मुख्य तथ्य

  • आधुनिक पर्यावरण शासन मानव पर्यावरण पर स्टॉकहोम सम्मेलन से शुरू होकर रियो पृथ्वी शिखर सम्मेलन 1992 में विस्तृत होता है।
  • पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 भारत में मुद्दा-विशेष नियमों और केंद्रीय मानकों का व्यापक विधिक आधार है।
  • प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 और 2022 संशोधन तथा ई-कचरा प्रबंधन नियम, 2022 अपशिष्ट लागत को उत्पादक तक पहुँचाते हैं।
  • राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 पर्यावरणीय विवाद को केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि विशिष्ट न्यायिक विषय बनाता है।
  • मिशन लाइफ और ग्रीन क्रेडिट नियम, 2023 नियंत्रण आधारित नियमन में व्यवहार और स्वैच्छिक कार्रवाई जोड़ते हैं।

मुख्य बिंदु

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    आधुनिक पर्यावरण शासन मानव पर्यावरण पर स्टॉकहोम सम्मेलन से शुरू होकर रियो पृथ्वी शिखर सम्मेलन 1992 में विस्तृत होता है।

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    पर्यावरणीय मुद्दे संधियों, घरेलू विधियों, अपशिष्ट नियमों, प्रदूषण प्रक्रियाओं, जैव विविधता दबाव और समसामयिकी संकेतकों में बँटते हैं।

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    खतरनाक अपशिष्टों पर बेसल अभिसमय, स्थायी कार्बनिक प्रदूषकों पर स्टॉकहोम अभिसमय और पारा पर मिनामाता अभिसमय प्रदूषक-विशेष आधार हैं।

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    पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 भारत में मुद्दा-विशेष नियमों और केंद्रीय मानकों का व्यापक विधिक आधार है।

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    प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 और 2022 संशोधन तथा ई-कचरा प्रबंधन नियम, 2022 अपशिष्ट लागत को उत्पादक तक पहुँचाते हैं।

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    राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 पर्यावरणीय विवाद को केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि विशिष्ट न्यायिक विषय बनाता है।

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    मिशन लाइफ और ग्रीन क्रेडिट नियम, 2023 नियंत्रण आधारित नियमन में व्यवहार और स्वैच्छिक कार्रवाई जोड़ते हैं।

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    सांभर झील का पर्यावरणीय दबाव और अरावली खनन राजस्थान में वैश्विक पर्यावरणीय मुद्दों के क्षेत्रीय उदाहरण देते हैं।

वैश्विक पर्यावरण शासन १९७२ से १९९२ तक कैसे बदला?

वैश्विक पर्यावरण शासन १९७२ के स्टॉकहोम सम्मेलन में पर्यावरण को अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी मानने से शुरू होकर १९९२ के रियो पृथ्वी शिखर सम्मेलन में सतत विकास, जलवायु और जैव विविधता की संयुक्त नीति तक पहुँचा। संयुक्त राष्ट्र सूचना केंद्र के अनुसार १९७२ के स्टॉकहोम सम्मेलन में ११३ देशों ने स्टॉकहोम घोषणा और मानव पर्यावरण कार्य-योजना अपनाई।

स्टॉकहोम सम्मेलन

  • मानव पर्यावरण पर स्टॉकहोम सम्मेलन ५ जून १९७२ को शुरू हुआ और पर्यावरणीय क्षति को केवल स्थानीय असुविधा से निकालकर अंतरराष्ट्रीय शासन का विषय बन गया।
  • इससे स्टॉकहोम घोषणा, मानव पर्यावरण के लिए कार्य-योजना और वह संस्थागत संदर्भ निकला जिससे यूएनईपी बना।
  • ५ जून की तिथि विश्व पर्यावरण दिवस से जुड़ती है, इसलिए यह घटना संधि-क्रम, पर्यावरण चेतना और संस्था-निर्माण तीनों को जोड़ती है।

रियो पृथ्वी शिखर सम्मेलन

  • रियो पृथ्वी शिखर सम्मेलन १९९२ ने इस ढाँचे को विकास से जोड़ा।
  • रियो डी जेनेरो में सरकारों ने पर्यावरण, विकास, एजेंडा २१, यूएनएफसीसीसी की जलवायु प्रक्रिया और सीबीडी की जैव विविधता प्रक्रिया को साथ रखा।
  • यह क्रम इसलिए महत्त्वपूर्ण है कि वायु प्रदूषण, खतरनाक अपशिष्ट, जैव विविधता क्षरण और जलवायु परिवर्तन अलग-अलग मुद्दे नहीं रहते।

राजस्थान संदर्भ

  • राजस्थान में सांभर झील का पर्यावरणीय दबाव इस क्रम को जमीन देता है।
  • यह लवणीय आर्द्रभूमि कोई जलवायु संधि नहीं है, फिर भी पक्षी मृत्यु, जल-दबाव और निकासी का दबाव दिखाते हैं कि वैश्विक सिद्धांतों को स्थानीय प्रवर्तन चाहिए।
  • राज्य संदर्भ में सांभर झील, अरावली और जयपुर का शहरी कचरा इसी शासन-तर्क के राजस्थान उदाहरण हैं।

पैमाना और प्रवर्तन

स्तर भूमिका
स्टॉकहोम रोकथाम, राज्य उत्तरदायित्व और सहयोग जैसे सिद्धांत देता है
रियो सहयोग को सतत विकास उपकरणों में बदलता है
स्थानीय एजेंसियाँ उन्हीं उपकरणों को अनुमति, मानक और बहाली आदेश में बदलती हैं
  • मुख्य विचार पैमाना है।
  • इसी से घोषणा जमीनी नियम बनती है।

पुरानी और नई समस्याएँ

चरण मुद्दे
पुरानी समस्याएँ प्रदूषण, स्वच्छता और संसाधन क्षय
नई समस्याएँ जलवायु, जैव विविधता, आनुवंशिक संसाधन, खतरनाक व्यापार और जीवन-शैली
  • यही क्रम पुरानी और नई समस्याओं को भी अलग करता है।

संभावित RAS प्रश्न

PYQ रुझान और 2026 पाठ्यक्रम विश्लेषण पर आधारित

1 MCQ इन पर्यावरण शासन घटनाओं को कालक्रम में रखिए: खतरनाक अपशिष्ट संधि, मानव पर्यावरण सम्मेलन, पारा संधि और रियो पृथ्वी शिखर सम्मेलन।
  1. A स्टॉकहोम 1972, बेसल 1989, रियो 1992, मिनामाता 2013 सही उत्तर
  2. B बेसल 1989, स्टॉकहोम 1972, रियो 1992, मिनामाता 2013
  3. C स्टॉकहोम 1972, रियो 1992, बेसल 1989, मिनामाता 2013
  4. D रियो 1992, स्टॉकहोम 1972, बेसल 1989, मिनामाता 2013

व्याख्या

1972 का स्टॉकहोम सम्मेलन 1989 में अपनाए गए बेसल अभिसमय से पहले आता है। रियो पृथ्वी शिखर सम्मेलन 1992 में हुआ और पारा पर मिनामाता अभिसमय 2013 का है। विकल्प ख स्टॉकहोम और बेसल को उलटता है, विकल्प ग बेसल को रियो के बाद रखता है और विकल्प घ गलत ढंग से रियो से शुरू करता है।