प्राकृतिक वनस्पति, जैव विविधता एवं संरक्षण
मुख्य तथ्य
- राजस्थान का वन आवरण कम और श्रेणी-निर्भर है: आईएसएफआर 2023 में कुल वन आवरण 16,548.21 वर्ग किमी है और खुला वन सबसे बड़ा वर्ग है।
- पाँच बाघ अभ्यारण्यों की क्रम-श्रृंखला रणथंभौर, सरिस्का, मुकुंदरा हिल्स, रामगढ़ विषधारी और धौलपुर-करौली से बनती है।
- मरु राष्ट्रीय उद्यान, ताल छापर, केवलादेव, सांभर और खींचन बताते हैं कि संरक्षण केवल घने बाघ आवास तक सीमित नहीं है।
- खेजड़ी, रोहिड़ा, गोडावण और ऊँट शुष्क क्षेत्र की पारिस्थितिकी को राज्य प्रतीकों से जोड़ते हैं।
- खेजड़ली, बिश्नोई परंपरा, ओरन, घासभूमि और गलियारा संरक्षण राजस्थान की जैव विविधता को आकार देते हैं।
मुख्य बिंदु
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राजस्थान का वन आवरण कम और श्रेणी-निर्भर है: आईएसएफआर 2023 में कुल वन आवरण 16,548.21 वर्ग किमी है और खुला वन सबसे बड़ा वर्ग है।
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पाँच बाघ अभ्यारण्यों की क्रम-श्रृंखला रणथंभौर, सरिस्का, मुकुंदरा हिल्स, रामगढ़ विषधारी और धौलपुर-करौली से बनती है।
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मरु राष्ट्रीय उद्यान, ताल छापर, केवलादेव, सांभर और खींचन बताते हैं कि संरक्षण केवल घने बाघ आवास तक सीमित नहीं है।
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खेजड़ी, रोहिड़ा, गोडावण और ऊँट शुष्क क्षेत्र की पारिस्थितिकी को राज्य प्रतीकों से जोड़ते हैं।
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खेजड़ली, बिश्नोई परंपरा, ओरन, घासभूमि और गलियारा संरक्षण राजस्थान की जैव विविधता को आकार देते हैं।
राजस्थान में वन आवरण और प्राकृतिक वनस्पति का ढाँचा कैसा है?
राजस्थान में वन आवरण कम, खुला और शुष्कता-प्रधान है; भारत वन स्थिति रिपोर्ट २०२३ के अनुसार राज्य का वन आवरण १६,५४८.२१ वर्ग किमी, यानी भौगोलिक क्षेत्र का ४.८४% है।
राजस्थान की प्राकृतिक वनस्पति शुष्कता, अरावली विभाजक और पूर्व-पश्चिम नमी अंतर से बनती है।
राजस्थान वन आवरण (भारत वन स्थिति रिपोर्ट २०२३)
| श्रेणी | क्षेत्रफल |
|---|---|
| राज्य में वन आवरण | १६,५४८.२१ वर्ग किमी |
| अति सघन वन | २२३.२० वर्ग किमी |
| मध्यम सघन वन | ४,२३७.४१ वर्ग किमी |
| खुला वन | १२,०८७.६० वर्ग किमी |
| झाड़ी क्षेत्र | ५,४७६.७५ वर्ग किमी |
- झाड़ी क्षेत्र अलग से ५,४७६.७५ वर्ग किमी है, इसलिए वन आवरण, वृक्ष आवरण और झाड़ी क्षेत्र को एक ही आँकड़ा नहीं माना जा सकता।
क्षेत्रीय वनस्पति ढाँचा
| क्षेत्र/जिले | वनस्पति और अर्थ |
|---|---|
| जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर और चूरू जैसे पश्चिमी जिले | सूखा, चराई और हवा के कटाव को सहने वाली काँटेदार वनस्पति, घास और झाड़ियाँ मिलती हैं। |
| शुष्क पारिस्थितिकी की शब्दावली | खेजड़ी, रोहिड़ा, बेर, केर, फोग, थोर और लाना |
| पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी राजस्थान | वर्षा, पथरीली ढाल और जल उपलब्धता बढ़ने से शुष्क पर्णपाती तथा मिश्रित पर्णपाती वन मिलते हैं। |
| सिरोही का माउंट आबू | छोटा किंतु महत्त्वपूर्ण उप-उष्णकटिबंधीय पहाड़ी वन क्षेत्र |
- अरावली केवल स्थलरूप नहीं, बल्कि वनस्पति सीमा, जल-विभाजक और प्रजाति-गमन गलियारा भी है।
- कम वन प्रतिशत के कारण खुले वन, ग्राम-चारागाह, ओरन, घासभूमि, आर्द्रभूमि और झाड़ी क्षेत्र भी पारिस्थितिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण हैं।
जिला तुलना
| जिले | स्थिति |
|---|---|
| उदयपुर, सिरोही और प्रतापगढ़ | पहाड़ी ढाल और अपेक्षाकृत अधिक वर्षा सहारा देती है। |
| चूरू, हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर | मरु मैदान और खेती प्रमुख रहती है। |
- केवल घने वन गिनने वाली दृष्टि मरु राष्ट्रीय उद्यान के गोडावण आवास, ताल छापर के कृष्णसार घास-मैदान और सांभर के पक्षी आवास को छोड़ देती है।
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संभावित संभावित RAS प्रश्न
PYQ रुझान और 2026 पाठ्यक्रम विश्लेषण पर आधारित
1 MCQ 2023 की आधिकारिक वन-आवरण तालिका अति सघन, मध्यम सघन और खुले वर्ग अलग रखती है। उस कुल से कौन-सा आँकड़ा जुड़ता है?
व्याख्या
आईएसएफआर 2023 की राजस्थान वन-आवरण तालिका अति सघन, मध्यम सघन और खुले वन को जोड़कर 16,548.21 वर्ग किमी कुल देती है। 24,000 हेक्टेयर आँकड़ा सांभर खारी आर्द्रभूमि से जुड़ा है। 7.1977 वर्ग किमी ताल छापर कृष्णसार अभ्यारण्य का क्षेत्र है। 1501.88 वर्ग किमी रामगढ़ विषधारी बाघ परिदृश्य से जुड़ा है।
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