पंचायती राज एवं नगरपालिकाएं
मुख्य तथ्य
- संविधान (73वां संशोधन) अधिनियम, 1992 ने पंचायतों के लिए भाग 9 जोड़ा; संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में 29 ग्रामीण विषय शामिल हैं।
- राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 राज्य में ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद की त्रिस्तरीय संरचना लागू करता है।
- अनुच्छेद 243A में वर्णित ग्राम सभा गांव की लोकतांत्रिक नींव है;
- पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम, 1996 जनजातीय अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा की शक्ति को सुरक्षित करता है।
- संविधान (74वां संशोधन) अधिनियम, 1992 ने नगरपालिकाओं के लिए भाग 9क जोड़ा; संविधान की बारहवीं अनुसूची में 18 शहरी विषय शामिल हैं।
मुख्य बिंदु
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संविधान (73वां संशोधन) अधिनियम, 1992 ने पंचायतों के लिए भाग 9 जोड़ा; संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में 29 ग्रामीण विषय शामिल हैं।
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राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 राज्य में ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद की त्रिस्तरीय संरचना लागू करता है।
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अनुच्छेद 243A में वर्णित ग्राम सभा गांव की लोकतांत्रिक नींव है; राजस्थान का कानून इसे बैठक, गणपूर्ति, प्रस्ताव और लाभार्थी जांच जैसी व्यावहारिक प्रक्रियाओं में ढालता है।
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पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम, 1996 जनजातीय अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा की शक्ति को सुरक्षित करता है।
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संविधान (74वां संशोधन) अधिनियम, 1992 ने नगरपालिकाओं के लिए भाग 9क जोड़ा; संविधान की बारहवीं अनुसूची में 18 शहरी विषय शामिल हैं।
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राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिका मंडल के भेद और उनके अधिकारी, समितियां तथा कार्य तय करता है।
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चुनाव, वित्त और जिला योजना की मुख्य नियंत्रक संस्थाएं हैं — राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग, राजस्थान राज्य वित्त आयोग और अनुच्छेद 243ZD के अंतर्गत गठित जिला योजना समिति।
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राजस्थान सुनवाई का अधिकार अधिनियम, 2012, राजस्थान लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम, 2011 और राजस्थान लोक उपापन में पारदर्शिता अधिनियम, 2012 स्थानीय सेवाओं और निर्माण कार्यों में जवाबदेही सुनिश्चित करते हैं।
ग्रामीण स्थानीय शासन का संवैधानिक ढांचा क्या है?
ग्रामीण स्थानीय शासन का संवैधानिक ढांचा संविधान के ७३वें संशोधन, भाग ९, अनुच्छेद २४३ से २४३ओ और ग्यारहवीं अनुसूची पर टिका है, जिससे पंचायतें संवैधानिक स्थानीय संस्थाएं बनती हैं।
संवैधानिक आधार
- संविधान (७३वां संशोधन) अधिनियम, १९९२ ग्रामीण स्थानीय शासन का संवैधानिक आधार है।
- इसने भाग ९ जोड़ा, जिसमें अनुच्छेद २४३ से २४३ओ तक आते हैं।
- इसने पंचायतों को केवल नीति-लक्ष्य नहीं बल्कि संवैधानिक स्थानीय संस्थाएं बना दिया।
प्रमुख अनुच्छेद
| अनुच्छेद | प्रावधान |
|---|---|
| अनुच्छेद २४३ए | ग्राम सभा यानी गांव की सभा राज्य कानून से मिली शक्तियों का प्रयोग करती है। |
| अनुच्छेद २४३बी | गांव, मध्यवर्ती और जिला स्तर पर पंचायतों का प्रावधान करता है। |
| अनुच्छेद २४३सी | पंचायतों की संरचना राज्य विधानमंडल पर छोड़ता है। |
| अनुच्छेद २४३डी | आरक्षण की व्यवस्था करता है। |
| अनुच्छेद २४३ई | पांच वर्ष का कार्यकाल तय करता है। |
| अनुच्छेद २४३के | स्थानीय निकाय चुनावों पर राज्य निर्वाचन आयोग को नियंत्रण देता है। |
| अनुच्छेद २४३आई | राज्य वित्त आयोग के गठन का चक्र निर्धारित करता है। |
ग्यारहवीं अनुसूची
संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में २९ विषय हैं, जिनमें शामिल हैं:
- कृषि
- लघु सिंचाई
- पशुपालन
- ग्रामीण आवास
- पेयजल
- सड़क
- शिक्षा
- स्वास्थ्य
- महिला और बाल विकास
- सामाजिक कल्याण
- सार्वजनिक वितरण
- सामुदायिक संपत्ति
भारत सरकार के पंचायती राज मंत्रालय के आधिकारिक ग्यारहवीं अनुसूची पृष्ठ में पंचायतों के लिए यही २९ विषय सूचीबद्ध हैं।
राजस्थान में प्रयोग
- राजस्थान में यह ढांचा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, १९९४ के साथ मिलकर काम करता है।
- ग्राम सभा की बैठक, पंचायत समिति क्षेत्र और जिला परिषद निर्वाचन क्षेत्र इसी मेल से प्रभावी होते हैं।
- यह ग्रामीण ढांचा निर्वाचित स्थानीय अधिकार और राज्य पर्यवेक्षण को अलग-अलग भी रखता है।
अधिकार और पर्यवेक्षण
- पंचायतों को संवैधानिक अस्तित्व मिलता है।
- पर कराधान, समिति नियम, कार्मिक नियंत्रण, लेखा-परीक्षा और वित्तीय हस्तांतरण राजस्थान कानून तथा वित्त आयोग की सिफारिशों से चलते हैं।
प्रशासनिक अर्थ
- राजस्थान प्रशासन में सड़क प्रस्ताव, पेयजल मरम्मत, स्कूल भवन की प्राथमिकता या लाभार्थी सूची संवैधानिक शब्दावली और राज्य-कानूनी प्रक्रिया, दोनों से होकर गुजरती है।
- इसी कारण संविधान के साथ-साथ राजस्थान के नियम और वित्त रिपोर्ट भी जरूरी हैं।
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संभावित संभावित RAS प्रश्न
PYQ रुझान और 2026 पाठ्यक्रम विश्लेषण पर आधारित
1 MCQ किस संवैधानिक संशोधन ने भाग 9 में पंचायत ढांचा और ग्यारहवीं अनुसूची जोड़ी?
व्याख्या
भाग 9 पंचायतों का भाग है और ग्यारहवीं अनुसूची ग्रामीण विषयों की सूची है। 74वां संशोधन नगरपालिकाओं से, 42वां संशोधन 1976 के व्यापक संवैधानिक परिवर्तनों से और 97वां संशोधन सहकारी समितियों से जुड़ता है।
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