मुख्य तथ्य

  • दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्यतः 1 जून के आसपास केरल पहुँचता है और अरब सागर तथा बंगाल की खाड़ी शाखाओं से उत्तर की ओर बढ़ता है।
  • लौटता मानसून तमिलनाडु तट को अक्टूबर-नवंबर की मुख्य वर्षा देता है, जबकि उत्तर भारत का बड़ा भाग सूखने लगता है।
  • पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिम भारत और पश्चिमी हिमालय में शीतकालीन वर्षा व हिमपात लाते हैं, जिससे रबी दशाएँ प्रभावित होती हैं।
  • मानसून द्रोणी, बंगाल की खाड़ी के निम्न-दाब और सक्रिय-विराम चक्र गंगा मैदान और मध्य भारत की अल्पावधि वर्षा समझाते हैं।
  • राजस्थान की थार उष्ण शुष्क जलवायु, अरावली दिशा और ऊष्ण लहर मानदंड राष्ट्रीय जलवायु तंत्र को राज्य भूगोल से जोड़ते हैं।

मुख्य बिंदु

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    दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्यतः 1 जून के आसपास केरल पहुँचता है और अरब सागर तथा बंगाल की खाड़ी शाखाओं से उत्तर की ओर बढ़ता है।

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    लौटता मानसून तमिलनाडु तट को अक्टूबर-नवंबर की मुख्य वर्षा देता है, जबकि उत्तर भारत का बड़ा भाग सूखने लगता है।

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    पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिम भारत और पश्चिमी हिमालय में शीतकालीन वर्षा व हिमपात लाते हैं, जिससे रबी दशाएँ प्रभावित होती हैं।

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    मानसून द्रोणी, बंगाल की खाड़ी के निम्न-दाब और सक्रिय-विराम चक्र गंगा मैदान और मध्य भारत की अल्पावधि वर्षा समझाते हैं।

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    राजस्थान की थार उष्ण शुष्क जलवायु, अरावली दिशा और ऊष्ण लहर मानदंड राष्ट्रीय जलवायु तंत्र को राज्य भूगोल से जोड़ते हैं।

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    1875 में स्थापित भारत मौसम विज्ञान विभाग आगमन, वापसी, चक्रवात, ऊष्ण लहर और जलवायु सामान्य की आधिकारिक सूचना देता है।

दक्षिण-पश्चिम मानसून भारत में कैसे आता है और उसकी शाखाएँ कौन-सी हैं?

दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्यतः १ जून के आसपास केरल तट पर पहुँचकर भारत में वर्षा ऋतु शुरू करता है और फिर अरब सागर शाखा तथा बंगाल की खाड़ी शाखा के रूप में देश में आगे बढ़ता है।

केरल में दक्षिण-पश्चिम मानसून का पहुँचना ही भारत में बारिश के मौसम की असली शुरुआत मानी जाती है, न कि कोई एक तय ऐतिहासिक तारीख। भारत मौसम विज्ञान विभाग के आगमन मानदंड के अनुसार केरल आगमन घोषित करने के लिए उपलब्ध १४ स्टेशनों में से कम से कम ६० प्रतिशत स्टेशनों पर लगातार दो दिन २.५ मिमी या अधिक वर्षा दर्ज होना जरूरी है।

आगमन का आधार

  • भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्यतः १ जून के आसपास केरल पहुँचता है।
  • यह झोंकों में उत्तर की ओर बढ़ते हुए लगभग मध्य जुलाई तक पूरे देश को ढकता है।
  • आगमन घोषित करने के लिए केरल और आसपास के १४ स्टेशनों की वर्षा, पवन क्षेत्र और दक्षिण-पूर्व अरब सागर के दीर्घतरंग विकिरण को देखा जाता है।

मानसून शाखाएँ

शाखा मार्ग वर्षा प्रभाव
अरब सागर शाखा पश्चिमी घाट से टकराती है पवनाभिमुख भाग में भारी वर्षा देती है
बंगाल की खाड़ी शाखा उत्तर-पूर्व में जाकर गंगा मैदान की ओर मुड़ती है गंगा मैदान की ओर नमी ले जाती है

राजस्थान पर प्रभाव

  • राजस्थान में इसका प्रभाव अप्रत्यक्ष है।
  • सौराष्ट्र और कच्छ से गुजरती अरब सागर धारा पश्चिमी राजस्थान तक कमजोर हो जाती है।
  • उत्तरी मैदानों में वर्षा पूर्व से पश्चिम घटती है।

संभावित RAS प्रश्न

PYQ रुझान और 2026 पाठ्यक्रम विश्लेषण पर आधारित

1 MCQ भारत के दक्षिण-पश्चिम मानसून के सामान्य परिचालन आरंभ का सही वर्णन कौन-सा है?
  1. A यह सामान्यतः 1 जून के आसपास केरल पहुँचता है। सही उत्तर
  2. B यह सामान्यतः नवंबर में तमिलनाडु से आरंभ होता है।
  3. C यह पंजाब के पश्चिमी विक्षोभों से आरंभ होता है।
  4. D यह केवल गुजरात पर चक्रवात आने के बाद शुरू होता है।

व्याख्या

भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून का सामान्य आरंभ 1 जून के आसपास केरल पर होता है। तमिलनाडु की मुख्य वर्षा लौटते मानसून से जुड़ी है, पश्चिमी विक्षोभ शीतकालीन तंत्र हैं और गुजरात चक्रवात अलग तटीय जोखिम हैं।