मुख्य तथ्य

  • डिजिटल इंडिया 1 जुलाई 2015 को डिजिटल अवसंरचना, मांग पर सेवाएं और नागरिक सशक्तिकरण के तीन स्तंभों पर शुरू हुआ।
  • 18 मई 2006 को स्वीकृत राष्ट्रीय ई-शासन योजना ने बाद में डिजिटल इंडिया के लिए प्रशासनिक आधार बनाया।
  • यूआईडीएआई 28 जनवरी 2009 को स्थापित हुआ, जबकि पहला आधार नंबर 29 सितंबर 2010 को जारी हुआ।
  • यूपीआई 11 अप्रैल 2016 को एनपीसीआई द्वारा शुरू हुआ और परस्पर संचालित भुगतान के लिए वर्चुअल भुगतान पते का उपयोग करता है।
  • भारतनेट अक्टूबर 2011 में राष्ट्रीय ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क के रूप में शुरू हुआ और अप्रैल 2015 में इसका नाम बदला गया।

मुख्य बिंदु

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    डिजिटल इंडिया 1 जुलाई 2015 को डिजिटल अवसंरचना, मांग पर सेवाएं और नागरिक सशक्तिकरण के तीन स्तंभों पर शुरू हुआ।

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    18 मई 2006 को स्वीकृत राष्ट्रीय ई-शासन योजना ने बाद में डिजिटल इंडिया के लिए प्रशासनिक आधार बनाया।

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    इंडिया स्टैक पहचान, भुगतान, दस्तावेज़ और डेटा सशक्तीकरण पर आधारित स्तरीकृत डिजिटल लोक अवसंरचना है।

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    यूआईडीएआई 28 जनवरी 2009 को स्थापित हुआ, जबकि पहला आधार नंबर 29 सितंबर 2010 को जारी हुआ।

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    यूपीआई 11 अप्रैल 2016 को एनपीसीआई द्वारा शुरू हुआ और परस्पर संचालित भुगतान के लिए वर्चुअल भुगतान पते का उपयोग करता है।

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    भारतनेट अक्टूबर 2011 में राष्ट्रीय ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क के रूप में शुरू हुआ और अप्रैल 2015 में इसका नाम बदला गया।

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    1991 का परम 8000 सी-डैक परंपरा में भारत का पहला स्वदेशी सुपरकंप्यूटर माना जाता है।

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    सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 ने इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख, डिजिटल हस्ताक्षर, इलेक्ट्रॉनिक संविदा और ई-फाइलिंग को विधिक मान्यता दी।

डिजिटल इंडिया क्या है और इसने भारत की ई-शासन व्यवस्था को कैसे जोड़ा?

डिजिटल इंडिया १ जुलाई २०१५ को शुरू किया गया राष्ट्रीय छाता कार्यक्रम है, जिसने डिजिटल अवसंरचना, मांग पर सरकारी सेवाओं और नागरिकों के डिजिटल सशक्तिकरण को एक ही ई-शासन ढांचे में जोड़ा। मेइटी की वार्षिक रिपोर्ट २०१७-१८ के अनुसार पीएमजीदिशा का लक्ष्य ३१ मार्च २०१९ तक ६ करोड़ ग्रामीण परिवारों में प्रति परिवार एक व्यक्ति को डिजिटल रूप से साक्षर बनाना था।

कार्यक्रम का ढांचा

  • घोषित लक्ष्य: भारत को डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था में बदलना।
  • तीन स्तंभ:
    • प्रत्येक नागरिक के लिए उपयोगिता के रूप में डिजिटल अवसंरचना।
    • मांग पर शासन और सेवाएं।
    • नागरिकों का डिजिटल सशक्तिकरण।
  • महत्व: ये स्तंभ संपर्क, सेवा वितरण और नागरिक क्षमता को अलग-अलग योजनाओं की जगह एक ही नीति फ्रेम में जोड़ते हैं।
  • नोडल मंत्रालय: आज इसका नोडल मंत्रालय मेइटी है।
  • संस्थागत आधार: २०१६ में पहले के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, यानी डेइटी, को पूर्ण मंत्रालय का रूप देकर कार्यक्रम को अधिक स्पष्ट संस्थागत आधार दिया गया।

ई-शासन की वंशरेखा

  • डिजिटल इंडिया शून्य से शुरू नहीं हुआ था।
  • इसकी प्रशासनिक वंशरेखा १८ मई २००६ को स्वीकृत राष्ट्रीय ई-शासन योजना, यानी नेजीपी, तक जाती है।
  • नेजीपी ने मिशन मोड परियोजनाओं को एक साझा कार्यान्वयन ढांचे में संगठित किया।
  • बाद के आधिकारिक दस्तावेजों में इसकी संरचना ३१ एमएमपी के रूप में वर्णित की गई।
  • इसमें आयकर प्रशासन, पासपोर्ट, ई-जिला, सामान्य सेवा केंद्र और राज्यव्यापी क्षेत्रीय नेटवर्क जैसे नागरिक-उन्मुख तथा आधारभूत तंत्र शामिल थे।
  • व्यवहार में नेजीपी ने सेवा काउंटर, कार्यप्रवाह के डिजिटलीकरण और राज्य स्तरीय संपर्क ढांचे को खड़ा किया, जिसे डिजिटल इंडिया ने अधिक दिखाई देने वाले राष्ट्रीय छाते के भीतर पुनर्गठित किया।
  • इसलिए नेजीपी को प्रशासनिक नींव और डिजिटल इंडिया को उसी ई-शासन यात्रा का राजनीतिक तथा कार्यक्रमगत विस्तार समझना चाहिए।

