सिंधु एवं वैदिक युग
मुख्य तथ्य
- परिपक्व हड़प्पा नगरीकरण लगभग 2600-1900 ईसा पूर्व का है, जिसमें योजनाबद्ध सड़कें, मानकीकृत ईंटें, नालियाँ, मुहरें, बाट और लंबी दूरी का विनिमय दिखता है।
- हड़प्पा और मोहनजोदड़ो इस सभ्यता की खोज की कड़ी हैं: हड़प्पा सबसे पहले 1921 में पहचाना गया और मोहनजोदड़ो 1922 में सिंधु नदी के पास सामने आया।
- लोथल भोगावा नदी पर बसा बंदरगाह नगर था, जो समुद्री व्यापार का बड़ा केंद्र रहा;
- लगभग 600 ईसा पूर्व के सोलह महाजनपद और मगध का उदय उत्तर वैदिक समाज को आरंभिक ऐतिहासिक युग से जोड़ते हैं।
मुख्य बिंदु
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परिपक्व हड़प्पा नगरीकरण लगभग 2600-1900 ईसा पूर्व का है, जिसमें योजनाबद्ध सड़कें, मानकीकृत ईंटें, नालियाँ, मुहरें, बाट और लंबी दूरी का विनिमय दिखता है।
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हड़प्पा और मोहनजोदड़ो इस सभ्यता की खोज की कड़ी हैं: हड़प्पा सबसे पहले 1921 में पहचाना गया और मोहनजोदड़ो 1922 में सिंधु नदी के पास सामने आया।
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राजस्थान भी इससे अछूता नहीं है: घग्घर नदी पर बसे कालीबंगा में पूर्व-हड़प्पा और हड़प्पा दोनों स्तर, जोता हुआ खेत, मुहरें और ग्रिड जैसी सड़कें मिलती हैं।
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लोथल भोगावा नदी पर बसा बंदरगाह नगर था, जो समुद्री व्यापार का बड़ा केंद्र रहा; धोलावीरा अपने जल-प्रबंधन, तीन भागों में बँटे नगर और 2021 की UNESCO मान्यता के लिए जाना जाता है।
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सिंधु लिपि अब तक पढ़ी नहीं जा सकी है; मुहरें, पशुपति मुहर और एक जैसे मानक बाट बताते हैं कि पढ़े जा सकने वाले राजकीय अभिलेखों के बिना भी यहाँ कोई प्रशासन व्यवस्था थी।
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ऋग्वेद, उत्तर वैदिक ग्रंथ, लोहा, चित्रित धूसर मृद्भांड और आहड़-बनास संस्कृति पशुपालक कुलों से कृषि-आधारित बसावट तक का संक्रमण दिखाते हैं।
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लगभग 600 ईसा पूर्व के सोलह महाजनपद और मगध का उदय उत्तर वैदिक समाज को आरंभिक ऐतिहासिक युग से जोड़ते हैं।
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हर्यंक वंश के बिंबिसार और अजातशत्रु ने विवाह-संधियों, किलेबंदी, युद्ध के नए हथियारों और वज्जि पर नियंत्रण के ज़रिए मगध का विस्तार किया।
हड़प्पा सभ्यता का कालक्रम, खोज और राजस्थान से संबंध कैसे समझें?
हड़प्पा सभ्यता का कालक्रम, खोज और राजस्थान से संबंध कैसे समझें?
