कौशल विकास एवं सामाजिक न्याय
मुख्य तथ्य
- कौशल नीति प्रशिक्षण, प्रमाणन, शिक्षुता, इंटर्नशिप और औपचारिक नियुक्ति प्रोत्साहन को रोजगार से जोड़ती है।
- रु. 12,000 करोड़ का व्यय-आधार पीएमकेवीवाई 2.0 से जुड़ा है; वर्तमान पीएमकेवीवाई 4.0 पुनर्गठित कौशल भारत कार्यक्रम का हिस्सा है।
- पीएलएफएस वार्षिक रिपोर्ट 2025 में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए सामान्य स्थिति के आधार पर श्रमबल भागीदारी दर 59.3%, कामगार-जनसंख्या अन…
- इस विषय में सामाजिक न्याय संरक्षण कानून, महिला सुरक्षा, आजीविका समूह, शिक्षा-अधिकार, स्वच्छ ईंधन और पेंशन तक फैला है।
- राजस्थान का संबंध जयपुर के विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय, रोजगार विभाग और मुख्यमंत्री युवा सम्बल योजना से स्पष्ट होता है।
मुख्य बिंदु
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कौशल नीति प्रशिक्षण, प्रमाणन, शिक्षुता, इंटर्नशिप और औपचारिक नियुक्ति प्रोत्साहन को रोजगार से जोड़ती है।
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रु. 12,000 करोड़ का व्यय-आधार पीएमकेवीवाई 2.0 से जुड़ा है; वर्तमान पीएमकेवीवाई 4.0 पुनर्गठित कौशल भारत कार्यक्रम का हिस्सा है।
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पीएलएफएस वार्षिक रिपोर्ट 2025 में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए सामान्य स्थिति के आधार पर श्रमबल भागीदारी दर 59.3%, कामगार-जनसंख्या अनुपात 57.4% और बेरोजगारी दर 3.1% है।
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इस विषय में सामाजिक न्याय संरक्षण कानून, महिला सुरक्षा, आजीविका समूह, शिक्षा-अधिकार, स्वच्छ ईंधन और पेंशन तक फैला है।
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राजस्थान का संबंध जयपुर के विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय, रोजगार विभाग और मुख्यमंत्री युवा सम्बल योजना से स्पष्ट होता है।
भारत में कौशल विकास का प्रशासनिक ढांचा कैसे बना?
भारत में कौशल विकास का प्रशासनिक ढांचा कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय, राष्ट्रीय कौशल विकास निगम, सेक्टर कौशल परिषदों, प्रशिक्षण प्रदाताओं, जन शिक्षण संस्थानों, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों और शिक्षुता व्यवस्था के सहारे बना। कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट २०२४-२५ के अनुसार पीएमकेवीवाई के अलग-अलग चरणों में शुरुआत से अब तक १.६३ करोड़ अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण या ओरिएंटेशन मिला है।
भारत का कौशल-विकास ढांचा पहले एक समर्पित प्रशासनिक आधार से शुरू होता है।
प्रशासनिक आधार और कार्यान्वयन तंत्र
- कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) ९ नवंबर २०१४ को पूरे देश में कौशल-विकास प्रयासों के समन्वय के लिए स्थापित किया गया।
- इसके साथ कार्यान्वयन तंत्र बनाते हैं:
- राष्ट्रीय कौशल विकास निगम
- सेक्टर कौशल परिषदें
- प्रशिक्षण प्रदाता
- जन शिक्षण संस्थान
- औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान
- शिक्षुता पोर्टल
- कौशल भारत मिशन + प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) १५ जुलाई २०१५ से इस व्यवस्था का प्रमुख सार्वजनिक चेहरा बना।
पीएमकेवीवाई के चरण
| चरण | अवधि / स्थिति | मुख्य तथ्य |
|---|---|---|
| पीएमकेवीवाई १.० | शुरुआती चरण | शुरुआती अल्पकालिक प्रशिक्षण और प्रमाणन चरण था |
| पीएमकेवीवाई २.० | २०१६-२० | रु. १२,००० करोड़ व्यय-आधार और एक करोड़ युवाओं के लक्ष्य के साथ स्वीकृति मिली |
| पीएमकेवीवाई ३.० | २०२०-२१ | २०२०-२१ में चला |
| पीएमकेवीवाई ४.० | वर्तमान पुनर्गठित व्यवस्था | पीएम-एनएपीएस और जन शिक्षण संस्थान के साथ पुनर्गठित कौशल भारत कार्यक्रम में समाहित है |
- मुख्य सुधार: रु. १२,००० करोड़ वर्तमान पीएमकेवीवाई ४.० का नहीं, बल्कि पीएमकेवीवाई २.० का आंकड़ा है।
राजस्थान संबंध
- जयपुर का विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय, जो २०१७ के अधिनियम संख्या ६ से राजस्थान आईएलडी कौशल विश्वविद्यालय के रूप में बना, पूरे राजस्थान के कौशल-शिक्षा संस्थानों को संबद्ध कर सकता है।
- राजस्थान का विश्वविद्यालय मार्ग स्थानीय पाठ्यक्रम और जिला-कौशल अंतर को जल्दी पहचान सकता है।
कौशल व्यवस्था के जोखिम
| जोखिम | नीति तर्क |
|---|---|
| नामांकन | मजबूत कौशल व्यवस्था नामांकन का जोखिम देखती है |
| प्रमाणपत्र | मजबूत कौशल व्यवस्था प्रमाणपत्र का जोखिम देखती है |
| मांग | मजबूत कौशल व्यवस्था मांग का जोखिम देखती है |
| टिकाऊ नियुक्ति | मजबूत कौशल व्यवस्था टिकाऊ नियुक्ति का जोखिम देखती है |
इसलिए परीक्षा में कौशल ढांचे को केवल योजना-सूची की तरह नहीं, बल्कि मंत्रालय, प्रशिक्षण तंत्र, उद्योग-संबंध और राज्य-स्तर के कौशल विश्वविद्यालय की संयुक्त व्यवस्था की तरह पढ़ना चाहिए।
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संभावित संभावित RAS प्रश्न
PYQ रुझान और 2026 पाठ्यक्रम विश्लेषण पर आधारित
1 MCQ पुनर्गठित कौशल भारत कार्यक्रम पर इन कथनों पर विचार करें: 1. इसमें पीएमकेवीवाई 4.0, पीएम-एनएपीएस और जन शिक्षण संस्थान शामिल हैं। 2. रु. 12,000 करोड़ का परिव्यय पीएमकेवीवाई 2.0 से जुड़ा है, पीएमकेवीवाई 4.0 से नहीं। कौन-से कथन सही हैं?
व्याख्या
दोनों कथन सही हैं: पुनर्गठित कौशल भारत कार्यक्रम पीएमकेवीवाई 4.0 को पीएम-एनएपीएस और जन शिक्षण संस्थान के साथ जोड़ता है, जबकि रु. 12,000 करोड़ का परिव्यय पीएमकेवीवाई 2.0 से जुड़ा है। विकल्प क परिव्यय-अंतर छोड़ता है, विकल्प ख वर्तमान कार्यक्रम संरचना छोड़ता है और विकल्प घ दो सही कथनों को अस्वीकार करता है।
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