जैव विविधता एवं संरक्षण
मुख्य तथ्य
- जैव विविधता को जैव विविधता अभिसमय के ढांचे में आनुवंशिक, प्रजातीय और पारितंत्रीय स्तरों पर समझा जाता है।
- व्हिटेकर के अल्फा, बीटा और गामा विविधता स्तर स्थानीय, स्थलों के बीच और क्षेत्रीय विविधता को मापते हैं।
- जैव विविधता अभिसमय संरक्षण, सतत उपयोग और आनुवंशिक संसाधनों से लाभ-साझेदारी के तीन उद्देश्यों पर आधारित है।
- वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 भारत में संरक्षित क्षेत्रों और प्रजाति-संरक्षण का मुख्य कानूनी आधार है।
- राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य, संरक्षण आरक्षित क्षेत्र, सामुदायिक आरक्षित क्षेत्र और बाघ अभयारण्य अलग-अलग श्रेणियां हैं।
मुख्य बिंदु
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जैव विविधता को जैव विविधता अभिसमय के ढांचे में आनुवंशिक, प्रजातीय और पारितंत्रीय स्तरों पर समझा जाता है।
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व्हिटेकर के अल्फा, बीटा और गामा विविधता स्तर स्थानीय, स्थलों के बीच और क्षेत्रीय विविधता को मापते हैं।
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जैव विविधता अभिसमय संरक्षण, सतत उपयोग और आनुवंशिक संसाधनों से लाभ-साझेदारी के तीन उद्देश्यों पर आधारित है।
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वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 भारत में संरक्षित क्षेत्रों और प्रजाति-संरक्षण का मुख्य कानूनी आधार है।
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राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य, संरक्षण आरक्षित क्षेत्र, सामुदायिक आरक्षित क्षेत्र और बाघ अभयारण्य अलग-अलग श्रेणियां हैं।
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2008 में रणथंभौर से बाघ स्थानांतरण शुरू होने के बाद सरिस्का बाघ पुनर्प्राप्ति का प्रमुख उदाहरण बना।
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केवलादेव घना मीठे जल की और सांभर झील अंतर्देशीय खारे जल की रामसर आर्द्रभूमि का उदाहरण है, जो राजस्थान में दोनों तरह की आर्द्रभूमि दिखाती हैं।
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राजस्थान में गोडावण संरक्षण की मुख्य चुनौती मरुस्थल राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में ऊपरी विद्युत-तारों से टकराव से जुड़ी है।
जैव विविधता क्या है, उसके तीन स्तर कौन-से हैं और उसे कैसे मापा जाता है?
जैव विविधता जीवित जगत की वह परिवर्तनशीलता है जिसे आनुवंशिक, प्रजातीय और पारितंत्रीय तीन स्तरों पर समझा जाता है और अल्फा, बीटा तथा गामा जैसे मापन-स्तरों से परखा जाता है। जैव विविधता की अवधारणा जीवन में निहित परिवर्तनशीलता से शुरू होती है और संरक्षण नीति में इसे तीन परतों में समझा जाता है। जैव विविधता पर अभिसमय सचिवालय के अनुसार जैव विविधता पर अभिसमय के १९६ पक्षकार हैं। जैव विविधता पर अभिसमय के अनुसार, जैव विविधता का अर्थ जीवित प्राणियों के बीच के अंतर से है, जिसमें आनुवंशिक, प्रजातीय और पारितंत्रीय विविधता एक साथ आती है। जैव विविधता पर अभिसमय ने १९९२ में इसे जीवित जगत की व्यापक विविधता के रूप में स्थापित किया।
जैव विविधता की अवधारणा
जैव विविधता की अवधारणा को परीक्षा में परिभाषा, स्तर, मापन और राजस्थान के उदाहरणों के साथ पढ़ना चाहिए, क्योंकि केवल शब्दार्थ लिखने से उत्तर अधूरा रहता है।
जैव विविधता के तीन स्तर
| स्तर | अर्थ | महत्त्व |
|---|---|---|
| आनुवंशिक विविधता | एक ही प्रजाति के भीतर जीनों का अंतर | इसी से सूखा, कीट या ताप तनाव के प्रति अनुकूलन क्षमता बनती है। |
| प्रजातीय विविधता | किसी समुदाय में मौजूद प्रजातियों की कुलता | बिना प्रजातीय विविधता के समुदाय कमजोर होता है। |
| पारितंत्रीय विविधता | भूमि-आवास और पारिस्थितिक प्रक्रियाओं के विभिन्न समूह | बिना पारितंत्रीय विविधता के परिदृश्य विखंडित होते हैं। |
- पाठ में जैव विविधता को तीन स्तरों पर पढ़ाया जाता है: पहले आनुवंशिक विविधता, फिर प्रजातीय विविधता और अंत में पारितंत्रीय विविधता।