हड़प्पा सभ्यता को पूर्व-हड़प्पा, परिपक्व हड़प्पा और उत्तर-हड़प्पा के लंबे सांस्कृतिक क्रम के रूप में समझना चाहिए; इसकी खोज हड़प्पा और मोहनजोदड़ो से सामने आई और राजस्थान में कालीबंगा तथा आहड़-बनास जैसी कड़ियाँ इसे स्थानीय प्रागैतिहास से जोड़ती हैं।
सिंधु या हड़प्पा सभ्यता को एक ही नगर नहीं, बल्कि लंबे सांस्कृतिक क्रम के रूप में पढ़ना चाहिए। एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक के अनुसार हड़प्पा सभ्यता का कुल समय ६००० ईसा पूर्व से १३०० ईसा पूर्व तक फैला माना जाता है। परीक्षा में इसी क्रम को काल, खोज, भौतिक साक्ष्य और राजस्थान-सम्बंध के साथ जोड़कर पढ़ना सबसे सुरक्षित तरीका है।
कालक्रम
| चरण | अवधि |
|---|---|
| पूर्व-हड़प्पा | ६०००-२६०० ईसा पूर्व |
| परिपक्व हड़प्पा | २६००-१९०० ईसा पूर्व |
| उत्तर-हड़प्पा | १९००-१३०० ईसा पूर्व |
परिपक्व चरण के साक्ष्य
- नियोजित नगर
- पक्की-कच्ची ईंटें
- मुहरें
- बाट
- मनके
- ताँबा-कांसा उपकरण
- अफगानिस्तान, बलूचिस्तान, राजस्थान, गुजरात तथा यमुना क्षेत्र तक फैली बसावटें
खोज और कालक्रम
| स्थल | उत्खनन | स्थिति | महत्त्व |
|---|---|---|---|
| हड़प्पा | दयाराम साहनी द्वारा उत्खनन, १९२१ | रावी नदी के पास पंजाब क्षेत्र | प्रकार-स्थल बना क्योंकि सभ्यता सबसे पहले यहीं पहचानी गई |
| मोहनजोदड़ो | आर.डी. बनर्जी द्वारा उत्खनन, १९२२ | सिंध में सिंधु नदी के किनारे | अगले वर्ष सामने आया; इन खोजों ने प्राचीन भारतीय कालक्रम में पाठ्य परंपरा से पहले का नगरीय कांस्य युग स्थापित किया |
राजस्थान और पड़ोसी ताम्रपाषाण तुलना
| क्षेत्र/संस्कृति | स्थिति | साक्ष्य |
|---|---|---|
| कालीबंगा | हनुमानगढ़, राजस्थान; घग्घर पर स्थित | पूर्व-हड़प्पा तथा हड़प्पा दोनों स्तर दिखाता है |
| आहड़-बनास संस्कृति | मेवाड़, राजस्थान | काले-लाल मृद्भांड, ताँबे की वस्तुएँ और आहड़, गिलुंड, बालाथल, ओजियाना जैसे स्थल |
मुख्य निष्कर्ष
- हड़प्पा संस्कृति केवल नदी-घाटी तक सीमित नहीं थी; ईंट-मानक, बाट और मुहरें अलग-अलग पर्यावरणों में दोहराती हैं।
- स्थल-मानचित्र, संग्रहालय-वस्तु और नदी-नाम साथ पढ़ने से प्रत्येक विशेषता का पर्यावरणीय अर्थ स्पष्ट होता है।
- राजस्थान इतिहास के लिए राज्य उत्तर-पश्चिमी प्रागैतिहासिक क्षेत्र का भाग है, सिंधु नगरों के बाद की टिप्पणी नहीं।
- इसलिए उत्तर लिखते समय हड़प्पा को केवल सिंधु नदी की सभ्यता कहकर छोड़ना अधूरा रहेगा; राजस्थान में कालीबंगा और मेवाड़ की आहड़-बनास संस्कृति इसे स्थानीय धरातल देती हैं।
उत्तर में पकड़
- कालक्रम को खोज से अलग न करें: पूर्व-हड़प्पा, परिपक्व हड़प्पा और उत्तर-हड़प्पा चरणों के बाद दयाराम साहनी और आर.डी. बनर्जी की खोजों को जोड़ें।
- राजस्थान को बाद की टिप्पणी की तरह न लिखें; कालीबंगा घग्घर पर पूर्व-हड़प्पा और हड़प्पा दोनों स्तर देता है, जबकि आहड़-बनास मेवाड़ की ताम्रपाषाण पृष्ठभूमि दिखाता है।
- परिपक्व हड़प्पा की पहचान केवल बड़े नगरों से नहीं, बल्कि ईंट-मानक, बाट, मुहरें, मनके और ताँबा-कांसा उपकरणों की दोहरावदार उपस्थिति से करें।
- अफगानिस्तान, बलूचिस्तान, राजस्थान, गुजरात और यमुना क्षेत्र तक फैली बसावटें बताती हैं कि यह सांस्कृतिक तंत्र अलग-अलग पर्यावरणों में अपना रूप बदलते हुए चलता था।
- परीक्षा में अच्छा उत्तर वही होगा जो सिंधु नगरों, घग्घर क्षेत्र और मेवाड़ के ताम्रपाषाण संसार को एक ही उत्तर-पश्चिमी प्रागैतिहासिक परिदृश्य में रखे।
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संभावित संभावित RAS प्रश्न
PYQ रुझान और 2026 पाठ्यक्रम विश्लेषण पर आधारित
1 MCQ घग्घर तट पर जोते हुए खेत और अग्नि-वेदियों से जुड़ा राजस्थान का हड़प्पा स्थल कौन-सा है?
व्याख्या
कालीबंगा घग्घर तट का राजस्थान स्थल है जहाँ जोते हुए खेत, अग्नि-वेदियाँ और ग्रिड जैसी सड़कें मिलती हैं। लोथल गोदी-स्थल है, धोलावीरा जल-प्रबंधन नगर है और राखीगढ़ी पैमाने तथा प्राचीन DNA के लिए प्रसिद्ध है।
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