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लोक प्रशासन

मुख्य बिंदु

लोक प्रशासन में मुद्दे: केंद्र-राज्य संबंध, मंत्री-लोकसेवक संबंध, सामान्यज्ञ-विशेषज्ञ, प्रशासनिक सुधार, सामाजिक लेखापरीक्षा

पेपर III · इकाई 2 अनुभाग 1 / 11 PYQ-शैली 23 मिनट

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मुख्य बिंदु

इस विषय में केंद्र-राज्य प्रशासनिक संबंध, मंत्री-लोकसेवक संबंध, सामान्यज्ञ-विशेषज्ञ बहस, प्रशासनिक सुधार और सामाजिक लेखापरीक्षा को एक साथ समझना ज़रूरी है, क्योंकि परीक्षा में इन्हीं तनावों से विश्लेषणात्मक प्रश्न बनते हैं।

१. केंद्र-राज्य प्रशासनिक संबंध — अनुच्छेद २५६ (केंद्रीय कानूनों का अनुपालन), २५७ (केंद्रीय कार्यपालिका में बाधा नहीं), २५८ (केंद्र राज्यों को शक्तियाँ सौंप सकता है); अखिल भारतीय सेवाएँ (अनुच्छेद ३१२) — केंद्र-राज्य कार्मिक सेतु।

२. सरकारिया आयोग (१९८३–८७) — केंद्र-राज्य संबंध; अखिल भारतीय सेवाओं का संरक्षण; अंतर-राज्य परिषद; अनुच्छेद ३५६ का सीमित प्रयोग। पुंछी आयोग (२००७–१०) — सरकारिया की समीक्षा; अनुच्छेद ३५६ के दुरुपयोग को रोकने पर बल।

३. मंत्री-लोकसेवक संबंध — शास्त्रीय सिद्धांत: मंत्री नीति, लोकसेवक सलाह एवं क्रियान्वयन; तटस्थता, स्थायित्व, गुमनामी। भारत में तनाव: दलगत क्रियान्वयन, उत्तरदायित्व-भय से विलंब, नीति-प्रशासन की रेखा अस्पष्ट।

४. सामान्यज्ञ-विशेषज्ञ बहस — सामान्यज्ञ (भारतीय प्रशासनिक सेवा): प्रशासनिक व्यापकता; विशेषज्ञ (डॉक्टर, इंजीनियर): क्षेत्रीय गहराई; पॉल एप्पलेबी (१९५३) व प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग (१९६६) — सामान्यज्ञ के पक्ष में; अशोक मेहता — विशेषज्ञ नेतृत्व; द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग — क्षेत्रीय विशेषज्ञता।

५. प्रशासनिक सुधार — प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग (१९६६–७०): २० रिपोर्ट; प्रधानमंत्री विभाग, कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग; द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग (२००५–०८): १५ रिपोर्ट; नीतिशास्त्र, सूचना का अधिकार, स्थानीय प्रशासन, ई-गवर्नेंस।

६. सामाजिक लेखापरीक्षा — मजदूर किसान शक्ति संगठन (राजस्थान) द्वारा प्रवर्तन (१९९० का दशक); मनरेगा (धारा १७) — ६ माह में एक बार ग्राम सभा जन-सुनवाई अनिवार्य; मस्टर रोल, बिल, वास्तविक कार्य की जाँच; नागरिक जवाबदेही।

७. अखिल भारतीय सेवाएँ और केंद्र-राज्य तनाव — भारतीय प्रशासनिक सेवा/भारतीय पुलिस सेवा राज्य काडर, केंद्रीय प्रतिनियुक्ति; केंद्र सेवा नियम एवं वरिष्ठ पदोन्नति नियंत्रित करता है; राज्यों को आपत्ति; सरकारिया आयोग — अखिल भारतीय सेवाओं को संघ की एकता के धागे के रूप में संरक्षित करने की सिफारिश।

८. अंतर-राज्य परिषद (अनुच्छेद २६३) — १९९० में स्थापित; अध्यक्ष: प्रधानमंत्री; सभी मुख्यमंत्री सदस्य; १९९० से आधिकारिक रूप से केवल ११ बैठकें; पुंछी आयोग — वर्ष में कम से कम ३ बार बैठक।

९. वेबरियन मॉडल बनाम भारतीय वास्तविकता — आदर्श नौकरशाही: पदानुक्रमिक, नियम-बद्ध, तटस्थ। भारत में: अतिकेंद्रीकरण, राजनीतिक हस्तक्षेप, लालफीताशाही। नव लोक प्रबंधन सुधार — बाज़ार तंत्र, नागरिक चार्टर, ई-गवर्नेंस।

१०. पॉल एप्पलेबी रिपोर्ट (१९५३, १९५६) — भारतीय प्रशासन का अमेरिकी लोक प्रशासन विशेषज्ञ द्वारा अध्ययन; सिफारिशें: प्रधानमंत्री विभाग; सामान्यज्ञ का बचाव; राजनीतिक उत्तरदायित्व पर बल।