विकास का मापन एवं मानव विकास सूचकांक
मुख्य तथ्य
- विकास का मापन उत्पादन, मानवीय क्षमता, निर्धनता, असमानता, स्थिरता और राज्य-स्तरीय परिणामों को एक साथ देखता है।
- मानव विकास सूचकांक स्वास्थ्य, शिक्षा और आय आयामों का ज्यामितीय माध्य है, जीडीपी रैंकिंग नहीं।
- 2023-24 मानव विकास रिपोर्ट में भारत 193 देशों में 134वें स्थान पर और 0.644 मूल्य के साथ मध्यम श्रेणी में है।
- बहुआयामी निर्धनता सूचकांक और उपभोग सर्वेक्षण वंचना तथा खपत को सीधे मापते हैं।
- राजस्थान का संदर्भ एसडीजी स्कोर, निर्धनता कमी, उपभोग अंतर और सेवा वितरण से स्पष्ट होता है।
मुख्य बिंदु
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विकास का मापन उत्पादन, मानवीय क्षमता, निर्धनता, असमानता, स्थिरता और राज्य-स्तरीय परिणामों को एक साथ देखता है।
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मानव विकास सूचकांक स्वास्थ्य, शिक्षा और आय आयामों का ज्यामितीय माध्य है, जीडीपी रैंकिंग नहीं।
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2023-24 मानव विकास रिपोर्ट में भारत 193 देशों में 134वें स्थान पर और 0.644 मूल्य के साथ मध्यम श्रेणी में है।
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बहुआयामी निर्धनता सूचकांक और उपभोग सर्वेक्षण वंचना तथा खपत को सीधे मापते हैं।
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राजस्थान का संदर्भ एसडीजी स्कोर, निर्धनता कमी, उपभोग अंतर और सेवा वितरण से स्पष्ट होता है।
विकास का मापन जीडीपी से आगे क्यों जाता है?
विकास का मापन जीडीपी से आगे इसलिए जाता है, क्योंकि आय बढ़ने से अपने-आप शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, सुरक्षित आवास और समान अवसर नहीं बढ़ जाते। नीति आयोग के एसडीजी भारत सूचकांक २०२३-२४ में राजस्थान का समग्र स्कोर ६७ रहा, इसलिए राज्य की विकास-कहानी को सिर्फ उत्पादन से नहीं, सामाजिक और पर्यावरणीय संकेतकों से भी पढ़ना पड़ता है। विकास को कई दृष्टियों से मापा जाता है, क्योंकि एक संख्या आय, क्षमता, वंचना और असमानता को साथ नहीं पकड़ती।
राष्ट्रीय आय लेखांकन के प्रमुख माप
| माप | क्या बताता है |
|---|---|
| बाजार मूल्य पर जीडीपी | अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य बताती है। |
| सकल राष्ट्रीय आय | विदेश से शुद्ध कारक आय जोड़ती या घटाती है। |
| शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद | मूल्यह्रास घटाता है। |
ये राष्ट्रीय आय लेखांकन के लिए आवश्यक हैं, पर ये नहीं बताते कि परिवार के पास शिक्षा, पोषण, सुरक्षित आवास और स्वास्थ्य पहुंच है या नहीं।
जीडीपी के साथ पढ़े जाने वाले संकेतक
- मानव विकास सूचकांक (एचडीआई) २०२३-२४ — भारत
- राष्ट्रीय बहुआयामी निर्धनता सूचकांक (एमपीआई) २०२३
- गृहस्थ उपभोग व्यय सर्वेक्षण (एचसीईएस) २०२२-२३
- गिनी गुणांक एवं लोरेंज वक्र — भारत
राजस्थान में जरूरत
राजस्थान में भी यही जरूरत दिखती है। किसी जिले में निर्माण और खनन उत्पादन बढ़ सकता है, पर राज्य को ये बातें देखनी पड़ती हैं:
- विद्यालय पूर्णता
- बाल पोषण
- पेयजल
- महिला श्रमिक
- जनजातीय वंचना
- ग्रामीण-शहरी उपभोग अंतर
राजस्थान के संकेत
| संकेतक | तथ्य | विकास कथा का हिस्सा |
|---|---|---|
| राजस्थान का एसडीजी भारत सूचकांक २०२३-२४ | स्कोर ६७ | विकास कथा का अलग हिस्सा मापता है। |
| एमपीआई हेडकाउंट | २०१५-१६ में २८.९३% से २०१९-२१ में १५.३१% | उसी विकास कथा का अलग हिस्सा मापता है। |
वृद्धि संसाधन आधार बढ़ाती है, पर एचडीआई, एमपीआई, उपभोग सर्वेक्षण और गिनी बताते हैं कि जीवन में बदलाव हुआ या नहीं। कल्याण निष्कर्ष एक शीर्षक संख्या से नहीं, संकेतकों के समूह से बनता है। परीक्षा में भी यही बात लिखनी है: जीडीपी विकास की शुरुआत दिखाती है, पर विकास का पूरा जवाब तब बनता है जब आय के साथ क्षमता, वंचना, असमानता और राज्य-स्तर की सेवा-गुणवत्ता को जोड़ा जाए।
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संभावित संभावित RAS प्रश्न
PYQ रुझान और 2026 पाठ्यक्रम विश्लेषण पर आधारित
1 MCQ एक संयुक्त संकेतक जीवन प्रत्याशा, स्कूली शिक्षा और क्रय-शक्ति-समायोजित आय को ज्यामितीय माध्य से जोड़ता है। कौन-सा माप वर्णित है?
व्याख्या
क सही है क्योंकि एचडीआई स्वास्थ्य, शिक्षा और आय आयामों को जोड़ता है तथा 2010 के बाद ज्यामितीय माध्य का प्रयोग करता है। ख भूख संकेतक लेता है, ग उपभोग व्यय मापता है और घ वितरण की असमानता बताता है।
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