कृषि
मुख्य तथ्य
- भारत की कृषि भौगोलिक बनावट ऋतु, जल स्रोत, मिट्टी, बाजार और नीति समर्थन से तय होती है।
- खरीफ-रबी-जायद कैलेंडर मानसूनी, शीतकालीन और अल्प ग्रीष्मकालीन फसलों को अलग करता है।
- सिंधु-गंगा जलोढ़ चावल-गेहूं पट्टी पूरे उत्तर भारतीय फसल क्षेत्र का पर्याय नहीं है।
- काली रेगुर मिट्टी दक्कन कपास से जुड़ती है, जबकि लेटराइट-लाल मिट्टी आर्द्र बागान फसलों को सहारा देती है।
- 1966 के बाद हरित क्रांति का लाभ सिंचित उत्तर-पश्चिम भारत में अधिक केंद्रित रहा।
मुख्य बिंदु
- 1
भारत की कृषि भौगोलिक बनावट ऋतु, जल स्रोत, मिट्टी, बाजार और नीति समर्थन से तय होती है।
- 2
खरीफ-रबी-जायद कैलेंडर मानसूनी, शीतकालीन और अल्प ग्रीष्मकालीन फसलों को अलग करता है।
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सिंधु-गंगा जलोढ़ चावल-गेहूं पट्टी पूरे उत्तर भारतीय फसल क्षेत्र का पर्याय नहीं है।
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काली रेगुर मिट्टी दक्कन कपास से जुड़ती है, जबकि लेटराइट-लाल मिट्टी आर्द्र बागान फसलों को सहारा देती है।
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1966 के बाद हरित क्रांति का लाभ सिंचित उत्तर-पश्चिम भारत में अधिक केंद्रित रहा।
- 6
इंदिरा गांधी नहर, बाजरा-सरसों पैटर्न और सूरतगढ़ शुभारंभ राष्ट्रीय कृषि को राजस्थान से जोड़ते हैं।
- 7
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन और मृदा परीक्षण उत्पादन वृद्धि को पोषक प्रबंधन से जोड़ते हैं।
- 8
चाय, कॉफी, गन्ना, जूट और कपास को जलवायु-मिट्टी-क्षेत्र संयोजन से पढ़ना चाहिए।
ऋतु, जल और फसल चयन में फसल कैलेंडर क्यों जरूरी है?
ऋतु, जल और फसल चयन में खरीफ-रबी-जायद फसल कैलेंडर इसलिए जरूरी है, क्योंकि वही बताता है कि कौन-सी फसल किस वर्षा, सिंचाई और मिट्टी-नमी पर टिकेगी। खरीफ-रबी-जायद फसल कैलेंडर भारतीय कृषि की मूल संरचना है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की कृषि सांख्यिकी एक झलक २०२४-२५ के अनुसार २०२४-२५ में खरीफ खाद्यान्न उत्पादन १६९४.६ लाख टन था, इसलिए खरीफ ऋतु केवल कैलेंडर शब्द नहीं बल्कि उत्पादन-भूगोल का बड़ा आधार है।
फसल कैलेंडर
| ऋतु | आधार | फसलें | समय और टिप्पणी |
|---|---|---|---|
| खरीफ | दक्षिण-पश्चिम मानसून | धान, कपास, जूट, ज्वार, बाजरा और अरहर | जून-सितंबर की वर्षा के साथ बोई जाती हैं, हालांकि सिंचाई जिला-वार अंतर बदल सकती है |
| रबी | ठंडी ऋतु, नहर जल, नलकूप या बची हुई मिट्टी नमी | गेहूं, चना और सरसों | ठंडी ऋतु, नहर जल, नलकूप या बची हुई मिट्टी नमी से चलते हैं |
| जायद | अप्रैल-जून की छोटी सिंचित अवधि | सब्जियां, चारा और ककड़ी वर्ग की फसलें | अप्रैल-जून की छोटी सिंचित अवधि है |
राजस्थान में अंतर
- बाड़मेर, जैसलमेर और नागौर का बाजरा खरीफ शुष्कभूमि फसल है।
- श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ और भरतपुर की सरसों तथा गेहूं रबी की नहर और कुओं से जुड़ी खेती है।
- यही कैलेंडर वर्षा-आधारित और सिंचित खेती को अलग करता है।
नमी, मानसून और क्षेत्र
- फसल ऋतु में मिट्टी की नमी पर्याप्त है या नहीं, इससे कमजोर मानसून पहले दालों और मोटे अनाज को प्रभावित करता है।
- सिंचित गेहूं पर असर जलाशय और नहर आपूर्ति से बाद में आता है।
- इसलिए फसल का नाम अकेले पर्याप्त नहीं; सही कृषि क्षेत्र में ऋतु, जल, मिट्टी, जिला और बाजार साथ आते हैं।
- इसी कारण बाजरा, अरहर और ज्वार जैसी खरीफ फसलें कम या अनिश्चित वर्षा में जल्दी जोखिम में आती हैं, जबकि गेहूं जैसे रबी अनाज का सवाल नहर, नलकूप और बची हुई नमी से ज्यादा जुड़ता है।
स्थानांतरित खेती से फर्क
| क्षेत्र | नाम | आधार |
|---|---|---|
| ओडिशा | पोंडू | वन परती, ढाल और अधिक वर्षा से जुड़े हैं |
| केरल | पूनम | वन परती, ढाल और अधिक वर्षा से जुड़े हैं |
| असम-उत्तर-पूर्व | झूम | वन परती, ढाल और अधिक वर्षा से जुड़े हैं |
| थार गांव | मेड़बंदी, कठोर बीज और पशुधन खाद | मेड़बंदी, कठोर बीज और पशुधन खाद महत्त्वपूर्ण हैं |
- ऋतु समय यह भी बताता है कि स्थानांतरित खेती के नाम राजस्थान उदाहरण नहीं बनते।
- परीक्षा में यदि प्रश्न फसल-ऋतु पूछे, तो केवल फसल का नाम याद करना काफी नहीं है; राजस्थान जैसे राज्य में उसी फसल की स्थिति जिला, पानी और बाजार से बदल सकती है।
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संभावित संभावित RAS प्रश्न
PYQ रुझान और 2026 पाठ्यक्रम विश्लेषण पर आधारित
1 MCQ उत्तर-पश्चिम और ऊपरी गंगा मैदान में शीतकालीन गेहूं संकेंद्रण किस संयोजन से समझ आता है?
व्याख्या
ख सही है क्योंकि ठंडी रबी ऋतु, जलोढ़ मिट्टी, नहर और नलकूप पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गेहूं को सहारा देते हैं। क और ग आर्द्र पहाड़ी बागान क्षेत्र हैं। घ आर्द्र डेल्टा चावल-जूट क्षेत्र है, सिंचित रबी गेहूं केंद्र नहीं।
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