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लोक प्रशासन

मुख्य बिंदु

जिला प्रशासन: कलेक्टर, कानून एवं व्यवस्था, राजस्व, विकास प्रशासन

पेपर III · इकाई 2 अनुभाग 1 / 13 PYQ-शैली 28 मिनट

सार्वजनिक अनुभाग प्रीव्यू

मुख्य बिंदु

जिला प्रशासन में जिला कलेक्टर जिले का केंद्रीय प्रशासक है, लेकिन उसका काम अकेले शासन चलाना नहीं बल्कि राजस्व, कानून-व्यवस्था, विकास, चुनाव और आपदा-प्रबंधन को एक साथ जोड़ना है।

  1. जिला कलेक्टर यानी जिला मजिस्ट्रेट राजस्थान के जिले का धुरी प्रशासक है। भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी होने के नाते, कलेक्टर कार्यकारी, राजस्व, दंडाधिकारी और विकास भूमिकाएँ एक साथ निभाता है। राजस्थान में अब ४१ जिले हैं; २०२३ में जिलों की संख्या ३३ से बढ़ाकर ५० की गई थी, पर २०२४ के पुनर्गठन के बाद ९ नए जिले खत्म कर दिए गए और प्रशासनिक ढाँचा ४१ जिलों तथा ७ संभागों पर आ गया।

  2. जिला कलेक्टर का पद ईस्ट इंडिया कंपनी के दौर में बना। १७७२ में वॉरेन हेस्टिंग्स ने जिले में राजस्व-संग्रह के लिए कलेक्टर पद की शुरुआत की और १७८६ में लॉर्ड कॉर्नवॉलिस ने बंगाल में इस पद को मजबूत किया। धीरे-धीरे न्यायिक, दंडाधिकारी और प्रशासनिक कार्य जुड़े। स्वतंत्रता के बाद विकास कार्य भी कलेक्टर की भूमिका में जोड़े गए।

  3. जिला मजिस्ट्रेट के रूप में कलेक्टर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के अंतर्गत कानून-व्यवस्था, धारा १६३ के निषेधात्मक आदेश, भीड़-नियंत्रण और कार्यपालक मजिस्ट्रेटी शक्तियों का प्रयोग करता है। पुराने प्रश्नों में इसे अक्सर पूर्व दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १४४ से जोड़कर पूछा जाता था।

  4. कलेक्टर के रूप में जिला मजिस्ट्रेट भूमि राजस्व संग्रह, भूमि अभिलेखों यानी खसरा, खतौनी, जमाबंदी के रखरखाव, नामान्तरण और राजस्थान भूमि राजस्व अधिनियम, १९५६ के क्रियान्वयन के लिए जिम्मेदार है। तहसीलदार और नायब-तहसीलदार कलेक्टर के अधीन राजस्व कार्य करते हैं।

  5. पुलिस अधीक्षक जिले का वरिष्ठतम भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी है। पुलिस अधीक्षक जिला मजिस्ट्रेट के सामान्य अधीक्षण में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करता है, लेकिन पुलिस बल पर स्वतंत्र परिचालन कमान रखता है। यह द्वि-नियंत्रण व्यवस्था जिला शासन की प्रमुख विशेषता है।

  6. उपखंड अधिकारी उपखंड का प्रशासनिक और राजस्व प्रमुख होता है। तहसीलों की निगरानी, राजस्व कार्य, कार्यपालक मजिस्ट्रेटी और विकास योजनाओं के समन्वय में वह कलेक्टर की क्षेत्रीय कड़ी है।

  7. विकास प्रशासन में कलेक्टर मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, जल जीवन मिशन और राज्य कल्याण योजनाओं की जिला-स्तरीय निगरानी करता है। कलेक्टर जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति में केंद्रीय योजनाओं के अभिसरण और प्रगति समीक्षा से जुड़ा प्रमुख अधिकारी रहता है।

  8. जिला कलेक्टरेट प्रशासनिक मुख्यालय है। जिला योजना समितिअनुच्छेद २४३-जेड-डी यानी तिहत्तरवें और चौहत्तरवें संशोधन से जुड़ा संवैधानिक ढाँचा — पंचायतों और नगर निकायों की योजनाओं को समेकित करती है। राजस्थान में जिला प्रमुख इसका अध्यक्ष होता है; कलेक्टर प्रशासनिक समन्वय और क्रियान्वयन में अहम भूमिका निभाता है।

  9. तहसील प्रशासन जिले के नीचे प्राथमिक राजस्व एवं प्रशासनिक इकाई है। प्रत्येक तहसील का प्रमुख तहसीलदार होता है — राजस्व संग्रह, भूमि अभिलेख, नामान्तरण, ग्रामीण विकास योजनाएँ और कार्यपालक मजिस्ट्रेट कार्य। राजस्थान में राजस्व मंडल की जनवरी २०२६ सूची के अनुसार ४२५ तहसीलें और २३३ उपतहसीलें हैं।

  10. आपदा प्रबंधन में आपदा प्रबंधन अधिनियम, २००५ की धारा २५ के तहत जिला कलेक्टर जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का पदेन अध्यक्ष है। बाढ़, सूखा, भूकंप और स्थानीय आपदाओं में राहत, बचाव, मुआवजा और विभागीय समन्वय का नेतृत्व कलेक्टर करता है।

  11. भूमि अधिग्रहण में कलेक्टर भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित मुआवजे और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, २०१३ के तहत प्रमुख क्रियान्वयन प्राधिकरण है। मुआवजा निर्धारण, सामाजिक प्रभाव आकलन और पुनर्वास सुनिश्चित करना इसी भूमिका का हिस्सा है।

  12. राजस्थान में जिला कलेक्टर की चुनौतियाँ हैं: अत्यधिक कार्यभार, स्थानान्तरण में राजनीतिक हस्तक्षेप, व्यावहारिक रूप से छोटा कार्यकाल, पुलिस अधीक्षक के साथ कानून-व्यवस्था में समन्वय का तनाव, अपर्याप्त क्षेत्र कर्मी, डिजिटल राजस्व अभिलेखों की शुद्धता और राज्य स्तरीय स्वीकृति के बिना सीमित व्यय स्वायत्तता।