ब्रिटिश साम्राज्यवाद एवं प्रतिरोध
मुख्य तथ्य
- 1757 की प्लासी और 1764 की बक्सर की लड़ाइयों के बाद भारत में ब्रिटिश साम्राज्यवाद व्यापार से बदलकर भू-राजनीतिक शक्ति बन गया।
- 1773 के रेगुलेटिंग एक्ट ने बंगाल के फोर्ट विलियम में गवर्नर-जनरल पद बनाकर संसदीय नियंत्रण की शुरुआत की।
- 1793 में लॉर्ड कॉर्नवालिस ने स्थायी बंदोबस्त के ज़रिए जमींदारों पर तय राजस्व का बोझ डालकर राजस्व आधारित साम्राज्यवाद को और मज़बूत किया।
- लॉर्ड वेलेजली और सहायक संधि ने संरक्षण को निर्भरता में बदला; हैदराबाद ने 1798 में यह ढाँचा स्वीकार किया।
- 1799 के श्रीरंगपट्टनम और 1848 से डलहौजी के गोद निषेध सिद्धांत में सैन्य तथा विधिक विस्तार एक साथ दिखते हैं।
मुख्य बिंदु
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1757 की प्लासी और 1764 की बक्सर की लड़ाइयों के बाद भारत में ब्रिटिश साम्राज्यवाद व्यापार से बदलकर भू-राजनीतिक शक्ति बन गया।
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1773 के रेगुलेटिंग एक्ट ने बंगाल के फोर्ट विलियम में गवर्नर-जनरल पद बनाकर संसदीय नियंत्रण की शुरुआत की।
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1793 में लॉर्ड कॉर्नवालिस ने स्थायी बंदोबस्त के ज़रिए जमींदारों पर तय राजस्व का बोझ डालकर राजस्व आधारित साम्राज्यवाद को और मज़बूत किया।
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लॉर्ड वेलेजली और सहायक संधि ने संरक्षण को निर्भरता में बदला; हैदराबाद ने 1798 में यह ढाँचा स्वीकार किया।
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1799 के श्रीरंगपट्टनम और 1848 से डलहौजी के गोद निषेध सिद्धांत में सैन्य तथा विधिक विस्तार एक साथ दिखते हैं।
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मेरठ से दिल्ली तक 1857 का विद्रोह सैनिक असंतोष को व्यापक कंपनी-विरोधी संकट में बदलता है।
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भारत शासन अधिनियम, 1858 और लॉर्ड कैनिंग की उद्घोषणा ने सत्ता कंपनी से क्राउन को दी।
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संथाल, नील, मुंडा, बिजोलिया और आउवा आंदोलनों से आदिवासी, किसान और क्षेत्रीय प्रतिरोध स्पष्ट होता है।
बंगाल में कंपनी व्यापार से राजनीतिक सत्ता तक कैसे पहुँची?
बंगाल में कंपनी व्यापार से राजनीतिक सत्ता तक प्लासी, बक्सर और १७६५ की दीवानी के रास्ते पहुँची, जहाँ सैन्य जीत, दरबारी षड्यंत्र और राजस्व अधिकार एक साथ जुड़ गए।
बंगाल में कंपनी व्यापार से राजनीतिक सत्ता तक कैसे पहुँची?
नेशनल आर्मी म्यूज़ियम के अनुसार प्लासी में क्लाइव की सेना लगभग ३,००० सैनिकों की थी।
प्लासी का युद्ध
- तिथि: २३ जून १७५७।
- राजनीतिक मोड़: प्लासी का युद्ध कंपनी शासन में पहला निर्णायक राजनीतिक मोड़ है।
- मुख्य घटना: रॉबर्ट क्लाइव ने बंगाल में सिराजुद्दौला को हराया और मीर जाफर को आश्रित नवाब बनाया गया।
- बदलाव की प्रकृति: प्लासी ने रातोंरात नियमित साम्राज्य नहीं बनाया।
- प्रभाव: इसने ईस्ट इंडिया कंपनी को बंगाल की राजस्व-संबंधी राजनीति पर प्रभाव दिया।
- कार्य-ढाँचा: निजी व्यापार, सैन्य दबाव तथा दरबारी षड्यंत्र एक साथ चलने लगे।
- संबद्ध संदर्भ: प्लासी का युद्ध बंगाल के खजाने, फोर्ट विलियम के हित और तटीय कारखानों से अंदरूनी सत्ता तक के बदलाव से जुड़ा है।
- राजस्थान समानांतर: राजस्थान में बाद में अजमेर और मारवाड़ में कंपनी एजेंटों का अनुभव भी यही ढाँचा दिखाता है: व्यापारिक शक्ति प्रत्यक्ष शासक बनने से पहले राजनीतिक निर्णायक बनी।
बक्सर का युद्ध
- तिथि: २२ अक्टूबर १७६४।
- बंगाल की स्थिति: बक्सर का युद्ध बंगाल की स्थिति को और मजबूत करता है।
- पराजित पक्ष: कंपनी की सेना ने बंगाल के मीर क़ासिम, अवध के शुजाउद्दौला और मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय को हराया।
- परिणाम: १७६५ में बंगाल, बिहार और उड़ीसा में कंपनी को दीवानी अधिकार मिले।
- महत्व: बक्सर केवल युद्ध-सूची का नाम नहीं है, क्योंकि इसने ऐसी संस्था को वैधानिक राजस्व अधिकार दिया जो अभी भी स्वयं को व्यापारिक निकाय बताती थी।
- राजपूताना तक विस्तार: यही राजस्व-तर्क बाद में राजपूताना में खिराज, ऋण और राजनीतिक एजेंसी के रूप में पहुँचा।
- स्मृति-संदर्भ: राजस्थान की आउवा तथा बिजोलिया स्मृतियाँ इसी कंपनी-राज्य की दुनिया में विकसित हुईं।
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संभावित संभावित RAS प्रश्न
PYQ रुझान और 2026 पाठ्यक्रम विश्लेषण पर आधारित
1 MCQ इन घटनाओं को सही कालक्रम में रखिए: प्लासी, बक्सर, रेगुलेटिंग एक्ट, स्थायी बंदोबस्त।
व्याख्या
क्रम 1757 प्लासी, 1764 बक्सर, 1773 रेगुलेटिंग एक्ट और 1793 स्थायी बंदोबस्त है। विकल्प ख बंगाल के दोनों युद्धों को उलटता है और दोनों प्रशासनिक घटनाओं को गलत रखता है। विकल्प ग उस अधिनियम से शुरू करता है जो प्लासी और बक्सर दोनों के बाद आया। विकल्प घ 1773 के अधिनियम को 1764 के बक्सर युद्ध से पहले रखता है, जो असंभव है।
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