- तीनों को अलग नहीं किया जा सकता क्योंकि बिना जीन विविधता के अनुकूलनशीलता घटती है।
व्हिटेकर का १९६० मापन ढाँचा
| मापन-स्तर | संकेत |
|---|---|
| अल्फा विविधता | एक स्थानीय समुदाय में प्रजातीय संरचना और प्रजातीय समृद्धि |
| बीटा विविधता | आवासों के बीच परिवर्तन |
| गामा विविधता | व्यापक क्षेत्रीय कुल विविधता |
- यह विभाजन स्पष्ट करता है कि अल्फा, बीटा और गामा मापन-स्तर हैं।
- आनुवंशिक, प्रजातीय और पारितंत्रीय विविधता विविधता के प्रकार हैं।
प्रजातीय समृद्धि और प्रजातीय समता
| शब्द | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| प्रजातीय समृद्धि | किसी क्षेत्र में कुल प्रजातियों की संख्या | दो समुदायों में चार-चार प्रजातियाँ हों तो समृद्धि समान हो सकती है। |
| प्रजातीय समता | प्रत्येक प्रजाति के व्यक्तियों का वितरण कितना संतुलित है | यदि किसी एक प्रजाति का प्रभुत्व बहुत अधिक हो और बाकी कम हों, तो समता अलग होगी। |
- ऐसे में समुदाय की संरचना और पारिस्थितिक संतुलन का मूल्यांकन अलग हो जाता है।
जैव विविधता हॉटस्पॉट
| मानदंड / तथ्य | विवरण |
|---|---|
| आधार | स्थानिक विशिष्टता और क्षरण की संयुक्त सीमा |
| स्थानिक पादप सीमा | कम से कम १५०० स्थानिक वाहिका पादप |
| क्षरण सीमा | मूल प्राकृतिक वनस्पति का लगभग ७०% से अधिक ह्रास यानी ३०% या कम अवशिष्ट प्राकृतिक आवरण |
| वैश्विक संख्या | ३६ जैव विविधता हॉटस्पॉट |
| भारत में संख्या | ४ |
| भारत के हॉटस्पॉट | पश्चिमी घाट और श्रीलंका, हिमालय, भारत-बर्मा, तथा सुंडालैंड (निकोबार द्वीप समूह) |
| ढाँचा | नॉर्मन मायर्स के २००० ढाँचे ने इन क्षेत्रों को संरक्षण प्राथमिकता के मानचित्र में ला दिया। |
राजस्थान के उदाहरण
- अरावली में ढाल, शैल और सूक्ष्म-आवास परिवर्तन समुदाय संरचना बदलते हैं।
- थार मरुस्थल में नमी की घटनाएँ प्रजातीय समृद्धि और समता दोनों बदल देती हैं।
- केवलादेव आर्द्रभूमि का पक्षी समुदाय अल्फा विविधता का स्पष्ट उदाहरण है।
- सांभर झील और चंबल की नदीय पट्टी पारितंत्रीय विविधता के लिए जल, आवागमन और परिदृश्य निरंतरता का महत्व दिखाती हैं।
- खेजड़ी का जीन पूल यदि सुरक्षित रखा जाए तो यह समझ मजबूत होती है कि यदि किसी राज्य में एक ही घटक अलग बचा, तो दीर्घकालीन स्थिरता अधूरी रह जाती है।
परीक्षा-सूत्र
- यदि प्रश्न अल्फा, बीटा और गामा से जुड़ा हो तो वह स्थानिक मापन-स्तर पूछ रहा है।
- यदि प्रश्न आनुवंशिक, प्रजातीय और पारितंत्रीय विविधता पूछता है तो वह विविधता के प्रकार पूछ रहा है।
- ये जुड़े हुए हैं पर समानार्थी नहीं।
- १९९२ में जैव विविधता पर अभिसमय की भाषा ने अनुकूलन योजना, आनुवंशिक संसाधन और आवास-आधारित रिपोर्टिंग को एक साझा नीति ढाँचे में जोड़ दिया।
उत्तर-ढाँचा
- पहले परिभाषा लिखें, फिर आनुवंशिक, प्रजातीय और पारितंत्रीय स्तरों को अलग करें।
- उसके बाद अल्फा, बीटा और गामा को मापन-स्तर के रूप में लिखें, ताकि प्रकार और मापन को मिला न दिया जाए।
- अंत में अरावली, थार, केवलादेव, सांभर, चंबल और खेजड़ी के उदाहरण जोड़ने से उत्तर राजस्थान-केन्द्रित बनता है।
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संभावित संभावित RAS प्रश्न
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1 MCQ व्हिटेकर के 1960 ढाँचे में अल्फा, बीटा और गामा विविधता का सही मेल कौन-सा है?
व्याख्या
व्हिटेकर (1960) ने अल्फा, बीटा और गामा को स्थानिक स्केल के ढाँचे के रूप में समझाया था। विकल्प ख सही है क्योंकि इसमें अल्फा को स्थानीय समुदाय, बीटा को आवासों के बीच परिवर्तन और गामा को व्यापक क्षेत्रीय कुल परिधि के रूप में क्रमबद्ध रखा गया है। विकल्प क इसलिए आकर्षक लगता है क्योंकि इसमें तीनों शब्द परिचित लगते हैं, लेकिन इसमें अल्फा और बीटा स्थान बदल दिए गए हैं। विकल्प ग गलत है क्योंकि कोई भी पद अकेले केवल एक ही घटक नहीं लेता, और विकल्प घ गलत है क्योंकि विभाजन दुर्लभता-आधारित वर्गीकरण से नहीं बल्कि स्थानिक तुलना से होता है।
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