में शब्द-संख्या की क्रमिक व्यवस्था आती है। निकट तैयारी में चिह्न-संक्रिया, कूटित गणना, अक्षर-प्रतिस्थापन और अक्षरांकीय रूपांतरण आते हैं। दोनों को साथ पढ़ना उपयोगी है, क्योंकि सीईटी प्रश्न लंबे चरण-तालिका के बिना भी इनपुट-आउटपुट विवेचन पूछ सकता है। जो अभ्यर्थी नियम को सरल भाषा में स्पष्ट बोल सकता है, वह प्रश्न का आधा भाग पहले ही हल कर चुका होता है।