मुख्य तथ्य

  • हरगोबिंद खुराना को 1968 में आनुवंशिक कोड की व्याख्या के लिए निरेनबर्ग और हॉले के साथ नोबेल मिला।
  • जीनोम इंडिया परियोजना ने 2024 में 10,000 भारतीय जीनोम अनुक्रम पूरे होने की घोषणा की, जिनका डेटा फरीदाबाद के जैविक डेटा केंद्र से जुड़ता है।
  • भारतीय जैव प्रौद्योगिकी का संस्थागत आधार डीबीटी, बिराक, टीका मिशन, बायोई3 और राष्ट्रीय जैव-दवा मिशन हैं।
  • नैनो प्रौद्योगिकी लगभग 1-100 नैनोमीटर पर काम करती है; आरएएस में क्वांटम डॉट, क्वांटम वेल, नैनोकण और एमओईएमएस बार-बार आते हैं।

मुख्य बिंदु

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    आनुवंशिकी डीएनए, कोडॉन, गुणसूत्र, डीएनए फिंगरप्रिंटिंग, जीन एडिटिंग और जनसंख्या जीनोमिक्स तक फैलती है।

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    हरगोबिंद खुराना को 1968 में आनुवंशिक कोड की व्याख्या के लिए निरेनबर्ग और हॉले के साथ नोबेल मिला।

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    जीनोम इंडिया परियोजना ने 2024 में 10,000 भारतीय जीनोम अनुक्रम पूरे होने की घोषणा की, जिनका डेटा फरीदाबाद के जैविक डेटा केंद्र से जुड़ता है।

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    भारतीय जैव प्रौद्योगिकी का संस्थागत आधार डीबीटी, बिराक, टीका मिशन, बायोई3 और राष्ट्रीय जैव-दवा मिशन हैं।

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    कोवैक्सिन और रोटावैक स्वदेशी टीका क्षमता दिखाते हैं; वैक्सीन मैत्री ने उत्पादन को स्वास्थ्य कूटनीति से जोड़ा।

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    बीटी कपास भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी में प्रमुख व्यावसायिक आनुवंशिक फसल अनुमोदन आधार है।

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    नैनो प्रौद्योगिकी लगभग 1-100 नैनोमीटर पर काम करती है; आरएएस में क्वांटम डॉट, क्वांटम वेल, नैनोकण और एमओईएमएस बार-बार आते हैं।

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    राजस्थान के संबंध सीतापुरा जैव-तकनीक सुविधाएँ, बीआईएसआर जयपुर, वनस्थली विद्यापीठ, एमएनआईटी जयपुर और आदिवासी सिकल-सेल स्क्रीनिंग जिले हैं।

आनुवंशिक कोड, गुणसूत्र और वंशागति कैसे काम करते हैं?

आनुवंशिक कोड, गुणसूत्र और वंशागति का मूल संबंध यह है कि डीएनए की सूचना आरएनए के ज़रिए प्रोटीन में बदलती है और वही सूचना गुणसूत्रों के रूप में पीढ़ी-दर-पीढ़ी जाती है।

आनुवंशिकी में सूचना डीएनए से आरएनए और फिर प्रोटीन तक जाती है।

मूल अवधारणा

  • डीएनए में चार क्षार वंशानुगत सूचना रखते हैं।
  • तीन क्षारों का कोडॉन प्रोटीन निर्माण में किसी अमीनो अम्ल या समाप्ति संकेत से जुड़ता है।

नोबेल आधार

आधार वर्ष विवरण
हरगोबिंद खुराना — आनुवंशिक कोड १९६८ उन्हें मार्शल निरेनबर्ग और रॉबर्ट हॉले के साथ आनुवंशिक कोड तथा प्रोटीन संश्लेषण में उसके कार्य की व्याख्या के लिए नोबेल मिला।
वेंकटरमन रामकृष्णन — राइबोसोम संरचना २००९ रसायन नोबेल ने राइबोसोम की संरचना और कार्य को मान्यता दी, इसलिए कोडॉन को उस राइबोसोम से जोड़ना चाहिए जो संदेशवाहक आरएनए पढ़ता है।

गुणसूत्र और पहचान

राष्ट्रीय मानव जीनोम अनुसंधान संस्थान के गुणसूत्र तथ्य-पत्र के अनुसार मनुष्य में २३ जोड़ी, यानी कुल ४६ गुणसूत्र होते हैं।

  • मनुष्य में २३ जोड़ी, कुल ४६ गुणसूत्र होते हैं।
  • गुणसूत्र २१ की अतिरिक्त प्रति ट्राइसॉमी २१ और डाउन सिंड्रोम का आधार है।
  • डीएनए फिंगरप्रिंटिंग बहुरूपी डीएनए क्षेत्रों, विशेषकर दोहरावों पर आधारित है, रक्त समूह या अंगुली की रेखाओं पर नहीं।

राजस्थान संबंध

  • राजस्थान का संबंध बांसवाड़ा, डूंगरपुर, उदयपुर और प्रतापगढ़ जैसे आदिवासी जिलों में सिकल-सेल जांच से बनता है।

मुख्य शब्द

शब्द अर्थ
उत्परिवर्तन डीएनए क्रम बदलता है।
एलील जीन का वैकल्पिक रूप है।
जीनोटाइप आनुवंशिक बनावट है।
फीनोटाइप जीन तथा पर्यावरण से बना दृश्य लक्षण है।

संभावित RAS प्रश्न

PYQ रुझान और 2026 पाठ्यक्रम विश्लेषण पर आधारित

1 MCQ 1968 में प्रोटीन संश्लेषण में आनुवंशिक कोड के कार्य की व्याख्या के लिए नोबेल साझा करने वाले भारतीय मूल के वैज्ञानिक कौन थे?
  1. A हरगोबिंद खुराना सही उत्तर
  2. B वेंकटरमन रामकृष्णन
  3. C सी. वी. रमन
  4. D सुब्रह्मण्यन चंद्रशेखर

व्याख्या

हरगोबिंद खुराना 1968 के आनुवंशिक कोड आधार हैं, निरेनबर्ग और हॉले के साथ। रामकृष्णन 2009 में राइबोसोम संरचना से, रमन 1930 में प्रकाश प्रकीर्णन से और चंद्रशेखर 1983 में तारकीय संरचना से जुड़े हैं।