औद्योगिक क्षेत्र एवं उद्योग
मुख्य तथ्य
- भारत के औद्योगिक क्षेत्र वहाँ सघन होते हैं जहाँ कच्चा माल, शक्ति, जल, श्रम, परिवहन, बाजार और समूहन लाभ मिलते हैं।
- मुंबई-पुणे और अहमदाबाद-वडोदरा पश्चिमी कपास-वस्त्र, बंदरगाह, वित्त, पेट्रोकेमिकल और इंजीनियरिंग ढाँचा दिखाते हैं।
- हुगली और दामोदर-छोटानागपुर पूर्वी नदी-बंदरगाह, जूट, कोयला, लौह अयस्क, इस्पात और भारी इंजीनियरिंग का ढाँचा दिखाते हैं।
- भिलाई, राउरकेला और बोकारो सार्वजनिक क्षेत्र के इस्पात भूगोल और भारी उद्योग चरण के मुख्य बिंदु हैं।
- बेंगलुरु-चेन्नई, विशाखापत्तनम-गुंटूर और दिल्ली-गुरुग्राम-नोएडा गलियारों, बंदरगाहों, ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स की ओर बदलाव दिखाते हैं।
मुख्य बिंदु
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भारत के औद्योगिक क्षेत्र वहाँ सघन होते हैं जहाँ कच्चा माल, शक्ति, जल, श्रम, परिवहन, बाजार और समूहन लाभ मिलते हैं।
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मुंबई-पुणे और अहमदाबाद-वडोदरा पश्चिमी कपास-वस्त्र, बंदरगाह, वित्त, पेट्रोकेमिकल और इंजीनियरिंग ढाँचा दिखाते हैं।
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हुगली और दामोदर-छोटानागपुर पूर्वी नदी-बंदरगाह, जूट, कोयला, लौह अयस्क, इस्पात और भारी इंजीनियरिंग का ढाँचा दिखाते हैं।
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भिलाई, राउरकेला और बोकारो सार्वजनिक क्षेत्र के इस्पात भूगोल और भारी उद्योग चरण के मुख्य बिंदु हैं।
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बेंगलुरु-चेन्नई, विशाखापत्तनम-गुंटूर और दिल्ली-गुरुग्राम-नोएडा गलियारों, बंदरगाहों, ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स की ओर बदलाव दिखाते हैं।
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काली कपासी मिट्टी पश्चिमी वस्त्र पट्टी को और लाल-लेटराइट पठार छोटानागपुर भारी उद्योग को आधार देते हैं।
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राजस्थान नीमराना-भिवाड़ी, जोधपुर-पाली-मारवाड़, भीलवाड़ा वस्त्र, कोटा औद्योगिक संबंध, सीमेंट और पत्थर उद्योगों से जुड़ता है।
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तेल रिफाइनरी, ऑटोमोबाइल क्लस्टर और औद्योगिक गलियारे अपने स्थान, स्वामित्व और काम की वजह से अक्सर भ्रम पैदा करते हैं।
भारत में औद्योगिक क्षेत्र कहाँ और क्यों बनते हैं?
भारत में औद्योगिक क्षेत्र वहाँ बनते हैं जहाँ कच्चा माल, ऊर्जा, जल, श्रम, बाजार, परिवहन और पूँजी एक-दूसरे से जुड़कर कारखानों की सघनता बना देते हैं। औद्योगिक क्षेत्र कारखानों की बेतरतीब सूची नहीं, बल्कि आपस में जुड़े भौगोलिक कारकों से बनी सघनता है। राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम के अनुसार राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा कार्यक्रम में ११ गलियारों के तहत ३२ परियोजनाएँ शामिल हैं।
प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों का स्थान-तर्क
| क्षेत्र | जुड़े भौगोलिक कारक |
|---|---|
| मुंबई-पुणे औद्योगिक क्षेत्र | कपास वाले पृष्ठप्रदेश, मुंबई बंदरगाह, वित्त, आयातित मशीनरी, रेल संपर्क और मुंबई-ठाणे-पुणे अक्ष के औद्योगिक फैलाव से बना। |
| हुगली औद्योगिक क्षेत्र | नदी-बंदरगाह, पृष्ठप्रदेश से रेल संपर्क, जूट प्रसंस्करण, दामोदर कोयला क्षेत्रों और पूर्वी भारत के श्रम पर टिका। |
| छोटानागपुर खनिज औद्योगिक क्षेत्र | कोयला, लौह अयस्क, जल, रेल और पठारी खनिज आधार से बढ़ा। |
| राजस्थान | भीलवाड़ा वस्त्र, सीमेंट पट्टियाँ, पत्थर उद्योग और गलियारा-संबद्ध औद्योगिक क्षेत्र तटीय नहीं हैं, फिर भी कच्चा माल, बाजार मार्ग, शक्ति और राज्य औद्योगिक क्षेत्रों से औद्योगिक समूह बनाते हैं। |
मिट्टी, खनिज पट्टी और उद्योग
- काली कपासी मिट्टी और पश्चिमी वस्त्र उद्योग का स्थान कपास-वस्त्र का आधार बताते हैं।
- छोटानागपुर लाल-लेटराइट खनिज पट्टी इस्पात और भारी अभियांत्रिकी का आधार देती है।
राष्ट्रीय ढाँचा
- पश्चिमी कपास-बंदरगाह पट्टी
- पूर्वी नदी-जूट पट्टी
- खनिज-इस्पात पट्टी
- दक्षिणी गलियारा-बंदरगाह पट्टी
- उत्तरी बाजार समूह
- राजस्थान के माल-ढुलाई आधारित केंद्र
बदलते स्थान-कारक और राजस्थान
- बिजली, सड़क, पाइपलाइन, बंदरगाह और कुशल सेवाएँ बढ़ने पर कच्चे माल की पुरानी पाबंदियाँ घटती हैं।
- राजस्थान का सूखा औद्योगिक भूगोल इसी ढाँचे में गलियारा और बाजार-आधारित पक्ष से बेहतर समझ आता है।
- इसलिए परीक्षा में किसी औद्योगिक क्षेत्र को याद करते समय केवल उद्योग का नाम नहीं, बल्कि उसका संसाधन आधार, बाजार से दूरी, परिवहन संपर्क और ऊर्जा-जल व्यवस्था साथ में लिखनी चाहिए।
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संभावित संभावित RAS प्रश्न
PYQ रुझान और 2026 पाठ्यक्रम विश्लेषण पर आधारित
1 MCQ एक पश्चिमी औद्योगिक पट्टी बंदरगाह के पास कपास-वस्त्र से शुरू होकर बाद में इंजीनियरिंग, पेट्रोकेमिकल और ऑटोमोबाइल में फैली। कौन-सा विकल्प सही है?
व्याख्या
क सही है क्योंकि संकेत पश्चिमी कपास, बंदरगाह लाभ, मुंबई वित्त और पुणे की ओर विविधीकरण को जोड़ता है। ख जूट-नदी-बंदरगाह पट्टी है, ग कोयला-लौह-इस्पात पठारी पट्टी है और घ पूर्वी तटीय बंदरगाह-उद्योग पट्टी है।
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