नागरिक सेवा-स्तर

लॉन्च / निर्माण खंड तिथि / स्थिति भूमिका
माईगव २६ जुलाई २०१४ नागरिक सहभागिता के सरकारी प्लेटफ़ॉर्म के रूप में शुरू हुआ
डिजिलॉकर १ जुलाई २०१५ मेइटी के तहत प्रामाणिक डिजिटल दस्तावेजों के लिए सुरक्षित क्लाउड आधारित भंडार के रूप में सामने आया
ई-साइन, ई-प्रमाण और ई-हॉस्पिटल निर्माण खंड कागजी प्रक्रिया, भौतिक हस्ताक्षर और बार-बार की जाने वाली प्रत्यक्ष सत्यापन प्रक्रिया की आवश्यकता को कम किया
उमंग २३ नवंबर २०१७ मोबाइल स्तर को विस्तारित किया और अनेक सरकारी सेवाओं को एक ही अनुप्रयोग पर लाया
सामान्य सेवा केंद्र २०२४ तक ५ लाख से अधिक पहुंच बिंदु गांवों और छोटे कस्बों को सहायक अंतिम-मील व्यवस्था मिली, जो केवल निजी उपकरण या उच्च डिजिटल कौशल पर निर्भर नहीं थी

पीएमजीदिशा साक्षरता पक्ष

  • पीएमजीदिशा को ८ फरवरी २०१७ को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने स्वीकृति दी।
  • इसका लक्ष्य मार्च २०१९ तक ६ करोड़ ग्रामीण परिवारों में प्रत्येक से एक व्यक्ति को डिजिटल रूप से साक्षर बनाना था।
  • सीएससी ई-गवर्नेंस सर्विसेज इंडिया लिमिटेड इसकी जमीनी कार्यान्वयन रीढ़ बना।
  • कार्यक्रम अपनी मूल समय-सीमा के बाद भी बढ़ाया गया, जिससे स्पष्ट हुआ कि डिजिटल समावेशन के लिए एकबारगी अभियान नहीं बल्कि निरंतर संस्थागत समर्थन चाहिए।
  • इससे यह केवल प्रशिक्षण योजना नहीं रही; इसने घरेलू स्तर की डिजिटल परिचितता को ऑनलाइन प्रमाणपत्र, मोबाइल सेवाएं, प्रमाणीकरण साधनों और नकदरहित लेनदेन की बड़ी व्यवस्था से जोड़ा।
  • भारतनेट, जिसकी चर्चा अलग अनुभाग में है, इस समावेशन एजेंडा के नीचे मौजूद ब्रॉडबैंड तर्क को पूरा करता है।

राजस्थान सेतु

  • राजस्थान ने इसी ढांचे का राज्य स्तरीय रूप सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग, ई-मित्र प्लेटफ़ॉर्म, आरआईएसएल, राजस्थान स्वान और राज्य डाटा सेंटर अवसंरचना से बनाया।
  • ई-मित्र २००२ के दौर से कार्यरत था, इसलिए राज्य ने डिजिटल इंडिया में प्रवेश किसी रिक्त स्थिति से नहीं बल्कि पहले से मौजूद सेवा-वितरण रीढ़ के साथ किया।
  • राजस्थान के आधिकारिक परियोजना दस्तावेज आरआईएसएल को ई-मित्र जैसे ई-शासन प्रकल्पों की कार्यान्वयन एजेंसी बताते हैं।
  • इन्हीं दस्तावेजों में यह भी दर्ज है कि इस प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में ४५० से अधिक नागरिक तथा व्यावसायिक सेवाएं दी जा रही हैं।
  • राजस्थान के अभ्यर्थी के लिए यही मुख्य सेतु है: डिजिटल इंडिया राष्ट्रीय छाता समझाता है, जबकि ई-मित्र और राज्य का सूचना प्रौद्योगिकी विभाग उसके राज्य स्तरीय संचालन को दिखाते हैं।

संभावित RAS प्रश्न

PYQ रुझान और 2026 पाठ्यक्रम विश्लेषण पर आधारित

1 MCQ 1 जुलाई 2015 को शुरू हुए इस छाता कार्यक्रम के घोषित तीन लक्ष्य-समूह कौन-से थे?
  1. A उपयोगिता के रूप में डिजिटल अवसंरचना, मांग पर सेवाएं, नागरिकों का डिजिटल सशक्तिकरण सही उत्तर
  2. B डिजिटल विनिर्माण, स्टार्टअप वित्तपोषण, साइबर पुलिसिंग
  3. C कौशल प्रशिक्षण, घरेलू विनिर्माण, नागरिक प्रतिक्रिया मंच
  4. D उपयोगिता के रूप में डिजिटल अवसंरचना, मांग पर सेवाएं, MyGov को चौथा स्तंभ

व्याख्या

विकल्प क सही है क्योंकि डिजिटल इंडिया 1 जुलाई 2015 को तीन स्पष्ट स्तंभों के साथ शुरू हुआ था: प्रत्येक नागरिक के लिए उपयोगिता के रूप में डिजिटल अवसंरचना, मांग पर शासन और सेवाएं, तथा नागरिकों का डिजिटल सशक्तिकरण। यही स्तंभ कार्यक्रम की मूल संरचना को परिभाषित करते हैं और आधिकारिक लॉन्च सामग्री में बार-बार इसी रूप में आते हैं। विकल्प घ आकर्षक लगता है क्योंकि माईगव एक महत्वपूर्ण नागरिक मंच है, लेकिन वह डिजिटल इंडिया का स्तंभ नहीं है। विकल्प ख और ग प्रौद्योगिकी नीति की परिचित भाषा लेते हैं, फिर भी वे आधिकारिक तीन-स्तंभी संरचना से मेल नहीं खाते।