मुख्य तथ्य

  • अनुच्छेद 153 से 167 के अधीन राज्यपाल राज्य कार्यपालिका का संवैधानिक प्रमुख होता है।
  • अनुच्छेद 164(1ए) राजस्थान की मंत्रिपरिषद को विधानसभा शक्ति के 15 प्रतिशत तक सीमित करता है, पर न्यूनतम संख्या 12 रहती है।
  • अनुच्छेद 164(2) की सामूहिक उत्तरदायित्व व्यवस्था मंत्रिपरिषद को विधानसभा के प्रति एक इकाई के रूप में जवाबदेह बनाती है।
  • राजस्थान लोक सेवा आयोग 22 दिसंबर 1949 से प्रभावी हुआ और अनुच्छेद 315 के अधीन कार्य करता है।
  • राजस्थान पुलिस अधिनियम, 2007 ने राज्य में औपनिवेशिक पुलिस अधिनियम, 1861 का स्थान लिया।

मुख्य बिंदु

  1. 1

    अनुच्छेद 153 से 167 के अधीन राज्यपाल राज्य कार्यपालिका का संवैधानिक प्रमुख होता है।

  2. 2

    अनुच्छेद 164(1ए) राजस्थान की मंत्रिपरिषद को विधानसभा शक्ति के 15 प्रतिशत तक सीमित करता है, पर न्यूनतम संख्या 12 रहती है।

  3. 3

    अनुच्छेद 164(2) की सामूहिक उत्तरदायित्व व्यवस्था मंत्रिपरिषद को विधानसभा के प्रति एक इकाई के रूप में जवाबदेह बनाती है।

  4. 4

    राजस्थान लोक सेवा आयोग 22 दिसंबर 1949 से प्रभावी हुआ और अनुच्छेद 315 के अधीन कार्य करता है।

  5. 5

    जिला कलेक्टर एक साथ जिला मजिस्ट्रेट, राजस्व प्रमुख, विकास समन्वयक और निर्वाचन प्रशासक की भूमिका निभाता है।

  6. 6

    राजस्व पदानुक्रम कलेक्टर से अतिरिक्त कलेक्टर, उप-मंडल मजिस्ट्रेट, तहसीलदार, नायब तहसीलदार और पटवारी तक चलता है।

  7. 7

    राजस्थान पुलिस अधिनियम, 2007 ने राज्य में औपनिवेशिक पुलिस अधिनियम, 1861 का स्थान लिया।

  8. 8

    राजस्थान की सेवा-प्रदान जवाबदेही लोक सेवाओं की गारंटी अधिनियम, 2011 और सुनवाई का अधिकार अधिनियम, 2012 पर आधारित है।

राजस्थान में राज्य गठन के बाद प्रशासनिक ढाँचा कैसे बना?

वर्तमान राजस्थान का राज्य प्रशासन १९५६ के वृहत्तर राजस्थान एकीकरण के बाद बने संवैधानिक ढाँचे पर चलता है, और इसका क्षेत्रीय आधार अब जिलों, संभागों तथा अधीनस्थ राजस्व इकाइयों से बनता है। राजस्व मंडल, राजस्थान की २९ जनवरी २०२५ की आधिकारिक सूची में राज्य में ७ संभाग और ४१ जिले दर्ज हैं।

१९५६ का राज्य गठन केवल नक्शे का बदलाव नहीं था; इसके बाद राजभवन, विधानसभा, मंत्रिपरिषद, सचिवालय, राज्य सेवाएँ और जिला प्रशासन एक ही संवैधानिक-प्रशासनिक रेखा में व्यवस्थित हुए। राज्यपाल संवैधानिक प्रमुख रहे, मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद वास्तविक राजनीतिक कार्यपालिका बने, सचिवालय नीति और आदेश का केंद्र बना, और जिला कलेक्टर राज्य की प्रशासनिक उपस्थिति का सबसे स्पष्ट स्थानीय चेहरा रहा।

जिला और संभाग ढाँचे की परीक्षा-समझ

बिंदु सही समझ
१९५६ का महत्व वृहत्तर राजस्थान के एकीकरण के बाद राज्य प्रशासन को भारतीय संविधान के अनुरूप स्थिर ढाँचा मिला।
२०२३ का पुनर्गठन उस समय जिलों की संख्या ५० और संभागों की संख्या १० तक पहुँची थी।
वर्तमान सावधानी बाद की आधिकारिक सूची के अनुसार अब परीक्षा-उत्तर में वर्तमान जिला-गणना लिखते समय ४१ जिले और ७ संभाग लिखना चाहिए।
प्रशासनिक अर्थ जिला, संभाग और तहसील केवल भूगोल की इकाइयाँ नहीं हैं; इनके माध्यम से राजस्व, कानून-व्यवस्था, विकास और सेवा-प्रदान का काम चलता है।

इसलिए इस अध्याय को केवल “राजस्थान में कितने जिले हैं” जैसी रटंत के रूप में नहीं पढ़ना चाहिए। सही तरीका यह है कि राज्य गठन से राज्यपाल, मंत्रिपरिषद, सचिवालय, सेवाएँ, निदेशालय, जिला कलेक्टर, पुलिस, वित्तीय नियंत्रण और नागरिक सेवा-प्रदान तक एक पूरी प्रशासनिक शृंखला देखी जाए।

संभावित RAS प्रश्न

PYQ रुझान और 2026 पाठ्यक्रम विश्लेषण पर आधारित

1 MCQ 18 मार्च 1948 के प्रारंभिक संघ से 26 जनवरी 1950 से सहसम्बद्ध चरण तक निम्न चार एकीकरण पड़ावों का सही क्रम चुनिए।
  1. A मत्स्य संघ → राजस्थान संघ → वृहत्तर राजस्थान → संयुक्त राजस्थान सही उत्तर
  2. B राजस्थान संघ → मत्स्य संघ → संयुक्त राजस्थान → वृहत्तर राजस्थान
  3. C मत्स्य संघ → वृहत्तर राजस्थान → राजस्थान संघ → संयुक्त राजस्थान
  4. D राजस्थान संघ → संयुक्त राजस्थान → वृहत्तर राजस्थान → मत्स्य संघ

व्याख्या

विकल्प क सही है क्योंकि क्रम 18 मार्च 1948 का मत्स्य संघ, 25 मार्च 1948 का राजस्थान संघ, 30 मार्च 1949 का वृहत्तर राजस्थान और 26 जनवरी 1950 का संयुक्त राजस्थान है। हीरालाल शास्त्री उस विस्तृत चरण में मुख्यमंत्री बने जब संघ वृहत्तर राजस्थान के रूप में संगठित हुआ, इसलिए जो अभ्यर्थी संयुक्त राजस्थान को वृहत्तर राजस्थान से पहले रखते हैं वे 1949 और 1950 के दो अलग चरणों को मिला देते हैं। विकल्प ख इसलिए आकर्षक लगता है क्योंकि मत्स्य संघ और राजस्थान संघ दोनों मार्च 1948 के हैं, पर मत्स्य संघ एक सप्ताह पहले बना था। विकल्प ग में वृहत्तर राजस्थान का प्रसिद्ध नाम भ्रम पैदा करता है, जबकि वह राजस्थान संघ के बाद आया था, पहले नहीं। विकल्प घ ऐतिहासिक प्रवाह को उलट देता है और 1949 के विस्तारों से पहले संयुक्त राजस्थान को रख देता है।